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  • PM मोदी की मितव्ययिता की अपील पर मारुति सुजुकी में लागू किया वर्क फ्रॉम होम

    PM मोदी की मितव्ययिता की अपील पर मारुति सुजुकी में लागू किया वर्क फ्रॉम होम


    नई दिल्ली।
    देश की सबसे बड़ी कार कंपनी (Country Largest Car Maker) मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (एमएसआईएल) (Maruti Suzuki India Limited – MSIL) ने वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) को लागू कर दिया है। सप्ताह के दूसरे दिन यानी मंगलवार को कहा कि कंपनी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की मितव्ययिता की अपील और पश्चिम एशिया में युद्ध के प्रभाव को कम करने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठाए हैं, जिनमें संभव होने पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू करना और विदेशी यात्राओं पर रोक शामिल है।


    क्या कहा कंपनी ने?

    कंपनी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि वह प्रधानमंत्री की मितव्ययिता की अपील और पश्चिम एशिया युद्ध के संभावित प्रभाव को कम करने के आह्वान को अत्यधिक महत्व देती है। मारुति सुजुकी ने कहा कि यह सभी प्रक्रियाओं की समीक्षा करने और उन्हें अधिक कुशल बनाने का उपयुक्त समय है, ताकि राष्ट्रीय उद्देश्यों के साथ-साथ कारोबार के स्वास्थ्य को भी बेहतर किया जा सके।

    कंपनी के अनुसार, प्रबंधन ने कर्मचारियों को कई उपायों को संस्थागत रूप देने का संदेश दिया है। इसके तहत जहां संभव हो वहां पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू किया जा रहा है, ताकि आवागमन से जुड़े ईंधन की खपत कम की जा सके। कंपनी ने कहा कि यह कदम उसकी मौजूदा रिमोट वर्किंग नीति के अनुरूप है।


    विदेश यात्रा पर क्या कहा?

    इसके अलावा, विदेश यात्राओं को केवल बेहद जरूरी व्यावसायिक जरूरतों तक सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं। कंपनी ने कर्मचारियों को बैठकों के लिए वर्चुअल माध्यम को प्राथमिकता देने और घरेलू यात्राओं को भी न्यूनतम रखने को कहा है। मारुति सुजुकी ने कर्मचारियों को भी कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग जैसे उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है।

    साथ ही, कार्यालय और घर दोनों जगह ऊर्जा संरक्षण पर जोर देते हुए एयर कंडीशनर, पंखे और रोशनी के बचत के हिसाब से इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। कंपनी ने कहा कि इन सभी उपायों की जानकारी आंतरिक कर्मचारियों और व्यावसायिक भागीदारों तक व्यापक रूप से पहुंचाई जा रही है।


    हरियाणा में मैन्युफैक्चरिंग लैब

    इस बीच, मारुति सुजुकी ने सरकार के कौशल विकास मिशन के तहत हरियाणा के रोहतक में अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग लैब स्थापित की है। कंपनी ने बयान में कहा कि रोहतक स्थित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) हसनगढ़ में स्थापित इस मैन्युफैक्चरिंग लैब में पहले वर्ष में लगभग 200 छात्रों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस लैब में छात्रों को वाहन असेंबली, वेल्डिंग और रंगाई जैसे कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    मारुति सुजुकी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (कॉरपोरेट मामले) राहुल भारती ने कहा- इस लैब में आधुनिक मशीनों और कार्यस्थल जैसे वातावरण का उपयोग किया जाएगा। कौशल विकास मिशन के अनुरूप यह पहल छात्रों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार होने और बदलते वाहन परिवेश के लिए प्रतिभा को निखारती है। मारुति सुजुकी देशभर में 31 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को सहयोग दे रही है और अब तक 18 ऐसी लैब स्थापित कर चुकी है।

  • ऑफिस जाने का जमाना खत्म? पीएम मोदी की वर्क फ्रॉम होम पर बड़ी सलाह, छात्रों के लिए नौकरी और फ्रॉड से बचने की पूरी गाइड

    ऑफिस जाने का जमाना खत्म? पीएम मोदी की वर्क फ्रॉम होम पर बड़ी सलाह, छात्रों के लिए नौकरी और फ्रॉड से बचने की पूरी गाइड


    नई दिल्ली ।
    आज के बदलते दौर में काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। ऑफिस जाकर काम करने की पारंपरिक व्यवस्था अब धीरे-धीरे एक नए मॉडल की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है, जहां घर से काम करना या कहीं से भी काम करने की आजादी लोगों के लिए एक नया विकल्प बनता जा रहा है। इस बदलाव के बीच चर्चा तब और तेज हो गई जब वर्क फ्रॉम होम को लेकर एक बड़ा दृष्टिकोण सामने आया, जिसमें इसे सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया गया।

    इस नए कामकाज के मॉडल में यह माना जा रहा है कि अगर लोग रोजाना ऑफिस जाने की बजाय घर से काम करें, तो इससे ट्रैफिक कम होगा, ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण में भी कमी आ सकती है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि इससे उन लोगों को फायदा मिल सकता है जिन्हें परिवार की जिम्मेदारियों के चलते नौकरी छोड़नी पड़ती है, खासकर महिलाएं, जो घर से ही काम करके करियर को आगे बढ़ा सकती हैं।

    वर्क फ्रॉम होम और रिमोट वर्क को अक्सर एक जैसा समझ लिया जाता है, लेकिन दोनों में अंतर होता है। वर्क फ्रॉम होम आमतौर पर उसी कंपनी के लिए घर से काम करने की सुविधा होती है, जहां कर्मचारी का ऑफिस पहले से होता है, जबकि रिमोट वर्क में व्यक्ति किसी भी जगह से काम कर सकता है और किसी एक निश्चित स्थान से जुड़ा नहीं होता। यह मॉडल पूरी तरह लोकेशन-इंडिपेंडेंट माना जाता है।

    इस बदलाव के साथ छात्रों और युवाओं के लिए नौकरी के नए रास्ते भी खुल रहे हैं। डिजिटल दौर में कंटेंट क्रिएशन, सोशल मीडिया हैंडलिंग, ऑनलाइन ट्यूशन और बेसिक डेटा वर्क जैसी नौकरियां तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। इन क्षेत्रों में काम करने के लिए घर से ही शुरुआत की जा सकती है और धीरे-धीरे अनुभव के साथ बेहतर अवसर भी मिलते हैं।

    हालांकि इस बढ़ते ट्रेंड के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। घर से काम करने में कई बार एकांत महसूस होता है और काम तथा निजी जीवन के बीच संतुलन बिगड़ सकता है। इसके अलावा तकनीकी समस्याएं जैसे इंटरनेट या बिजली की दिक्कत भी काम को प्रभावित कर सकती हैं।

    सबसे बड़ी चिंता वर्क फ्रॉम होम के नाम पर होने वाले फ्रॉड को लेकर भी है। कई बार फर्जी कंपनियां आकर्षक कमाई के वादे करके लोगों से पैसे मांगती हैं या गलत तरीके से नौकरी का लालच देती हैं। इसलिए किसी भी अवसर को स्वीकार करने से पहले उसकी पूरी जांच करना बेहद जरूरी हो जाता है।

    कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है और आने वाले समय में हाइब्रिड मॉडल यानी ऑफिस और घर दोनों का मिश्रण अधिक देखने को मिल सकता है। यह बदलाव जहां एक तरफ सुविधा और लचीलापन लेकर आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ सतर्कता और समझदारी की भी जरूरत को बढ़ा रहा है।

  • दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण: आज से वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य, बिना PUC पेट्रोल पर रोक और वाहनों पर सख्त पाबंदियां

    दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण: आज से वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य, बिना PUC पेट्रोल पर रोक और वाहनों पर सख्त पाबंदियां

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली एक बार फिर गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में है। लगातार बिगड़ते एयर क्वालिटी इंडेक्स AQI के कारण लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है। हालात को देखते हुए दिल्ली सरकार ने आज से कई सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं जिनका असर आम नागरिकों से लेकर दफ्तरों, ट्रांसपोर्ट और निर्माण कार्यों तक साफ तौर पर देखने को मिलेगा। ये सभी कदम GRAP-IV ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लानके तहत उठाए गए हैं ।

    सबसे बड़ा फैसला दफ्तरों को लेकर लिया गया है। दिल्ली सरकार ने सभी सरकारी और निजी संस्थानों में वर्क फ्रॉम होम को अनिवार्य कर दिया है। श्रम मंत्री कपिल मिश्रा ने साफ कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी। आदेश के मुताबिक, निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत से ज्यादा कर्मचारी एक साथ ऑफिस में मौजूद नहीं हो सकते। बाकी कर्मचारियों को घर से काम करना होगा। हालांकि, इमरजेंसी सेवाओं और फ्रंटलाइन वर्कर्स को इससे छूट दी गई है। इसमें अस्पताल, स्वास्थ्य सेवाएं, फायर डिपार्टमेंट, प्रदूषण नियंत्रण, ट्रांसपोर्ट और सैनिटेशन जैसी जरूरी सेवाएं शामिल हैं।

    प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्माण गतिविधियों पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। सरकार का कहना है कि GRAP-IV लागू रहने तक सभी तरह के निर्माण और तोड़-फोड़ के काम बंद रहेंगे। इससे प्रभावित होने वाले मजदूरों के लिए राहत की घोषणा भी की गई है। दिल्ली सरकार ऐसे पंजीकृत मजदूरों को 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता देगी, ताकि उनकी आजीविका पर तत्काल असर न पड़े। इसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    वाहनों से फैलने वाले प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए सरकार ने बिना PUC पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट के पेट्रोल और डीजल देने पर रोक लगा दी है। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि अब पेट्रोल पंपों पर PUC सर्टिफिकेट की जांच की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों को ईंधन नहीं मिलेगा। PUC सर्टिफिकेट अधिकृत केंद्रों पर वाहन की उत्सर्जन जांच के बाद जारी होता है। दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए इसकी फीस 60 रुपये, चारपहिया के लिए 80 रुपये और डीजल वाहनों के लिए 100 रुपये तय की गई है। BS-IV और BS-VI वाहनों के लिए इसकी वैधता 12 महीने की होती है।

    इसके अलावा, निर्माण सामग्री ढोने वाले ट्रकों की दिल्ली में एंट्री पर भी रोक लगा दी गई है। सरकार ने साफ किया है कि दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड BS-6 से नीचे के सभी वाहनों को GRAP-3 और GRAP-4 के दौरान राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। बाहर से आने वाले लोगों से अपील की गई है कि वे केवल BS-6 मानक वाले वाहन ही दिल्ली लाएं।दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की टीमें पेट्रोल पंपों, प्रमुख सड़कों और बॉर्डर पॉइंट्स पर तैनात की गई हैं, ताकि नियमों का सख्ती से पालन कराया जा सके। साथ ही, सरकार वाहन प्रदूषण कम करने के लिए एक कारपूलिंग ऐप लॉन्च करने की योजना पर भी काम कर रही है।सरकार का मानना है कि ये कड़े फैसले अस्थायी हैं लेकिन इनका मकसद दिल्ली के लोगों को साफ और सुरक्षित हवा देना है। यदि हालात में सुधार होता है तो पाबंदियों में ढील दी जा सकती है, लेकिन फिलहाल सभी नागरिकों से नियमों का पालन करने और सहयोग करने की अपील की गई है।