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  • पाकिस्तान ने भारत में होने वाले मास्टर्स क्रिकेट विश्व कप से बनाई दूरी, हॉकी टीम को भेजने की अनुमति भी नहीं

    पाकिस्तान ने भारत में होने वाले मास्टर्स क्रिकेट विश्व कप से बनाई दूरी, हॉकी टीम को भेजने की अनुमति भी नहीं

    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों का असर एक बार फिर खेल आयोजनों पर दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और वहां के गृह मंत्रालय ने जनवरी 2027 में भारत में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल मास्टर्स क्रिकेट विश्व कप में अपनी 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की टीम को भेजने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के कारण पाकिस्तान की वेटरंस क्रिकेट टीम टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकेगी। इससे पहले पाकिस्तान की पुरुष राष्ट्रीय हॉकी टीम को भी भारत में आयोजित होने वाले टूर्नामेंट में भेजने से इनकार किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

    इंटरनेशनल मास्टर्स क्रिकेट विश्व कप में भाग लेने के लिए पाकिस्तान वेटरंस क्रिकेट संघ ने अपनी टीम भेजने की तैयारी की थी। संघ के प्रमुख फवाद एजाज के अनुसार, आयोजकों को टीम का नाम वापस लेने की आधिकारिक जानकारी दे दी गई है, ताकि वे टूर्नामेंट के लिए किसी दूसरी टीम की व्यवस्था कर सकें। पाकिस्तान की टीम को अनुमति नहीं मिलने से आयोजकों को अब भाग लेने वाली टीमों की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।

    फवाद एजाज ने बताया कि भारतीय आयोजकों और मेजबान देश की ओर से पाकिस्तानी खिलाड़ियों को वीजा तथा उच्चस्तरीय सुरक्षा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद पाकिस्तान वेटरंस क्रिकेट संघ ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी मांगा था। हालांकि, अनुमति नहीं मिलने के कारण टीम भारत आने की तैयारी आगे नहीं बढ़ा सकी।

    बताई गई जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के गृह मंत्री और क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख मोहसिन नकवी ने दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों का हवाला देते हुए टीम को भारत जाने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया। इसके चलते पाकिस्तान की टीम अगले साल होने वाले इस टूर्नामेंट में अपने खिताब का बचाव नहीं कर सकेगी। पाकिस्तान ने पिछला वेटरंस विश्व कप श्रीलंका में जीता था। ऐसे में आगामी प्रतियोगिता से उसका बाहर रहना टीम के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है।

    क्रिकेट के अलावा हॉकी में भी इसी तरह की स्थिति सामने आई है। पाकिस्तान हॉकी महासंघ ने हाल ही में संवेदनशील द्विपक्षीय परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपनी पुरुष राष्ट्रीय टीम को भारत भेजने से इनकार कर दिया था। इसके बाद एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी के लिए बांग्लादेश को शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई। इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि भारत-पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव का प्रभाव केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य खेल प्रतियोगिताओं में भागीदारी पर भी पड़ रहा है।

    पाकिस्तान पहले भी भारत में आयोजित कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से हट चुका है। सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए उसने तमिलनाडु में आयोजित जूनियर विश्व कप और जूनियर एशिया कप से भी अपना नाम वापस लिया था। हालांकि, अलग-अलग प्रतियोगिताओं में फैसलों के पीछे परिस्थितियां और आधिकारिक कारण अलग हो सकते हैं।

    भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय खेल संबंध लंबे समय से प्रभावित हैं। वर्ष 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंधों में बड़ा बदलाव आया। भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने जुलाई 2008 में एशिया कप के लिए पाकिस्तान का दौरा किया था। वहीं, द्विपक्षीय श्रृंखला खेलने के लिए भारतीय टीम वर्ष 2005-06 में पाकिस्तान गई थी।

    वर्तमान परिस्थितियों में दोनों देशों की क्रिकेट टीमें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद और एशियाई क्रिकेट परिषद के बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में आमने-सामने आती हैं। ऐसे मुकाबले भी अक्सर संयुक्त अरब अमीरात या श्रीलंका जैसे तटस्थ स्थानों पर आयोजित किए जाते हैं। द्विपक्षीय तनाव के कारण नियमित घरेलू दौरे और श्रृंखलाएं बहाल नहीं हो पाई हैं।

    जनवरी 2027 के मास्टर्स क्रिकेट विश्व कप में पाकिस्तान की अनुपस्थिति और हॉकी टीम को भारत नहीं भेजने के फैसले से दोनों देशों के खेल संबंधों में जारी चुनौतियां फिर सामने आई हैं। अब आयोजकों को क्रिकेट प्रतियोगिता के लिए वैकल्पिक टीम की व्यवस्था करनी होगी, जबकि दोनों देशों के बीच भविष्य में खेल आयोजनों में भागीदारी की स्थिति राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों पर निर्भर करेगी।

  • अर्जेंटीना की जर्सी में मेसी का आखिरी मैच, 21 साल के करियर में 125 गोल, 4 बड़े खिताब और रिकॉर्ड्स की लंबी फेहरिस्त

    अर्जेंटीना की जर्सी में मेसी का आखिरी मैच, 21 साल के करियर में 125 गोल, 4 बड़े खिताब और रिकॉर्ड्स की लंबी फेहरिस्त

    नई दिल्ली: लियोनल मेसी ने अर्जेंटीना की जर्सी में अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेल लिया। ब्यूनस आयर्स के एस्टाडियो मोनुमेंटल में बेनिन के खिलाफ खेले गए दोस्ताना मैच में अर्जेंटीना ने 3-0 से जीत दर्ज की। इस मुकाबले में मेसी ने एक गोल किया और टीम के तीनों गोल में अहम भूमिका निभाई। 39 वर्षीय मेसी अगस्त में ही राष्ट्रीय टीम से संन्यास का एलान कर चुके थे। इसके साथ अर्जेंटीना की नीली-सफेद जर्सी में उनका 21 साल से ज्यादा लंबा सफर समाप्त हो गया, जिसमें उन्होंने टीम को विश्व कप और कोपा अमेरिका समेत चार बड़े अंतरराष्ट्रीय खिताब दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    मेसी ने 2005 में अर्जेंटीना की सीनियर टीम के लिए पदार्पण किया था। इससे पहले वह उसी साल अर्जेंटीना को अंडर-20 विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभा चुके थे और टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी तथा शीर्ष स्कोरर बने थे। 2008 बीजिंग ओलंपिक में भी उन्होंने अर्जेंटीना के साथ स्वर्ण पदक जीता। हालांकि सीनियर टीम के शुरुआती वर्षों में उन्हें कई निराशाओं का सामना करना पड़ा। 2014 विश्व कप फाइनल में जर्मनी से हार और 2015 तथा 2016 कोपा अमेरिका फाइनल में चिली के खिलाफ हार के बाद मेसी पर सवाल उठे। 2016 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास का एलान भी किया, लेकिन बाद में टीम में वापसी की।

    वापसी के बाद मेसी और अर्जेंटीना की कहानी पूरी तरह बदल गई। 2021 में अर्जेंटीना ने ब्राजील को हराकर कोपा अमेरिका का खिताब जीता और मेसी ने अपना पहला बड़ा सीनियर अंतरराष्ट्रीय खिताब हासिल किया। 2022 में इटली के खिलाफ फाइनलिसिमा जीतने के बाद कतर विश्व कप में अर्जेंटीना ने फ्रांस को फाइनल में हराकर खिताब जीता। मेसी ने उस फाइनल में दो गोल किए और पेनल्टी शूटआउट में अर्जेंटीना की जीत के बाद विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम की। उन्हें टूर्नामेंट का गोल्डन बॉल पुरस्कार भी मिला। 2024 में अर्जेंटीना ने कोलंबिया को हराकर लगातार दूसरी बार कोपा अमेरिका जीता। इस तरह मेसी के नेतृत्व में टीम ने चार बड़े अंतरराष्ट्रीय खिताब हासिल किए।

    2026 विश्व कप में भी मेसी ने कई नए रिकॉर्ड बनाए। अल्जीरिया के खिलाफ मुकाबले में मैदान पर उतरते ही वह पुरुष फुटबॉल इतिहास में छह अलग-अलग विश्व कप खेलने वाले पहले खिलाड़ी बने। उसी मैच में उन्होंने विश्व कप करियर की पहली हैट्रिक लगाई। इसके बाद ऑस्ट्रिया के खिलाफ दो गोल करके उन्होंने विश्व कप में अपने गोल की संख्या 18 पहुंचाई और मिरोस्लाव क्लोज को पीछे छोड़ दिया। 2026 विश्व कप के अंत तक मेसी के नाम 21 गोल हो गए। उन्होंने टूर्नामेंट में आठ गोल और चार असिस्ट के साथ अर्जेंटीना को फाइनल तक पहुंचाया, जहां स्पेन से अतिरिक्त समय में 0-1 की हार के बाद टीम उपविजेता रही।

    मेसी के नाम विश्व कप में 23 जीत और 12 असिस्ट का रिकॉर्ड भी दर्ज है। वह तीन विश्व कप फाइनल में शुरुआती एकादश का हिस्सा रहने वाले खिलाड़ियों में शामिल हैं। 2026 में उन्होंने लगातार नौ विश्व कप मैचों में गोल करने का रिकॉर्ड बनाया और नॉकआउट चरण में लगातार छह मैचों में गोल करने का रिकॉर्ड भी कायम किया। कतर विश्व कप में वह ग्रुप चरण से लेकर फाइनल तक हर चरण में गोल करने वाले खिलाड़ी बने थे। अर्जेंटीना के लिए अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में मेसी ने 207 मैच खेले और 125 गोल के साथ टीम के सबसे ज्यादा मैच खेलने तथा सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी के रूप में विदाई ली। उन्होंने 68 असिस्ट भी किए।

    मेसी की उपलब्धियां सिर्फ अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल तक सीमित नहीं रहीं। बार्सिलोना के साथ उन्होंने 17 सीजन बिताए और 778 मैचों में 672 गोल किए। क्लब के साथ उन्होंने 35 खिताब जीते, जिनमें चार चैंपियंस लीग और 10 ला लीगा खिताब शामिल हैं। 2012 में एक कैलेंडर वर्ष में 91 गोल करने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है। वह आठ बार बैलन डी’ओर जीत चुके हैं और छह बार यूरोपीय गोल्डन शू हासिल कर चुके हैं। 2023 में इंटर मियामी पहुंचने के बाद भी उनका रिकॉर्ड कायम रहा और 2026 में क्लब के लिए 100 गोल पूरे करने वाले पहले खिलाड़ी बने। अब अर्जेंटीना के साथ उनका अंतरराष्ट्रीय अध्याय समाप्त हो चुका है, लेकिन उनके रिकॉर्ड और उपलब्धियां फुटबॉल इतिहास का अहम हिस्सा बनी रहेंगी।

  • विराट कोहली का बड़ा ऐलान, 2027 वनडे वर्ल्ड कप होगा भारत के लिए उनका आखिरी विश्व कप

    विराट कोहली का बड़ा ऐलान, 2027 वनडे वर्ल्ड कप होगा भारत के लिए उनका आखिरी विश्व कप


    नई दिल्ली ।
    भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने 2027 वनडे वर्ल्ड कप को लेकर अपने भविष्य पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में होने वाला 2027 आईसीसी पुरुष वनडे विश्व कप भारत के लिए उनका आखिरी वर्ल्ड कप होगा। कोहली ने कहा कि इस टूर्नामेंट में उनका पूरा ध्यान खिताब जीतने पर रहेगा और इसके लिए वह मैदान पर अपना सब कुछ लगाने के लिए तैयार हैं।

    2027 का वनडे वर्ल्ड कप अक्टूबर-नवंबर में खेला जाना है। टूर्नामेंट के मुकाबले दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया के अलग-अलग मैदानों पर होंगे। विराट कोहली ने वर्ष 2011 में भारत में आयोजित वनडे वर्ल्ड कप से अपने विश्व कप सफर की शुरुआत की थी। उस टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने फाइनल में श्रीलंका को हराकर खिताब जीता था और कोहली उस ऐतिहासिक टीम का हिस्सा थे।

    इसके बाद कोहली 2015, 2019 और 2023 के वनडे वर्ल्ड कप में भी भारतीय टीम का हिस्सा रहे। इस तरह 2027 का टूर्नामेंट उनके विश्व कप करियर का पांचवां संस्करण होगा। अपने अब तक के विश्व कप सफर में कोहली ने कई शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं। वह वनडे वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में दूसरे स्थान पर बताए जाते हैं।

    2023 के वनडे वर्ल्ड कप में भी कोहली का प्रदर्शन बेहद प्रभावी रहा था। उन्होंने उस टूर्नामेंट में 765 रन बनाए थे और कई अहम रिकॉर्ड अपने नाम किए थे। अब 2027 में उनके सामने अपने विश्व कप करियर को खिताबी जीत के साथ समाप्त करने का लक्ष्य होगा।

    वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज से पहले बातचीत में कोहली ने 50 ओवर के विश्व कप की चुनौती के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि वनडे वर्ल्ड कप में मुकाबलों की इंटेंसिटी काफी ज्यादा होती है। उनके मुताबिक, टी20 वर्ल्ड कप में करीब 10 मैच खेलने के मुकाबले 50 ओवर के प्रारूप में एक मुकाबला काफी अधिक समय और ऊर्जा लेता है।

    कोहली ने 50 ओवर के विश्व कप की तुलना करते हुए कहा कि एक दिन में लगभग ढाई टी20 मैच के बराबर क्रिकेट खेलने जैसा दबाव महसूस हो सकता है। ऐसे में पूरे टूर्नामेंट के दौरान ऊर्जा और प्रदर्शन का स्तर बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है। इसके अलावा 2027 विश्व कप विदेशी परिस्थितियों में खेला जाएगा, जिससे खिलाड़ियों के सामने अलग तरह की परिस्थितियां होंगी।

    कोहली ने साफ कहा कि उनके लिए यह भारत की ओर से आखिरी विश्व कप होगा और यही बात उन्हें अतिरिक्त प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि वह मैदान पर अपना सब कुछ छोड़ना चाहते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्व कप जीतना है और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जो भी करना पड़ेगा, वह उसके लिए तैयार हैं।

    विराट कोहली के साथ रोहित शर्मा को लेकर भी 2027 वर्ल्ड कप की चर्चा जारी है। रोहित ने कहा है कि उनके लिए किसी टूर्नामेंट के बाद यह मान लेना सही नहीं है कि काम पूरा हो गया। उनके अनुसार खेलते हुए हमेशा कुछ नया हासिल करने की उम्मीद रहती है।

    रोहित ने यह भी कहा कि आईसीसी टूर्नामेंट अलग तरह की चुनौती लेकर आते हैं। अलग-अलग टीमों, मैदानों और परिस्थितियों के कारण खिलाड़ियों को अपनी तैयारी और रणनीति में बदलाव करना पड़ता है। ऐसे में 2027 वर्ल्ड कप दोनों अनुभवी भारतीय बल्लेबाजों के वनडे सफर में महत्वपूर्ण पड़ाव हो सकता है।

  • विराट कोहली का बड़ा ऐलान, 2027 विश्व कप होगा आखिरी, बोले- ट्रॉफी के लिए सब कुछ झोंक दूंगा

    विराट कोहली का बड़ा ऐलान, 2027 विश्व कप होगा आखिरी, बोले- ट्रॉफी के लिए सब कुछ झोंक दूंगा


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने 2027 वनडे विश्व कप को लेकर अपने इरादे साफ कर दिए हैं। कोहली ने कहा है कि दक्षिण अफ्रीका में होने वाला 2027 आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप भारत के लिए उनका आखिरी विश्व कप होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस टूर्नामेंट को जीतने के लिए वह अपना सब कुछ मैदान पर झोंकने के लिए तैयार हैं।

    विराट कोहली और रोहित शर्मा अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक ही प्रारूप खेल रहे हैं और दोनों की नजरें 2027 वनडे विश्व कप पर टिकी हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ शुरू होने वाली वनडे सीरीज को भी विश्व कप की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अनुभवी खिलाड़ियों के लिए यह अगले बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ने का एक अहम चरण होगा।

    पहले वनडे से पहले बातचीत के दौरान कोहली ने 50 ओवर के विश्व कप की चुनौती और अपनी प्रेरणा पर बात की। उन्होंने कहा कि वनडे विश्व कप की तीव्रता किसी भी अन्य मुकाबले से अलग होती है। उनके मुताबिक अब विश्व कप में लगभग 10 मुकाबलों तक टी20 जैसी तीव्रता बनाए रखनी होती है, जबकि एक दिन में लंबे समय तक मैदान पर रहना पड़ता है।

    कोहली ने कहा कि विश्व कप में लगातार उच्च स्तर का प्रदर्शन करना आसान नहीं होता, खासकर तब जब मुकाबले विदेशी परिस्थितियों में खेले जा रहे हों। उनके अनुसार इस तरह का टूर्नामेंट खिलाड़ी से शारीरिक और मानसिक तौर पर बहुत कुछ मांगता है।

    विराट ने अपने भविष्य को लेकर भी स्पष्ट संकेत दिया। उन्होंने कहा कि 2027 विश्व कप भारत के लिए उनका आखिरी विश्व कप होगा और यही बात उनके लिए प्रेरणा का काम कर रही है। उनका लक्ष्य केवल टूर्नामेंट में हिस्सा लेना नहीं, बल्कि भारत को विश्व कप जिताना है। इसके लिए उन्होंने कहा कि वह हर संभव प्रयास करने के लिए तैयार हैं।

    विश्व कप में विराट कोहली का रिकॉर्ड भी बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने अब तक वनडे विश्व कप में 37 मुकाबले खेले हैं और 59.83 की औसत से 1,795 रन बनाए हैं। उनके नाम पांच शतक और 12 अर्धशतक हैं, जबकि विश्व कप में उनका सर्वोच्च स्कोर 117 रन है।

    पूरे वनडे करियर की बात करें तो कोहली ने 302 पारियों में 14,941 रन बनाए हैं। उनका बल्लेबाजी औसत 58.59 है। इस प्रारूप में उन्होंने 54 शतक और 79 अर्धशतक लगाए हैं तथा उनका सर्वोच्च स्कोर 183 रन है। उनका वनडे स्ट्राइक रेट 93.95 रहा है।

    टी20 विश्व कप में भी कोहली का प्रदर्शन शानदार रहा है। उन्होंने 35 मैचों में 58.73 की औसत से 1,292 रन बनाए हैं। उनके नाम 15 अर्धशतक हैं। वह 2014 और 2016 में दो बार टी20 विश्व कप के प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट भी रह चुके हैं।

    रोहित शर्मा ने भी 2027 विश्व कप को लेकर अपनी सोच सामने रखी। उन्होंने कहा कि वह अपने विश्व कप लक्ष्य को किसी ऐसे अधूरे काम के रूप में नहीं देखते जिसे पूरा करने के बाद सब कुछ खत्म हो जाए। उनके मुताबिक जब तक कोई खिलाड़ी खेल रहा है, तब तक उसके सामने कुछ नया हासिल करने की चुनौती बनी रहती है।

    रोहित ने कहा कि वह विश्व कप को लेकर उत्साहित हैं और आगे अपने लिए क्या है, इसे लेकर उत्सुक हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आईसीसी टूर्नामेंटों में अलग-अलग टीमों और मैदानों के खिलाफ खेलने के लिए तैयारी का तरीका बदलना पड़ता है। यही चुनौती खिलाड़ियों को बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है।

    अब भारत और वेस्टइंडीज के बीच वनडे सीरीज का पहला मुकाबला रविवार को खेला जाएगा। इस सीरीज के साथ भारतीय टीम की 2027 विश्व कप की तैयारियों का एक नया चरण शुरू होगा और विराट कोहली तथा रोहित शर्मा जैसे अनुभवी खिलाड़ियों पर भी सभी की नजरें रहेंगी।

  • रोहित-विराट के विश्व कप भविष्य पर संदीप पाटिल का बड़ा बयान, कहा- दोनों रहें या नहीं, भारत को नहीं होगी परेशानी

    रोहित-विराट के विश्व कप भविष्य पर संदीप पाटिल का बड़ा बयान, कहा- दोनों रहें या नहीं, भारत को नहीं होगी परेशानी

    नई दिल्ली । भारत के दो दिग्गज बल्लेबाज रोहित शर्मा और विराट कोहली के वनडे भविष्य को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। 2027 वनडे विश्व कप में अब करीब एक साल का समय बचा है और टूर्नामेंट शुरू होने तक रोहित 40 जबकि विराट 39 साल के हो जाएंगे। ऐसे में दोनों के विश्व कप में खेलने को लेकर सवाल बने हुए हैं। इसी बीच पूर्व भारतीय ऑलराउंडर संदीप पाटिल ने टीम की बेंच स्ट्रेंथ का जिक्र करते हुए बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि अगर भविष्य में रोहित और विराट टीम का हिस्सा नहीं रहते हैं, तो भी भारतीय टीम के सामने बड़ी समस्या नहीं होगी।

    ‘रोहित-विराट रहें या नहीं, कोई परेशानी नहीं’

    पाटिल ने कहा कि दोनों खिलाड़ियों का भविष्य कई चीजों पर निर्भर करेगा। इनमें उनकी खुद खेलने की इच्छा, फिटनेस और चयनकर्ताओं की रणनीति शामिल है। उन्होंने कहा, ‘यह इन दोनों खिलाड़ियों पर निर्भर करता है। क्या वे खेलना जारी रखना चाहेंगे? क्या वे अपनी फिटनेस बनाए रख पाएंगे? चयनकर्ताओं की रणनीति क्या है? क्या चयनकर्ता भविष्य को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रहे हैं? मौजूदा खिलाड़ियों के साथ हमें हमेशा यह भी देखना होगा कि अगर इन खिलाड़ियों को टीम से बाहर करने का समय आता है तो क्या हमारे पास उनकी जगह लेने के लिए कोई मजबूत खिलाड़ी है।’

    पाटिल ने आगे कहा, ‘भारतीय टीम की बेंच स्ट्रेंथ को देखते हुए, जिसके बारे में मैंने अभी बात की, मुझे नहीं लगता कि कोई समस्या होगी, चाहे विराट या रोहित टीम में हों या नहीं।’

    दोनों दिग्गजों को बताया ‘लीजेंड’

    हालांकि, पाटिल ने रोहित और विराट के योगदान की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि दोनों लंबे समय से भारतीय क्रिकेट का हिस्सा रहे हैं और उन्हें दिग्गजों के रूप में याद किया जाएगा। पाटिल ने कहा, ‘ये दोनों खिलाड़ी कई वर्षों से टीम के साथ हैं और उन्हें लीजेंड के तौर पर देखा जाएगा। रोहित शर्मा सफेद गेंद के क्रिकेट में शानदार खिलाड़ी रहे हैं। जहां तक विराट की बात है, उनके बारे में मैं जितना कहूं, उतना ही कम होगा।’

    वेस्टइंडीज सीरीज में दोनों टीम का हिस्सा

    फिलहाल रोहित और विराट के वनडे भविष्य पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। दोनों को वेस्टइंडीज के खिलाफ आगामी तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है। शुभमन गिल कप्तान और केएल राहुल उपकप्तान हैं। वनडे सीरीज 27 सितंबर से शुरू होगी। इस टीम चयन के साथ रोहित और विराट के पास 2027 विश्व कप की तैयारियों के बीच वनडे क्रिकेट में अपनी जगह बनाए रखने का एक और मौका होगा।

  • मोहम्मद शमी की टीम इंडिया में वापसी पर जहीर खान ने दिया बड़ा संकेत, 2027 वर्ल्ड कप को लेकर चयनकर्ताओं को समझाया नजरिया

    मोहम्मद शमी की टीम इंडिया में वापसी पर जहीर खान ने दिया बड़ा संकेत, 2027 वर्ल्ड कप को लेकर चयनकर्ताओं को समझाया नजरिया

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को राष्ट्रीय टीम की योजनाओं से बाहर रखे जाने को लेकर चर्चा लगातार बनी हुई है। घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन करने के बावजूद टीम में जगह नहीं मिलने के बीच पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जहीर खान ने शमी के समर्थन में अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि भारत को 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियों में शमी जैसे अनुभवी गेंदबाज के अनुभव का इस्तेमाल करना चाहिए।

    जहीर खान का मानना है कि शमी को बाहरी चर्चाओं और टीम में चयन से जुड़ी परिस्थितियों पर अधिक ध्यान देने के बजाय अपने प्रदर्शन पर फोकस बनाए रखना चाहिए। उनके अनुसार, किसी खिलाड़ी के नियंत्रण में सबसे महत्वपूर्ण चीज उसका प्रदर्शन होता है। इसलिए शमी को लगातार मैच खेलकर विकेट हासिल करने पर ध्यान देना चाहिए।

    जहीर ने कहा कि अगर शमी नियमित रूप से क्रिकेट खेल रहे हैं और अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, तो वह 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए उपलब्ध विकल्प हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि घरेलू क्रिकेट में मजबूत प्रदर्शन करने वाले अनुभवी खिलाड़ी को राष्ट्रीय टीम की भविष्य की योजनाओं में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    मोहम्मद शमी भारतीय क्रिकेट में लंबे समय से अपनी तेज गेंदबाजी और नई गेंद से विकेट लेने की क्षमता के लिए पहचाने जाते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके अनुभव को देखते हुए आगामी बड़े टूर्नामेंट के लिए उनकी संभावित भूमिका को लेकर चर्चा स्वाभाविक है। जहीर खान के बयान ने इसी बहस को और प्रमुखता दी है।

    जहीर के मुताबिक, यदि कोई अनुभवी खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, तो चयनकर्ताओं को उसके प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि टीम प्रबंधन को भविष्य की योजनाएं बनाते समय ऐसे खिलाड़ियों के अनुभव को ध्यान में रखना उपयोगी हो सकता है।

    2027 का वनडे वर्ल्ड कप दक्षिण अफ्रीका में आयोजित होना है। इस टूर्नामेंट को ध्यान में रखते हुए भारतीय टीम के पास अपनी गेंदबाजी इकाई तैयार करने के लिए पर्याप्त समय है। ऐसे में चयनकर्ताओं के सामने अनुभवी खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं के बीच सही संतुलन बनाने की चुनौती भी रहेगी।

    जहीर ने शमी को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें उन चीजों पर ध्यान देना चाहिए जो उनके नियंत्रण में हैं। चयन को लेकर होने वाली चर्चा खिलाड़ी के हाथ में नहीं होती, लेकिन मैदान पर प्रदर्शन और फिटनेस बनाए रखना उसके नियंत्रण में रहता है। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने से राष्ट्रीय टीम में वापसी की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

    शमी के लिए घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रीय चयन के दौरान मौजूदा फॉर्म और फिटनेस जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाता है। जहीर की राय में यदि शमी प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेल रहे हैं और विकेट हासिल कर रहे हैं, तो उनकी उपलब्धता को भारतीय टीम की योजनाओं में गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

    पूर्व तेज गेंदबाज की इस टिप्पणी से 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम की संभावित गेंदबाजी रणनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। भारत के सामने आने वाले वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय मुकाबले और आईसीसी प्रतियोगिताएं होंगी, जिनमें अनुभवी खिलाड़ियों की भूमिका और युवा गेंदबाजों को तैयार करने के बीच संतुलन अहम होगा।

    फिलहाल अंतिम फैसला चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन को करना है। शमी की वापसी उनकी फिटनेस, प्रदर्शन और टीम की जरूरतों समेत कई पहलुओं पर निर्भर करेगी। हालांकि जहीर खान की टिप्पणी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय क्रिकेट के अनुभवी खिलाड़ियों में से एक को 2027 वर्ल्ड कप की योजनाओं में शामिल किए जाने की संभावना पर चर्चा जारी है।

  • फुटबॉल इतिहास का स्वर्णिम अध्याय हुआ खत्म, फ्रेंको बारेसी के निधन पर दुनिया भर में शोक

    फुटबॉल इतिहास का स्वर्णिम अध्याय हुआ खत्म, फ्रेंको बारेसी के निधन पर दुनिया भर में शोक


    नई दिल्ली। विश्व फुटबॉल के इतिहास में जब भी महान डिफेंडरों का नाम लिया जाएगा तब फ्रेंको बारेसी का नाम हमेशा सबसे सम्मान के साथ लिया जाएगा। इटली के पूर्व कप्तान और एसी मिलान की पहचान बन चुके फ्रेंको बारेसी का 66 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों खिलाड़ियों और खेल विशेषज्ञों में शोक की लहर दौड़ गई। एसी मिलान ने आधिकारिक बयान जारी कर अपने सबसे महान खिलाड़ियों में शामिल बारेसी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी और कहा कि क्लब ने सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं बल्कि अपनी आत्मा को खो दिया है।

    फ्रेंको बारेसी का पूरा करियर समर्पण अनुशासन और वफादारी का प्रतीक रहा। ऐसे दौर में जब खिलाड़ी बेहतर अनुबंध और बड़ी रकम के लिए क्लब बदलते रहते हैं तब बारेसी ने अपने पूरे पेशेवर करियर में केवल एसी मिलान की जर्सी पहनी। उन्होंने 1974 में क्लब की युवा अकादमी से सफर शुरू किया और 1978 में सीनियर टीम में पदार्पण किया। इसके बाद लगभग दो दशकों तक उन्होंने एसी मिलान की रक्षा पंक्ति को मजबूती प्रदान की और क्लब को कई ऐतिहासिक सफलताएं दिलाईं।

    महज 22 वर्ष की उम्र में उन्हें टीम का कप्तान बना दिया गया था। कप्तान के रूप में उन्होंने अपने नेतृत्व कौशल से पूरी टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। एसी मिलान के लिए उन्होंने 719 मुकाबले खेले जो लंबे समय तक क्लब का रिकॉर्ड रहा। उनके सम्मान में क्लब ने उनकी प्रतिष्ठित नंबर 6 जर्सी को हमेशा के लिए रिटायर कर दिया जो किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है।

    फ्रेंको बारेसी ने डिफेंडर की भूमिका को नई पहचान दी। उनकी बेहतरीन पोजिशनिंग खेल को पढ़ने की क्षमता और शांत स्वभाव उन्हें दुनिया के बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता था। पाओलो माल्डिनी माउरो टैसोटी और एलेसांद्रो कोस्टाकुर्ता के साथ उन्होंने ऐसी रक्षापंक्ति बनाई जिसे फुटबॉल इतिहास की सबसे मजबूत डिफेंस लाइन में गिना जाता है। उनके शानदार प्रदर्शन की बदौलत एसी मिलान ने छह सीरी ए खिताब और तीन यूरोपीय कप जीतकर यूरोपीय फुटबॉल में अपना दबदबा कायम किया।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनका योगदान बेहद यादगार रहा। वे 1982 में विश्व कप जीतने वाली इटली की टीम का हिस्सा थे। बाद में उन्होंने राष्ट्रीय टीम की कप्तानी भी संभाली और 1994 फीफा विश्व कप में इटली को फाइनल तक पहुंचाया। हालांकि ब्राजील के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट में हार के कारण उनका दूसरा विश्व कप जीतने का सपना अधूरा रह गया लेकिन उनके प्रदर्शन की आज भी मिसाल दी जाती है।

    पिछले वर्ष उनके फेफड़े में गांठ मिलने के बाद सर्जरी हुई थी लेकिन इसके बावजूद उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी नहीं बनाई। वे लगातार एसी मिलान के मुकाबलों में दिखाई देते रहे और खेल से जुड़े आयोजनों में सक्रिय भागीदारी निभाते रहे। हाल ही में आयोजित विंटर ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में भी उन्होंने मशाल लेकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी।

    फ्रेंको बारेसी सिर्फ एक महान फुटबॉलर नहीं बल्कि अनुशासन समर्पण और खेल भावना की जीवंत मिसाल थे। उन्होंने यह साबित किया कि महान खिलाड़ी केवल ट्रॉफियों से नहीं बल्कि अपने चरित्र और मूल्यों से भी पहचाने जाते हैं। उनका जाना फुटबॉल जगत के लिए अपूरणीय क्षति है लेकिन उनकी उपलब्धियां और प्रेरणादायक विरासत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेंगी।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इंग्लैंड का धमाका: नॉर्वे को हराकर सेमीफाइनल में मारी एंट्री, जूड बेलिंगहैम ने दागे दो ऐतिहासिक गोल

    फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इंग्लैंड का धमाका: नॉर्वे को हराकर सेमीफाइनल में मारी एंट्री, जूड बेलिंगहैम ने दागे दो ऐतिहासिक गोल

    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के नॉकआउट चरण में फुटबॉल जगत का एक बड़ा उलटफेर और रोमांचक मुकाबला देखने को मिला है। स्टार मिडफील्डर जूड बेलिंगहैम के असाधारण और दमदार प्रदर्शन के दम पर इंग्लैंड की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने नॉर्वे को शिकस्त देकर फीफा विश्व कप के सेमीफाइनल में शान से प्रवेश कर लिया है। इस खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड की जीत के सबसे बड़े नायक जूड बेलिंगहैम रहे, जिन्होंने मैच के बेहद दबाव वाले क्षणों में दो बेहतरीन गोल दागकर अपनी टीम की जीत सुनिश्चित की। इस हार के साथ ही नॉर्वे का विश्व कप का सफर क्वार्टर फाइनल में ही समाप्त हो गया है।

    मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। नॉर्वे की टीम ने अपने मजबूत डिफेंस और आक्रामक विंगर्स के दम पर शुरुआती हाफ में इंग्लैंड के फॉरवर्ड लाइन को काफी परेशान किया। हालांकि, खेल के आगे बढ़ने के साथ ही इंग्लिश टीम ने मैच पर अपनी पकड़ मजबूत करना शुरू कर दी। मध्यक्रम में खेलते हुए जूड बेलिंगहैम ने न केवल नॉर्वे के आक्रमण को विफल किया, बल्कि इंग्लैंड के लिए लगातार गोल करने के बेहतरीन मौके भी बनाए। उनके इस आक्रामक खेल का नॉर्वे के पास कोई जवाब नहीं था।

    हाफ टाइम के बाद मैच का रोमांच चरम पर पहुंच गया, जब बेलिंगहैम ने विपक्षी टीम के डिफेंस को छकाते हुए पहला शानदार मैदानी गोल दागा और इंग्लैंड को बढ़त दिला दी। इसके कुछ ही समय बाद नॉर्वे ने भी पलटवार करने की कोशिश की, लेकिन बेलिंगहैम के रणनीतिक खेल और दूसरे निर्णायक गोल ने नॉर्वे की वापसी की उम्मीदों पर पूरी तरह से पानी फेर दिया। इस पूरे मुकाबले में बेलिंगहैम का फुटवर्क और मैदान पर उनकी सूझबूझ अद्भुत रही, जिसके लिए उन्हें मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी चुना गया।

    इंग्लैंड के फुटबॉल प्रशंसकों के लिए यह एक बेहद ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाला क्षण है, क्योंकि टीम लंबे समय बाद विश्व कप के इतने करीब पहुंची है। टीम के मुख्य कोच ने मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में जूड बेलिंगहैम की जमकर तारीफ की और कहा कि बेलिंगहैम ने न केवल अपनी व्यक्तिगत प्रतिभा का प्रदर्शन किया, बल्कि एक सच्चे लीडर की तरह पूरी टीम को एकजुट रखकर सेमीफाइनल का टिकट दिलाया। कतर विश्व कप की कड़वी यादों को पीछे छोड़ते हुए अब इंग्लिश टीम इस बार खिताब अपने नाम करने के लिए प्रबल दावेदार मानी जा रही है।

    दूसरी ओर, इस हार से नॉर्वे के खेमे में मायूसी छा गई है, लेकिन टूर्नामेंट में उनके जुझारू प्रदर्शन की हर तरफ सराहना हो रही है। अब सभी फुटबॉल प्रेमियों की नजरें आगामी सेमीफाइनल मुकाबलों पर टिकी हैं, जहां इंग्लैंड का सामना दुनिया की अन्य दिग्गज टीमों से होगा। खेल समीक्षकों का मानना है कि यदि जूड बेलिंगहैम का यह शानदार फॉर्म आगे भी जारी रहता है, तो इंग्लैंड को इस साल विश्व चैंपियन बनने से रोकना किसी भी टीम के लिए बेहद मुश्किल चुनौती साबित होने वाला है।

  • महिला क्रिकेट के एक स्वर्णिम युग का अंत: इंग्लैंड की विश्व विजेता कप्तान हीदर नाइट ने किया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान

    महिला क्रिकेट के एक स्वर्णिम युग का अंत: इंग्लैंड की विश्व विजेता कप्तान हीदर नाइट ने किया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान

    नई दिल्ली । महिला क्रिकेट जगत से एक बेहद भावुक और बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ इंग्लैंड की महान और दिग्गज क्रिकेटर हीदर नाइट ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। भारत के खिलाफ ऐतिहासिक लॉर्ड्स के मैदान पर खेला जा रहा महिला टेस्ट मैच उनके 16 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी मुकाबला साबित होने जा रहा है। उनके साथ ही इंग्लैंड की एक और अनुभवी खिलाड़ी टैमी ब्यूमोंट भी इस ऐतिहासिक टेस्ट मैच की समाप्ति के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को हमेशा के लिए अलविदा कह देंगी। इस तरह इंग्लैंड महिला क्रिकेट के एक बेहद सफल और स्वर्णिम युग का समापन हो रहा है।

    हीदर नाइट ने साल 2010 में इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम के लिए पदार्पण किया था और तब से लेकर अब तक वे टीम के मध्यक्रम की सबसे मजबूत रीढ़ बनी रहीं। उन्होंने अपने करियर में तीनों प्रारूपों को मिलाकर कुल 320 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले, जिसमें उन्होंने 7,994 रन बनाए। उनके नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 6 शानदार शतक और 42 अर्धशतक दर्ज हैं, जबकि अपनी उपयोगी गेंदबाजी के दम पर उन्होंने 84 विकेट भी चटकाए हैं। वह इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली महिला क्रिकेटर हैं। साल 2020 में उन्होंने टी20 विश्व कप में शतक जड़कर क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में शतक लगाने वाली इंग्लैंड की पहली महिला खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया था।

    नाइट के पूरे क्रिकेटिंग सफर का सबसे ऐतिहासिक और यादगार पल साल 2017 में आया था। उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए महिला वनडे विश्व कप के बेहद रोमांचक फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम का सपना तोड़ते हुए विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। उन्होंने साल 2016 में दिग्गज खिलाड़ी चार्लोट एडवर्ड्स के बाद टीम की कमान संभाली थी और साल 2025 तक कुल 199 मैचों में इंग्लैंड का नेतृत्व किया, जिसमें से टीम ने 134 मुकाबलों में जीत दर्ज की। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली एशेज सीरीज में पराजय के बाद उन्होंने कप्तानी छोड़ दी थी।

    अपने संन्यास की घोषणा करते हुए हीदर नाइट बेहद भावुक नजर आईं और उन्होंने कहा कि पिछले 16 वर्षों की यह यात्रा उनके लिए किसी सौभाग्य से कम नहीं रही है। उन्होंने इस सफर में मिले अनुभवों, यादों और ड्रेसिंग रूम के साथियों का आभार व्यक्त किया। पिछले कुछ वर्षों में नाइट को गंभीर चोटों का भी सामना करना पड़ा, जिसमें साल 2024 के टी20 विश्व कप के दौरान पिंडली की चोट और साल 2025 में हैमस्ट्रिंग टेंडन की गंभीर चोट शामिल थी। इन बाधाओं के बावजूद उन्होंने शानदार वापसी की और हालिया टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 58 रनों की जुझारू पारी खेलकर अपनी टीम को संकट से निकाला था।

    इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) की मैनेजिंग डायरेक्टर क्लेयर कॉनर और चेयरमैन रिचर्ड थॉम्पसन ने हीदर नाइट के योगदान को असाधारण बताते हुए उनकी प्रतिबद्धता और नेतृत्व क्षमता की जमकर सराहना की है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद हीदर नाइट अब खेल प्रशासनिक भूमिका में कदम रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्हें द हंड्रेड टूर्नामेंट की प्रसिद्ध टीम ‘लंदन स्पिरिट’ का नया जनरल मैनेजर नियुक्त किया गया है, जिसकी जिम्मेदारी वे जुलाई के अंत में शुरू होने वाले नए सीजन से संभालेंगी।

  • फिलाडेल्फिया में फ्रांस का जलवा एम्बाप्पे के दो गोल से नॉकआउट में एंट्री

    फिलाडेल्फिया में फ्रांस का जलवा एम्बाप्पे के दो गोल से नॉकआउट में एंट्री


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस ने एक बार फिर अपना दमखम दिखाते हुए इराक को 3 0 से हराकर नॉकआउट राउंड में जगह पक्की कर ली। फिलाडेल्फिया में खेले गए इस मुकाबले में बारिश और खराब मौसम भी खेल का रोमांच कम नहीं कर सके और पूरे मैच में फ्रांस का दबदबा बना रहा। इस जीत के सबसे बड़े हीरो रहे Kylian Mbappé जिन्होंने दो गोल दागकर टीम को आसान जीत दिलाई।

    मैच की शुरुआत से ही फ्रांस ने आक्रामक खेल दिखाया। एम्बाप्पे ने 14वें मिनट में पहला गोल कर टीम को बढ़त दिला दी। इसके बाद इराक की टीम संभलने की कोशिश करती रही लेकिन फ्रांस का दबाव लगातार बढ़ता गया। दूसरे हाफ में 54वें मिनट में एम्बाप्पे ने एक और गोल कर स्कोर 2 0 कर दिया। यह गोल इराकी डिफेंडर की गलती का फायदा उठाकर किया गया, जिसमें एम्बाप्पे ने अपनी तेज रफ्तार और सटीक फिनिशिंग का बेहतरीन प्रदर्शन किया।

    इसके बाद उस्मान डेम्बेले ने तीसरा गोल कर फ्रांस की जीत पर मुहर लगा दी। इस जीत के साथ फ्रांस ने न केवल नॉकआउट राउंड में जगह बनाई बल्कि यह भी साबित कर दिया कि वह इस टूर्नामेंट की सबसे मजबूत दावेदार टीमों में शामिल है।

    यह मुकाबला मौसम की वजह से भी चर्चा में रहा। पहले हाफ के बाद तेज बारिश और तूफान की चेतावनी के चलते मैच को करीब दो घंटे तक रोकना पड़ा। मैदान पर पानी भर जाने के कारण खेल दोबारा शुरू कराना चुनौतीपूर्ण रहा लेकिन ग्राउंड स्टाफ की मेहनत के बाद मैच फिर से शुरू हुआ और फ्रांस ने अपनी लय बनाए रखी।

    इस मुकाबले में एम्बाप्पे के लिए यह और भी खास रहा क्योंकि यह उनका 100वां अंतरराष्ट्रीय मैच था। अपने करियर के इस अहम पड़ाव पर उन्होंने दो गोल कर इसे यादगार बना दिया। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने विश्व कप में अपने गोलों की संख्या 16 तक पहुंचा दी और कई दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया।

    एम्बाप्पे ने इस उपलब्धि के साथ जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोज की बराबरी कर ली और ब्राजील के दिग्गज रोनाल्डो को पीछे छोड़ दिया। अब उनसे आगे केवल अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी हैं जिनके नाम 18 विश्व कप गोल दर्ज हैं।

    इराक की टीम के लिए यह मैच निराशाजनक रहा। टीम के प्रमुख स्ट्राइकर अयमेन हुसैन चोट के कारण मैदान छोड़ने को मजबूर हुए जिससे टीम की आक्रामक क्षमता कमजोर पड़ गई। इराक के लिए यह विश्व कप में सिर्फ दूसरा ही मौका था और इस हार के बाद उनका आगे का सफर काफी मुश्किल हो गया है।

    दूसरी ओर ग्रुप I से नॉर्वे ने भी नॉकआउट में जगह बना ली है। इस ग्रुप में मुकाबला बेहद रोमांचक रहा जिसमें नॉर्वे ने सेनेगल को 3 2 से हराया। नॉर्वे की जीत में एर्लिंग हालैंड ने दो गोल दागे जबकि मार्कस पेडरसन ने एक गोल किया। सेनेगल की ओर से इस्माइला सार ने दोनों गोल किए।

    इस तरह फ्रांस और नॉर्वे दोनों ने नॉकआउट में प्रवेश कर लिया है और अब आगे के मुकाबलों में खिताब की दौड़ और भी दिलचस्प हो गई है।