Tag: Workers

  • रूस के अमूर गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स में भीषण विस्फोट से 7 लोगों की मौत, छह चीनी नागरिक शामिल, नौ अब भी लापता

    रूस के अमूर गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स में भीषण विस्फोट से 7 लोगों की मौत, छह चीनी नागरिक शामिल, नौ अब भी लापता

    नई दिल्ली । रूस के सुदूर पूर्वी अमूर क्षेत्र में मंगलवार को एक बड़े गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स में हुए भीषण विस्फोट और आग ने औद्योगिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में छह चीनी नागरिकों समेत सात लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है, जबकि नौ अन्य चीनी कर्मचारी अब भी लापता बताए जा रहे हैं। घटना के बाद परिसर में राहत और बचाव अभियान चलाया गया तथा हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।

    यह हादसा अमूर गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स की पाइरोलिसिस यूनिट के एक सहायक तकनीकी हिस्से में हुआ। जानकारी के अनुसार जिस समय विस्फोट हुआ, उस दौरान संयंत्र में उपकरणों की अंतिम टेस्टिंग और कमीशनिंग का काम चल रहा था। अचानक हुए धमाके के बाद परिसर में आग फैल गई, जिससे वहां मौजूद कर्मचारियों में अफरा तफरी मच गई।

    प्लांट की प्रेस सर्विस के अनुसार घटना के बाद लगी आग पर काबू पा लिया गया है। कंपनी की ओर से यह भी बताया गया कि संयंत्र के मुख्य उपकरणों को नुकसान नहीं पहुंचा है। हालांकि हादसे में जान गंवाने वाले लोगों और लापता कर्मचारियों को लेकर स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। नौ चीनी कर्मचारियों के बारे में अब तक स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आने से उनके परिवारों और संबंधित अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है।

    अमूर गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स रूस और चीन के बीच औद्योगिक सहयोग से जुड़ी एक बड़ी परियोजना है। यह परिसर रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है और इसके निर्माण तथा विकास में रूस की सिबुर और चीन की सिनोपेक जैसी कंपनियों की भागीदारी है। ऐसे में हादसे में चीनी नागरिकों के प्रभावित होने से दोनों देशों के स्तर पर भी घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है।

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक विस्फोट मुख्य पाइरोलिसिस यूनिट के एक सहायक तकनीकी हिस्से में हुआ। उस समय वहां अंतिम परीक्षण और कमीशनिंग से जुड़ा काम चल रहा था। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि विस्फोट की वास्तविक वजह क्या थी। तकनीकी खराबी, उपकरणों से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    रूसी जांच अधिकारियों की कार्रवाई के बाद हादसे के कारणों को लेकर अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आने की उम्मीद है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि घटना के समय संयंत्र में किस तरह का तकनीकी काम चल रहा था और सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर तक किया गया था। साथ ही विस्फोट के बाद आग फैलने की परिस्थितियों और कर्मचारियों की मौजूदगी से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा सकती है।

    हादसे ने एक बार फिर बड़े औद्योगिक संयंत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षण के दौरान अपनाए जाने वाले मानकों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेष रूप से ऐसे परिसर में जहां गैस और रासायनिक प्रक्रियाओं से जुड़े संवेदनशील उपकरण मौजूद हों, वहां छोटी तकनीकी गड़बड़ी भी गंभीर दुर्घटना का रूप ले सकती है। फिलहाल प्रशासन और संबंधित एजेंसियों का मुख्य ध्यान लापता कर्मचारियों की तलाश, प्रभावित लोगों की पहचान और दुर्घटना की वास्तविक वजह सामने लाने पर है।

  • देवास में आशा कार्यकर्ताओं का शक्ति प्रदर्शन मांगें पूरी नहीं हुईं तो विधानसभा घेराव की चेतावनी

    देवास में आशा कार्यकर्ताओं का शक्ति प्रदर्शन मांगें पूरी नहीं हुईं तो विधानसभा घेराव की चेतावनी


    देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले में सोमवार को आशा कार्यकर्ताओं और आशा पर्यवेक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचीं दो हजार से अधिक कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर धरना दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने समय पर वेतन भुगतान, लंबित प्रोत्साहन राशि और एरियर जारी करने की मांग उठाई।

    तेज धूप के बावजूद बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता कलेक्टर कार्यालय परिसर में डटी रहीं। कई महिलाएं धूप से बचने के लिए छाते लेकर धरने पर बैठीं जबकि कुछ अपने छोटे बच्चों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुईं। कार्यकर्ताओं का कहना था कि स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें समय पर भुगतान और निर्धारित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

    प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कई महीनों तक प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किया जाता और भुगतान में मनमानी कटौती भी की जाती है। उनका कहना है कि बकाया राशि का स्पष्ट विवरण भी उपलब्ध नहीं कराया जाता जिससे उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    आशा कार्यकर्ताओं ने वर्ष 2023 में घोषित एक हजार रुपये की वार्षिक वेतन वृद्धि का एरियर तत्काल जारी करने की मांग भी दोहराई। उनका कहना है कि सरकार द्वारा घोषणा किए जाने के बावजूद अब तक एरियर का भुगतान नहीं हुआ है। साथ ही छह हजार रुपये मासिक प्रोत्साहन राशि में परिवार का भरण पोषण करना बेहद कठिन हो गया है।

    रैली शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंची जहां करीब आधे घंटे तक धरना प्रदर्शन चला। इस दौरान भारत माता की जय और हमारा हक हमें दो जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के माध्यम से सरकार को अपनी मांगों का ज्ञापन भी सौंपा।

    आशा कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगला चरण विधानसभा घेराव का होगा और तब तक आंदोलन जारी रहेगा जब तक लंबित भुगतान और अन्य मांगों का समाधान नहीं किया जाता।

  • मजदूरों को राहत: न्यूनतम वेतन में 1000 से 3000 रुपये तक इजाफा, नई दरें लागू

    मजदूरों को राहत: न्यूनतम वेतन में 1000 से 3000 रुपये तक इजाफा, नई दरें लागू


    नई दिल्ली। नोएडा में चल रहे श्रमिक आंदोलन और तनाव के बीच Yogi Adityanath सरकार ने मजदूरों के हित में बड़ा फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में 1000 रुपये से 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह नया शासनादेश 1 अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में लागू होगा।

    नए वेतन दर क्या हैं?
    सरकार द्वारा तय किए गए नए वेतन के अनुसार Gautam Buddh Nagar और Ghaziabad में अकुशल मजदूरी ₹11,313 से बढ़ाकर 13,690 रुपये कर दी गई है। अर्धकुशल मजदूरी 12,445 रुपये से बढ़कर 15,059 रुपये और कुशल मजदूरी 13,940 रुपये से बढ़कर 16,868 रुपये कर दी गई है। वहीं अन्य नगर निगम क्षेत्रों में अकुशल मजदूरी 13,006, रुपये अर्धकुशल 14,306 रुपये और कुशल रुपये 16,025 तय की गई है। अन्य जिलों में अकुशल मजदूरी रुपये 12,356, अर्धकुशल 13,591 रुपये और कुशल रुपये 15,224 निर्धारित की गई है।

    मजदूरों को मिली अंतरिम राहत
    सरकार का कहना है कि यह फैसला श्रमिकों और उद्योगों के बीच संतुलन बनाकर लिया गया है और इससे मजदूरों को फिलहाल अंतरिम राहत मिलेगी। आगे वेज बोर्ड के माध्यम से मजदूरी की व्यापक समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि न्यूनतम वेतन ₹20,000 किए जाने की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर इस तरह की झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं, जिनका कोई आधिकारिक आधार नहीं है। सरकार ने बताया कि केंद्र स्तर पर नए लेबर कोड के तहत राष्ट्रीय न्यूनतम ‘फ्लोर वेज’ तय करने की प्रक्रिया जारी है।

    20,000 रुपये न्यूनतम वेतन की खबरें गलत
    मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने जनता से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें और अफवाहों से बचें। साथ ही नियोक्ताओं से कहा गया है कि वे श्रमिकों को समय पर वेतन, ओवरटाइम का भुगतान, साप्ताहिक अवकाश, बोनस और सामाजिक सुरक्षा के सभी अधिकार सुनिश्चित करें, साथ ही महिला श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान का विशेष ध्यान रखें।

  • LPG की किल्लत के बीच बढ़ी स्टोव की डिमांड… केरोसिन नहीं मिलने से मजदूर पलायन को मजबूर

    LPG की किल्लत के बीच बढ़ी स्टोव की डिमांड… केरोसिन नहीं मिलने से मजदूर पलायन को मजबूर


    नई दिल्ली।
    एलपीजी किल्लत (Gas Crisis) के कारण आम लोग खासकर मजदूर वर्ग खासे परेशान हैं। आसानी से सिलिंडर (Gas Cylinder) नहीं मिलने के कारण हालात ऐसे हो गए हैं कि साल पहले घरों से गायब केरोसिन स्टोव (Kerosene Stove) विकल्प के रूप में एक बार फिर जरूरत बनकर उभर रहा है।

    केंद्र सरकार ने आपात परिस्थितियों को देखते हुए केरोसिन तेल की बिक्री की अनुमति तो दे दी है, लेकिन बाजार में तेल उपलब्ध नहीं होने से लोग परेशान हैं। इस कारण मजदूर वर्ग पलायन करने को भी मजबूर हैं।

    सदर बाजार और चांदनी चौक जैसे थोक बाजारों में केरोसिन स्टोव की कमी देखी जा रही है। कभी इन बाजारों में स्टोव की भरमार होती थी, लेकिन बदलते समय के साथ इनकी मांग लगभग समाप्त हो गई थी। पहले सिलिंडर उसके बाद इंडक्शन उपयोग के कारण व्यापारियों ने धीरे-धीरे इसे बेचना छोड़ दिया। अब गैस संकट के चलते स्टोव की मांग अचानक बढ़ी है तो बाजार इसकी आपूर्ति करने में असमर्थ दिखाई दे रहा है।


    केरोसिन-डीजल स्टोव के दाम बढ़े

    जो साधारण स्टोव पहले 400 से 600 रुपये में आसानी से मिल जाते थे, उनकी कीमत अब 1500 से 1800 रुपये तक पहुंच गई है। बड़े स्तर पर उपयोग होने वाली केरोसिन-डीजल भट्टियों के दाम 30 हजार रुपये तक पहुंच गया है। बावजूद बाजार में आसानी से नहीं मिल रहा है। सदर बाजार के व्यापारी सुरेश ने बताया कि उनके परिवार का पुराना व्यवसाय स्टोव बेचना था, लेकिन केरोसिन के उपयोग में कमी आने के कारण उन्होंने यह काम छोड़ दिया।


    नई पीढ़ी के लिए केरोसिन स्टोव बना चुनौती

    नई पीढ़ी के अधिकांश लोग केरोसिन स्टोव का उपयोग करना नहीं जानते हैं। मुनिरका में काम करने वाली घरेलू सहायिका मीना ने बताया कि उनका सिलिंडर खत्म हो चुका है। वह कई बाजारों में स्टोव की तलाश कर चुकी हैं, लेकिन उन्हें कहीं नहीं मिला। वहीं, आरके पुरम में रहने वाली गृहिणी प्रेरणा ने बताया कि उनके घर में पिछले तीन दशकों से केवल गैस चूल्हे का उपयोग हो रहा है। उन्होंने कभी स्टोव पर खाना नहीं बनाया, अब यह स्थिति उनके लिए नई और चुनौतीपूर्ण बन गई है।


    बढ़ रहा पलायन, बस अड्डों-स्टेशनों पर लोगों की भीड़

    रोजी रोटी की तलाश में घर से हजारों किलोमीटर दूर पहुंचे मजदूर वर्ग के लिए एलपीजी संकट से पेट भरना भी मुश्किल हो गया है। इन संकटों से जूझ रहे खासकर मजदूर वर्ग के लोग अपने घर लौटने को मजबूर हो रहे हैं।

    इस कारण बड़ी संख्या में पलायन कर रहे लोगों की भीड़ इन दिनों बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों पर देखी जा रही है। सिलेंडर न मिलने, बाहर खाने की महंगाई और काम की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोग घर जाना ही मुनासिक समझ रहे हैं। आनंद विहार बस अड्डा और रेलवे स्टेशन पर सुबह से ही यात्रियों की भीड़ देखने को मिली।

    कई लोग बैग और सामान के साथ बसों और ट्रेनों का इंतजार करते नजर आए। उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली बसों में भीड़ अधिक रही। यात्रियों का कहना है कि पिछले कई दिनों से गैस नहीं मिलने के कारण खाना बनाना मुश्किल हो गया है।