संख्या बल में कमी से गिरा प्रस्ताव
सरकार ने विपक्ष को ठहराया जिम्मेदार
लंबी बहस के बावजूद नहीं बनी सहमति
परिसीमन बना मुख्य विवाद का कारण
संसदीय प्रक्रिया और राजनीतिक टकराव

सरकार ने विपक्ष को ठहराया जिम्मेदार
लंबी बहस के बावजूद नहीं बनी सहमति
परिसीमन बना मुख्य विवाद का कारण
संसदीय प्रक्रिया और राजनीतिक टकराव


नंबर गेम में NDA के लिए चुनौती
संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जबकि NDA के पास फिलहाल यह संख्या पूरी नहीं है। ऐसे में सरकार को विपक्षी दलों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। लोकसभा में सीटों की मौजूदा संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव भी इस विधेयक का हिस्सा है।
पीएम मोदी ने बताया नारी सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद की विशेष बैठक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि देश नारी सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। उन्होंने इसे माताओं और बहनों के सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि यह राष्ट्र के सम्मान का विषय है।
तमिलनाडु CM स्टालिन का विरोध
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन प्रस्ताव को ‘काला कानून’ करार देते हुए कड़ा विरोध जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकता है और वहां की जनता के अधिकारों को नुकसान पहुंचा सकता है।
2011 जनगणना पर आधारित होगा परिसीमन
सूत्रों के अनुसार, परिसीमन प्रक्रिया 2011 की जनगणना के आधार पर की जा रही है क्योंकि 2026 की जनगणना के परिणाम देर से आने की संभावना है। सरकार का उद्देश्य 2029 तक महिला आरक्षण को लागू करना है, जिसके लिए समयबद्ध प्रक्रिया जरूरी बताई जा रही है।
परिसीमन आयोग के गठन की भी तैयारी
सरकार ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ के साथ परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक भी पेश कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इन्हें सदन में रखा। प्रस्ताव के अनुसार परिसीमन आयोग का गठन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व या वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में किया जाएगा।
विरोध के मूड में विपक्ष
INDIA गठबंधन ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए परिसीमन प्रस्ताव का विरोध करने का फैसला लिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस प्रक्रिया के जरिए राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करना चाहती है। इसे लेकर गठबंधन के भीतर रणनीति तैयार की जा रही है और संसद में तीखा विरोध देखने की संभावना है।

आरक्षण के भीतर आरक्षण का फॉर्मूला
सरकारी सूत्रों के मुताबिक ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत महिला आरक्षण सभी श्रेणियों सामान्य, SC और ST पर समान रूप से लागू किया जाएगा। यानी हर श्रेणी की लगभग एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जिससे “कोटा के भीतर कोटा” की व्यवस्था लागू होगी।
परिसीमन के बाद बढ़ेंगी सीटें
वर्तमान में लोकसभा की करीब 24 प्रतिशत सीटें SC और ST वर्ग के लिए आरक्षित हैं। परिसीमन के बाद सीटों की संख्या बढ़ने के साथ यह अनुपात भी उसी हिसाब से बढ़ेगा। इसके बाद महिला आरक्षण लागू होने पर SC और ST वर्ग में भी महिलाओं के लिए अलग कोटा तय होगा।
सरकार का दावा
सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि परिसीमन के बाद सभी राज्यों की लोकसभा सीटें समान अनुपात में बढ़ाई जाएंगी, जिससे किसी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा। विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों की सीटों में कटौती के आरोपों को सरकार ने खारिज किया है।
विपक्ष पर आरोप
सरकारी पक्ष का कहना है कि जनगणना और परिसीमन को लेकर विपक्ष का रुख लगातार बदल रहा है। 2023 में जहां विपक्ष ने जनगणना का इंतजार न करने की बात कही थी, वहीं अब वह प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। सरकार ने इसे पूरी तरह तय प्रक्रिया बताते हुए किसी भी बदलाव से इनकार किया है।