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  • मिडिल ईस्ट से यूक्रेन तक बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दांव नेतन्याहू और जेलेंस्की संग बंद कमरे में हुई अहम वार्ता

    मिडिल ईस्ट से यूक्रेन तक बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दांव नेतन्याहू और जेलेंस्की संग बंद कमरे में हुई अहम वार्ता


    नई दिल्ली । दुनिया इस समय एक साथ कई बड़े भू राजनीतिक संकटों का सामना कर रही है। एक ओर मध्य पूर्व में इजरायल और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है तो दूसरी ओर रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने वैश्विक सुरक्षा को नई चुनौती दी है। ऐसे माहौल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से अलग अलग बंद कमरे में मुलाकात कर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इन बैठकों को अमेरिका की भविष्य की रणनीति तय करने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार दोनों बैठकें पूरी तरह बंद कमरे में हुईं और उनकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। हालांकि व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इन्हें सकारात्मक और रचनात्मक बताया। माना जा रहा है कि इन चर्चाओं में अमेरिका की सुरक्षा नीति सहयोगी देशों के साथ रणनीतिक तालमेल और युद्ध प्रभावित क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से विचार किया गया।

    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुई बैठक में ईरान सबसे प्रमुख मुद्दा रहा। हाल के महीनों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर अमेरिका और इजरायल लगातार चिंतित रहे हैं। बैठक से पहले ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक बयान में कहा था कि उन्हें इजरायल की ओर से किसी विशेष ब्रीफिंग की आवश्यकता नहीं है और उन्होंने संकेत दिया था कि नेतन्याहू चाहते हैं कि अमेरिका इस पूरे मामले में सक्रिय भूमिका निभाता रहे। हालांकि बाद में ओवल ऑफिस से जारी तस्वीरों में दोनों नेता बेहद सकारात्मक माहौल में नजर आए। बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ भी मौजूद रहे।

    सूत्रों के अनुसार इस दौरान लेबनान सीमा पर बढ़ते तनाव हिज्बुल्लाह की गतिविधियों और अब्राहम समझौते के भविष्य जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। इन मुद्दों को मध्य पूर्व की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के साथ हुई बैठक का मुख्य फोकस रूस के खिलाफ जारी युद्ध और यूक्रेन की रक्षा जरूरतें रहीं। जेलेंस्की ने ट्रंप के साथ हुई बातचीत को रचनात्मक बताते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। खास तौर पर पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों के लाइसेंस और एयर डिफेंस सहयोग को लेकर विचार विमर्श हुआ। रूस की ओर से लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच यूक्रेन इन रक्षा प्रणालियों को अपनी सुरक्षा के लिए बेहद अहम मानता है।

    बैठक में ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और रूस के साथ संभावित शांति प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। इसके बाद जेलेंस्की अमेरिकी सांसदों से मुलाकात के लिए कैपिटल हिल पहुंचे जहां यूक्रेन को भविष्य में सैन्य सहायता जारी रखने पर भी विचार किया गया।

    इन बैठकों से पहले ट्रंप नेतन्याहू और जेलेंस्की ने दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार में भी हिस्सा लिया। ग्राहम अमेरिका में इजरायल और यूक्रेन दोनों के प्रबल समर्थक माने जाते थे और उनकी विदेश नीति पर गहरी पकड़ थी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में जब दुनिया कई मोर्चों पर अस्थिरता का सामना कर रही है तब ट्रंप की ये कूटनीतिक बैठकें आने वाले दिनों में अमेरिका की विदेश नीति और वैश्विक शक्ति संतुलन को नई दिशा दे सकती हैं। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि इन अहम बैठकों के बाद अमेरिका कौन से रणनीतिक फैसले लेता है।

  • मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव ट्रंप का बड़ा दावा ईरान के पास समझौते के अलावा कोई विकल्प नहीं अमेरिका पूरी तरह तैयार

    मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव ट्रंप का बड़ा दावा ईरान के पास समझौते के अलावा कोई विकल्प नहीं अमेरिका पूरी तरह तैयार


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव गहराता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान के पास समझौते के अलावा अब कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है लेकिन उनकी पहली प्राथमिकता अब भी कूटनीतिक समाधान और बातचीत ही है। ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर मध्य पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक राजनीति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

    व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और वाशिंगटन हर परिस्थिति के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो मौजूदा सैन्य अभियान को और तेज किया जा सकता है लेकिन अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने पर सहमत हो जाता है तो बातचीत के जरिए समाधान निकालना सबसे बेहतर रास्ता होगा। उनके मुताबिक अमेरिका की नीति स्पष्ट है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे।

    ट्रंप ने कहा कि फिलहाल दो रास्ते खुले हैं। पहला रास्ता सैन्य कार्रवाई का है जिसमें अमेरिका अपनी ताकत का इस्तेमाल कर सकता है जबकि दूसरा रास्ता बातचीत और समझौते का है। उन्होंने दावा किया कि ईरान पहले की तुलना में अब ज्यादा गंभीरता से वार्ता कर रहा है हालांकि उन्होंने यह भी माना कि किसी अंतिम समझौते की अभी कोई गारंटी नहीं है। उनके अनुसार हालात लगातार बदल रहे हैं और आने वाले समय में तस्वीर और साफ होगी।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि यदि ईरान ने परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में कोई कदम बढ़ाया तो अमेरिका पहले से कहीं अधिक कड़ी कार्रवाई करेगा। उन्होंने इसे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। ट्रंप का कहना था कि अमेरिका इस मामले में किसी भी तरह का जोखिम उठाने के लिए तैयार नहीं है।

    उन्होंने जानकारी दी कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस विदेश मंत्री मार्को रुबियो और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी ईरानी प्रतिनिधियों के साथ लगातार संपर्क में हैं। ट्रंप के मुताबिक कूटनीतिक प्रयास जारी हैं और अमेरिका बातचीत के सभी विकल्प खुले रखना चाहता है। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि यदि वार्ता विफल होती है तो सैन्य विकल्प पूरी तरह तैयार रहेगा।

    अपने संबोधन में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका की पिछली सैन्य कार्रवाइयों से ईरान की सैन्य क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के कई अहम सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया जिससे उसकी ताकत काफी कमजोर हुई है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका के दबाव अभियान ने पूरे क्षेत्र का रणनीतिक संतुलन बदल दिया है और अब ईरान पहले जैसी स्थिति में नहीं है।

    रूस और चीन की संभावित भूमिका पर पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों ने फिलहाल किसी बड़े स्तर पर ईरान के समर्थन में हस्तक्षेप नहीं किया है। उन्होंने दावा किया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वे इस विवाद में सीधे तौर पर शामिल नहीं होंगे। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि ईरान के इन दोनों देशों के साथ लंबे समय से संबंध रहे हैं।

    ट्रंप ने अपने पिछले सैन्य अभियानों का बचाव करते हुए कहा कि इन्हीं कदमों की वजह से ईरान परमाणु हथियार हासिल करने में सफल नहीं हो पाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि अमेरिका ने समय रहते कार्रवाई नहीं की होती तो क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति कहीं अधिक गंभीर हो सकती थी। उनके अनुसार अमेरिका का उद्देश्य युद्ध नहीं बल्कि स्थायी शांति और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना है।

    दूसरी ओर ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसका मकसद परमाणु हथियार बनाना नहीं है। इसके बावजूद अमेरिका और कई पश्चिमी देश लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताते रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच जारी बातचीत और संभावित समझौता पूरी दुनिया की नजरों का केंद्र बना रहेगा।

  • ईरान का ट्रंप को साफ संदेश: ‘ना डरते हैं, ना किसी का हुक्म मानेंगे’

    ईरान का ट्रंप को साफ संदेश: ‘ना डरते हैं, ना किसी का हुक्म मानेंगे’


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, और फिलहाल युद्ध के खतरे को पूरी तरह टाला नहीं जा सका है। बातचीत की कोशिशों के बीच रविवार को ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना रुख फिर स्पष्ट कर दिया। ईरान ने कहा कि वह अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को किसी भी दबाव के बावजूद नहीं छोड़ेगा और किसी अन्य देश के आदेश में काम नहीं करेगा।

    तेहरान में एक सार्वजनिक मंच से बोलते हुए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान अपनी परमाणु नीति किसी से डरकर नहीं बदलेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और दर्शकों के सामने कहा कि यूरेनियम संवर्धन उनके लिए गैर-समझौते वाला मुद्दा है।अराघची ने कहा, “हम संवर्धन क्यों करते हैं और इसे छोड़ने से इंकार क्यों करते हैं, भले ही युद्ध का खतरा हो? क्योंकि किसी को भी हम पर हुक्म चलाने का अधिकार नहीं है।”

    अमेरिका पर भरोसा नहीं

    ईरानी विदेश मंत्री ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को दबाव बनाने की कमजोर रणनीति बताया। अराघची ने कहा, “क्षेत्र में उनकी सैन्य तैनाती हमें डराती नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान को अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। अराघची ने बताया कि कुछ संकेत अमेरिकी गंभीरता दिखाते हैं, जबकि कई संकेत इसे झूठा साबित करते हैं। उनके मुताबिक, ईरान के खिलाफ जारी प्रतिबंध और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां अमेरिका की गंभीरता पर सवाल खड़े करती हैं।

    समझौते के लिए ईरान की शर्तें

    अराघची ने कहा कि ईरान सभी संकेतों का मूल्यांकन करेगा। उन्होंने उल्लेख किया कि अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत समझौते की राह खोल सकती है, लेकिन केवल तभी जब अमेरिकी मांगें वास्तविक और न्यायसंगत हों। उन्होंने कहा, “अगर अमेरिका का दृष्टिकोण सम्मानजनक और आपसी हितों पर आधारित होगा, तभी समझौता संभव है।”

  • अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी में खौफनाक गोलीबारी, फाइनल एग्ज़ाम के बीच 2 की मौत; 9 छात्र घायल 📝 शॉर्ट डिस्क्रिप्शन

    अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी में खौफनाक गोलीबारी, फाइनल एग्ज़ाम के बीच 2 की मौत; 9 छात्र घायल 📝 शॉर्ट डिस्क्रिप्शन


    नई दिल्ली /अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी में फाइनल परीक्षाओं के दौरान हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई जबकि नौ छात्र घायल हुए हैं। शूटर की तलाश जारी है।अमेरिका के रोड आइलैंड राज्य स्थित ब्राउन यूनिवर्सिटी शनिवार को उस समय दहशत और खून-खराबे का गवाह बन गई जब फाइनल परीक्षाओं के दौरान एक अज्ञात हमलावर ने कैंपस के भीतर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। इस भयावह घटना में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई जबकि नौ अन्य छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए।घटना के बाद पूरे आइवी लीग कैंपस में अफरातफरी मच गई। सायरनों की आवाज लॉकडाउन अलर्ट और चीख-पुकार के बीच छात्र-छात्राएं जान बचाने के लिए इमारतों में छिपते नजर आए। पुलिस और आपातकालीन टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और पूरे इलाके को घेर लिया गया।

    फाइनल परीक्षा के दौरान बरसी गोलियां
    यह गोलीबारी शनिवार दोपहर को बारुस एंड होली इंजीनियरिंग बिल्डिंग में हुई जहां उस समय इंजीनियरिंग डिजाइन की परीक्षाएं चल रही थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार काले कपड़े और मास्क पहने एक व्यक्ति ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। हमलावर के हाथ में हैंडगन थी और उसने पहली मंजिल की एक कक्षा में घुसकर गोलियां चलाईं।यूनिवर्सिटी की अध्यक्ष क्रिस्टीना पैक्सन ने पुष्टि की कि गोली लगने से घायल हुए सभी लोग छात्र थे। शुरुआती जानकारी में 10 छात्रों के घायल होने की बात कही गई थी जिनमें से बाद में दो की मौत हो गई।


    आरोपी अब भी फरार

    प्रोविडेंस पुलिस के उप प्रमुख टिमोथी ओ’हारा के मुताबिक संदिग्ध एक पुरुष था जिसकी उम्र करीब 30 साल बताई जा रही है। उसे आखिरी बार इंजीनियरिंग इमारत से निकलते देखा गया लेकिन उसका चेहरा साफ दिखाई नहीं दे रहा था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फाइनल परीक्षा के दौरान जब कई कमरों में बैज एक्सेस जरूरी था तब शूटर अंदर कैसे घुसा। शुरुआत में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बताया था कि संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है लेकिन बाद में इस सूचना को गलत बताया गया। मेयर ब्रेट स्माइली ने कहा कि एक व्यक्ति को पूछताछ के लिए रोका गया था लेकिन जांच में उसका घटना से कोई संबंध नहीं पाया गया।

    कैंपस सील शेल्टर-इन-प्लेस आदेश
    घटना के तुरंत बाद पूरे कैंपस और आसपास के रिहायशी इलाकों में शेल्टर-इन-प्लेस आदेश जारी कर दिया गया। छात्रों और स्थानीय निवासियों को घरों के अंदर रहने की सलाह दी गई। आमतौर पर वीकेंड पर गुलजार रहने वाली सड़कें पूरी तरह सुनसान नजर आईं। करीब पांच घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद टैक्टिकल गियर में तैनात पुलिसकर्मियों ने छात्रों को अलग-अलग इमारतों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।

    घायलों की हालत
    रॉड आइलैंड अस्पताल की प्रवक्ता केली ब्रेनन ने बताया कि सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से छह छात्रों को आईसीयू में रखना पड़ा हालांकि उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। एक घायल की स्थिति गंभीर बताई जा रही है।

    छात्रों ने बयां किया खौफ
    केमिकल इंजीनियरिंग की छात्रा एम्मा फेरारो ने बताया कि वह लॉबी में प्रोजेक्ट पर काम कर रही थीं तभी उन्हें गोलियों की आवाज सुनाई दी। उन्हें जब एहसास हुआ कि यह फायरिंग है तो वे जान बचाकर पास की इमारत में भागीं और कई घंटों तक छिपी रहीं।एक अन्य छात्र एलेक्स ब्रूस ने कहाजब सायरन बजे और एक्टिव शूटर का मैसेज आया तो मैं कांप गया। यह पल जिंदगी भर नहीं भूलूंगा। इस हमले ने न केवल ब्राउन यूनिवर्सिटी बल्कि पूरे अमेरिका में कैंपस सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।