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  • भारत की तर्ज पर अमेरिका में भी SIR ….. वोटर लिस्ट की सफाई में जुटे ट्रंप, अब तक मिले 24 हजार फर्जी मतदाता

    भारत की तर्ज पर अमेरिका में भी SIR ….. वोटर लिस्ट की सफाई में जुटे ट्रंप, अब तक मिले 24 हजार फर्जी मतदाता


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) में वोटर लिस्ट (Voter List) की शुद्धता को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने दावा किया है कि 2020 के वोटर रिकॉर्ड और नागरिकता संबंधी रिकॉर्ड के मिलान किया गया है. इस दावे के मुताबिक, 12.8 करोड़ मतदाताओं के शुरुआती विश्लेषण में 24 हजार से अधिक गैर-नागरिक मतदाताओं की पहचान हुई है।

    ट्रंप ने इसकी जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth पर पोस्ट की और कहा कि अब बचे हुए 3.2 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी जिसके बाद यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।

    ट्रंप ने लिखा, ‘पहले 12.8 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच में यूएस सेंसस ब्यूरो ने साबित कर दिया है कि 24,000 से अधिक गैर-नागरिकों ने अवैध वोट डाले. अभी अगले 3.2 करोड़ मतदाताओं का विश्लेषण बाकी है और यह आंकड़ा और बढ़ेगा. मैं चुनाव जीता था! हमें हर हाल में ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पास करना होगा.।

    व्हाइट हाउस द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, जिन गैर-नागरिकों के वोटर रिकॉर्ड मिले हैं उनमें मेक्सिको में जन्मे लोगों की संख्या सबसे अधिक (3,800) बताई गई है. इसके बाद कनाडा (950), फिलीपींस (900), जमैका (900), जर्मनी (700), ब्रिटेन (650), क्यूबा (450), वियतनाम (400), हैती (400) और दक्षिण कोरिया (350)का नंबर आता है. ट्रंप का दावा है कि है कि बाकी बचे 3.2 करोड़ वोटों के विश्लेषण के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है।

    ट्रंप ने कहा कि यूएस सेंसस ब्यूरो 2020 के मतदाता रिकॉर्ड की नागरिकता संबंधी रिकॉर्ड के साथ जांच कर रहा है. उन्होंने इसे चुनावी पारदर्शिता से जोड़ते हुए दावा किया कि इससे 2020 के चुनाव को लेकर उनकी पुरानी आपत्तियां पुख्ता होती हैं. हालांकि, ट्रंप के इन दावों को लेकर भी सवार उठ रहे हैं।

    इस पूरे विवाद के बीच ट्रंप ने एक बार फिर ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को पारित करने की मांग दोहराई है. इस प्रस्तावित कानून के तहत संघीय चुनावों में मतदान के लिए नागरिकता का प्रमाण और फोटो पहचान पत्र अनिवार्य करने का प्रावधान है. साथ ही राज्यों को मतदाता सूचियों से गैर-नागरिकों के नाम हटाने की दिशा में भी कदम उठाने होंगे।

    भारत के चुनावी मॉडल की कर चुके हैं तारीफ
    दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने इस मुद्दे पर भारत के चुनावी मॉडल की भी सराहना की थी. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा था कि भारत में 64.6 करोड़ मतदाताओं ने मतदान किया और लगभग सभी मतदाताओं के पास वैध फोटो पहचान पत्र था. ट्रंप ने भारत की मतदाता पहचान प्रणाली को अमेरिका के लिए एक उदाहरण बताया।

    हालांकि, इस मुद्दे पर अमेरिका में राजनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं. आलोचकों का कहना है कि बड़े पैमाने पर गैर-नागरिकों के मतदान के दावों के समर्थन में पर्याप्त सार्वजनिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं, जबकि ट्रंप प्रशासन इसे चुनावी सुधारों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार मान रहा है।

  • बंदूक नहीं, दिमाग से जंग’-भारत के खिलाफ नई रणनीति पर काम कर रहा पाकिस्तान, रिपोर्ट में खुलासा

    बंदूक नहीं, दिमाग से जंग’-भारत के खिलाफ नई रणनीति पर काम कर रहा पाकिस्तान, रिपोर्ट में खुलासा

    इस्लामाबाद। आसिम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान भारत के खिलाफ नई रणनीति पर काम कर रहा है। आरोप है कि सैन्य टकराव के बजाय अब “इन्फॉर्मेशन वॉर” के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को चुनौती देने की कोशिश हो रही है।

    DisinfoLab की हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान एक वैश्विक मीडिया नेटवर्क और थिंक टैंक इकोसिस्टम तैयार कर रहा है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय राय को प्रभावित करना है। यह पहल कथित तौर पर पिछले साल के ऑपरेशन सिंदूर के बाद शुरू हुई, जब पाकिस्तान का नैरेटिव वैश्विक मंच पर प्रभाव नहीं डाल सका।

    ‘नैरेटिव वॉर’ का मास्टर प्लान

    रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने 2025 में “रणनीतिक संचार मास्टर प्लान” नाम से पहल शुरू की है। इसका लक्ष्य अंग्रेजी भाषा के ऐसे प्लेटफॉर्म बनाना है जो अंतरराष्ट्रीय दर्शकों में विश्वसनीय दिखें और कश्मीर जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान-समर्थक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएं। पहले उर्दू-केंद्रित मैसेजिंग वैश्विक स्तर पर प्रभावी नहीं रही, इसलिए यह बदलाव किया गया।

    थिंक टैंक नेटवर्क पर फोकस

    बताया गया है कि मिन्हाज यूनिवर्सिटी लाहौर में “हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड पॉलिसी स्टडीज” जैसे संस्थान स्थापित किए गए हैं। ये भू-राजनीति, सुरक्षा और जलवायु जैसे विषयों पर काम करने का दावा करते हैं, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार इनमें रणनीतिक तंत्र से जुड़े लोगों की भागीदारी बताई गई है।

    ग्लोबल मीडिया में पैठ की कोशिश

    रिपोर्ट में कहा गया है कि कई डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए सक्रिय किया गया है, जिनमें AsiaOne News, DM News English, FP92TV और Afrik1 TV शामिल बताए गए हैं। इन प्लेटफॉर्म्स को कथित तौर पर “निष्पक्ष पत्रकारिता” के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि आलोचकों का आरोप है कि इनके जरिए नैरेटिव सेट करने की कोशिश हो रही है।

    ‘न्यूट्रल मीडिया’ के नाम पर रणनीति

    विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी समर्थन वाले मीडिया पर भरोसे की कमी को देखते हुए पाकिस्तान ने थिंक टैंक, सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय डिजिटल चैनलों के जरिए “सॉफ्ट पावर” आधारित रणनीति अपनाई है। इसका उद्देश्य बिना प्रत्यक्ष सैन्य टकराव के कूटनीतिक और सूचना स्तर पर प्रभाव बनाना है।
    कुल मिलाकर, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान अब पारंपरिक सैन्य टकराव के बजाय सूचना और प्रचार के जरिए वैश्विक मंच पर भारत को चुनौती देने की रणनीति अपना रहा है।