Tag: WTC 2025-27

  • गॉल की जीत ने बढ़ाई उम्मीद लेकिन खतरा बरकरार, 8 टेस्ट में एक भी बड़ी चूक भारत का बिगाड़ सकती है पूरा खेल

    गॉल की जीत ने बढ़ाई उम्मीद लेकिन खतरा बरकरार, 8 टेस्ट में एक भी बड़ी चूक भारत का बिगाड़ सकती है पूरा खेल

    नई दिल्ली । श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में 165 रनों की शानदार जीत दर्ज कर टीम इंडिया ने दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त जरूर बना ली है लेकिन वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप 2025-27 के फाइनल की दौड़ में भारत की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। गॉल में मिली जीत से भारतीय टीम के अंक प्रतिशत में सुधार हुआ है और फाइनल की उम्मीदें भी मजबूत हुई हैं लेकिन अंक तालिका में टीम अभी पांचवें स्थान पर ही बनी हुई है। ऐसे में अब बचे हुए आठ टेस्ट मुकाबले भारत के लिए बेहद अहम हो गए हैं और फाइनल की रेस में बने रहने के लिए टीम को लगभग हर मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा।

    गॉल टेस्ट से पहले भारत ने नौ मुकाबलों में चार जीत दर्ज की थीं और उसका पॉइंट्स प्रतिशत 48.15 था। इस जीत के बाद भारत का पीसीटी बढ़कर 53.33 हो गया है। हालांकि इस सुधार के बावजूद भारतीय टीम अभी बांग्लादेश से पीछे है। बांग्लादेश ने पांच टेस्ट में तीन जीत के साथ 66.67 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं और वह चौथे स्थान पर है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 77.78 प्रतिशत के साथ तालिका में सबसे ऊपर है। दक्षिण अफ्रीका 75 प्रतिशत और न्यूजीलैंड 72.22 प्रतिशत के साथ भारत से आगे हैं। इससे साफ है कि भारत को सिर्फ अपने प्रदर्शन पर निर्भर रहने से काम नहीं चलेगा बल्कि दूसरी टीमों के नतीजे भी फाइनल की तस्वीर तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

    भारत के पास अब इस चक्र में आठ टेस्ट मैच बाकी हैं। अगर टीम इन सभी मुकाबलों में जीत दर्ज करती है तो उसका पॉइंट्स प्रतिशत करीब 74.07 तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में भारत की फाइनल में पहुंचने की संभावना बेहद मजबूत हो जाएगी। लेकिन समस्या यह है कि इन आठ मुकाबलों में एक भी हार भारत के समीकरण को काफी प्रभावित कर सकती है। एक हार की स्थिति में पीसीटी लगभग 68.52 तक गिर सकता है जबकि दो हार होने पर यह करीब 62.96 और तीन हार की स्थिति में लगभग 57.41 तक पहुंच जाएगा। यानी भारत के लिए अब हर टेस्ट का महत्व कई गुना बढ़ गया है।

    श्रीलंका के खिलाफ सीरीज का दूसरा और आखिरी मुकाबला 23 अगस्त से कोलंबो के एसएससी मैदान पर खेला जाएगा। भारत की कोशिश इस मुकाबले को जीतकर सीरीज 2-0 से अपने नाम करने की होगी। इसके बाद टीम इंडिया के सामने न्यूजीलैंड की चुनौती होगी जहां उसे दो टेस्ट मैच खेलने हैं। न्यूजीलैंड की परिस्थितियां भारतीय टीम के लिए आसान नहीं होंगी और हाल के वर्षों में कीवी टीम ने भारत को टेस्ट क्रिकेट में कड़ी चुनौती दी है।

    इसके बाद भारत की अगली बड़ी परीक्षा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी होगी। ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ घरेलू मैदान पर होने वाली यह सीरीज WTC फाइनल की दौड़ में निर्णायक साबित हो सकती है। भारत अगर ऑस्ट्रेलिया को 4-1 या 3-1 से हराने में सफल रहता है तो उसके फाइनल की राह काफी मजबूत हो जाएगी। इसके उलट सीरीज में ज्यादा नुकसान भारत के समीकरण को मुश्किल बना सकता है।

    WTC में जीत के लिए 12 अंक मिलते हैं जबकि ड्रॉ होने पर चार अंक हासिल होते हैं और हार की स्थिति में कोई अंक नहीं मिलता। यही वजह है कि भारत के लिए अब हर टेस्ट में जीत की अहमियत बढ़ गई है। गॉल की जीत ने टीम इंडिया को राहत जरूर दी है लेकिन फाइनल का टिकट अभी दूर है। आने वाले आठ टेस्ट मुकाबले अब भारत के लिए सिर्फ सीरीज जीतने की लड़ाई नहीं बल्कि WTC फाइनल में जगह बनाने की निर्णायक जंग बनने वाले हैं।

  • WTC फाइनल की रेस में भारत की अग्निपरीक्षा, अब हर मैच जीतना जरूरी; एक गलती बिगाड़ देगी पूरा गणित

    WTC फाइनल की रेस में भारत की अग्निपरीक्षा, अब हर मैच जीतना जरूरी; एक गलती बिगाड़ देगी पूरा गणित


    नई दिल्ली। वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप 2025-27 में भारतीय क्रिकेट टीम की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। शुरुआती मुकाबलों के बाद टीम इंडिया अंक प्रतिशत के मामले में पांचवें स्थान पर पहुंच गई है और अब उसके सामने फाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए बेहद कठिन चुनौती है। भारत ने अब तक 9 टेस्ट मैच खेले हैं जिसमें उसे 4 मुकाबलों में जीत मिली है और उसका पॉइंट्स परसेंटेज यानी पीसीटी 48.15 है। मौजूदा स्थिति में भारत बांग्लादेश से भी पीछे है। ऐसे में अब टीम इंडिया के लिए WTC का हर मुकाबला लगभग करो या मरो जैसा हो गया है।

    भारतीय टीम के पास इस चक्र में अभी 9 टेस्ट मैच बाकी हैं। अगर टीम अपने सभी बचे हुए मुकाबले जीतने में सफल रहती है तो उसका पीसीटी करीब 74.07 तक पहुंच सकता है। यह आंकड़ा उसे फाइनल की दौड़ में बेहद मजबूत स्थिति में पहुंचा सकता है। लेकिन समस्या यह है कि आने वाले सभी मुकाबले आसान नहीं होने वाले हैं। भारत को पहले श्रीलंका का दौरा करना है जहां दो टेस्ट मैच खेले जाएंगे। श्रीलंका की परिस्थितियों में स्पिन गेंदबाजी हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है और गॉल की पिच पर भारतीय बल्लेबाजों की परीक्षा होना तय माना जा रहा है।

    श्रीलंका के बाद भारतीय टीम न्यूजीलैंड का दौरा करेगी। वहां उसे दो टेस्ट मैच खेलने हैं। न्यूजीलैंड की परिस्थितियां भी भारतीय टीम के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। तेज गेंदबाजी के अनुकूल परिस्थितियों में भारतीय बल्लेबाजों को नई गेंद का सामना करना होगा। इसके बाद भारत में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जाएगी। ऑस्ट्रेलिया मौजूदा WTC चक्र में मजबूत टीमों में शामिल है और उसके खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज भारत के लिए सबसे बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है।

    भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा यह है कि अब एक भी हार उसके अंक प्रतिशत को काफी नीचे ला सकती है। अगर टीम अपने बचे हुए नौ मैचों में से एक मुकाबला हार जाती है तो उसका पीसीटी करीब 68.5 तक गिर सकता है। दो हार होने पर यह आंकड़ा करीब 62.9 और तीन हार की स्थिति में लगभग 57.41 तक पहुंच सकता है। ऐसे में सिर्फ एक मुकाबले का नतीजा भी फाइनल की रेस में भारत की स्थिति को काफी प्रभावित कर सकता है।

    मौजूदा अंक तालिका पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलिया 87.50 पीसीटी के साथ शीर्ष पर है। दक्षिण अफ्रीका 75 पीसीटी के साथ दूसरे जबकि न्यूजीलैंड 72.22 के साथ तीसरे स्थान पर है। बांग्लादेश 58.33 पीसीटी के साथ भारत से आगे है। इसका मतलब साफ है कि भारत को अपने बचे हुए मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करने के साथ साथ दूसरी टीमों के नतीजों पर भी नजर रखनी होगी। अगर शीर्ष टीमों में से कोई लगातार अंक गंवाती है तो भारत को उसका फायदा मिल सकता है।

    WTC में जीत के लिए 12 अंक मिलते हैं जबकि ड्रॉ होने पर दोनों टीमों को 4-4 अंक दिए जाते हैं और हारने वाली टीम को कोई अंक नहीं मिलता। अंक प्रतिशत की यही व्यवस्था टीमों की अंतिम स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए भारत के लिए अब ड्रॉ भी उतना फायदेमंद नहीं होगा जितनी लगातार जीत होगी।

    शुभमन गिल की अगुआई वाली भारतीय टीम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती जीत की लय कायम रखने की है। श्रीलंका में दो टेस्ट से लेकर न्यूजीलैंड और फिर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मुकाबलों तक टीम को लगातार दबाव में खेलना होगा। भारतीय बल्लेबाजों को स्पिन और तेज गेंदबाजी दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार रहना होगा जबकि गेंदबाजों को भी हर मैच में निर्णायक प्रदर्शन करना होगा।

    कुल मिलाकर WTC 2025-27 में भारत के लिए तस्वीर बिल्कुल साफ है। फाइनल में पहुंचने का रास्ता अभी बंद नहीं हुआ है लेकिन गलती की गुंजाइश बेहद कम बची है। भारत अगर अपने बचे हुए नौ टेस्ट में लगातार जीत दर्ज करता है तो फाइनल की उम्मीद मजबूत रहेगी लेकिन हार की संख्या बढ़ते ही समीकरण मुश्किल होता जाएगा। अब टीम इंडिया के सामने हर टेस्ट सिर्फ एक मुकाबला नहीं बल्कि WTC फाइनल की ओर बढ़ने का एक बड़ा कदम होगा।