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  • दिल्ली छात्र प्रदर्शन में पीएम मोदी की मां पर टिप्पणी का मामला, योगी आदित्यनाथ ने गलती स्वीकारने और माफी का किया जिक्र

    दिल्ली छात्र प्रदर्शन में पीएम मोदी की मां पर टिप्पणी का मामला, योगी आदित्यनाथ ने गलती स्वीकारने और माफी का किया जिक्र

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के लिए अभद्र शब्दों के इस्तेमाल से जुड़े मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जिस बेटी ने प्रधानमंत्री की माता के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था, उसने बाद में अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांग ली।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रा और उसके माता-पिता ने बाद में स्वीकार किया कि उससे गलती हुई थी। उन्होंने बताया कि छात्रा ने इसके बाद माफी भी मांगी। मुख्यमंत्री की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब छात्र प्रदर्शन के दौरान की गई उक्त टिप्पणी को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर चर्चा हो रही है।

    योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में युवाओं के भविष्य और उनके सामने मौजूद चुनौतियों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ लोग देश के युवाओं को भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि आखिर कुछ लोग भारत के भविष्य को प्रभावित करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं।

    उन्होंने इस संदर्भ में अर्बन नक्सलियों का भी उल्लेख किया और कहा कि उनके हाथों देश के भविष्य को बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से जुड़े मुद्दों को व्यापक दृष्टिकोण से देखने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि देश की युवा पीढ़ी को सही दिशा देना महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री की टिप्पणी में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई घटना के साथ राजनीतिक परिस्थितियों का भी संदर्भ दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को किसी भी प्रकार के भटकाव से बचाना आवश्यक है। उनके अनुसार, देश के भविष्य को लेकर युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है और उनके बीच जिम्मेदारी तथा सकारात्मक सोच को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

    योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि एक जिम्मेदार विपक्षी नेता के रूप में उनसे बेहतर आचरण की अपेक्षा थी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से खुद को अलग कर लिया है।

    अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने अमेठी और रायबरेली का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन दोनों क्षेत्रों की जनता ने हमेशा राजनीतिक घटनाक्रमों को समझते हुए अपना फैसला दिया है। इन इलाकों का राजनीतिक महत्व लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में रहा है और चुनावी परिस्थितियों में यहां के मतदाताओं के फैसले पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को लेकर की गई अभद्र टिप्पणी के मामले में मुख्यमंत्री ने छात्रा की ओर से बाद में माफी मांगे जाने को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि छात्रा और उसके माता-पिता ने गलती स्वीकार की और इसके बाद माफी मांगी गई।

    मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया में एक ओर छात्रा की ओर से की गई टिप्पणी का जिक्र रहा, वहीं दूसरी ओर उन्होंने युवाओं को राजनीतिक या वैचारिक प्रभाव से बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने देश के भविष्य के रूप में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए उनके सामने सही दिशा और जिम्मेदार सार्वजनिक व्यवहार की जरूरत बताई।

    इस पूरे घटनाक्रम में छात्र प्रदर्शन, प्रधानमंत्री की मां के खिलाफ की गई कथित अभद्र टिप्पणी, छात्रा की ओर से माफी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया प्रमुख बिंदु रहे। साथ ही मुख्यमंत्री ने विपक्षी राजनीति और राहुल गांधी के संदर्भ में भी अपनी बात रखी।

  • योगी आदित्यनाथ ने कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर सपा पर साधा निशाना, ‘पी’ की परिभाषा को लेकर दिया बड़ा बयान

    योगी आदित्यनाथ ने कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर सपा पर साधा निशाना, ‘पी’ की परिभाषा को लेकर दिया बड़ा बयान

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ के इकाना स्टेडियम में पूर्व मुख्यमंत्री और पद्म विभूषण कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कल्याण सिंह के राजनीतिक और सामाजिक योगदान को याद करते हुए समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सपा के पीडीए की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि समय के साथ राजनीतिक रंग बदलने वाले लोग ‘पी’ की अलग-अलग परिभाषाएं गढ़ते हैं।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले ‘पी’ को पिछड़े से जोड़ा गया, फिर पंडित से जोड़ा गया और एक दिन ऐसे लोग ‘पी’ की परिभाषा पाकिस्तान से भी करने लगेंगे। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी को समाजवादी पार्टी की राजनीतिक रणनीति और उसके पीडीए के दावे पर सीधे हमले के तौर पर देखा गया। उन्होंने कहा कि बदलते राजनीतिक समीकरणों के साथ विचार और परिभाषाएं बदलने वाले लोगों को जनता समझती है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कल्याण सिंह के जीवन और सार्वजनिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति का महत्व केवल उसके पद से निर्धारित नहीं होता। व्यक्ति अपनी सोच, कर्म, सिद्धांत और समाज के प्रति योगदान से बड़ा बनता है। उन्होंने कहा कि अतरौली के सामान्य किसान परिवार में जन्मे कल्याण सिंह ने संघर्ष और मेहनत के बल पर सार्वजनिक जीवन में अलग पहचान बनाई।

    योगी ने बताया कि कल्याण सिंह ने किसान और शिक्षक के रूप में काम करने के बाद विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद और राज्यपाल जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभाए। उन्होंने उनके जीवन को सादगी, संघर्ष, तप और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार, कल्याण सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में दबाव के बावजूद अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया।

    मुख्यमंत्री ने कल्याण सिंह के उस कथन को भी याद किया कि वह टूट सकते हैं, लेकिन झुक नहीं सकते। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने जीवन में इस विचार को व्यवहार में उतारा और गलत कार्यों के लिए किसी भी तरह के दबाव के आगे झुकने से इनकार किया।

    राम जन्मभूमि आंदोलन का उल्लेख करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कल्याण सिंह ने सत्ता से अधिक अपने सिद्धांतों को महत्व दिया। उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन का समर्थन किया और ऐसी परिस्थितियों में भी अपने राजनीतिक निर्णयों पर कायम रहे, जब उन्हें सत्ता गंवाने का जोखिम उठाना पड़ा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद कल्याण सिंह का योगदान और अधिक याद आता है। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन में संतों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद सहित विभिन्न संगठनों की भूमिका रही और कल्याण सिंह भी इस आंदोलन के महत्वपूर्ण राजनीतिक चेहरों में शामिल रहे।

    योगी ने कल्याण सिंह के निधन के समय की परिस्थितियों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली से लखनऊ पहुंचे और कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि दी। अंतिम यात्रा से जुड़े कार्यक्रमों में प्रदेश सरकार के मंत्रियों और अन्य नेताओं की मौजूदगी का भी उन्होंने उल्लेख किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि दी थी, जबकि समाजवादी पार्टी के नेतृत्व की ओर से प्रत्यक्ष रूप से श्रद्धांजलि देने या संवेदना व्यक्त करने की पहल नहीं की गई। योगी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि कल्याण सिंह का जीवन सामाजिक मूल्यों, सिद्धांतों और सनातन परंपराओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है। पुण्यतिथि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उनके राजनीतिक जीवन और सार्वजनिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का विषय रहेगा।

  • सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी से की मुलाकात, उत्तर प्रदेश के विकास और राजनीतिक स्थिति पर बातचीत

    सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी से की मुलाकात, उत्तर प्रदेश के विकास और राजनीतिक स्थिति पर बातचीत

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास पहुंचे, जहां दोनों नेताओं के बीच उत्तर प्रदेश से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत हुई। इस मुलाकात में प्रदेश के विकास कार्यों, प्रशासनिक विषयों और मौजूदा राजनीतिक स्थिति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के बीच हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब उत्तर प्रदेश में कई विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक कार्यों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। दोनों नेताओं की बातचीत में प्रदेश से जुड़े प्रमुख विकास कार्यों की प्रगति और उनसे संबंधित विषयों पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, बैठक में किन-किन मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच समय-समय पर उत्तर प्रदेश से जुड़े विषयों को लेकर बैठकें होती रही हैं। राज्य में केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन, बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट, निवेश, रोजगार और विकास कार्यों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।

    बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति से जुड़े विषयों पर भी बातचीत होने की संभावना जताई गई है। हालांकि, दोनों नेताओं की बैठक के बाद किसी विशेष राजनीतिक फैसले या चर्चा का आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए मुलाकात के राजनीतिक पहलू को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मिलने उनके आवास पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच भी उत्तर प्रदेश से जुड़े राजनीतिक और संगठनात्मक विषयों पर बातचीत होने की संभावना है। मुख्यमंत्री की दिल्ली यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष से मुलाकात को राज्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है और राष्ट्रीय राजनीति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य में केंद्र और प्रदेश सरकार के स्तर पर चल रही योजनाओं और विकास परियोजनाओं की प्रगति पर नियमित समन्वय की जरूरत रहती है। मुख्यमंत्री की प्रधानमंत्री से मुलाकात में ऐसे विषयों पर चर्चा होना इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा सकता है।

    प्रदेश में बुनियादी ढांचे, औद्योगिक निवेश, सड़क और परिवहन व्यवस्था, रोजगार तथा विभिन्न केंद्रीय योजनाओं से जुड़े कार्य लगातार सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की बैठक के दौरान इन क्षेत्रों में चल रहे कार्यों की स्थिति और आगे की प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया जाना महत्वपूर्ण है।

    फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात के बाद किसी नए निर्णय या घोषणा की जानकारी सामने नहीं आई है। बैठक में उत्तर प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई है। आने वाले दिनों में यदि सरकार या पार्टी की ओर से बैठक के संबंध में विस्तृत जानकारी जारी की जाती है, तो मुलाकात में चर्चा किए गए मुद्दों की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

  • 'ठाकुर सज्जन सिंह' से घर-घर मशहूर हुए अनुपम श्याम, बीमारी के दौर में योगी सरकार ने की थी 20 लाख रुपये की मदद

    'ठाकुर सज्जन सिंह' से घर-घर मशहूर हुए अनुपम श्याम, बीमारी के दौर में योगी सरकार ने की थी 20 लाख रुपये की मदद

    नई दिल्ली । अभिनेता अनुपम श्याम ओझा भारतीय फिल्म और टेलीविजन जगत में अपने दमदार अभिनय, प्रभावशाली आवाज और अलग अंदाज के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। खास तौर पर लोकप्रिय धारावाहिक ‘मन की आवाज प्रतिज्ञा’ में ठाकुर सज्जन सिंह के किरदार ने उन्हें घर-घर पहचान दिलाई। फिल्मों से लेकर छोटे पर्दे तक अपने अभिनय की मजबूत छाप छोड़ने वाले अनुपम श्याम ने अपने करियर में कई तरह के किरदार निभाए। हालांकि, जीवन के अंतिम वर्षों में उन्हें गंभीर बीमारी और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसी दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से मिली आर्थिक सहायता भी चर्चा में रही थी।

    अनुपम श्याम का जन्म 20 सितंबर 1957 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में हुआ था। बचपन से ही उनका रुझान अभिनय की ओर था। शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अवध विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की। इसके बाद लखनऊ स्थित भारतेंदु नाट्य अकादमी से रंगमंच और अभिनय का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के बाद वह दिल्ली के श्रीराम सेंटर रंगमंडल से जुड़े और थिएटर के जरिए अभिनय की बारीकियों को समझा। रंगमंच पर अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने अभिनय के बड़े सपने के साथ मुंबई का रुख किया।

    मुंबई में शुरुआती दौर आसान नहीं था। उन्हें छोटे-छोटे किरदारों से शुरुआत करनी पड़ी, लेकिन उनकी प्रतिभा ने धीरे-धीरे फिल्म निर्माताओं का ध्यान खींचा। उनके फिल्मी करियर की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय फिल्म ‘लिटिल बुद्धा’ से हुई। इसके बाद शेखर कपूर की चर्चित फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ में भी उन्होंने अभिनय किया। आगे चलकर वह ‘लगान’, ‘नायक’, ‘शक्ति’, ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’, ‘वांटेड’, ‘हल्ला बोल’ और ‘रक्त चरित्र’ जैसी फिल्मों का हिस्सा बने। कई फिल्मों में उन्होंने दबंग और नकारात्मक भूमिकाओं को प्रभावी तरीके से पर्दे पर उतारा।

    हालांकि फिल्मों में लंबे समय तक काम करने के बाद भी उन्हें सबसे बड़ी लोकप्रियता वर्ष 2009 में शुरू हुए धारावाहिक ‘मन की आवाज प्रतिज्ञा’ से मिली। इसमें ठाकुर सज्जन सिंह की भूमिका ने उनकी पहचान को एक अलग मुकाम दिया। उनका संवाद बोलने का अंदाज और किरदार की प्रभावशाली प्रस्तुति दर्शकों को बेहद पसंद आई। इस भूमिका की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि बड़ी संख्या में दर्शक उन्हें उनके वास्तविक नाम के बजाय ठाकुर सज्जन सिंह के नाम से पहचानने लगे। बाद में उन्होंने ‘प्रतिज्ञा 2’, ‘कृष्णा चली लंदन’ और ‘डोली अरमानों की’ सहित कई धारावाहिकों में अभिनय किया।

    जीवन के अंतिम दौर में अनुपम श्याम गंभीर किडनी संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे। उन्हें नियमित डायलिसिस की जरूरत पड़ती थी और लंबे इलाज के कारण आर्थिक परेशानियां भी बढ़ गई थीं। इसी दौरान उनके परिवार की ओर से मदद की अपील की गई थी। अनुपम श्याम ने बाद में एक बातचीत में बताया था कि उनकी बीमारी की जानकारी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंची, जिसके बाद इलाज के लिए 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता अस्पताल के खाते में भेजी गई। अभिनेता ने इस मदद के लिए आभार भी जताया था और बताया था कि इससे उनके इलाज को आगे बढ़ाने में सहायता मिली।

    इलाज के दौरान उनकी तबीयत में कुछ समय के लिए सुधार आया और उन्होंने दोबारा काम शुरू करने की कोशिश की। वह ‘मन की आवाज प्रतिज्ञा 2’ की शूटिंग से भी जुड़े, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां लगातार बनी रहीं। आखिरकार 8 अगस्त 2021 को मुंबई के एक अस्पताल में 63 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उनके जाने के बाद फिल्म और टेलीविजन जगत में शोक की लहर दौड़ गई। अनुपम श्याम भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन ठाकुर सज्जन सिंह सहित उनके यादगार किरदार और अभिनय की विरासत दर्शकों के बीच लंबे समय तक जीवित रहेगी।

  • जनता दर्शन में सख्त दिखे सीएम योगी, बोले- जनसमस्याओं के समाधान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

    जनता दर्शन में सख्त दिखे सीएम योगी, बोले- जनसमस्याओं के समाधान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

    लखनऊ। सावन के पहले सोमवार को धार्मिक कार्यक्रमों और विधानसभा के मानसून सत्र की व्यस्तताओं के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन में लोगों की समस्याएं सुनीं। विभिन्न जिलों से पहुंचे लोगों से उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनके प्रार्थना पत्र संबंधित अधिकारियों को सौंपे और समयबद्ध एवं प्रभावी निस्तारण के निर्देश दिए।

    पुलिस मामलों पर दिखाई सख्ती

    जनता दर्शन के दौरान पुलिस से जुड़ी कई शिकायतें सामने आने पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने मुकदमों में दबाव बनाने और आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी जैसी शिकायतों पर नाराजगी जताते हुए शासन स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन जिलों से इस तरह की शिकायतें लगातार आ रही हैं, वहां संबंधित पुलिस अधीक्षकों की जवाबदेही तय की जाए।

    पीड़ितों के साथ संवेदनशील व्यवहार के निर्देश

    सीएम योगी ने अधिकारियों से कहा कि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। प्रत्येक पीड़ित की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए तथा समयबद्ध तरीके से समाधान सुनिश्चित किया जाए।

    राजस्व और पुलिस मामलों पर विशेष फोकस
    मुख्यमंत्री ने राजस्व और पुलिस से जुड़े मामलों को प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पारिवारिक विवादों में पहले आपसी संवाद और समझौते का प्रयास किया जाए, उसके बाद आवश्यकता होने पर विधिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनसमस्याओं का समाधान पारदर्शिता, संवेदनशीलता और गुणवत्ता के साथ किया जाए, ताकि लोगों को संतोषजनक न्याय और राहत मिल सके।

  • युवा उद्यमिता को नई दिशा देने की तैयारी, 'यूथ अड्डा' से आत्मनिर्भरता पर यूपी सरकार का बड़ा फोकस

    युवा उद्यमिता को नई दिशा देने की तैयारी, 'यूथ अड्डा' से आत्मनिर्भरता पर यूपी सरकार का बड़ा फोकस


    नई दिल्ली । बदलती अर्थव्यवस्था और डिजिटल युग में युवाओं की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं। पारंपरिक नौकरी की बजाय बड़ी संख्या में युवा अब स्टार्टअप, नवाचार, डिजिटल कारोबार और स्वरोजगार को अपने भविष्य के रूप में देख रहे हैं। इसी बदलते परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं को उद्यमिता की ओर प्रोत्साहित करने के लिए ‘यूथ अड्डा’ पहल को विस्तार देने की दिशा में काम तेज किया है। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को केवल रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाना है।

    राज्य सरकार का मानना है कि आज की पीढ़ी केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उसे ऐसा मंच चाहिए जहां विचारों को व्यवसाय में बदलने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और बाजार तक पहुंच की सुविधा एक ही स्थान पर मिल सके। इसी सोच के साथ ‘यूथ अड्डा’ को एक समग्र उद्यमिता मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां बिजनेस आइडिया से लेकर वित्तीय सहयोग और व्यवसाय विस्तार तक की पूरी प्रक्रिया में सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    इस पहल का मुख्य फोकस विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, पॉलीटेक्निक संस्थानों और आईटीआई में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर रखा गया है। सरकार चाहती है कि छात्र अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद केवल नौकरी की तलाश तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी क्षमता और नवाचार के आधार पर नए उद्यम स्थापित करने की दिशा में भी आगे बढ़ें। इसके लिए उन्हें प्रारंभिक स्तर से ही व्यवसाय योजना तैयार करने, बाजार की जरूरतों को समझने और उद्यम संचालन की जानकारी दी जाएगी।

    डिजिटल अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इस मंच पर आधुनिक तकनीकों से जुड़े प्रशिक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया है। युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, इलेक्ट्रिक व्हीकल, डिजिटल कॉमर्स, ई-कॉमर्स और अन्य उभरती तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश के युवा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप अपने कौशल को विकसित कर सकें और भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के लिए तैयार रहें।

    ‘यूथ अड्डा’ केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा। यहां युवाओं को व्यवसाय योजना तैयार करने, परियोजना रिपोर्ट बनाने, बैंक ऋण प्राप्त करने, उद्यम पंजीकरण, जीएसटी प्रक्रिया, डिजिटल ब्रांडिंग, ऑनलाइन मार्केटिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ने तक निरंतर सहयोग प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। साथ ही नए उद्यमियों के जोखिम को कम करने के लिए विभिन्न फ्रेंचाइजी मॉडल और अनुभवी विशेषज्ञों की मेंटरशिप भी उपलब्ध कराई जाएगी।

    राज्य सरकार इस पहल को केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखना चाहती। लक्ष्य है कि ‘यूथ अड्डा’ की सुविधाएं प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचें, ताकि ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं को भी समान अवसर मिल सकें। महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय उत्पादों और सूक्ष्म उद्योगों को भी इस पहल से जोड़कर उन्हें पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन संबंधी सहयोग उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सके।

    इस मंच पर वर्षभर विभिन्न गतिविधियां आयोजित करने की भी योजना है। बैंकर्स मीट, स्टार्टअप क्लिनिक, टेक्नोलॉजी वर्कशॉप, बिजनेस आइडिएशन कार्यक्रम, फाउंडर्स टॉक और उद्योग विशेषज्ञों के संवाद जैसे आयोजन युवाओं को व्यावहारिक अनुभव और नेटवर्किंग का अवसर देंगे। सरकार ने वर्ष 2027 तक लाखों युवाओं को इस पहल से जोड़ने, हजारों नए उद्यम स्थापित कराने और बड़े स्तर पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

    सरकार का मानना है कि यदि युवा रोजगार मांगने की बजाय रोजगार उपलब्ध कराने वाले बनते हैं, तो इससे प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। साथ ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को भी मजबूती मिलेगी और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी। इसी उद्देश्य से विभिन्न विभागों, वित्तीय संस्थानों और उद्योग विशेषज्ञों के सहयोग से ‘यूथ अड्डा’ को एक दीर्घकालिक उद्यमिता इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है।

  • योगी कैबिनेट विस्तार में दिखा सामाजिक संतुलन.. अगले चुनाव के लिए पॉलिटिकल टोन सेट

    योगी कैबिनेट विस्तार में दिखा सामाजिक संतुलन.. अगले चुनाव के लिए पॉलिटिकल टोन सेट


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath Government) के तीसरे और आखिरी मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet Expansion) के साथ ही बीजेपी (BJP) ने अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) के लिए पॉलिटिकल टोन सेट कर दिया है. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रविवार को लखनऊ के लोक भवन में 6 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई और दो मौजूदा मंत्रियों का प्रमोशन किया. जिन 6 नए मंत्रियों ने शपथ ली उनमें से 5 दलित और ओबीसी समुदाय से हैं, जबकि एक मंत्री ब्राह्मण बिरादरी से.

    यह मंत्रिमंडल विस्तार किसी नए प्रयोग के बजाय स्पष्ट तौर पर ‘सोशल इंजीनियरिंग’ की रणनीति के तहत तैयार किया गया है. बीजेपी ने जातीय संतुलन साधने के लिए बेहद संतुलित और सोच-समझकर नए मंत्रियों के चुनाव किए हैं. पार्टी का फोकस ब्राह्मण, जाट, दलित, पासी, वाल्मीकि, लोध और अन्य पिछड़ा वर्ग से आने वाली अन्य जाति समुदायों पर रहा है, ताकि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक और सामाजिक पकड़ को और मजबूत किया जा सके. यही कारण रहा कि मंत्रियों के नामों को अंतिम रूप देने से पहले लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में देर रात तक बीजेपी नेताओं का मंथन और बैठकों का दौर चला।

    इस दौरान पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ पिछड़े और दलित वर्गों के प्रमुख समुदायों को प्रतिनिधित्व देने पर विशेष ध्यान दिया गया. भाजपा ने 2027 चुनाव से पहले इस मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए सामाजिक और जातीय समीकरण साधने और अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की काट खोजने की कोशिश की है. मार्च 2022 में जब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में योगी 2.0 सरकार बनी थी, तब कुल 52 मंत्रियों ने शपथ ली थी।


    कैबिनेट में 22 सवर्ण, 25 OBC और 10 दलित मंत्री

    उस समय मंत्रिमंडल में 21 सवर्ण, 20 ओबीसी और 8 दलित नेताओं को जगह दी गई थी. इसके अलावा 1 आदिवासी, 1 मुस्लिम और 1 सिख चेहरे को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था. उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्य संख्या के लिहाज से राज्य के मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत कुल 60 मंत्री हो सकते हैं. अब तीसरे और अंतिम मंत्रिमंडल विस्तार के बाद योगी सरकार के सभी 60 मंत्री पद भर चुके हैं. मौजूदा मंत्रिमंडल में 22 सवर्ण, 25 ओबीसी और 10 दलित मंत्री हैं. इसके अलावा 1 आदिवासी, 1 मुस्लिम और 1 सिख मंत्री भी शामिल हैं।


    सवर्ण समीकरण में ब्राह्मण और ठाकुर चेहरे अहम

    यूपी कैबिनेट में 2022 में सवर्ण वर्ग से बनाए गए मंत्रियों में 7 ब्राह्मण, 8 ठाकुर, 3 वैश्य, 2 भूमिहार और 1 कायस्थ नेता शामिल थे. बीजेपी ने उस समय ब्राह्मण संतुलन साधने के लिए ब्रजेश पाठक को डिप्टी सीएम बनाया था, जबकि जितिन प्रसाद को कैबिनेट मंत्री बनाकर पीडब्ल्यूडी विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. साल 2024 में योगी मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार किया गया था, जिसमें 4 नए मंत्रियों को शामिल किया गया. इनमें 2 ओबीसी, 1 दलित और 1 ब्राह्मण नेता को जगह मिली थी।

    उस दौरान समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन तोड़कर बीजेपी के साथ आए सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) प्रमुख ओम प्रकाश राजभर, सपा से बीजेपी में वासपी करने वाले दारा सिंह चौहान, राष्ट्रीय लोकदल (RLD) से अनिल कुमार और साहिबाबाद से बीजेपी विधायक सुनील कुमार शर्मा को मंत्री बनाया गया था. उस विस्तार के बाद मंत्रिमंडल की संख्या 52 से बढ़कर 56 हो गई थी।


    विधायकों के सांसद चुने जाने के बाद खाली हुईं सीटें

    लोकसभा चुनाव 2024 के बाद योगी सरकार के दो मंत्री जितिन प्रसाद और अनूप वाल्मीकि संसद पहुंच गए. दोनों ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. जितिन प्रसाद शाहजहांपुर से सांसद बनने के बाद केंद्र सरकार में मंत्री बनाए गए, जबकि दलित चेहरा अनूप वाल्मीकि हाथरस से सांसद चुने गए. इन इस्तीफों के बाद योगी मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या 56 से घटकर 54 हो गई थी।

    कैबिनेट में जितिन प्रसाद का रिप्लेसमेंट मनोज पांडे
    जितिन प्रसाद के केंद्र की राजनीति में जाने के बाद योगी मंत्रिमंडल में ब्राह्मण मंत्रियों की संख्या 8 से घटकर 7 रह गई थी. अब हालिया मंत्रिमंडल विस्तार में रायबरेली जिले के ऊंचाहार से सपा के बागी विधायक मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाकर बीजेपी ने एक बार फिर ब्राह्मण संतुलन साधने की कोशिश की है. मनोज पांडेय के बागी होने के बाद सपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था और वर्तमान में वह निर्दलीय विधायक के रूप में विधानसभा के सदस्य हैं. मनोज पांडे को योगी कैबिनेट में काफी हद तक जितिन प्रसाद के रिप्लेसमेंट के तौर पर देखा जा रहा है. बीजेपी ने दो साल बाद ही सही, लेकिन योगी कैबिनेट में फिर एक बड़ा ब्राह्मण चेहरा शामिल कर सामाजिक और जातीय समीकरणों को संतुलित करने का संदेश दिया है।


    मंत्रिमंडल विस्तार के केंद्र में है जातिगत समीकरण

    मंत्रिमंडल में शामिल किए गए नए सदस्यों में कन्नौज की तिर्वा विधानसभा सीट से विधायक कैलाश राजपूत और अलीगढ़ की खैर विधानसभा सीट से विधायक सुरेंद्र दिलेर शामिल हैं. वाल्मीकि समुदाय से आने वाले सुरेंद्र दिलेर को भाजपा द्वारा दलित मतदाताओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जबकि कैलाश राजपूत को मंत्री बनाकर पार्टी ने लोध मतदाताओं के बीच अपने समर्थन को मजबूत करने की कोशिश की है. शपथ लेने वाले अन्य मंत्रियों में पासी समुदाय से आने वाले फतेहपुर की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान और वाराणसी के एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा शामिल हैं, जिन्हें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के करीबी माना जाता है।

    हंसराज विश्वकर्मा को शामिल कर बीजेपी ने पूर्वांचल में गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक को साधने का स्पष्ट संदेश दिया है. हंसराज 34 वर्षों से सक्रिय राजनीति में हैं. उन्होंने 1989 में बूथ स्तर से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था और राम मंदिर आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी. वहीं, कृष्णा पासवान के जरिए पार्टी ने गैर-जाटव दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश की है. कृष्णा पासवान ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी. वह चार बार की विधायक हैं और दो बार जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं. वह भाजपा की प्रमुख दलित महिला चेहरा मानी जाती हैं।


    भूपेंद्र चौधरी करेंगे वेस्ट यूपी व जाटों का प्रतिनिधित्व

    इसके अलावा बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी की कैबिनेट में वापसी पश्चिमी यूपी में जाट प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की कोशिश मानी जा रही है. उत्तर प्रदेश के प्रमुख जाट नेताओं में शामिल भूपेंद्र चौधरी मुरादाबाद के रहने वाले हैं और लंबे समय तक संघ और भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं. चौधरी वर्ष 2016 में पहली बार विधान परिषद सदस्य बने. 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें पंचायती राज राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया और 2019 में कैबिनेट मंत्री, पंचायती राज की जिम्मेदारी मिली. उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने के पीछे की वजह सरकार और संगठन के बीच सामंजस्य बनाए रखना है।


    दो मंत्रियों को प्रमोशन देने में छिपा है सियासी संदेश

    सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल को मिली जिम्मेदारियां इस बात का संकेत हैं कि सरकार बदलाव के साथ निरंतरता बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है. सोमेंद्र तोमर मेरठ दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक और ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत राज्य मंत्री ​थे, सरकार में उनका कद बढ़ाकर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कर दिया गया है. इसी तरह कानपुर देहात की सिकंदरा विधानसभा सीट से विधायक अजीत पाल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री थे. उनका भी प्रमोशन करके राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।