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  • मदीना को निशाना बनाने की कोशिश! हूती विद्रोहियों ने अदन में राष्ट्रपति भवन और एयरपोर्ट पर दागी मिसाइलें

    मदीना को निशाना बनाने की कोशिश! हूती विद्रोहियों ने अदन में राष्ट्रपति भवन और एयरपोर्ट पर दागी मिसाइलें


    नई दिल्ली। यमन के हूती विद्रोहियों ने शुक्रवार को हमलों की नई लहर शुरू की। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने मदीना क्षेत्र के ऊपर एक ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है, जबकि अदन में राष्ट्रपति भवन परिसर और हवाई अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की खबर है। हालांकि, हूती प्रवक्ता ने सऊदी अरब की ओर ड्रोन भेजने के आरोपों को खारिज किया है।

    हूतियों के खिलाफ लड़ रहे सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने शुक्रवार को बताया कि उसने मदीना क्षेत्र के ऊपर एक ड्रोन को रोककर नष्ट कर दिया। मदीना में पैगंबर मोहम्मद की मस्जिद (मस्जिद-ए-नबवी) स्थित है, जो इस्लाम के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक है। इससे पहले गठबंधन ने मक्का क्षेत्र में भी एक ड्रोन को रोकने की जानकारी दी थी।

    अदन में राष्ट्रपति महल और हवाई अड्डे पर मिसाइलें

    एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, हूतियों ने दो मिसाइलों से अदन स्थित राष्ट्रपति महल को निशाना बनाया। यमन सरकार के एक सैन्य प्रवक्ता ने भी बताया कि शुक्रवार को अदन हवाई अड्डे और अल-माशीक राष्ट्रपति महल परिसर पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि मिसाइलें अपने लक्ष्य पर लगीं या नहीं। हमले में किसी के हताहत होने या नुकसान की भी पुष्टि नहीं हुई है।

    दो प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति महल परिसर की ओर एम्बुलेंस जाते देखीं। इस परिसर में कई इमारतें हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इससे कुछ समय पहले शहर में दो धमाकों की आवाज भी सुनाई दी थी।

    दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का प्रमुख केंद्र है। वर्ष 2014 में हूतियों ने इस सरकार को राजधानी सना से बाहर कर दिया था। इसके बाद से यमन में संघर्ष जारी है और जुलाई में लड़ाई तेज होने के बाद अदन को लगातार हमलों का सामना करना पड़ रहा है।

    शुक्रवार के मिसाइल हमलों से पहले बुधवार को भी हूतियों ने अदन हवाई अड्डे को निशाना बनाया था। इस हमले से पहले संगठन ने लोगों को हवाई अड्डे से दूर चले जाने की चेतावनी दी थी। यह हवाई अड्डा दक्षिणी यमन में मानवीय सहायता पहुंचाने के लिहाज से एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है।

    मक्का और मदीना के धार्मिक महत्व के कारण बढ़ी चिंता

    मक्का में ग्रैंड मस्जिद (मस्जिद अल-हरम) और काबा स्थित हैं, जबकि मदीना में पैगंबर की मस्जिद यानी मस्जिद-ए-नबवी है। इस्लाम में दोनों शहरों का विशेष धार्मिक महत्व है। यहां हर साल बड़ी संख्या में तीर्थयात्री और आगंतुक पहुंचते हैं।

    सऊदी अरब पहले भी हूतियों पर मक्का और मदीना के आसपास हमले की कोशिश करने का आरोप लगा चुका है। सितंबर में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया था कि उसने मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को रोककर नष्ट किया। गठबंधन के मुताबिक, यह ड्रोन मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। उसने इसे मक्का को निशाना बनाने की हूतियों की दूसरी कोशिश बताया था।

    हूतियों ने आरोपों को किया खारिज

    हूती संगठन ने मक्का और मदीना को निशाना बनाने के आरोपों को बार-बार खारिज किया है। उसका कहना है कि उसके सैन्य अभियान सऊदी अरब के सैन्य ठिकानों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे तक सीमित हैं।

    शुक्रवार को हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सऊदी अरब की ओर ड्रोन भेजने के आरोपों को झूठा बताया। उन्होंने कहा कि संगठन ने सऊदी क्षेत्र के खिलाफ कोई सैन्य अभियान नहीं चलाया है। उनके मुताबिक, हूतियों के हमलों का निशाना केवल सऊदी अरब के तेल ठिकाने और सैन्य अड्डे रहे हैं। हूतियों ने सऊदी अरब पर हमलों के झूठे दावे गढ़ने का आरोप भी लगाया है।

  • यमन के ताइज पर सऊदी का हवाई हमला…. 13 की मौत, 10 लाख लोगों के सामने भुखमरी का संकट

    यमन के ताइज पर सऊदी का हवाई हमला…. 13 की मौत, 10 लाख लोगों के सामने भुखमरी का संकट


    सना।
    यमन (Yemen) के ताइज शहर (Ties City) में गुरुवार को सऊदी अरब (Saudi Arabia) के हवाई हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई. हूती विद्रोहियों (Houthi rebels) के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी है. वहीं, स्थानीय अधिकारियों ने दावा किया है कि हूती विद्रोहियों की घेराबंदी के कारण ताइज शहर में भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है. खाने-पीने की चीजों, पानी और रसोई गैस की भारी किल्लत के बीच शहर के करीब 10 लाख लोगों के सामने गंभीर मानवीय संकट खड़ा हो गया है।

    ताइज के गवर्नर नबील शमसान ने एक ब्रीफिंग में कहा, ‘शहर में भुखमरी की स्थिति बन चुकी है.’ उन्होंने बताया कि वह यह बयान मोर्चे से महज एक मील की दूरी पर दे रहे हैं। गवर्नर शमसान के मुताबिक, हूती विद्रोहियों ने शहर के बाहर स्थित पानी के आखिरी स्रोत पर भी कब्जा कर लिया है. इसके कारण ताइज को अब उसकी जरूरत के मुकाबले बेहद कम पानी मिल रहा है. शहर में रसोई गैस की आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई है. इसकी वजह से रेस्तरां बंद करने पड़े हैं और परिवार खाना पकाने के लिए लकड़ियां जलाने को मजबूर हैं. अस्पतालों में मरीजों के लिए ऑक्सीजन का भंडार भी लगभग खत्म हो चुका है।

    विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने बताया कि वह ताइज में मानवीय सहायता पर निर्भर छह लाख से अधिक लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है. इसके अलावा गेहूं के आटे का भंडार भी लगभग समाप्त हो गया है।


    अक्टूबर की शुरुआत से अब तक 271 लोगों की मौत

    गवर्नर नबील शमसान के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत में सैन्य अभियान शुरू होने के बाद से 271 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 1,129 लोग घायल हुए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बचाव कार्य में लगे लोगों और एंबुलेंस को भी निशाना बनाया जा रहा है. शमसान ने कहा, ‘जिन लोगों को बचाया जा सकता है, उन पर भी गोलाबारी की जाती है या स्नाइपर एंबुलेंस को निशाना बनाते हैं. हमें एक आम नागरिक की कार को एंबुलेंस की तरह इस्तेमाल करना पड़ा, लेकिन उस पर भी हमला किया गया.’


    ह्यूमन राइट्स वॉच ने जताई युद्ध अपराध की आशंका

    मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने गुरुवार को कहा कि अक्टूबर की शुरुआत से जारी ताइज की घेराबंदी युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकती है, क्योंकि युद्ध के दौरान नागरिकों को भूखा रखना युद्ध के तरीके के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. ह्यूमन राइट्स वॉच की यमन शोधकर्ता निकू जाफरनिया ने कहा कि हूती विद्रोही ताइज की घेराबंदी के जरिए नागरिकों के सामने पैदा हुए मानवीय संकट को उचित नहीं ठहरा सकते.


    हूती नेता ने घेराबंदी के आरोपों को किया खारिज

    दूसरी ओर, हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने ताइज की घेराबंदी की खबरों को खारिज किया है. उन्होंने इन आरोपों को ‘सऊदी अरब द्वारा गढ़े गए दावे’ बताया. हूती नियंत्रण वाले अल-मसीरा टीवी पर गुरुवार को प्रसारित संबोधन में उन्होंने कहा कि खाद्य सामग्री और मानवीय जरूरतों की आपूर्ति के लिए रास्ते खुले हैं. उनका दावा है कि हूती लड़ाके केवल उन हथियारों की आपूर्ति रोक रहे हैं, जो उनके मुताबिक सऊदी समर्थित मिलिशिया तक पहुंचाए जा रहे हैं.

    अगस्त से अब तक 1.24 लाख विस्थापित ताइज पहुंचे
    यमन के दूसरे हिस्सों में जारी संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोग ताइज पहुंच रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी के मुताबिक, अगस्त से अब तक करीब 1.24 लाख विस्थापित लोगों ने ताइज में शरण ली है. इससे शहर के पहले से सीमित संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है. यमन में 2014 में गृहयुद्ध शुरू हुआ था, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना समेत देश के उत्तरी हिस्से के बड़े क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को निर्वासन में जाना पड़ा।

    ताइज तभी से संघर्ष का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. शहर के मध्य हिस्से पर सरकारी बलों का कंट्रोल है, जबकि आसपास की सड़कों पर हूती विद्रोहियों का कब्जा है।

  • यमन में हूतियों का सैन्य शिविर पर मिसाइल हमला, 53 सैनिकों की मौत और 200 से अधिक घायल

    यमन में हूतियों का सैन्य शिविर पर मिसाइल हमला, 53 सैनिकों की मौत और 200 से अधिक घायल


    नई दिल्ली ।
    यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थक बलों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। सोमवार को दक्षिणी यमन के शबवा प्रांत स्थित अल-अलम सैन्य शिविर पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया। इस हमले में कम से कम 53 सैनिकों की मौत हो गई, जबकि 200 से अधिक जवान घायल बताए गए हैं। मृतकों में ज्यादातर नए भर्ती हुए सैनिक शामिल हैं। यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब देश में लंबे समय से जारी गृहयुद्ध और क्षेत्रीय तनाव के कारण सुरक्षा स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

    यमन की सेना के प्रवक्ता कर्नल माजेद अल-नजिली के अनुसार, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण केंद्र को निशाना बनाते हुए तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, उन्होंने हताहतों की संख्या की पुष्टि नहीं की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के दो सैन्य अधिकारियों ने हमले में कम से कम 53 सैनिकों की मौत और 200 से अधिक जवानों के घायल होने की जानकारी दी। हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाली समाचार एजेंसी ने भी हमले में कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की बात कही, लेकिन मृतकों और घायलों की संख्या नहीं बताई।

    अल-अलम सैन्य शिविर शबवा प्रांत की राजधानी अटक के उत्तर में जर्दान जिले में स्थित है। पहले इस शिविर का इस्तेमाल संयुक्त अरब अमीरात के समर्थन वाले एक सशस्त्र समूह द्वारा किया जाता था। यह इलाका सरकार के नियंत्रण वाले मारीब प्रांत तक पहुंचने वाले मार्ग पर स्थित है। इस कारण सैन्य और जरूरी आपूर्ति को सरकारी बलों तक पहुंचाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। एक सैन्य अधिकारी के मुताबिक, हमले में निशाना बनाए गए जवान रैपिड इंटरवेंशन नाम से गठित नई सुरक्षा इकाई का हिस्सा थे। इस इकाई को क्षेत्र की सुरक्षा और रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

    यमन में संघर्ष बढ़ने के पीछे कई क्षेत्रीय और आंतरिक कारण बताए जा रहे हैं। हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब समर्थित सरकारी बलों के बीच पिछले कई महीनों से टकराव तेज हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर भी क्षेत्र की परिस्थितियों पर पड़ा है। वर्ष 2022 में हुआ संघर्षविराम यमन के गृहयुद्ध में लड़ाई को काफी हद तक रोकने में सफल रहा था, लेकिन हालिया घटनाओं के बीच उस व्यवस्था की प्रभावशीलता कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।

    इस बीच उत्तरी यमन के हूती नियंत्रित सादा प्रांत में रविवार को हवाई हमला हुआ। हूती प्रशासन के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इस हमले में कम से कम नौ लोगों की मौत हुई, जिनमें पांच बच्चे और दो महिलाएं शामिल थीं। हूतियों ने हमले के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले बलों को जिम्मेदार ठहराया है। सप्ताहांत के दौरान हुए कई हमलों में 30 से अधिक लोगों के मारे जाने या घायल होने का दावा भी किया गया। हालांकि, सऊदी अरब की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई।

    सऊदी अरब और लाल सागर के आसपास भी तनाव बढ़ने की खबरें हैं। हूती विद्रोहियों ने हाल के हफ्तों में सऊदी अरब पर हमले दोबारा शुरू किए हैं। उनका आरोप है कि सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन कर रहा है। इन हमलों में सऊदी हवाई अड्डों, तेल ठिकानों और सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इन घटनाओं से हजारों उड़ानें प्रभावित हुई हैं और 19 लोगों की मौत हुई है। सऊदी तेल कंपनी अरामको के मुख्यालय पर भी हमला किए जाने की बात सामने आई है।

    लाल सागर के तट और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास हूतियों की गतिविधियां भी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अहम है और वैश्विक माल परिवहन में इसकी बड़ी भूमिका है। इस रणनीतिक क्षेत्र पर नियंत्रण को लेकर तनाव के बीच सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इसी महीने सैन्य अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य क्षेत्र से हूती विद्रोहियों को पीछे हटाना और वहां दोबारा नियंत्रण स्थापित करना बताया गया है। हालिया मिसाइल हमले ने यमन में संघर्ष के और गंभीर होने की आशंकाओं को बढ़ा दिया है।

  • यमन में हूती विद्रोहियों का बड़ा हमला … अदन एयरपोर्ट पर दागीं दो मिसाइलें

    यमन में हूती विद्रोहियों का बड़ा हमला … अदन एयरपोर्ट पर दागीं दो मिसाइलें


    सना।
    यमन (Yemen) के बंदरगाह शहर अदन ( Port City Aden) के एयरपोर्ट (Airport) पर शुक्रवार रात दो मिसाइलों से हमला हुआ. स्थानीय पुलिस ने इसके लिए ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi rebels) को जिम्मेदार ठहराया है. अधिकारियों का कहना है कि हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. दस दिन से भी कम समय में एयरपोर्ट पर यह दूसरा हमला बताया गया है।


    विमान से करीब 500 मीटर दूर गिरीं मिसाइलें

    यमन सरकार के सूचना मंत्री ने बताया कि मिसाइलें यमनिया एयरवेज के एक प्लेन से करीब 500 मीटर दूर गिरीं. यह विमान उड़ान भरने की तैयारी कर रहा था. एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि विमान में सवार यात्रियों को तुरंत बाहर निकाल लिया गया।

    हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाली समाचार एजेंसी सबा ने एक सैन्य अधिकारी के हवाले से बताया कि समूह ने एयरपोर्ट के पास स्थित एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया था. अधिकारी के मुताबिक, इस ठिकाने पर सऊदी नेतृत्व वाली सेना का कमांड सेंटर और हथियारों का भंडार है।


    दो दिन में अदन में दूसरा बड़ा हमला

    अदन में दो दिन के अंदर यह दूसरा बड़ा हमला है. इससे पहले गुरुवार को हूती विद्रोहियों ने राष्ट्रपति भवन के परिसर पर हमला किया था. यह परिसर यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का केंद्र है. उस हमले में पांच लोगों की मौत हुई थी. अधिकारियों के मुताबिक, 7 अक्टूबर को भी अदन एयरपोर्ट पर दो मिसाइलें दागी गई थीं. उस हमले में भी किसी के घायल होने की सूचना नहीं थी।

    यमन के परिवहन मंत्रालय ने हमले को जरूरी बुनियादी ढांचे और सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाने की सुनियोजित कोशिश बताया. मंत्रालय ने आरोप लगाया कि हूती विद्रोहियों की कार्रवाई से आम नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।

    दरअसल, यमन में हाल के महीनों में लड़ाई फिर तेज हुई है. यह संघर्ष व्यापक ईरान युद्ध से जुड़े तनाव के बीच बढ़ा है. हूती विद्रोहियों ने पड़ोसी सऊदी अरब के एयरपोर्ट, तेल ठिकानों और सैन्य सुविधाओं को भी निशाना बनाया है.


    लाल सागर और बाब अल मंदेब स्ट्रेट पर भी तनाव

    हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के तटीय इलाकों में बाब अल मंदेब स्ट्रेट के पास भी अपनी पकड़ बढ़ाई है. यह समुद्री रास्ता अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अहम है और होर्मुज स्ट्रेट के विकल्पों में गिना जाता है.

    हूती विद्रोहियों को इस इलाके से हटाने और खोया हुआ क्षेत्र वापस लेने के लिए सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इसी महीने बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है. इस बीच यमन के ताइज जैसे शहरों में आम नागरिकों को भी संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है. बढ़ती लड़ाई ने क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक बाजारों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

  • रियाद में अरामको की सुविधा पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला, हूतियों ने सऊदी कार्रवाई का जवाब बताया

    रियाद में अरामको की सुविधा पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला, हूतियों ने सऊदी कार्रवाई का जवाब बताया


    नई दिल्ली ।सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच जारी तनाव के बीच शनिवार को राजधानी रियाद में सऊदी अरामको की एक सुविधा को निशाना बनाकर हमला किए जाने का दावा किया गया। यमन के हूती विद्रोहियों के मुताबिक, इस कार्रवाई में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। हमले के बाद अरामको की सुविधा से आग की लपटें और काले धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया। हूतियों ने इस हमले को यमन में सऊदी अरब की ओर से किए गए हमलों की जवाबी कार्रवाई बताया है।

    हूती विद्रोहियों का कहना है कि रियाद स्थित अरामको की सुविधा पर किया गया हमला यमन की राजधानी सना और देश के दूसरे प्रांतों में हुई सऊदी कार्रवाई के जवाब में किया गया। उनके अनुसार, इस हमले में मिसाइलों और ड्रोन दोनों का इस्तेमाल किया गया। हूतियों ने इसे बदले की कार्रवाई के तौर पर पेश किया है। हालांकि, इस हमले से अरामको की संबंधित सुविधा को कितना नुकसान हुआ, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

    हमले के बाद रियाद में अरामको की सुविधा के आसपास आग और धुएं का असर दिखाई देने की बात सामने आई। एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, शनिवार को सुविधा के पास धुएं और आग का गुबार उठता हुआ देखा गया। घटना के बाद इलाके में हलचल भी देखी गई। हालांकि, सऊदी अधिकारियों की ओर से अरामको की सुविधा को निशाना बनाए जाने की तत्काल पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में हमले से हुए नुकसान की वास्तविक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

    यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। इससे पहले पिछले सप्ताह हूतियों ने यानबू में भी अरामको की सुविधाओं पर हमले का दावा किया था। उस घटना के संबंध में सऊदी अरब की ओर से छह मिसाइलों को रोकने की बात कही गई थी। दोनों पक्षों के बीच जारी टकराव के बीच अरामको की सुविधाओं को लेकर सामने आ रहे हमलों के दावों ने तनाव की स्थिति को और सामने ला दिया है।

    रियाद में हुए ताजा हमले को लेकर हूतियों ने स्पष्ट रूप से इसे यमन में सऊदी हमलों की प्रतिक्रिया बताया है। विद्रोहियों के दावे के अनुसार, बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के जरिए अरामको की सुविधा को निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, सऊदी अधिकारियों की ओर से तत्काल हमले की पुष्टि नहीं की गई है। फिलहाल घटना के बाद सुविधा को हुए नुकसान का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। प्रत्यक्षदर्शी द्वारा आग और धुएं के गुबार देखे जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि हमले की पूरी स्थिति और उसके प्रभाव को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

  • सऊदी अरब जाने वाले अमेरिकी नागरिकों को अलर्ट, अमेरिका ने जारी की लेवल-3 ट्रैवल एडवाइजरी, यमन सीमा पर सबसे कड़ी चेतावनी

    सऊदी अरब जाने वाले अमेरिकी नागरिकों को अलर्ट, अमेरिका ने जारी की लेवल-3 ट्रैवल एडवाइजरी, यमन सीमा पर सबसे कड़ी चेतावनी


    नई दिल्ली ।पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच अमेरिका ने सऊदी अरब की यात्रा करने वाले अपने नागरिकों के लिए नई चेतावनी जारी की है। अमेरिकी प्रशासन ने सऊदी अरब के लिए लेवल-3 ट्रैवल एडवाइजरी जारी करते हुए नागरिकों से वहां की यात्रा पर पुनर्विचार करने को कहा है। इस चेतावनी में क्षेत्र में संभावित हमलों, आतंकवाद और सुरक्षा जोखिमों को प्रमुख कारण बताया गया है।

    सऊदी अरब के लिए जारी लेवल-3 चेतावनी का अर्थ है कि अमेरिकी नागरिकों को वहां जाने से पहले सुरक्षा परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। पश्चिम एशिया में लगातार बने तनाव के बीच अमेरिकी हितों और नागरिकों को संभावित खतरे की आशंका भी जताई गई है। विशेष रूप से ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों को सुरक्षा चिंता का प्रमुख कारण बताया गया है।

    यमन से लगे सऊदी अरब के कुछ सीमावर्ती इलाकों के लिए इससे भी सख्त लेवल-4 ट्रैवल एडवाइजरी जारी की गई है। इस स्तर की चेतावनी के तहत इन क्षेत्रों की यात्रा नहीं करने की सलाह दी गई है। यमन सीमा के आसपास सुरक्षा स्थिति को अधिक संवेदनशील माना गया है, जहां सशस्त्र समूहों की गतिविधियों और हमलों के कारण खतरा बढ़ने की बात कही गई है।

    चेतावनी में ड्रोन और मिसाइल हमलों के अलावा हवा में नष्ट किए गए हथियारों के मलबे से होने वाले नुकसान की आशंका का भी उल्लेख किया गया है। किसी हमले को रोकने के दौरान गिरने वाला मलबा भी लोगों और संपत्ति के लिए खतरा पैदा कर सकता है। ऐसे में यमन सीमा के आसपास रहने या यात्रा करने वाले अमेरिकी नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है।

    सऊदी अरब में सैन्य ठिकानों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे के आसपास के क्षेत्रों को भी संवेदनशील माना गया है। अमेरिकी नागरिकों के लिए इन इलाकों में सुरक्षा जोखिम अधिक होने की बात सामने आई है। क्षेत्रीय तनाव के चलते सऊदी अरब में अमेरिकी हितों को निशाना बनाए जाने की आशंका भी व्यक्त की गई है।

    यमन से लगी सीमा के अलावा उड़ानों पर पड़ने वाले असर को भी सुरक्षा स्थिति से जोड़ा गया है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण हवाई सेवाओं में रुकावट की स्थिति पैदा हो सकती है। इसके साथ ही अमेरिकी कर्मचारियों की आवाजाही से संबंधित कुछ प्रतिबंध भी लागू किए गए हैं, जिससे वहां की सुरक्षा परिस्थितियों को लेकर चिंता का स्तर स्पष्ट होता है।

    अमेरिकी चेतावनी ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है। सऊदी अरब को लेकर जारी सलाह में आम इलाकों और विशेष रूप से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच अलग-अलग स्तर की चेतावनी दी गई है। जहां पूरे सऊदी अरब के लिए यात्रा पर पुनर्विचार करने को कहा गया है, वहीं यमन सीमा से लगे कुछ क्षेत्रों के लिए यात्रा नहीं करने की सलाह दी गई है।

    अमेरिकी नागरिकों को सऊदी अरब की यात्रा की योजना बनाने से पहले मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों पर ध्यान देने और संभावित जोखिमों को समझने की सलाह दी गई है। सैन्य गतिविधियों, ड्रोन और मिसाइल हमलों तथा क्षेत्रीय तनाव के बीच जारी यह चेतावनी सऊदी अरब जाने वाले अमेरिकी यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा संदेश के रूप में सामने आई है।

  • हूतियों की बढ़ती ताकत से सऊदी अरब चिंतित, अमेरिकी मदद की मांग के बीच ट्रंप ने सैन्य हमले से किया इनकार

    हूतियों की बढ़ती ताकत से सऊदी अरब चिंतित, अमेरिकी मदद की मांग के बीच ट्रंप ने सैन्य हमले से किया इनकार

    नई दिल्ली ।यमन में हूती लड़ाकों की बढ़ती ताकत और रणनीतिक इलाकों की ओर उनके बढ़ते प्रभाव ने सऊदी अरब की चिंता बढ़ा दी है। हालात को देखते हुए सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दो बार फोन पर बातचीत की और हूतियों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की मांग की। हालांकि, ट्रंप ने यमन में सीधे अमेरिकी हमले से इनकार कर दिया।

    हूतियों के मोचा शहर पर कब्जे और दक्षिण की ओर उनकी बढ़ती गतिविधियों के बीच सऊदी समर्थित यमनी बलों के पीछे हटने की खबर सामने आई है। इसी स्थिति के बीच सऊदी नेतृत्व ने अमेरिका से मदद की अपील की। बातचीत के दौरान सऊदी क्राउन प्रिंस ने क्षेत्र में बिगड़ते हालात की जानकारी ट्रंप को दी और इसके बाद दोबारा संपर्क कर हूतियों के खिलाफ अमेरिकी स्ट्राइक की मांग रखी।

    ट्रंप ने यमन में संघर्ष बढ़ने को लेकर चिंता जताई, लेकिन हूती समूह के खिलाफ सीधे हमले के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। अमेरिका ने हालांकि सऊदी अरब को हूतियों से संबंधित खुफिया जानकारी और टारगेटिंग डेटा उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है। बताया गया है कि करीब 200 अमेरिकी सैन्यकर्मी पहले से सऊदी अरब में गैर-गतिशील सहायता प्रदान कर रहे हैं।

    सऊदी अरब की चिंता का एक बड़ा कारण हूतियों का रणनीतिक समुद्री क्षेत्रों की ओर बढ़ना है। उनकी गतिविधियां बढ़ने से बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास स्थिति और महत्वपूर्ण हो गई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए अहम माना जाता है और सऊदी अरब के तेल निर्यात से भी इसका सीधा संबंध है। हूतियों की बढ़ती गतिविधियों के बीच तेल की कीमतों में भी उछाल देखा गया है।

    मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि ईरान पहले से होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए समुद्री आवाजाही पर दबाव बना रहा है। ऐसे में बाब अल-मंदेब क्षेत्र में हूतियों का प्रभाव बढ़ने से अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगियों पर दबाव बढ़ने की आशंका सऊदी अरब के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

    मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर गुरुवार को सऊदी अरब पहुंचे। बताया गया कि उन्होंने क्षेत्र की स्थिति को लेकर तत्काल चर्चा के लिए अहम बैठकें कीं। हालांकि, वाशिंगटन स्थित सऊदी दूतावास और व्हाइट हाउस की ओर से इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की गई।

    अमेरिका फिलहाल हूतियों के खिलाफ सीधे युद्ध में उतरने से बचने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वाशिंगटन की प्राथमिकता लाल सागर में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित और खुला रखना है। यमन के व्यापक संघर्ष से निपटने की जिम्मेदारी क्षेत्रीय सहयोगियों पर छोड़ने की नीति पर जोर दिया जा रहा है।

    इसी वजह से सऊदी अरब की सैन्य हस्तक्षेप की मांग के बावजूद अमेरिका फिलहाल सीधे हमले के बजाय खुफिया जानकारी और सैन्य सहयोग तक अपनी भूमिका सीमित रखने की कोशिश कर रहा है।

    यमन में हूतियों ने रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है। यह शहर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से करीब 75 किलोमीटर दूर बताया गया है। मोखा पर पहले सऊदी समर्थित यमनी नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स का नियंत्रण था। दोनों पक्षों के बीच नौ दिनों से लड़ाई चल रही थी। मोखा पर कब्जे के बाद हूतियों की स्थिति और मजबूत हुई है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों को लेकर सऊदी अरब की चिंता बढ़ गई है।

  • सऊदी पर हूती हमलों के बीच पाकिस्तान ने ईरान को दी चेतावनी, तेहरान ने कहा- हूतियों पर हमारा नियंत्रण नहीं

    सऊदी पर हूती हमलों के बीच पाकिस्तान ने ईरान को दी चेतावनी, तेहरान ने कहा- हूतियों पर हमारा नियंत्रण नहीं

    नई दिल्ली । सऊदी अरब पर हूतियों के बढ़ते हमलों के बीच पाकिस्तान ने ईरान को बड़ी चेतावनी दी है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान ने पिछले 24 घंटे के दौरान तेहरान तक यह संदेश पहुंचाया है कि वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके हूतियों को सऊदी अरब पर हमले रोकने के लिए कहे। ईरान को यह मैसेज तब दिया गया है जब हूतियों ने बीते दिनों सऊदी के तेल ठिकानों पर हमले किए थे।

    पाकिस्तान की इस दखल को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि वह लंबे समय से सऊदी अरब और ईरान, दोनों के साथ अपने रिश्तों को संभालता रहा है। अब इस्लामाबाद को डर है कि हूती हमले अगर और बढ़े तो प्रॉक्सी जंग एक बड़े क्षेत्रीय सुरक्षा संकट में बदल सकती है।

    ईरान बोला- हूतियों पर हमारा कंट्रोल नहीं

    एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान ने मंगलवार को तेहरान तक अपना संदेश पहुंचाया था। ईरान की तरफ से जवाब दिया गया कि ईरान हूतियों को कंट्रोल नहीं करता। हालांकि, दो ईरानी सूत्रों ने अलग दावा किया है। उनके मुताबिक, तेहरान ने पिछले हफ्ते हूतियों से सऊदी अरब पर हमले करने को कहा था।

    दावा है कि ईरान ने इसके लिए अतिरिक्त पैसा और हथियार देने का वादा भी किया था। साथ ही इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के कई कमांडर हमलों के तालमेल में मदद के लिए यमन पहुंचे थे।

    सऊदी की रक्षा में पाकिस्तान-तुर्की की तैयारी

    पाकिस्तान की चेतावनी का एक बड़ा कारण सऊदी अरब के साथ उसका डिफेंस पैक्ट भी है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पहले ही कहा है कि अगर हमले सऊदी की जमीन तक फैलते हैं तो रियाद, अंकारा और इस्लामाबाद के बीच ज्वाइंट सिक्योरिटी अरेंजमेंट सामने आ सकता है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि सऊदी अधिकारियों ने रियाद में पाकिस्तान और तुर्की के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की है। तीनों देशों के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि उनकी सेनाएं यमन में दाखिल नहीं होंगी और किसी भी जवाबी कार्रवाई को सऊदी की जमीन से अंजाम दिया जाएगा।

  • यमन में जेल पर एयरस्ट्राइक का दावा, 7 की मौत, हूतियों ने सऊदी अरब को ठहराया जिम्मेदार

    यमन में जेल पर एयरस्ट्राइक का दावा, 7 की मौत, हूतियों ने सऊदी अरब को ठहराया जिम्मेदार


    नई दिल्ली। यमन में सोमवार को एक जेल पर कथित हवाई हमले के बाद तनाव बढ़ गया। हूती विद्रोहियों ने इस हमले के लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया है। हूतियों के मुताबिक, उत्तरी यमन के जौफ प्रांत में हुए हमले में कम से कम 7 लोगों की मौत हुई है, इनमें एक बच्चा भी शामिल है। वहीं, 7 अन्य लोग घायल बताए गए हैं, जिनमें एक महिला शामिल है।

    हमला जौफ प्रांत के हज्म शहर स्थित सेंट्रल करेक्टिव फैसिलिटी पर होने का दावा किया गया है। हूती संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इमारत के मलबे में 35 कैदियों और अपने पति से मिलने पहुंची एक महिला के दबे होने की आशंका है।

    हूती मीडिया ने हमले के बाद के दृश्य भी प्रसारित किए हैं। फुटेज में क्षतिग्रस्त इमारत, चारों ओर बिखरा मलबा और राहत एवं बचाव दल के सदस्य तलाशी अभियान चलाते दिखाई दे रहे हैं।

    हूती प्रवक्ता ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

    हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने आरोप लगाया कि सऊदी अरब ने जौफ में एयरस्ट्राइक कर ‘नरसंहार’ किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस हमले का जवाब दिया जाएगा और सऊदी अरब को इसकी कीमत चुकानी होगी।

    सरी ने बाद में यह भी दावा किया कि पिछले 24 घंटे में हूती बलों ने सऊदी अरब के चार टोही ड्रोन मार गिराए हैं। हालांकि, इन आरोपों और दावों पर सऊदी अरब की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

    कई इलाकों में आगे बढ़ रही सरकारी सेना

    जेल पर हमले के ये आरोप ऐसे समय सामने आए हैं, जब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के प्रति वफादार बल कई मोर्चों पर आगे बढ़ने का दावा कर रहे हैं। इनमें जौफ के अलावा बैदा, दहले और मारिब के इलाके शामिल हैं।

    यमन का गृहयुद्ध 2014 में उस समय शुरू हुआ था, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को देश छोड़ना पड़ा। वर्ष 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया था।

    जेलों को पहले भी बनाया जा चुका है निशाना

    यमन के संघर्ष में जेल और हिरासत केंद्र पहले भी हवाई हमलों का शिकार हो चुके हैं। 2022 में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के एक हमले में सादा की एक डिटेंशन फैसिलिटी में कम से कम 87 कैदियों की मौत हुई थी।

    इससे पहले 2019 में धमार में हूतियों द्वारा संचालित डिटेंशन फैसिलिटी पर हमले में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

    डेढ़ लाख से ज्यादा मौतों का अनुमान

    संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के मुताबिक यमन के लंबे समय से जारी संघर्ष में अब तक कम से कम 1.5 लाख लोगों की जान जा चुकी है। युद्ध की वजह से देश गंभीर मानवीय और खाद्य संकट की ओर भी धकेला गया है।

    वर्ष 2022 से बड़े स्तर पर कायम युद्धविराम अब कमजोर पड़ चुका है और अलग-अलग मोर्चों पर जारी सैन्य गतिविधियों के बीच यमन में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

  • यमन और सोमालिया के तटों से समुद्री लुटेरों ने 22 भारतीयों वाले 2 जहाजों को किया हाइजैक

    यमन और सोमालिया के तटों से समुद्री लुटेरों ने 22 भारतीयों वाले 2 जहाजों को किया हाइजैक


    सना।
    यमन और सोमालिया (Yemen and Somalia) के तट के पास अलग-अलग घटनाओं में 22 भारतीय नागरिकों (Indian citizens) को लेकर जा रहे दो कॉमर्शियल जहाजों (Two Commercial Ships) को समुद्री लुटेरों (Pirates) ने हाइजैक (Hijack) कर लिया। अधिकारियों के मुताबिक, इन घटनाओं ने हॉर्न ऑफ अफ्रीका के आसपास के समुद्री इलाकों में एक बार फिर समुद्री डकैती के खतरे को उजागर किया है।


    यमन के पास 16 भारतीयों वाला टैंकर हाइजैक

    पहली घटना में इरिट्रिया के झंडे वाला ऑयल प्रोडक्ट्स टैंकर M.T. Sibu 1 समुद्री लुटेरों के कब्जे में चला गया। जहाज पर कुल 20 क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें 16 भारतीय नागरिक थे। इसे यमन के तट से करीब 30 नॉटिकल मील दूर अदन की खाड़ी में छह हथियारबंद समुद्री लुटेरों ने हाइजैक किया।

    समुद्री प्रशासन निदेशालय की तैयार रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज के सभी 20 क्रू सदस्यों के सुरक्षित होने की सूचना है। हालांकि, जहाज और उसके क्रू की ताजा स्थिति का इंतजार किया जा रहा है। क्रू में 16 भारतीयों के अलावा एक सीरियाई, एक सूडानी और एक इराकी नागरिक शामिल है। वहीं, एक अन्य नाविक की राष्ट्रीयता की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, रिक्रूटमेंट एंड प्लेसमेंट सर्विस लाइसेंस एजेंसी से घटना की रिपोर्ट और उसके बाद की नियमित जानकारी e-Navik ऑनलाइन मरीन कैजुअल्टी रिपोर्टिंग सिस्टम के जरिए देने को कहा गया है। SKS Krishiv Marine Services के सुमित कांत सिंह ने बताया कि उनकी कंपनी ने क्रू के चार सदस्यों की भर्ती की थी और उनके विवरण समुद्री प्रशासन निदेशालय को उपलब्ध करा दिए हैं।


    सोमालिया के पास 6 भारतीयों वाला कार्गो जहाज कब्जे में

    दूसरी घटना में सोमालिया के पुंटलैंड तट के पास M/V LUTUF नाम के कैमरून-फ्लैग वाले कार्गो जहाज को समुद्री लुटेरों ने अपने कब्जे में ले लिया। एसोसिएटेड प्रेस द्वारा उद्धृत एक सोमाली अधिकारी के मुताबिक, यह घटना सोमवार को हुई।

    जहाज पर 10 सदस्यीय क्रू था, जिसमें छह भारतीय नागरिक शामिल थे। जहाज को पुंटलैंड के Eyl जिले में Marraya से करीब 3.5 नॉटिकल मील दूर कब्जे में लिया गया और बाद में इसे Nugaal तट की ओर ले जाया गया। क्रू में एक तुर्की नागरिक, एक जॉर्जियाई नागरिक और दो सर्बियाई सुरक्षा गार्ड भी शामिल थे।

    सोमाली अधिकारी के मुताबिक, पोलर मूवमेंट शिपिंग के स्वामित्व वाला यह जहाज मोगादिशु में तुर्की के एक सैन्य प्रशिक्षण केंद्र के लिए हथियार लेकर जा रहा था। इसके अलावा जहाज पर संचार और सैटेलाइट उपकरण भी थे।

    अधिकारी ने बताया कि आठ समुद्री लुटेरों ने जहाज को पुंटलैंड के डैंगोरोया जिले में जर्माल के पास तट की ओर ले जाया। माना जा रहा है कि ये वही समूह है जो अप्रैल में M/V Sward के हाईजैक में भी शामिल था।

    हालांकि, M/V LUTUF, उसके क्रू और जहाज पर मौजूद सामान की तत्काल स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी थी। तुर्की के अधिकारियों ने भी घटना पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की थी।