सुनाया बचपन का किस्सा
महिलाओं से हर कोई सीखता है
विधेयक की मंशा पर उठाए सवाल
चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश
जाति जनगणना का भी उठाया मुद्दा
सरकार पर डर की राजनीति का आरोप

सुनाया बचपन का किस्सा
महिलाओं से हर कोई सीखता है
विधेयक की मंशा पर उठाए सवाल
चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश
जाति जनगणना का भी उठाया मुद्दा
सरकार पर डर की राजनीति का आरोप

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप में शानदार सफलता से प्रेरित होकर आयोजित इस टूर्नामेंट ने जिले में नई ऊर्जा भर दी। आमतौर पर घर परिवार की जिम्मेदारियों में व्यस्त रहने वाली महिलाओं ने जब बल्ला और गेंद थामी तो मैदान पर चौके छक्कों की बारिश होने लगी और दर्शक भी आश्चर्यचकित रह गए।
स्टेडियम मैदान पर आयोजित सिंदूर कप में जिले की छह विवाहित महिला टीमों ने हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता की खास बात यह रही कि इसमें विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाएं शामिल हुईं। एक ओर महिला पुलिसकर्मियों की टीम थी तो दूसरी ओर शिक्षिकाएं और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी महिलाएं मैदान में उतरीं। सभी टीमों ने पूरे जोश और खेल भावना के साथ मुकाबला किया।
दो दिनों तक चले इस रोमांचक टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला पुलिस इलेवन और शिक्षा विभाग की टीम के बीच खेला गया। मैच के दौरान कभी शिक्षिकाओं की बल्लेबाजी हावी नजर आई तो कभी महिला पुलिसकर्मियों की सटीक गेंदबाजी ने मुकाबले को रोमांचक बना दिया। अंततः कड़े संघर्ष के बाद पुलिस इलेवन टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिंदूर कप की ट्रॉफी अपने नाम कर ली।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को घर की चारदीवारी से बाहर निकालकर खेल स्वास्थ्य और आत्मविश्वास से जोड़ना था। टूर्नामेंट के दौरान महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। वे पूरे जोश के साथ खेलते हुए अपने बचपन के दिनों को फिर से जीती नजर आईं।
सिंदूर कप न केवल एक खेल प्रतियोगिता रहा बल्कि यह महिलाओं के आत्मबल सामूहिकता और सामाजिक भागीदारी का भी प्रतीक बनकर उभरा। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि अगर अवसर मिले तो महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकती हैं।

रानी मुखर्जी की मर्दानी फ्रैंचाइजी इसकी बेहतरीन मिसाल है। 2014 में रिलीज हुई फिल्म मर्दानी में रानी ने शिवानी शिवाजी रॉय का किरदार निभाया। यह निडर पुलिस अधिकारी महिला उत्पीड़न और अपराध के खिलाफ लड़ती है। गोपी पुथरान के निर्देशन में बनी यह क्राइम थ्रिलर पुरुष प्रधान मानसिकता के खिलाफ महिला की ताकत और साहस को प्रदर्शित करती है।2018 में रानी मुखर्जी की हिचकी ने महिलाओं की मानसिक और शारीरिक चुनौतियों पर भी ध्यान खींचा। नैना माथुर के किरदार में रानी ने टॉरेट सिंड्रोम जैसी चुनौती का सामना करते हुए बच्चों को पढ़ाने और अपने सपनों को पूरा करने का संदेश दिया।
आलिया भट्ट की फिल्में डियर जिंदगी और राजी महिलाओं के आत्मविश्वास और साहस को अलग अंदाज में पेश करती हैं। डियर जिंदगी मानसिक स्वास्थ्य और आत्म-जागरूकता पर ध्यान केंद्रित करती है जबकि राजी में आलिया की भूमिका देशभक्ति और बुद्धिमानी से जोखिम भरे कार्यों में सफल होने की मिसाल बनती है।अनुभव सिन्हा की फिल्म थप्पड़ ने घरेलू हिंसा और पारिवारिक दबाव की कहानियों को पर्दे पर उतारा। तापसी पन्नू ने अमृता के किरदार में दिखाया कि कैसे एक छोटे से थप्पड़ ने उसकी जिंदगी बदल दी और उसने अपने हक के लिए आवाज उठाई।
2023 में द केरल स्टोरी ने महिलाओं की पहचान और स्वतंत्रता की लड़ाई को नए ढंग से पेश किया। अदा शर्मा के किरदार फातिमा के माध्यम से फिल्म दिखाती है कि डर और पीड़ा के बावजूद महिलाएं अपनी हिम्मत और समझदारी से संघर्ष कर सकती हैं।2014 के बाद की ये फिल्में साबित करती हैं कि बॉलीवुड अब महिलाओं की आवाज़ को ताकत बना रहा है। ये फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता और महिलाओं के आत्मविश्वास की मिसाल भी हैं।

मारन ने दक्षिण भारत के मॉडल की भी जमकर तारीफ की।
मारन ने कहा, हम चाहते हैं कि हमारी लड़कियां पढ़ें, शिक्षित बनें और अपने भविष्य में सशक्त हों। वहीं, उत्तर भारत में लड़कियों को केवल घर के कामकाज तक सीमित रखा जाता है।
आंकड़े बताते हैं अंतर
2011 की जनगणना के अनुसार, तमिलनाडु में 7 साल से ऊपर की उम्र की महिला साक्षरता दर 73.44% है। वहीं उत्तर भारत के राज्यों में यह दर कम है:
उत्तर प्रदेश – 57.18%
हरियाणा – 65.94%
राजस्थान – 52.12%
हिमाचल प्रदेश – 75.93%
विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतर सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक कारणों से उत्पन्न होता है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
मारन के बयान पर उत्तर और दक्षिण भारत में तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि दयानिधि मारन का बयान केवल विवाद नहीं, बल्कि भारत में महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और सामाजिक समानता के मुद्दों पर नई बहस को जन्म देने वाला कदम है। राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इसकी प्रतिक्रियाएं अभी भी सामने आ रही हैं और यह मामला राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन चुका है।

इससे देश में एलपीजी की खपत बढ़ाने में मदद मिली है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश में प्रति परिवार औसत खपत बढ़कर 4.47 सिलेंडर हो गई है जो कि पहले वित्त वर्ष 2019-20 में 3 थी। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में इसके 4.85 प्रति परिवार तक पहुंचने की उम्मीद है।सरकार ने बयान में कहा कि बकाया आवेदन को निपटाने और ज्यादा परिवारों तक एलपीजी गैस को पहुंचाने के लिए सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 25 लाख अतिरिक्त एलपीजी कनेक्शन जारी करने को मंजूरी दी है। आधार ऑथेंटिकेशन में तेजी लाकर सब्सिडी टारगेटिंग और पारदर्शिता में सुधार किया गया।
1 दिसंबर 2025 तक बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन ने पीएमयूवाई के 71 प्रतिशत और नॉन-पीएमयूवाई के 62 प्रतिशत उपभोक्ताओं को कवर किया।सरकार ने बताया कि देश भर में चलाए गए ‘बेसिक सेफ्टी चेक’ अभियान ने ग्राहक सुरक्षा को मजबूत किया है। ग्राहकों के घरों पर 12.12 करोड़ से अधिक फ्री सेफ्टी इंस्पेक्शन किए गए और 4.65 करोड़ से अधिक एलपीजी होज रियायती दरों पर बदले गए जिससे घरेलू एलपीजी इस्तेमाल में जागरूकता और सेफ्टी स्टैंडर्ड में काफी सुधार हुआ।
मंत्रालय ने पेट्रोलियम मार्केटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया। 90000 से अधिक रिटेल आउटलेट्स को डिजिटल पेमेंट की सुविधा दी गई जिन्हें 2.71 लाख से ज्यादा पीओएस टर्मिनलों का सपोर्ट मिला।मंत्रालय ने आगे कहा कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कवरेज बढ़कर 307 ज्योग्राफिकल इलाकों तक पहुंच गई है। सितंबर 2025 तक पीएमजी घरेलू कनेक्शन की संख्या बढ़कर 1.57 करोड़ और सीएनजी स्टेशन की संख्या बढ़कर 8400 से अधिक हो गई है।