Tag: Women’s Safety

  • हैवानियत पर कानून का प्रहार: बैतूल में नाबालिग से गैंगरेप के दो दोषियों को मरते दम तक जेल की सजा

    हैवानियत पर कानून का प्रहार: बैतूल में नाबालिग से गैंगरेप के दो दोषियों को मरते दम तक जेल की सजा


    बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में मानवता को शर्मसार करने वाले सामूहिक दुष्कर्म के एक मामले में न्यायपालिका ने कड़ा संदेश दिया है। जिले की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने एक नाबालिग छात्रा के साथ दरिंदगी करने वाले दो युवकों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट के इस फैसले ने न केवल पीड़िता को न्याय दिलाया है बल्कि समाज में महिलाओं और बच्चियों के विरुद्ध अपराध करने वालों के मन में कानून का खौफ भी पैदा किया है।

    यह हृदयविदारक घटना वर्ष 2023 में आठनेर थाना क्षेत्र में घटित हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार दोनों दोषियों ने एक नाबालिग छात्रा को अपनी हवस का शिकार बनाया था। वारदात के बाद डरी-सहमी पीड़िता ने जब परिजनों को आपबीती सुनाई तो पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामला दर्ज किया। पुलिस ने विवेचना के दौरान वैज्ञानिक साक्ष्य और गवाहों के बयान एकत्रित कर न्यायालय में पेश किए। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण की सुनवाई स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में चली जहाँ अभियोजन ने प्रभावी पैरवी करते हुए दोषियों के कृत्य को जघन्य श्रेणी का बताया।

    विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपियों ने न केवल कानून का उल्लंघन किया बल्कि एक मासूम के भविष्य और उसकी गरिमा को भी गंभीर चोट पहुँचाई। कोर्ट ने दोनों अभियुक्तों को सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया। सजा सुनाते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराध समाज के लिए कलंक हैं और अपराधियों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जा सकती। दोषियों को ‘अंतिम सांस तक’ जेल की सलाखों के पीछे रहने का आदेश दिया गया है। साथ ही अदालत ने दोनों पर 21-21 हजार रुपए का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की यह राशि अदा न करने पर उन्हें अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। बैतूल पुलिस और अभियोजन की इस सफलता को महिला सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी जीत माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे त्वरित और सख्त फैसलों से अपराधियों के हौसले पस्त होंगे और पीड़ित परिवारों का न्याय प्रणाली पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा।

  • पश्चिम बंगाल: हुगली में नाबालिग से दरिंदगी, TMC नेता समेत दो गिरफ्तार; सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

    पश्चिम बंगाल: हुगली में नाबालिग से दरिंदगी, TMC नेता समेत दो गिरफ्तार; सुरक्षा पर फिर उठे सवाल


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के हुगली जिले से एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है जहाँ एक बंद पड़ी फैक्ट्री के भीतर 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया। इस घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं बल्कि राज्य की सियासत में भी उबाल ला दिया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से एक सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस TMC का स्थानीय युवा नेता बताया जा रहा है।

    पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह वीभत्स घटना गुरुवार शाम की है जब उत्तरपाड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली बंद पड़ी हिंद मोटर फैक्ट्री के परिसर में पीड़िता अपनी एक सहेली के साथ गई थी। आरोप है कि वहाँ आरोपियों ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर नाबालिग को बंधक बनाया और उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जांच शुरू की गई। शनिवार को पुलिस ने बताया कि इस मामले में पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दीपांकर अधिकारी उर्फ सोनाई और एक अन्य नाबालिग के रूप में हुई है।

    दीपांकर अधिकारी इलाके में टीएमसी का सक्रिय युवा चेहरा माना जाता है। वहीं दूसरा आरोपी कथित तौर पर पीड़िता का पूर्व परिचित बताया जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है और गिरफ्तार आरोपियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। भाजपा की वरिष्ठ नेता और विधायक अग्निमित्रा पॉल ने ममता बनर्जी सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि बंगाल में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। पॉल ने दुख जताते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि एक महिला मुख्यमंत्री के शासन में इस तरह की आपराधिक गतिविधियां आम हो गई हैं।
    उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त सजा की मांग की है।दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस ने इस मामले में खुद को कानून के साथ खड़ा बताया है। स्थानीय टीएमसी नेता निताई दासगुप्ता ने स्वीकार किया कि गिरफ्तार आरोपी उनकी पार्टी का सदस्य है लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी किसी भी तरह के अपराध का समर्थन नहीं करती। उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से आरोपी को तुरंत निष्कासित करने की मांग की है। टीएमसी नेता अजय शंकर ने भी दोहराया कि कानून अपना काम करेगा और जो भी दोषी होगा उसे कड़ी सजा भुगतनी होगी। फिलहाल पुलिस अन्य फरार संदिग्धों की तलाश में जुटी है और इलाके में तनाव को देखते हुए सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

  • इंदौर में कॉल सेंटर कर्मचारी पर धर्म परिवर्तन का दबाव, युवती ने बीच सड़क जूतों से की पिटाई

    इंदौर में कॉल सेंटर कर्मचारी पर धर्म परिवर्तन का दबाव, युवती ने बीच सड़क जूतों से की पिटाई


    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में एक कॉल सेंटर में कार्यरत युवती पर लगातार धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपी युवक का नाम अब्दुल कलाम है, जो कॉल सेंटर में एमओ मैनेजमेंट ऑफिसर के पद पर कार्यरत था। युवती ने अपनी शिकायत में कहा कि आरोपी काम के दौरान उसे बार-बार धर्म परिवर्तन करने के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था। इस दबाव से परेशान होकर युवती ने कॉल सेंटर की नौकरी छोड़ दी, लेकिन आरोपी का पीछा तब भी नहीं रुका।

    युवती ने बताया कि कंपनी के दो माह के नोटिस पीरियड के दौरान, जब वह रोजाना काम पर जा रही थी, तब भी आरोपी उसे रास्ते में रोककर परेशान करता रहा। लगातार उत्पीड़न से तंग आकर एक दिन युवती का गुस्सा फूट पड़ा। रास्ते में ही उसने आरोपी की जूतों से पिटाई कर दी। इसके बाद, पीड़िता ने पूरे मामले की शिकायत लसूड़िया थाना पुलिस में दर्ज कराई।

    पुलिस ने युवती की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले की जांच जारी है। यह घटना एक बार फिर कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी गंभीर सवालों को उजागर करती है। क्या हमारे कार्यस्थलों पर महिलाओं को सुरक्षित महसूस होता है क्या हम उनके धार्मिक विश्वासों और स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं? इन सवालों का जवाब अब समाज और जिम्मेदार अधिकारियों को देना होगा ।

  • पक्की नौकरी और पगार बढ़ाने का झासा…; एएसआई पर महिला ने लगाए दुष्कर्म के आरोप

    पक्की नौकरी और पगार बढ़ाने का झासा…; एएसआई पर महिला ने लगाए दुष्कर्म के आरोप


    हरदा । मध्य प्रदेश के हरदा जिले में एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है जिसमें एक यातायात थाने में पदस्थ एएसआई पर अपनी ही घर में काम करने वाली महिला के साथ दुष्कर्म करने और उसे धमकाने का आरोप लगा है। यह मामला उस समय सामने आया जब पीड़िता ने स्थानीय सिविल लाइन थाने में एएसआई के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता का आरोप है कि वह पिछले दो सालों से एएसआई के घर पर घरेलू कामकाजी झाड़ू-पोछा का काम कर रही थी और इस दौरान आरोपी ने उसे नौकरी और पगार बढ़ाने का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए।

    शोषण का आरोप

    पीड़िता के अनुसार एएसआई सुरेंद्र मालवीय ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और जब उसने इसका विरोध किया तो आरोपी ने उसे जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया और जान से मारने की धमकी दी। इस मामले ने पूरे हरदा जिले में गहरी चिंता और आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। यह घटना दिखाती है कि जब कानून के रखवाले खुद मर्यादा लांघने लगें तो आम जनता से न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

    पुलिस कार्रवाई

    पुलिस ने पीड़िता की शिकायतa पर तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी एएसआई के खिलाफ भारतीय दंड संहिता IPC और अनुसूचित जाति-जनजाति एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। हरदा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ASP अमित कुमार मिश्रा ने इस घटना की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि अपराध क्रमांक 410/25 के तहत धारा 69 गलत तरीके से संबंध बनाना 351 धमकाना बीएनएस और SC-ST एक्ट की धारा 3(2)(v) 3(2)(V-A) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    आरोपी एएसआई का बयान

    इस मामले में पुलिस के द्वारा कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन आरोपों को लेकर एएसआई सुरेंद्र मालवीय की स्थिति पर अब तक कोई सफाई सामने नहीं आई है। ऐसे मामलों में आमतौर पर आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ता है। इस मामले में भी पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पुलिस पूरी तरह से तत्पर दिखाई दे रही है।

    शोषण और असुरक्षा का माहौल

    यह मामला सिर्फ एक महिला के साथ हुए शारीरिक शोषण का नहीं है बल्कि इसने समाज में महिलाओं की असुरक्षा और उनके शोषण की समस्याओं को उजागर किया है। जब एक सरकारी कर्मचारी जो लोगों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को बनाए रखने का जिम्मेदार होता है खुद ऐसी घटनाओं का हिस्सा बने तो यह समाज में भय और असुरक्षा की भावना को और बढ़ावा देता है।

    समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी

    इस मामले ने प्रशासन और समाज के लिए गंभीर सवाल उठाए हैं। क्या ऐसे मामलों में सख्त और प्रभावी कार्रवाई हो रही है? क्या महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर समाज और प्रशासन का दायित्व पूरा हो रहा है? इस घटना के बाद महिलाओं के प्रति होने वाली हिंसा और शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाने की आवश्यकता और बढ़ गई है। मध्य प्रदेश के हरदा जिले का यह मामला एक गंभीर सामाजिक और कानूनी मुद्दे की ओर इशारा करता है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है लेकिन यह सिर्फ एक शुरूआत है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।

  • रोहिणी आचार्य के बयान पर राजनीति और समाज में हलचल, बेटियों की सुरक्षा पर जोर

    रोहिणी आचार्य के बयान पर राजनीति और समाज में हलचल, बेटियों की सुरक्षा पर जोर


    नई दिल्ली। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य द्वारा हाल ही में दिए गए एक बयान ने बिहार की राजनीति और समाज में नई बहस छेड़ दी है। रोहिणी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “हर बेटी का यह अधिकार है कि उसका मायका सुरक्षित और भरोसेमंद स्थान हो, जहां वह बिना डर, अपराधबोध या शर्म के वापस आ सके”। इस बयान में उन्होंने बिहार में बेटियों के अधिकार और परिवारों में सुरक्षा की अहमियत को उजागर किया, जो समाज में महिला सुरक्षा और सम्मान को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है।

    शांभवी चौधरी का बयान: बेटियों का सम्मान सर्वोपरि
    रोहिणी के बयान पर शांभवी चौधरी, जो लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) सांसद और जेडीयू नेता अशोक चौधरी की बेटी हैं, ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “यह किसी भी परिवार का निजी मामला हो सकता है, लेकिन बेटियों का सम्मान सर्वोपरि है।” शांभवी ने आगे कहा, “बेटों को जो अधिकार मिलते हैं, वही अधिकार बेटियों को भी मिलना चाहिए।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि समाज की एक बड़ी चुनौती है। शांभवी ने यह भी व्यक्त किया कि उन्हें खुशी है कि लालू यादव के परिवार के लोग भी अब राज्य सरकार से सुरक्षा की उम्मीद कर रहे हैं।

    सरकार की प्रतिक्रिया: महिला सुरक्षा पर संजीदगी
    इस बयान पर जेडीयू सांसद संजय झा ने कहा, “नीतीश कुमार हमेशा महिलाओं की सुरक्षा को लेकर संवेदनशील रहे हैं। अगर रोहिणी ने अपनी चिंता जाहिर की है, तो सरकार इसे गंभीरता से संज्ञान में लेगी।” उन्होंने कहा कि बिहार सरकार की सक्रियता इस मामले में स्पष्ट है और “जनता देख रही है कि राजद की राजनीति कितनी खोखली हो चुकी है”।

    मायके की सुरक्षा और बेटियों के अधिकार की अहमियत
    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि बेटियों का सम्मान और उनका मायका सुरक्षित होना किसी भी समाज की मजबूती और परिवार की प्रतिष्ठा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिहार में इस मुद्दे पर चल रही बहस सामाजिक चेतना और राजनीतिक जिम्मेदारी दोनों को उजागर करती है, जिससे महिला सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर राज्य सरकार की जिम्मेदारी भी स्पष्ट होती है।