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  • हरित प्रदेश’ की ओर यूपी! 9 साल में 242 करोड़ से अधिक पौधे रोपे गए

    हरित प्रदेश’ की ओर यूपी! 9 साल में 242 करोड़ से अधिक पौधे रोपे गए


    नई दिल्ली उत्तर प्रदेश को विकास के साथ-साथ हरियाली की नई पहचान देने की दिशा में Yogi Adityanath के नेतृत्व में प्रदेश सरकार लगातार अभियान चला रही है। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश भर में 242 करोड़ से अधिक पौधे रोपे गए हैं। इसके परिणामस्वरूप राज्य का वनाच्छादन भी बढ़ा है और यूपी अब ‘हरित प्रदेश’ की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाता दिख रहा है।

    वन क्षेत्र में 559.19 वर्ग किमी की बढ़ोतरी
    Forest Survey of India की ‘भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट-2023’ के अनुसार उत्तर प्रदेश के वनाच्छादन में 559.19 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी व्यापक स्तर पर चलाए गए पौधरोपण अभियानों का परिणाम मानी जा रही है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 में सत्ता संभालने के बाद से पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता में रखा। हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस और वर्षाकाल के दौरान राज्यव्यापी पौधरोपण अभियान चलाया जाता है, जिसकी मॉनिटरिंग खुद मुख्यमंत्री करते हैं।

    एक दिन में 37.21 करोड़ पौधे
    प्रदेश में पिछले वर्ष 9 जुलाई को एक ही दिन में 37.21 करोड़ पौधे लगाने का रिकॉर्ड बनाया गया। यह अभियान जनभागीदारी के साथ संचालित हुआ, जिसमें विभिन्न विभागों, स्वयंसेवी संगठनों और आम नागरिकों ने हिस्सा लिया।

    इतना ही नहीं, वाराणसी के सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में आयोजित ‘वृहद पौधरोपण कार्यक्रम’ में मात्र एक घंटे में 2,51,446 पौधों का रोपण कर नया इतिहास रचा गया। इस उपलब्धि पर Guinness World Records के जज ऋषिनाथ ने महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को प्रमाणपत्र सौंपा।

    चीन का पुराना रिकॉर्ड टूटा
    सुजाबाद डोमरी के 350 बीघा क्षेत्र में विकसित ‘शहरी वन’ ने विश्व स्तर पर पहचान बनाई। इससे पहले 10 मार्च 2018 को चीन की हेनान प्रांतीय समिति ने 1,53,981 पौधों का रोपण कर रिकॉर्ड बनाया था, जिसे काशीवासियों ने पीछे छोड़ दिया।

    इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री Narendra Modi की प्रेरणा और मुख्यमंत्री योगी के मार्गदर्शन का परिणाम बताया जा रहा है।

    ‘ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट’ और जनजागरण
    प्रदेश सरकार ने 1 से 7 जुलाई 2025 के बीच जन्मे 18,348 नवजातों को ‘ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट’ प्रदान किए। उनके अभिभावकों को फलदार, लकड़ी और सहजन जैसी प्रजातियों के पौधे दिए गए। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को भी व्यापक सराहना मिली।

    साथ ही, गांवों में ‘ग्रीन चौपाल’ की शुरुआत कर पर्यावरण संरक्षण को जनांदोलन का रूप देने की कोशिश की गई है। अब तक 15,000 से अधिक ग्रामसभाओं में ग्रीन चौपाल आयोजित की जा चुकी हैं, जहां महीने में कम से कम एक बैठक अनिवार्य है।

    2026 में 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य
    वर्षाकाल 2026 के लिए सरकार ने 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है। बजट में सामाजिक वानिकी योजना के लिए 800 करोड़ रुपये, पौधशाला प्रबंधन के लिए 220 करोड़ रुपये और राज्य प्रतिकारात्मक वनरोपण योजना के लिए 189 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने 2030 तक प्रदेश के हरित आवरण को 15 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जनभागीदारी इसी तरह बनी रही, तो यूपी न केवल विकास बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।

  • यूपी में जल्द कैबिनेट विस्तार! छह नए मंत्रियों की एंट्री और तीसरे उपमुख्यमंत्री की संभावना तेज

    यूपी में जल्द कैबिनेट विस्तार! छह नए मंत्रियों की एंट्री और तीसरे उपमुख्यमंत्री की संभावना तेज


    नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार होने की अटकलें ज़ोर पकड़ रही हैं। भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नियुक्ति के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि सरकार संगठन और सत्ता के बीच संतुलन बनाने के लिए कैबिनेट में बड़े बदलाव कर सकती है। सूत्रों के अनुसारइस विस्तार में छह नए मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है और साथ ही प्रदेश को तीसरा उपमुख्यमंत्री भी मिल सकता है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिकवर्तमान में उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में कुल 54 मंत्री हैंजबकि संवैधानिक रूप से 60 मंत्रियों की अनुमति है। ऐसे में छह पद खाली हैंजिन्हें भरने की तैयारी शुरू हो चुकी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस प्रक्रिया में केवल नए चेहरों की एंट्री ही नहीं होगीबल्कि कुछ मौजूदा मंत्रियों को हटाया भी जा सकता है। इसका उद्देश्य सरकार के कामकाज को अधिक प्रभावी बनाना और आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करना है।

    तीसरे उपमुख्यमंत्री की चर्चा क्यों?

    इस बार कैबिनेट विस्तार की सबसे बड़ी चर्चा तीसरे उपमुख्यमंत्री को लेकर है। फिलहाल उत्तर प्रदेश में दो उपमुख्यमंत्री हैं-केशव प्रसाद मौर्यओबीसी वर्ग और बृजेश पाठकब्राह्मण वर्ग। सूत्रों के अनुसारतीसरे उपमुख्यमंत्री का पद अनुसूचित जातिSC समुदाय को दिए जाने की संभावना हैजिससे सामाजिक संतुलन को और मजबूत किया जा सके। इस पद के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद साध्वी निरंजन ज्योति का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। यदि उन्हें यह जिम्मेदारी मिलती हैतो यह भाजपा की सामाजिक समरसता की राजनीति को और मजबूती देगा। साथ ही दलित समुदाय में पार्टी के संदेश को भी बल मिलेगा।

    सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर फोकस

    भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ओबीसी समुदाय से आते हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय को साधने के लिए भी सरकार कैबिनेट में कुछ बड़े चेहरे शामिल कर सकती है। इस संदर्भ में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का नाम भी चर्चा में है। वे पहले योगी सरकार में पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं और पश्चिमी यूपी में जाट मतदाताओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना भाजपा के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकता है।

    बागी नेताओं को भी मिल सकता है मौका

    सूत्रों के मुताबिकइस कैबिनेट विस्तार में भाजपा के कुछ बागी नेताओंसमाजवादी पार्टी से अलगहोकर आएनेताओं और सहयोगी दलों-राष्ट्रीय लोक दलRLDऔर अपना दल-के प्रतिनिधियों को भी जगह दी जा सकती है। संभावित नामों में पूजा पालमनोज पांडेय और महेंद्र सिंह जैसे नेताओं की चर्चा है।राजनीतिक विश्लेषकों कामानना है कि बागीनेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल कर भाजपा न सिर्फ विपक्ष की धार कमजोर करना चाहती हैबल्कि अपने राजनीतिक आधार को भी व्यापक बनाना चाहती है।

    चुनावी रणनीति से जुड़ा है विस्तार

    विशेषज्ञों के अनुसारयह कैबिनेट विस्तार केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि पूरी तरह राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। इससे सरकार को आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में सामाजिकक्षेत्रीय और जातिगत संतुलन साधने में मदद मिलेगी। नए चेहरों को मौका देकर संगठन के भीतर भी उत्साह बढ़ाया जा सकता है।हालांकिमंत्रिमंडल विस्तार की आधिकारिक तारीख अभी तय नहीं हुई हैलेकिन राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि आने वाले कुछ हफ्तों में इस पर मुहर लग सकती है। योगी सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है।