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  • युवाओं से लेकर विकास तक बड़े फैसले की तैयारी! UP कैबिनेट में 19 से ज्यादा प्रस्ताव, इलेक्ट्रिक बसों और एक्सप्रेसवे पर भी बड़ा ऐलान

    युवाओं से लेकर विकास तक बड़े फैसले की तैयारी! UP कैबिनेट में 19 से ज्यादा प्रस्ताव, इलेक्ट्रिक बसों और एक्सप्रेसवे पर भी बड़ा ऐलान


    उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश में युवाओं को रोजगार और प्रदेश के विकास को गति देने के लिए योगी सरकार कई बड़े फैसले लेने की तैयारी में है। मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में 19 से अधिक महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा और मंजूरी की संभावना है। इनमें युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने वाली योजना के साथ नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद और कई बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट शामिल हैं। सरकार की कोशिश है कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएं और प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन की सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जाए।

    कैबिनेट में सरदार वल्लभ भाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक विकास योजना को मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इस योजना के जरिए प्रदेश के युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा परिवहन विभाग के बेड़े को मजबूत करने के लिए करीब 400 करोड़ रुपए की लागत से नई इलेक्ट्रिक बसें खरीदने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इलेक्ट्रिक बसों के बढ़ने से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के साथ प्रदूषण कम करने की दिशा में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

    बैठक में जन सेवा केंद्र 4.0 परियोजना को भी मंजूरी मिल सकती है। जन सेवा केंद्रों के जरिए लोगों को आय प्रमाण पत्र जाति प्रमाण पत्र निवास प्रमाण पत्र सहित कई जरूरी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती है। जन सेवा केंद्र 3 की अवधि जून 2026 में समाप्त हो चुकी थी। अब नई व्यवस्था के तहत जन सेवा केंद्र 4.0 शुरू करने की तैयारी है।

    उत्तर प्रदेश पुलिस को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने आए हैं। जिला पुलिस इकाइयों के लिए पुराने और स्क्रैप वाहनों की जगह 1323 नए वाहन खरीदे जाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा पुलिस में कुशल खिलाड़ियों की भर्ती और बिना पारी पदोन्नति से जुड़े नियमों में संशोधन पर भी फैसला हो सकता है।

    औद्योगिक विकास के लिहाज से भी कैबिनेट बैठक काफी अहम मानी जा रही है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के पास सुल्तानपुर में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित करने के लिए 27225.33 लाख रुपए के प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है। झांसी लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना और गंगा एक्सप्रेसवे को मेरठ से हरिद्वार तक विस्तार देने से जुड़े प्रस्ताव भी बैठक में रखे जाएंगे। इन परियोजनाओं को मंजूरी मिलने से प्रदेश में कनेक्टिविटी और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    निजी अस्पतालों में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी सहायता नीति और विदेशी निवेश से जुड़े प्रस्ताव भी कैबिनेट के सामने रखे जाएंगे। इसके अलावा मुख्यमंत्री हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना के दिशा निर्देशों को मंजूरी मिलने की संभावना है। साक्षर भारत योजना से जुड़े कर्मचारियों की बकाया देनदारी के भुगतान और मैनपुरी में पर्यटन विकास के लिए भूमि हस्तांतरण जैसे प्रस्ताव भी एजेंडे में शामिल हैं।

    इन फैसलों के बीच युवाओं पर सरकार का विशेष फोकस भी दिखाई दे रहा है। वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले Gen-Z मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं को लेकर सरकार की सक्रियता बढ़ी है। कैबिनेट में प्रस्तावित फैसले अगर मंजूर होते हैं तो रोजगार पर्यटन परिवहन औद्योगिक विकास और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में प्रदेश को कई नई सौगातें मिल सकती हैं।

  • पहली बार यूपी में नेताओं को दी गई बुलेट प्रूफ जैकेट, 11 मंत्रियों समेत 52 नाम शामिल; जानिए किसे मिली कौन सी सुरक्षा

    पहली बार यूपी में नेताओं को दी गई बुलेट प्रूफ जैकेट, 11 मंत्रियों समेत 52 नाम शामिल; जानिए किसे मिली कौन सी सुरक्षा


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। योगी सरकार ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती समेत 52 नेताओं को बुलेट प्रूफ जैकेट उपलब्ध कराई है। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में राजनीतिक नेताओं को इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है। सूची में सत्ता पक्ष के नेताओं के साथ विपक्ष के प्रमुख चेहरे और अलग-अलग दलों से जुड़े कई नेता भी शामिल हैं।

    जानकारी के मुताबिक सुरक्षा मुख्यालय की ओर से इन बुलेट प्रूफ जैकेट की खरीद की गई है। एक जैकेट की कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये बताई जा रही है। पहले चरण में आठ नेताओं को जैकेट दी गई थी जबकि दूसरे चरण में 44 और नेताओं को यह सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराया गया है। इस तरह कुल 52 नेता अब बुलेट प्रूफ जैकेट पाने वालों की सूची में शामिल हो गए हैं। इनमें प्रदेश सरकार के 11 कैबिनेट मंत्री भी बताए जा रहे हैं।

    जिन प्रमुख नामों को जैकेट दी गई है उनमें मंत्री संजय निषाद नंद गोपाल गुप्ता नंदी ओम प्रकाश राजभर और अपर्णा यादव शामिल हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चर्चित भाजपा नेताओं संगीत सोम और सुरेश राणा का नाम भी सूची में बताया गया है। हालांकि सरकार ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया है कि किन विशेष परिस्थितियों को देखते हुए नेताओं को बुलेट प्रूफ जैकेट देने का फैसला किया गया। सुरक्षा मुख्यालय के एक अधिकारी के मुताबिक पहले बुलेट प्रूफ जैकेट सुरक्षा मानकों में शामिल नहीं थी लेकिन अब इसे सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है।

    इस फैसले को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सुरक्षा तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रदेश में कई नेताओं को पहले से ही अलग-अलग श्रेणियों की सुरक्षा उपलब्ध है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल 98 नेताओं और अन्य महत्वपूर्ण लोगों को विभिन्न सुरक्षा श्रेणियां मिली हुई हैं। इनमें सबसे अधिक लोगों को Y श्रेणी की सुरक्षा हासिल है जबकि कुछ लोगों को Y प्लस और एस्कॉर्ट के साथ अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान की गई है।

    राज्य की सबसे ऊंची सुरक्षा श्रेणियों में शामिल Z प्लस सुरक्षा पाने वालों में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा अखिलेश यादव और मायावती भी शामिल बताए गए हैं। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पूर्व सांसद मुरली मनोहर जोशी और विनय कटियार समेत कई अन्य प्रमुख नेताओं को भी इस श्रेणी में सुरक्षा दी गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेश राणा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश का नाम भी Z प्लस सुरक्षा सूची में बताया गया है।

    वहीं उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा को Z श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है। भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और प्रदेश सरकार के मंत्री नंद गोपाल नंदी समेत कई नेताओं को भी इसी स्तर की सुरक्षा हासिल है। दूसरी ओर ओम प्रकाश राजभर बेबी रानी मौर्य लक्ष्मी नारायण चौधरी और बलदेव सिंह औलख समेत कई नेताओं को Y प्लस श्रेणी की सुरक्षा दी गई है।

    मंत्री संजय निषाद को Y श्रेणी की सुरक्षा एस्कॉर्ट के साथ मिली हुई है। उनके अलावा कई सांसद विधायक पूर्व राज्यपाल और अन्य राजनीतिक हस्तियों को भी अलग-अलग श्रेणियों में सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है। बुलेट प्रूफ जैकेट के मामले में मंत्री संजय निषाद ने बताया कि उन्हें अभी इसे पहनने का प्रशिक्षण नहीं मिला है।

    कुल मिलाकर चुनावी वर्ष से पहले उत्तर प्रदेश में नेताओं की सुरक्षा को लेकर सरकार की तैयारियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। हालांकि बुलेट प्रूफ जैकेट बांटने के फैसले की विस्तृत वजह सरकार की ओर से सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में यह कदम सुरक्षा समीक्षा का हिस्सा है या चुनाव से पहले संभावित खतरे को देखते हुए एहतियाती व्यवस्था इसका स्पष्ट जवाब आने वाले समय में ही सामने आएगा।

  • उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा ऐलान, ग्रेजुएट छात्राओं के लिए स्कूटी योजना; 400 करोड़ का बजट स्वीकृत

    उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा ऐलान, ग्रेजुएट छात्राओं के लिए स्कूटी योजना; 400 करोड़ का बजट स्वीकृत


    उत्तरप्रदेश । उत्तर प्रदेश सरकार ने छात्राओं के सशक्तिकरण और प्रदेश के बुनियादी ढांचे को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना सहित कुल 18 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इस योजना के तहत प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में ग्रेजुएशन करने वाली मेधावी छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। इसके अलावा सरकार ने दो नए एक्सप्रेस-वे के निर्माण, इलेक्ट्रिक बसों की खरीद और कई विकास परियोजनाओं को भी मंजूरी प्रदान की।

    उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि इस योजना के लिए 400 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया गया है। योजना का लाभ उन छात्राओं को मिलेगा जिनके परिवार की वार्षिक आय 10 लाख रुपए तक है। हालांकि दिव्यांग छात्राओं, शहीद परिवारों की बेटियों और निराश्रित परिवारों की छात्राओं के लिए आय सीमा लागू नहीं होगी।

    योजना के तहत प्रत्येक विश्वविद्यालय और कॉलेज की टॉप 5 प्रतिशत छात्राओं को पेट्रोल स्कूटी दी जाएगी। सरकार स्कूटी के साथ उसका रजिस्ट्रेशन, बीमा, हेलमेट, आवश्यक एक्सेसरीज और 4 लीटर पेट्रोल भी उपलब्ध कराएगी। हालांकि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की जिम्मेदारी छात्राओं की होगी।

    कैबिनेट बैठक में प्रदेश के सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए दो बड़े एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई। पहला 333 किलोमीटर लंबा विंध्य एक्सप्रेस-वे प्रयागराज से सोनभद्र तक बनेगा। इसकी अनुमानित लागत 26,315 करोड़ रुपए होगी। यह एक्सप्रेस-वे प्रयागराज, मिर्जापुर, भदोही, वाराणसी, चंदौली और सोनभद्र को जोड़ते हुए बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमाओं तक बेहतर संपर्क उपलब्ध कराएगा। इसके बनने से प्रयागराज से सोनभद्र की यात्रा लगभग साढ़े छह घंटे से घटकर करीब सवा तीन घंटे रह जाएगी।

    दूसरी परियोजना 117 किलोमीटर लंबा विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेस-वे है, जिसकी लागत करीब 9,039 करोड़ रुपए होगी। यह पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को विंध्य एक्सप्रेस-वे से जोड़ेगा और पूर्वी उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई मजबूती देगा।

    कैबिनेट ने परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए 220 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद को भी मंजूरी दी है, जिस पर लगभग 400 करोड़ रुपए खर्च होंगे। वहीं वाराणसी में छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के लिए नए छात्रावासों के निर्माण, सहकारी ग्राम विकास बैंक को वित्तीय सहायता, महिला कल्याण विभाग की सेवा नियमावली में बदलाव और अन्य प्रशासनिक प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई।

    सरकार ने यह भी घोषणा की कि उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 3 से 6 अगस्त तक आयोजित होगा। इसी सत्र में संभल दंगों की जांच रिपोर्ट सदन में रखी जाएगी और अनुपूरक बजट भी पेश किया जाएगा।

    सरकार का कहना है कि इन फैसलों से शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, परिवहन और आधारभूत ढांचे के विकास को नई गति मिलेगी। वहीं विपक्ष इन योजनाओं के क्रियान्वयन और बजटीय प्रबंधन पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है।

  • योगी कार्यकाल में कानून-व्यवस्था का दावा मजबूत: मुठभेड़ों और गिरफ्तारी के आंकड़े बने सुर्खियां

    योगी कार्यकाल में कानून-व्यवस्था का दावा मजबूत: मुठभेड़ों और गिरफ्तारी के आंकड़े बने सुर्खियां

    नई दिल्ली /उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को लेकर किए गए पुलिस अभियानों के आंकड़े एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। सामने आए विवरण के अनुसार इस अवधि में राज्यभर में हजारों मुठभेड़ की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें बड़ी संख्या में अपराधियों की गिरफ्तारी, कई के घायल होने और कुछ मामलों में गंभीर परिणाम देखने को मिले। औसतन हर दिन कई मुठभेड़ होने का दावा किया गया है, जो प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिसिंग मॉडल पर व्यापक बहस को जन्म देता है।

    आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में पुलिस ने संगठित अपराध, गिरोहबंदी और गंभीर आपराधिक गतिविधियों पर लगातार कार्रवाई की है। हजारों मामलों में पुलिस और अपराधियों के बीच टकराव की स्थिति बनी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया। साथ ही कई अपराधी घायल भी हुए, जिससे यह संकेत मिलता है कि कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य में सक्रिय और आक्रामक रणनीति अपनाई गई है। इन कार्रवाइयों के दौरान पुलिस बल को भी नुकसान हुआ, जिसमें कुछ कर्मियों की जान जाने और कई के घायल होने की घटनाएं शामिल रहीं।

    प्रदेश के विभिन्न जोनों में इन कार्रवाइयों का स्तर अलग-अलग रहा। कुछ क्षेत्रों में मुठभेड़ों की संख्या अधिक दर्ज की गई, जबकि कुछ जगहों पर तुलनात्मक रूप से कम घटनाएं सामने आईं। पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जोन इस तरह की कार्रवाइयों में अधिक सक्रिय दिखाई दिए, जहां अपराधियों पर लगातार दबाव बनाए रखने के प्रयास किए गए। इन अभियानों में बड़े अपराधियों को पकड़ने और उनकी गतिविधियों को रोकने पर विशेष जोर दिया गया।

    इन आंकड़ों के साथ यह भी दावा किया जा रहा है कि पुलिस की सख्ती के चलते संगठित अपराध पर नियंत्रण में मदद मिली है और कई आपराधिक नेटवर्क प्रदेश छोड़ने या निष्क्रिय होने को मजबूर हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि कठोर कार्रवाई और कानूनी प्रावधानों के प्रभावी उपयोग से अपराधियों में भय का माहौल बना है। वहीं दूसरी ओर, इस तरह की कार्रवाइयों को लेकर समय-समय पर मानवाधिकार और पुलिसिंग के तरीकों पर सवाल भी उठते रहे हैं, जिससे यह मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित न रहकर सामाजिक और कानूनी बहस का हिस्सा बन गया है।

    कुल मिलाकर, पिछले नौ वर्षों में सामने आए ये आंकड़े उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर एक व्यापक तस्वीर पेश करते हैं, जिसमें एक तरफ अपराध पर नियंत्रण और पुलिस की सक्रिय भूमिका दिखाई देती है, तो दूसरी तरफ इस रणनीति की प्रकृति और प्रभाव पर अलग-अलग राय भी मौजूद हैं। यह पूरा विषय राज्य में सुरक्षा व्यवस्था के बदलते स्वरूप और उसके परिणामों को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • यूपी में पेट्रोल-डीजल महंगा होते ही नेताओं का ‘ई-रिक्शा और साइकिल मोड’, विधायक से सांसद तक दिखा अनोखा बदलाव

    यूपी में पेट्रोल-डीजल महंगा होते ही नेताओं का ‘ई-रिक्शा और साइकिल मोड’, विधायक से सांसद तक दिखा अनोखा बदलाव



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। शुक्रवार से लागू नए रेट के बाद लखनऊ में पेट्रोल 97.53 रुपए और डीजल 90.81 रुपए प्रति लीटर हो गया है। बढ़ती कीमतों के बीच नेताओं और अफसरों ने ईंधन बचाने के लिए नए तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं।

    सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बढ़ते दामों को लेकर तंज कसा है। उन्होंने X पर लिखा कि आगे बढ़ना है तो साइकिल ही बेहतर विकल्प है, और साइकिल से बेहतर कुछ नहीं हो सकता।

    वहीं दूसरी ओर, प्रधानमंत्री की ईंधन बचत की अपील का असर यूपी में साफ नजर आ रहा है। रामपुर में भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने गुरुवार को 4 ई-रिक्शा खरीदे हैं और अब वह गनर के साथ इन्हीं ई-रिक्शा से कार्यक्रमों में जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि उनके ई-रिक्शा उनके घर पर ही रहते हैं और शहर में आने-जाने के लिए उनका उपयोग किया जा रहा है।

    गोरखपुर में सांसद रवि किशन ने भी कार पूलिंग कर उदाहरण पेश किया। उन्होंने कुशीनगर सांसद विजय दुबे के साथ इलेक्ट्रिक कार में 25 किलोमीटर की दूरी तय की और खजनी पहुंचे। इस दौरान रवि किशन ने वीडियो बनाकर बताया कि पीएम मोदी की अपील के बाद ईंधन बचाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

    प्रदेश सरकार के कई मंत्री और अफसर भी इस अभियान में शामिल होते दिखे। लखनऊ में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आजाद अपनी फ्लीट छोड़कर बुलेट से सचिवालय पहुंचे। फिरोजाबाद में डीएम और उनका स्टाफ करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर ऑफिस पहुंचे। मुरादाबाद में कमिश्नर ऑन्जनेय कुमार सिंह ने साइकिल चलाकर कार्यालय पहुंचकर संदेश दिया कि ऊर्जा बचत जरूरी है।

    प्रयागराज में मेयर गणेश केसरवानी भी घर से साइकिल चलाकर नगर निगम पहुंचे और उन्होंने कहा कि ईंधन की बचत, प्राकृतिक संसाधनों का संतुलन और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना भविष्य के लिए जरूरी है।

    यूपी सरकार ने भी ऊर्जा बचत को लेकर सख्त फैसले लिए हैं। नए निर्देशों के अनुसार मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और अफसरों के काफिले में 50 प्रतिशत कटौती की जाएगी। सप्ताह में एक दिन सार्वजनिक परिवहन या मेट्रो/बस का उपयोग अनिवार्य होगा। साथ ही सरकारी बैठकें, सेमिनार और वर्कशॉप वर्चुअल आयोजित करने पर जोर दिया जाएगा।

  • ब्रज को बनाओ पूरी तरह सात्विक, प्रेमानंद महाराज की योगी सरकार से बड़ी मांग; मांस-मदिरा बैन पर फिर छिड़ी बहस

    ब्रज को बनाओ पूरी तरह सात्विक, प्रेमानंद महाराज की योगी सरकार से बड़ी मांग; मांस-मदिरा बैन पर फिर छिड़ी बहस



    नई दिल्ली। वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने एक बार फिर ब्रज क्षेत्र को मांस और मदिरा मुक्त बनाने की मांग उठाकर धार्मिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की उत्तर प्रदेश सरकार से अपील करते हुए कहा कि मथुरा, वृंदावन और पूरे ब्रज मंडल की पवित्रता बनाए रखने के लिए यहां मांस और शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

    अपने दैनिक सत्संग में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए प्रेमानंद महाराज ने कहा कि ब्रज केवल एक धार्मिक स्थान नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की लीलाभूमि है। उन्होंने कहा कि जिस धरती पर भगवान कृष्ण ने बाल लीलाएं कीं और प्रेम, भक्ति व करुणा का संदेश दिया, वहां मांस और मदिरा की बिक्री उचित नहीं मानी जा सकती। महाराज ने कहा कि ब्रज की पहचान उसकी आध्यात्मिकता और सात्विक संस्कृति से है, इसलिए इसकी गरिमा को बनाए रखना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।

    उन्होंने कहा कि हर साल लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से मथुरा, वृंदावन, बरसाना और गोवर्धन जैसे पवित्र स्थलों पर दर्शन और भक्ति के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में ब्रज क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह धार्मिक और शांतिपूर्ण होना चाहिए। प्रेमानंद महाराज का मानना है कि यदि पूरे ब्रज क्षेत्र को मांस और मदिरा मुक्त घोषित किया जाता है, तो इससे यहां की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी।

    गौरतलब है कि इससे पहले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी ब्रज क्षेत्र में शराब और मांस बिक्री पर रोक लगाने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने दिल्ली से मथुरा तक पदयात्रा निकालते हुए कहा था कि धार्मिक नगरी में शराब की दुकानों की मौजूदगी श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है।

    हालांकि, इस मुद्दे पर पहले विवाद भी हो चुके हैं। कुछ समय पहले मथुरा में कुछ युवकों ने कथित तौर पर जबरन शराब की दुकान बंद कराने की कोशिश की थी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया था। प्रशासन ने साफ किया था कि कानून हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।

    अब प्रेमानंद महाराज के ताजा बयान के बाद ब्रज क्षेत्र में मांस-मदिरा प्रतिबंध की मांग फिर सुर्खियों में आ गई है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय दे रहे हैं। कुछ लोग इसे ब्रज की धार्मिक पहचान से जोड़कर समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इस विषय पर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर संतुलित फैसला लिया जाना चाहिए।

  • मजदूरों को राहत: न्यूनतम वेतन में 1000 से 3000 रुपये तक इजाफा, नई दरें लागू

    मजदूरों को राहत: न्यूनतम वेतन में 1000 से 3000 रुपये तक इजाफा, नई दरें लागू


    नई दिल्ली। नोएडा में चल रहे श्रमिक आंदोलन और तनाव के बीच Yogi Adityanath सरकार ने मजदूरों के हित में बड़ा फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में 1000 रुपये से 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह नया शासनादेश 1 अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में लागू होगा।

    नए वेतन दर क्या हैं?
    सरकार द्वारा तय किए गए नए वेतन के अनुसार Gautam Buddh Nagar और Ghaziabad में अकुशल मजदूरी ₹11,313 से बढ़ाकर 13,690 रुपये कर दी गई है। अर्धकुशल मजदूरी 12,445 रुपये से बढ़कर 15,059 रुपये और कुशल मजदूरी 13,940 रुपये से बढ़कर 16,868 रुपये कर दी गई है। वहीं अन्य नगर निगम क्षेत्रों में अकुशल मजदूरी 13,006, रुपये अर्धकुशल 14,306 रुपये और कुशल रुपये 16,025 तय की गई है। अन्य जिलों में अकुशल मजदूरी रुपये 12,356, अर्धकुशल 13,591 रुपये और कुशल रुपये 15,224 निर्धारित की गई है।

    मजदूरों को मिली अंतरिम राहत
    सरकार का कहना है कि यह फैसला श्रमिकों और उद्योगों के बीच संतुलन बनाकर लिया गया है और इससे मजदूरों को फिलहाल अंतरिम राहत मिलेगी। आगे वेज बोर्ड के माध्यम से मजदूरी की व्यापक समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि न्यूनतम वेतन ₹20,000 किए जाने की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर इस तरह की झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं, जिनका कोई आधिकारिक आधार नहीं है। सरकार ने बताया कि केंद्र स्तर पर नए लेबर कोड के तहत राष्ट्रीय न्यूनतम ‘फ्लोर वेज’ तय करने की प्रक्रिया जारी है।

    20,000 रुपये न्यूनतम वेतन की खबरें गलत
    मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने जनता से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें और अफवाहों से बचें। साथ ही नियोक्ताओं से कहा गया है कि वे श्रमिकों को समय पर वेतन, ओवरटाइम का भुगतान, साप्ताहिक अवकाश, बोनस और सामाजिक सुरक्षा के सभी अधिकार सुनिश्चित करें, साथ ही महिला श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान का विशेष ध्यान रखें।

  • निवेश का बड़ा झटका: Puch AI का 25,000 करोड़ का MoU यूपी में सिर्फ चार दिन में रद्द

    निवेश का बड़ा झटका: Puch AI का 25,000 करोड़ का MoU यूपी में सिर्फ चार दिन में रद्द


    नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश में निवेशकों और सरकार के बीच बड़े समझौतों को लेकर जो उम्मीदें थीं, उन्हें उस वक्त झटका लगा जब राज्य सरकार ने ‘Puch AI’ कंपनी के साथ हुए 25,000 करोड़ रुपये के निवेश समझौते यानी MoU को महज चार दिनों में रद्द कर दिया। यह फैसला तब आया जब कंपनी की वित्तीय स्थिति और दस्तावेजों की गहन जांच में कई संदिग्ध पहलू सामने आए।

    Invest UP के CEO विजय किरन आनंद ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर MoU की समीक्षा की गई थी। कंपनी को नोटिस भेजकर उसका बिजनेस प्लान, वित्तीय स्थिति और Detailed Project Report (DPR) मांगी गई। जवाब देने के लिए कंपनी को केवल तीन दिन का समय दिया गया, लेकिन इस दौरान कंपनी की तरफ से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।

    सरकार की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कंपनी समय पर जरूरी दस्तावेज नहीं जमा कर सकी। वित्तीय स्थिति कमजोर पाई गई और निवेश के लिए फंड का स्रोत भी स्पष्ट नहीं था। इस वजह से यह निवेश प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही जोखिम भरा साबित हुआ।

    योगी सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि इतनी बड़ी परियोजना के लिए Puch AI कंपनी के पास न तो पर्याप्त वित्तीय क्षमता थी और न ही भरोसेमंद दस्तावेज। निवेश में किसी भी तरह के संभावित जोखिम से बचने के लिए सरकार ने MoU रद्द कर दिया।

    इस मामले ने राजनीतिक और आर्थिक दोनों ही स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। विपक्ष के नेताओं ने भी इस पर सवाल उठाए थे। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने 25,000 करोड़ रुपये के इस निवेश को लेकर सरकार को घेरा था।

    उत्तर प्रदेश सरकार लगातार राज्य में निवेश बढ़ाने के लिए बड़े-बड़े समझौते कर रही है। इसी कड़ी में Puch AI के साथ यह महत्त्वाकांक्षी निवेश प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि शुरुआती जांच में ही कंपनी की विश्वसनीयता पर सवाल उठे, जिसके चलते यह निवेश प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही रद्द कर दिया गया।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी किसी भी निवेश प्रोजेक्ट में पारदर्शिता और वित्तीय क्षमता को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि राज्य में आने वाले निवेश सुरक्षित और प्रभावी हों और किसी तरह का वित्तीय या कानूनी जोखिम राज्य को प्रभावित न करे।

    इस फैसले से यह संदेश गया कि यूपी सरकार बड़े निवेश प्रोजेक्ट्स में केवल भरोसेमंद और सक्षम कंपनियों के साथ ही आगे बढ़ेगी। Puch AI का मामला एक चेतावनी भी है कि वित्तीय और प्रबंधन संबंधी कमजोरियों वाले निवेश समझौतों को राज्य सरकार बढ़ावा नहीं देगी।

    अंततः, चार दिन में रद्द किया गया यह 25,000 करोड़ का MoU यह दिखाता है कि यूपी सरकार निवेशकों की विश्वसनीयता और परियोजनाओं की पारदर्शिता पर पूरी तरह ध्यान देती है और किसी भी तरह के जोखिम से राज्य को बचाने के लिए त्वरित और निर्णायक कदम उठाती है।

  • गाय का मांस बेचकर आप राम राज्य की स्थापना करेंगे, शंकराचार्य ने योगी सरकार को दिया 40 दिन का अल्टीमेटम

    गाय का मांस बेचकर आप राम राज्य की स्थापना करेंगे, शंकराचार्य ने योगी सरकार को दिया 40 दिन का अल्टीमेटम


    नई दिल्ली। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर सरकार गौ माता को राज्य माता घोषित नहीं करती है तो उसे छद्म हिंदू घोषित कर दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने गौ माता के मांस को भैंस का मांस बताकर बचाव किया, जो हिंदुत्व के खिलाफ है।

    शंकराचार्य ने कहा कि अब सरकार को हिंदू होने का प्रमाण देना होगा और वे 40 दिन में यह प्रमाण देने को कह रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि “गाय का मांस बेचकर आप डॉलर से राम राज्य की स्थापना करेंगे,” और यदि 10 मार्च तक गौ माता को राज्य माता घोषित नहीं किया गया तो वे दिल्ली नहीं जाएंगे बल्कि लखनऊ में संत महंत आचार्य इकट्ठा करके आगे का निर्णय लेंगे।

    अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी कहा कि हिंदू होने की पहली शर्त गो रक्षा है और सरकार को बताना होगा कि उन्होंने गौ सेवा के लिए क्या किया। उन्होंने यूपी सरकार को महाराष्ट्र और नेपाल से सीखने की नसीहत दी और कहा कि भारत से गौ मांस का निर्यात अधिकतर उत्तर प्रदेश से होता है।

    उन्होंने कहा कि 24 घंटे में उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण माँगा गया था, जिसे उन्होंने जवाब दिया और अब योगी सरकार को 40 दिन में हिंदू होने का प्रमाण देना होगा। शंकराचार्य ने साफ कहा कि अगर सरकार यह प्रमाण नहीं दे पाती तो उसे “कालनेमि”, “ढोंगी” और “छद्म हिंदू” कहा जाएगा।