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  • श्री बाबा बूढ़ा अमरनाथ यात्रा का आज से शुभारंभ, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भगवती नगर से दिखाएंगे हरी झंडी

    श्री बाबा बूढ़ा अमरनाथ यात्रा का आज से शुभारंभ, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भगवती नगर से दिखाएंगे हरी झंडी

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर में 21वीं श्री बाबा बूढ़ा अमरनाथ यात्रा का सोमवार से विधिवत शुभारंभ हो रहा है। केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सुबह जम्मू स्थित भगवती नगर यात्री निवास से श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को पुंछ में स्थित पवित्र धाम के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह धार्मिक यात्रा 28 अगस्त तक चलेगी, जिसके लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।

    यात्रा की पूर्व संध्या पर रविवार को जम्मू के अभिनव थिएटर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्कार भारती तथा कला, भाषा एवं संस्कृति अकादमी की ओर से आयोजित इस भजन संध्या में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने औपचारिक रूप से यात्रा समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर पूरा परिसर श्रद्धालुओं और कलाकारों के ‘बम बम भोले’ के जयकारों से गूंज उठा।

    उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि भगवान शिव सत्य, एकता और आध्यात्मिक शक्ति के शाश्वत प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि बूढ़ा अमरनाथ यात्रा पर निकलने वाले श्रद्धालुओं का प्रत्येक कदम समाज को निरंतर उन्नति और सद्भाव की दिशा में ले जाता है। बाबा के दर्शन से प्राप्त होने वाली आध्यात्मिक ऊर्जा समाज में आपसी भाईचारे और राष्ट्रीय एकता को और अधिक मजबूती प्रदान करती है।

    उपराज्यपाल ने सभी नागरिकों से धर्म और करुणा के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि प्रशासन ने यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ठहरने, भोजन, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा के कड़े और पुख्ता इंतजाम किए हैं। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुगम आवाजाही के लिए संपूर्ण यात्रा मार्ग और पुंछ क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

    भजन संध्या के दौरान गायिका रितिमा और उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत भक्ति भजनों ने समां बांध दिया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में संत शिरोमणि दिनेश भारती, विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता शक्तिदास शर्मा, सतपाल शर्मा, जम्मू के मंडलायुक्त रमेश कुमार सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा में भाग लेने के लिए जम्मू पहुंचे हैं।

  • भारतीय रेलवे के सहयोग से बनी 'यात्रा' ने 15 एपिसोड में देश की विविध संस्कृति और समाज को दिखाया

    भारतीय रेलवे के सहयोग से बनी 'यात्रा' ने 15 एपिसोड में देश की विविध संस्कृति और समाज को दिखाया

    नई दिल्ली । भारतीय टेलीविजन के स्वर्णिम दौर में दूरदर्शन ने ऐसे कई धारावाहिक दर्शकों को दिए, जिन्होंने केवल मनोरंजन ही नहीं किया बल्कि समाज को नई सोच और संवेदनशील दृष्टिकोण भी प्रदान किया। इन्हीं यादगार कार्यक्रमों में वर्ष 1986 में प्रसारित धारावाहिक ‘यात्रा’ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। प्रसिद्ध फिल्मकार श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी इस श्रृंखला ने भारतीय रेल के लंबे सफर को आधार बनाकर देश के अलग-अलग हिस्सों, संस्कृतियों और आम लोगों की जिंदगी से जुड़ी कहानियों को दर्शकों तक पहुंचाया। करीब चार दशक बाद भी यह धारावाहिक भारतीय टेलीविजन के सबसे अलग और प्रयोगधर्मी कार्यक्रमों में गिना जाता है।

    ‘यात्रा’ कुल 15 एपिसोड की श्रृंखला थी, जिसमें प्रत्येक कड़ी किसी न किसी रेल यात्रा के दौरान मिलने वाले यात्रियों और उनकी परिस्थितियों पर आधारित थी। ट्रेन यहां केवल परिवहन का माध्यम नहीं थी, बल्कि अलग-अलग सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोगों को जोड़ने वाली एक जीवंत कड़ी के रूप में दिखाई गई। प्रत्येक एपिसोड में नई कहानी, नए पात्र और जीवन का अलग अनुभव दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाता था।

    इस धारावाहिक की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसे भारतीय रेलवे के सहयोग से तैयार किया गया था। पूरी टीम को विशेष ट्रेन उपलब्ध कराई गई, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों में वास्तविक स्थानों पर जाकर शूटिंग की जा सकी। इस वजह से दर्शकों को भारत के अनेक शहरों, रेलवे स्टेशनों और प्राकृतिक दृश्यों की वास्तविक झलक देखने का अवसर मिला। कन्याकुमारी से जम्मू तवी और जैसलमेर से पूर्वोत्तर भारत तक फैले लंबे रेल मार्गों को श्रृंखला का हिस्सा बनाया गया, जिससे इसकी प्रस्तुति और भी प्रामाणिक बन गई।

    ‘यात्रा’ में उस दौर के कई प्रतिष्ठित कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। ओम पुरी, नीना गुप्ता, इला अरुण, मोहन गोखले और हरीश पटेल जैसे कलाकारों ने अपने प्रभावशाली अभिनय से साधारण लोगों की असाधारण कहानियों को जीवंत रूप दिया। प्रत्येक पात्र अपने साथ एक नया अनुभव और सामाजिक संदेश लेकर आता था, जिससे दर्शक भावनात्मक रूप से भी कहानी से जुड़ जाते थे।

    धारावाहिक में केवल मनोरंजन पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि समाज के अनेक गंभीर विषयों को भी संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया। लूटपाट, दुर्घटनाएं, महिलाओं की सुरक्षा, आत्महत्या की कोशिश, पारिवारिक संघर्ष, सामाजिक असमानता और मानवीय रिश्तों जैसे विषयों को कहानियों के माध्यम से सहज ढंग से दर्शाया गया। यही कारण था कि यह कार्यक्रम केवल एक रेल यात्रा नहीं, बल्कि समाज का चलता-फिरता आईना बन गया।

    हर एपिसोड की शुरुआत भारतीय रेलवे के इतिहास और उसके महत्व से जुड़े वॉइसओवर से होती थी। इसमें बताया जाता था कि रेलवे किस प्रकार देश के अलग-अलग क्षेत्रों को जोड़ती है और करोड़ों लोगों के लिए सुलभ तथा किफायती यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण साधन बनी हुई है। इस प्रस्तुति ने कार्यक्रम को एक डॉक्यूमेंट्री जैसी गंभीरता और धारावाहिक जैसी रोचकता, दोनों प्रदान की।

    आज जब डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक तकनीक का दौर है, तब भी ‘यात्रा’ जैसे कार्यक्रम भारतीय टेलीविजन की रचनात्मकता और सामाजिक सरोकारों की मिसाल माने जाते हैं। यह धारावाहिक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं था, बल्कि भारत की विविधता, मानवीय संबंधों और रेल यात्रा के अनुभवों को एक साथ प्रस्तुत करने वाला ऐसा प्रयास था, जिसे आज भी दूरदर्शन के सबसे यादगार कार्यक्रमों में शामिल किया जाता है।

  • अरब सागर से शुरू हुई BJP की यात्रा गंगासागर तक पहुंची, अब दक्षिणी राज्यों पर नजर

    अरब सागर से शुरू हुई BJP की यात्रा गंगासागर तक पहुंची, अब दक्षिणी राज्यों पर नजर


    नई दिल्ली।
    अरब सागर (Arabian Sea) के तट से वर्ष 1980 में शुरू हुई भाजपा (BJP) की राजनीतिक यात्रा 46 साल बाद गंगासागर (Gangasagar) तक पहुंच गई है। हालांकि, हिंद महासागर की सीमाई राज्यों तक पहुंचना अभी बाकी है। पार्टी का अगले एक दशक का लक्ष्य सारी समुद्री सीमाओं वाले प्रदेशों में भाजपा को सत्ता तक पहुंचाना है। इसके लिए अब पार्टी अपने मिशन दक्षिण के लिए बदली हुई रणनीति पर काम करेगी। भाजपा की पहुंच से दूर रहा तेलंगाना उसका पहला लक्ष्य है। उसके बाद केरल और तमिलनाडु (Kerala and Tamil Nadu) की व्यूह रचना पर काम होगा। कर्नाटक में उसे अगले ही चुनाव में वापसी की उम्मीद है।

    साल 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के कुछ समय बाद ही अमित शाह ने भाजपा की कमान संभाली थी। उन्होंने अपने पहले ही भाषण में भाजपा के पू्र्वोत्तर विस्तार और कोरोमंडल में पहुंच का विशाल रोड मैप पेश किया था। पूर्वोत्तर से कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने और प्रमुख पूर्वी राज्यों बिहार, ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल में अपने मुख्यमंत्री बनाने के बाद अब वह अधूरे मिशन दक्षिण की ओर बढ़ने जा रही है।

    तमिलनाडु में तैयार भाजपा की जमीन
    दक्षिण के पांच राज्यों में भाजपा अभी आंध्र प्रदेश में तेलुगुदेशम के साथ गठबंधन सरकार में है। कर्नाटक में कई बार सरकार बना चुकी पार्टी को अगले चुनाव में फिर से सत्ता में आने का भरोसा है। बाकी तीन राज्यों तेलंगाना, तमिलनाडु एवं केरल उसके अगले लक्ष्य हैं। तेलंगाना में भाजपा की जमीन तैयार हो चुकी है।

    केरल और तमिलनाडु ही उसके लिए सबसे मुश्किल राज्यों में शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा तमिलनाडु में पश्चिम बंगाल का फॉर्मूला अपनाएगी और अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए अन्नाद्रमुक के कई प्रमुख नेताओं को अपने साथ लाएगी। यहां हाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने नागेंद्रन भी अन्नाद्रमुक से ही आए हैं।

    वाम दलों की जगह लेने की तैयारी
    केरल भाजपा से ज्यादा आरएसएस की मजबूती के लिए जाना जाता है। इस बार के चुनाव में भाजपा ने बदलाव वाले चुनाव में अपने लिए तीन सीट जीतकर तथा पांच सीट पर दूसरे स्थान पर रहकर अपने भावी अभियान की शुरुआत कर दी है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा वाम दलों की हार के बाद अब उसका स्थान खुद हासिल करने की तैयारी में है। राज्य में हिंदू समुदाय की सालों से पसंद रहे वाम दलों की जगह अब भाजपा लेने की तैयारी में है। ईसाई समुदाय में भी भाजपा ने अपनी पकड़ बनाई है।