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  • दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के विपरीत दृष्टिकोणों ने इंडस्ट्री में बढ़ाई नई बहस..

    दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के विपरीत दृष्टिकोणों ने इंडस्ट्री में बढ़ाई नई बहस..

    नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा में काम के घंटों और कार्य संस्कृति को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छिड़ गई है। 8 घंटे की शिफ्ट की मांग ने फिल्म इंडस्ट्री में नई चर्चा को जन्म दिया है और यह मुद्दा अब केवल व्यक्तिगत राय तक सीमित न रहकर व्यापक पेशेवर विमर्श का हिस्सा बन चुका है। हाल के समय में यह विषय तब और अधिक चर्चा में आया जब दीपिका पादुकोण ने मातृत्व के बाद काम के संतुलन और सीमित कार्य घंटों की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना है कि लगातार लंबे समय तक काम करना केवल पेशेवर प्रतिबद्धता का पैमाना नहीं हो सकता, बल्कि यह कलाकारों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ विषय है। इस विचार ने फिल्म जगत में एक नई बहस को जन्म दिया है जिसमें काम की गुणवत्ता और कलाकारों की भलाई के बीच संतुलन को लेकर अलग अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं।

    दीपिका पादुकोण का दृष्टिकोण यह है कि किसी भी पेशेवर क्षेत्र में काम के घंटे तय होने चाहिए ताकि कलाकार अपने निजी और पेशेवर जीवन के बीच संतुलन बना सकें। उनका मानना है कि लंबे शूटिंग शेड्यूल कई बार रचनात्मकता पर दबाव डालते हैं और यह थकान प्रदर्शन को भी प्रभावित कर सकती है। इसी कारण वह कार्य समय को सीमित और व्यवस्थित रखने की बात करती हैं ताकि काम की गुणवत्ता और व्यक्तिगत स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित रह सकें।

    वहीं रणवीर सिंह का नजरिया इस मुद्दे पर बिल्कुल अलग दिखाई देता है। उनका मानना है कि फिल्म निर्माण एक रचनात्मक प्रक्रिया है जिसमें समय की सीमा कई बार बाधा बन सकती है। उनके अनुसार जब तक किसी दृश्य की आवश्यकता पूरी न हो जाए तब तक शूटिंग जारी रहनी चाहिए। वे काम को केवल एक औपचारिक प्रक्रिया के रूप में नहीं देखते बल्कि इसे एक ऐसी यात्रा मानते हैं जिसमें अंतिम परिणाम और प्रदर्शन की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण होती है।

    उनके अनुसार फिल्म निर्माण में कई बार निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा करना कठिन हो जाता है इसलिए अतिरिक्त समय देना प्रक्रिया का हिस्सा बन जाता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि लंबे शूटिंग शेड्यूल के दौरान सह कलाकारों को भी अधिक समय देना पड़ता है लेकिन उनका उद्देश्य हमेशा बेहतर दृश्य और प्रभावशाली प्रदर्शन हासिल करना होता है।

    इस पूरे मुद्दे ने फिल्म इंडस्ट्री में एक व्यापक बहस को जन्म दिया है जिसमें कार्य संस्कृति, कलाकारों का स्वास्थ्य, रचनात्मक स्वतंत्रता और पेशेवर अनुशासन जैसे पहलू शामिल हैं। यह चर्चा केवल दो दृष्टिकोणों तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे उद्योग में काम करने के तरीकों पर पुनर्विचार की आवश्यकता को दर्शाती है। समय के साथ यह विषय और अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है क्योंकि बदलते समय में काम और जीवन के संतुलन को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है।

  • तेलंगाना सरकार ने रमजान में मुस्लिम कर्मचारियों को विशेष छुट्टी देने का फैसला लिया

    तेलंगाना सरकार ने रमजान में मुस्लिम कर्मचारियों को विशेष छुट्टी देने का फैसला लिया


    नई दिल्ली । तेलंगाना सरकार ने रमजान के पवित्र महीने में राज्य के मुस्लिम कर्मचारियों को विशेष छूट देने का निर्णय लिया है। मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि राज्य में कार्यरत सभी मुस्लिम कर्मचारी शिक्षक अनुबंधित और आउटसोर्सिंग स्टाफ बोर्डों निगमों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में कार्यरत लोग रमजान के दौरान अपने कार्यालय या स्कूल से शाम 4 बजे छुट्टी ले सकते हैं। यह समय सामान्य कार्य अवधि से एक घंटा पहले है ताकि उपवास तोड़ने और नमाज अदा करने जैसी धार्मिक प्रथाओं को आसानी से पूरा किया जा सके। यह आदेश 19 फरवरी से 20 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेगा हालांकि सेवा की आवश्यकताओं या आपातकालीन परिस्थितियों में कर्मचारियों को निर्धारित समय से अधिक ड्यूटी करनी पड़ सकती है।

    सरकार का यह कदम धार्मिक संवेदनशीलता और समावेशी नीति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। फैसले का दायरा व्यापक है और इसमें केवल सरकारी कार्यालय ही नहीं बल्कि शैक्षणिक संस्थान भी शामिल हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक ने रमजान के दौरान विशेष समय-सारिणी को मंजूरी दी है। 19 फरवरी से 20 मार्च तक सभी उर्दू माध्यम के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल समानांतर माध्यम स्कूलों के उर्दू खंड और डाइट कॉलेज सुबह 8 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक संचालित होंगे। कम हुए शिक्षण घंटों की भरपाई के लिए उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को एक अतिरिक्त कार्य दिवस चलाना होगा जबकि प्राथमिक स्कूलों में दैनिक समय को 30 मिनट बढ़ाया जाएगा।

    नोटिफिकेशन के अनुसार क्षेत्रीय और जिला शिक्षा अधिकारी इस संशोधित समय-सारिणी और मुआवजा व्यवस्था के सख्त क्रियान्वयन के जिम्मेदार होंगे। यह व्यवस्था पिछले वर्षों की प्रथाओं के अनुरूप है और शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करती है। आदेश का मुख्य उद्देश्य रमजान के दौरान उपवास रखने वाले मुस्लिम कर्मचारियों को उनकी धार्मिक जिम्मेदारियों को निर्वहन करने में मदद करना है। सरकार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि यह छूट एकसमान रूप से लागू हो और केवल आपात स्थिति में ही अपवाद बनाया जाए।

    यह फैसला मुस्लिम समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए राज्य में सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देता है। पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में भी समान व्यवस्था लागू है जहां 18 फरवरी से 19 मार्च तक यह सुविधा दी जा रही है। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ने इसे धार्मिक प्रथाओं के पालन में सहायक बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का कदम न केवल धार्मिक स्वतंत्रता को प्रोत्साहित करता है बल्कि कार्य-जीवन संतुलन में भी मददगार है।

    कुल मिलाकर तेलंगाना सरकार का यह निर्णय मुस्लिम कर्मचारियों को रमजान की रौनक में भाग लेने का अवसर देता है बिना कार्यालय या स्कूल की कार्यक्षमता पर नकारात्मक असर डाले। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि यह विशेष छूट केवल रमजान तक सीमित है और अन्य समुदायों की परंपराओं के लिए आवश्यकतानुसार विचार किया जा सकता है। यह कदम राज्य की बहुलतावादी संस्कृति को मजबूत करने और सामाजिक समावेशिता को बढ़ावा देने की दिशा में सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है।

  • भारत में 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी? जानिए सरकार ने क्या संकेत दिए हैं

    भारत में 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी? जानिए सरकार ने क्या संकेत दिए हैं


    नई दिल्‍ली । देश के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, गुरुग्राम और पुणे में ज्यादातर कॉरपोरेट ऑफिस अभी 5-Day वर्क वीक सिस्टम पर काम कर रहे हैं। लेकिन बढ़ते वर्क प्रेशर, लंबे ऑफिस ऑवर्स और वर्क-लाइफ बैलेंस की समस्या के चलते अब 4-Day वर्क वीक की मांग जोर पकड़ने लगी है। कर्मचारियों का मानना है कि हफ्ते में चार दिन काम और तीन दिन की छुट्टी मिलने से उत्पादकता बढ़ेगी और मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होगा।

    दुनिया के कई देशों में इस मॉडल पर प्रयोग हो रहे हैं। जापान, स्पेन और जर्मनी जैसे देशों में कई कंपनियां 4-Day वर्क वीक को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू कर चुकी हैं। इसी बीच भारत में नए लेबर कानूनों के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या यहां भी 4-Day वर्क वीक को कानूनी मंजूरी मिल सकती है।

    श्रम मंत्रालय ने क्या कहा?
    श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 12 दिसंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए स्थिति स्पष्ट की। मंत्रालय के अनुसार, नए लेबर कोड्स के तहत किसी भी कर्मचारी से हफ्ते में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जा सकता। हालांकि कंपनियों को यह विकल्प दिया गया है कि वे कर्मचारियों से दिन में 12 घंटे तक काम करवा सकती हैं। ऐसे में यदि कोई कंपनी 12 घंटे की शिफ्ट अपनाती है, तो कर्मचारी हफ्ते में चार दिन काम कर तीन दिन की पेड छुट्टी ले सकता है।

    मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि 12 घंटे की शिफ्ट का मतलब लगातार 12 घंटे काम नहीं है। इसमें ब्रेक और स्प्रेड-ओवर टाइम भी शामिल रहेगा। अगर किसी कर्मचारी से तय सीमा से अधिक काम कराया जाता है, तो ओवरटाइम के लिए दोगुना भुगतान करना अनिवार्य होगा।

    नए लेबर कोड्स क्या कहते हैं?
    सरकार ने देश के 29 पुराने श्रम कानूनों को हटाकर चार नए लेबर कोड लागू किए हैं—

    वेज कोड

    इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड

    सोशल सिक्योरिटी कोड

    ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड

    इनका उद्देश्य श्रम कानूनों को सरल बनाना और कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करना है।

    क्या भारत में लागू होगा 4-Day वर्क वीक?
    हालांकि नए नियम 4-Day वर्क वीक की कानूनी गुंजाइश जरूर देते हैं, लेकिन इसे अपनाना पूरी तरह कंपनियों की नीति और काम की प्रकृति पर निर्भर करेगा। हर सेक्टर में 12 घंटे की शिफ्ट संभव हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए यह मॉडल कब और कितनी कंपनियों में लागू होगा, यह आने वाला वक्त ही तय करेगा।

    कुल मिलाकर, सरकार ने भारत में 4-Day वर्क वीक का रास्ता खोला है, लेकिन इसका व्यापक रूप से लागू होना कंपनियों और कर्मचारियों की सहमति पर निर्भर करेगा।