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  • योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर निशाना, बोले सत्ता परिवर्तन का रास्ता जनादेश से निकलता है, अराजकता से नहीं

    योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर निशाना, बोले सत्ता परिवर्तन का रास्ता जनादेश से निकलता है, अराजकता से नहीं

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत में बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन का सपना देखने वाली शक्तियों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता हासिल करने का रास्ता जनता के जनादेश से होकर गुजरता है, न कि अराजकता के जरिए। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ शक्तियां चुनाव सुधार, न्याय और लोकतंत्र जैसे मुद्दों की आड़ लेकर देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही हैं।

    योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में सत्ता परिवर्तन का सपना देखने वाली ताकतें युवाओं की ऊर्जा का इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण के बजाय अराजकता फैलाने के लिए करना चाहती हैं। उन्होंने युवाओं को देश के भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनकी शक्ति का उपयोग राष्ट्रीय विकास के लिए होना चाहिए, न कि किसी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में लोकतंत्र, चुनाव सुधार और न्याय से जुड़े नारों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों का सहारा लेकर देश में अस्थिरता का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती जनता के विश्वास पर निर्भर करती है और इसे राजनीतिक षड्यंत्रों के जरिए कमजोर नहीं किया जा सकता।

    योगी आदित्यनाथ ने भारत के लोकतंत्र की तुलना एक विशाल वटवृक्ष से करते हुए कहा कि इसकी जड़ें जनविश्वास में हैं। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था इतनी मजबूत है कि उसे षड्यंत्रों और अस्थिरता पैदा करने वाली कोशिशों से हिलाया नहीं जा सकता। उनके बयान में जनता के विश्वास और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सत्ता परिवर्तन का प्रमुख आधार बताया गया।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में राजनीतिक विरोधियों पर यह आरोप भी लगाया कि वे सत्ता से दूर रहने के बाद अब अराजकता के माध्यम से राजनीतिक परिस्थितियों को बदलना चाहते हैं। उन्होंने ऐसे प्रयासों को सियासी साजिश करार देते हुए कहा कि देश को अस्थिरता की ओर धकेलकर सत्ता हासिल करने की कोशिश सफल नहीं होनी चाहिए।

    अपने बयान में योगी आदित्यनाथ ने कुछ राजनीतिक शक्तियों के लिए मारीच और कालनेमि जैसे पौराणिक पात्रों का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि जनता ने राजनीतिक दलों और नेताओं को पहचानकर ही उन्हें सत्ता से दूर रखा है। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और किसी भी राजनीतिक दल को सत्ता हासिल करने के लिए जनादेश के अलावा दूसरे रास्ते नहीं अपनाने चाहिए।

    योगी आदित्यनाथ की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब देश में चुनाव सुधार और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। उनके संदेश में इन मुद्दों को लेकर सक्रिय शक्तियों पर देश में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, उनके बयान में किसी विशेष घटना या कथित साजिश के समर्थन में अलग से कोई विस्तृत प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश के अंत में कहा कि भारत की जनता देश को अराजकता की आग में झोंककर सत्ता हासिल करने की कोशिशों को सफल नहीं होने देगी। उन्होंने युवाओं की भूमिका को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में राजनीतिक बदलाव का आधार जनता का विश्वास और उसका जनादेश होना चाहिए।

  • रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन, योगी आदित्यनाथ बोले- अभावों से संघर्ष कर सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की प्रेरक कहानी

    रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन, योगी आदित्यनाथ बोले- अभावों से संघर्ष कर सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की प्रेरक कहानी

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में अधिक समय बिताने के बजाय अच्छी पुस्तकों को पढ़ने की आदत विकसित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया पर प्रतिदिन पांच से सात घंटे बिताने वाले लोग यदि इसमें से एक-दो घंटे भी पुस्तकें पढ़ने के लिए निकालें, तो उनके जीवन को नई दिशा मिल सकती है। सोशल मीडिया पर रील बनाकर लाइक्स जुटाने की तुलना में वास्तविक जीवन में आगे बढ़ने के प्रयास अधिक उपयोगी हैं। उन्होंने महापुरुषों की जीवनियां और आत्मकथाएं पढ़ने को संघर्षों से प्रेरणा प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को लखनऊ स्थित लोकभवन सभागार में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक ऐसे व्यक्ति की जीवनयात्रा को सामने लाती है, जिसने अभावों को अपनी कमजोरी या आगे बढ़ने में बाधा नहीं बनने दिया। संघर्ष, परिश्रम और पुरुषार्थ के बल पर रामनाथ कोविंद देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचे। मुख्यमंत्री के अनुसार, उनकी आत्मकथा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बन सकती है।
    योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में पुस्तकालयों के विस्तार और पढ़ने की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से प्रत्येक ग्राम पंचायत में पुस्तकालय की व्यवस्था की जा रही है। प्रदेश में 57,600 ग्राम सचिवालय बन चुके हैं और इनमें पुस्तकालय के लिए एक कमरा निर्धारित किया गया है। इन स्थानों पर गांव के बच्चे अध्ययन कर रहे हैं। इसके साथ ही डिजिटल लाइब्रेरी विकसित करने का काम भी किया जा रहा है। बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों से लेकर महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों तक पुस्तकालयों का विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि रामनाथ कोविंद की आत्मकथा भी व्यापक स्तर पर पुस्तकालयों तक पहुंचनी चाहिए और सरकार इस दिशा में प्रयास करेगी।
    मुख्यमंत्री ने पुस्तक मेलों में लोगों की भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि शुरुआत में आयोजकों को आशंका थी कि मौजूदा दौर में लोग पुस्तकें खरीदने में कितनी रुचि दिखाएंगे। हालांकि, लखनऊ में आयोजित पुस्तक मेले में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इसके बाद गोरखपुर में उससे भी अधिक पुस्तकें बिकीं। हाल में लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में लगे पुस्तक मेले में भी युवाओं और विद्यार्थियों ने अच्छी भागीदारी की। उन्होंने कहा कि लोगों में पढ़ने की रुचि मौजूद है, जरूरत उन्हें उपयुक्त मंच और अवसर उपलब्ध कराने की है।
    रामनाथ कोविंद की जीवनयात्रा का उल्लेख करते हुए योगी आदित्यनाथ ने बताया कि उनका जन्म कानपुर के परौंख गांव में हुआ था और बचपन में ही उन्होंने अपनी मां को खो दिया था। उन्होंने गांव के विद्यालय से पढ़ाई शुरू की और उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद अधिवक्ता के रूप में गरीबों तथा वंचितों की आवाज बने। इसके बाद उन्होंने भाजपा संगठन, राज्यसभा, बिहार के राज्यपाल और राष्ट्रपति के रूप में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों से पीछे हटने के बजाय उनका सामना करना ही महानता की पहचान है।
    उन्होंने यह भी कहा कि सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने के बावजूद रामनाथ कोविंद का अपनी जन्मभूमि परौंख से जुड़ाव बना रहा। वह अवसर मिलने पर गांव जाते हैं और पुराने साथियों के साथ चाय तथा चाट बेचने वालों से भी उनके संबंध कायम हैं। उन्होंने गांव में शिक्षा सुविधाओं के विकास के लिए प्रयास किए। वहां विद्यालय भवन को विकसित करके राज्य सरकार को सौंपा गया, जिसे आगे आवासीय विद्यालय के रूप में विकसित किया गया। मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम के जन्मभूमि प्रेम का उदाहरण देते हुए कहा कि जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं।
    उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि रामनाथ कोविंद की आत्मकथा सार्वजनिक जीवन में शुचिता, सादगी और अहंकार से दूर रहने की प्रेरणा देती है। उनके अनुसार, व्यक्ति कितना भी बड़ा पद हासिल कर ले, उसके संस्कार और विचार नहीं बदलने चाहिए। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि कानपुर के छोटे से गांव के गरीब परिवार में जन्मा व्यक्ति अपनी योग्यता और कार्यक्षमता के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकता है। उन्होंने इसे भारतीय गणतंत्र की खूबसूरती और रामनाथ कोविंद के जीवन को लोकतांत्रिक मूल्यों तथा पारदर्शिता का उदाहरण बताया।
    विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने पूर्व राष्ट्रपति की जीवनयात्रा को ‘कच्चे घर, पक्के इरादे’ का उदाहरण बताया और विधानसभा सदस्यों के लिए पुस्तक की 500 प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक कपिश मेहरा ने कहा कि प्रदेश के विद्यालयों और पुस्तकालयों में अच्छी हिंदी पुस्तकों की पहुंच बढ़ी है और किताबें बच्चों तक पहुंच रही हैं।
    कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत के गायन से हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामनाथ कोविंद को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। उनकी पत्नी सविता कोविंद का भी स्वागत किया गया। इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति ने अतिथियों के साथ अपनी आत्मकथा के हिंदी संस्करण का विमोचन किया।
  • योगी आदित्यनाथ ने देवीपाटन मंदिर में कन्या पूजन कर बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन को राम राज्य का आधार बताया

    योगी आदित्यनाथ ने देवीपाटन मंदिर में कन्या पूजन कर बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन को राम राज्य का आधार बताया

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा और अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर बलरामपुर स्थित देवीपाटन मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने नवदुर्गा के स्वरूप में नौ कन्याओं का पूजन किया। कन्याओं को तिलक लगाने के साथ चुनरी ओढ़ाई गई। मंदिर परिसर में आयोजित ‘शिक्षा की उड़ान’ पहल के अंतर्गत मुख्यमंत्री ने स्कूली बच्चों को स्टडी टेबल, आशीर्वाद पत्र और स्टेशनरी किट वितरित कीं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन देना राम राज्य की स्थापना का मूल आधार है।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले पांचवीं कक्षा तक पहुंचने से पहले ही हर पांचवीं बेटी स्कूल छोड़ देती थी। उस समय 60 से 70 प्रतिशत बच्चे नंगे पैर विद्यालय जाते थे। स्कूलों में शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था। उन्होंने कहा कि सरकार ने कार्यभार संभालने के बाद बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, स्वच्छ पेयजल और गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन की व्यवस्था की।

    योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के माध्यम से प्रदेश के 1.60 करोड़ परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को हर साल दो जोड़ी यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्वेटर, स्कूल बैग और पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं। कार्यक्रम में शिक्षा और बालिकाओं के विकास से जुड़े प्रयासों पर भी जोर दिया गया। ‘शिक्षा की उड़ान’ के तहत बच्चों को अध्ययन के लिए आवश्यक सामग्री देकर उनकी पढ़ाई को प्रोत्साहित किया गया।

    महिला सशक्तिकरण के विषय पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं में महिलाओं को संपत्ति का मालिकाना हक देने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत मकानों की रजिस्ट्री तथा धनराशि परिवार की महिला मुखिया के नाम पर दी जा रही है। उन्होंने बताया कि एक करोड़ से अधिक परिवारों को वितरित की गई घरौनियों में भी महिलाओं को मालिकाना अधिकार मिला है। इसके अलावा उज्ज्वला योजना और तीन करोड़ से अधिक शौचालयों के निर्माण को महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े प्रयासों के रूप में प्रस्तुत किया।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों की विकास प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसके साथ ही विराट किसान मेले का शुभारंभ भी किया गया। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर की चाबियां और कीटनाशक छिड़काव करने वाले यंत्र वितरित किए गए। इन गतिविधियों के माध्यम से कृषि क्षेत्र से जुड़े उपकरणों और सुविधाओं को किसानों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया गया।

    मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को ट्रैक सूट देकर सम्मानित किया। वहीं, बेसिक विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को स्टेशनरी किट प्रदान की गईं। कार्यक्रम में देवीपाटन मंदिर के महंत मिथिलेश नाथ, विधायक कैलाश नाथ शुक्ला, पल्टूराम और रामप्रताप वर्मा सहित जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर कन्या पूजन, बालिका शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, किसानों को उपकरणों के वितरण और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए।

  • यूपी चुनाव से पहले दिल्ली पहुंचे योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात में चुनाव और राज्य के मुद्दों पर चर्चा

    यूपी चुनाव से पहले दिल्ली पहुंचे योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात में चुनाव और राज्य के मुद्दों पर चर्चा

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार, 26 सितंबर को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हुई है। मुलाकात के कारण राज्य की राजनीति में चुनावी तैयारियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच इससे पहले भी इस साल मुलाकातें हो चुकी हैं।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिल्ली दौरे को उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में बैठक के दौरान हुई चर्चाओं का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा सामने नहीं आया है। ऐसे में मुलाकात के एजेंडे को लेकर सामने आई अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याओं को तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।

    उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के बीच हुई बैठक ने राज्य के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर स्वाभाविक रूप से ध्यान आकर्षित किया है। मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे और प्रधानमंत्री से मुलाकात के बीच चुनावी तैयारियों से जुड़े विषयों पर चर्चा की अटकलें लगाई जा रही हैं।

    मुलाकात से एक दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ग्रेटर नोएडा में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 में शामिल हुए थे। इस दौरान उत्तर प्रदेश में निवेश से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने रूस, वियतनाम, बेलारूस, जापान और सिंगापुर सहित भागीदार देशों की कंपनियों के साथ बैठक की थी और प्रदेश में रक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, विमानन, मेडिकल डिवाइस, कृषि तथा विनिर्माण क्षेत्र में निवेश का आमंत्रण दिया था।

    दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री की केंद्रीय नेतृत्व के साथ अन्य बैठकों की भी जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद उनकी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से भी मुलाकात प्रस्तावित थी।

    योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री मोदी के बीच उत्तर प्रदेश को लेकर संवाद पहले भी होता रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, मुख्यमंत्री ने 11 जून 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। इससे पहले 8 अगस्त 2026 को भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी। इन मुलाकातों की आधिकारिक जानकारी में मुख्य रूप से दोनों नेताओं के मिलने की पुष्टि की गई थी।

    वर्तमान दिल्ली दौरा ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। राज्य सरकार और केंद्रीय नेतृत्व के बीच होने वाली बैठकों को इसी व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक संदर्भ में देखा जा रहा है।

    फिलहाल 26 सितंबर की मुलाकात में किन-किन विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई, इसे लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए बैठक को लेकर सामने आ रही चुनावी रणनीति संबंधी चर्चाओं को अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। इतना स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और यह मुलाकात उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हुई है।

  • यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो बना वैश्विक मंच, सीएम योगी बोले- परंपरा और तकनीक से पॉसिबिलिटी को प्रॉस्पेरिटी में बदला

    यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो बना वैश्विक मंच, सीएम योगी बोले- परंपरा और तकनीक से पॉसिबिलिटी को प्रॉस्पेरिटी में बदला

    नई दिल्ली । ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में शुक्रवार से चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह आयोजन उत्तर प्रदेश की औद्योगिक, पारंपरिक और तकनीकी क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि ट्रेड शो प्रदेश की परंपरा और तकनीक को एक मंच पर लाकर वैश्विक बाजार से जोड़ने का काम कर रहा है।

    मुख्यमंत्री ने ट्रेड शो में पहुंचे 90 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों, विदेशी खरीदारों और प्रदर्शकों का स्वागत किया। उन्होंने जापान, सिंगापुर और बेलारूस के राजदूतों तथा उच्चायुक्तों के प्रति भी आभार जताया। उनके मुताबिक इस बार करीब 600 विदेशी खरीदार और लगभग डेढ़ लाख बी2बी विजिटर आयोजन में शामिल होने वाले हैं।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश की प्रमुख ताकत उसकी परंपरा और उद्यमशीलता में है। इसी सोच के तहत प्रदेश के पारंपरिक उद्योगों और स्थानीय उत्पादों को वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट यानी ओडीओपी के माध्यम से पहचान देने का प्रयास किया गया है। अलग-अलग जिलों के विशिष्ट उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने पर काम किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश से दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात विभिन्न देशों को किया जा रहा है। उनके अनुसार यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो इसी बदलाव को प्रदर्शित करने वाला महत्वपूर्ण मंच बन गया है।

    इस बार ट्रेड शो करीब 36 हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में आयोजित किया गया है। इसमें 2400 से अधिक प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं। यहां उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों के साथ आधुनिक तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग, एमएसएमई और नवाचार से जुड़े उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं।

    योगी ने कहा कि इस आयोजन के जरिए छोटे उद्यमियों, कारीगरों, बुनकरों और एमएसएमई को सीधे वैश्विक बाजार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। इससे उत्पादकों को बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है और बिचौलियों की भूमिका कम करने की संभावना भी बनती है। उन्होंने ट्रेड शो को केवल व्यापारिक आयोजन के बजाय उत्तर प्रदेश में हो रहे बदलाव को दुनिया के सामने रखने वाला मंच बताया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक प्रदेश के हस्तशिल्प, बुनकरों और पारंपरिक कारीगरों को पर्याप्त मंच नहीं मिल पाया। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो उनके उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक हुनर और सांस्कृतिक विरासत अब बड़े कारोबार से जुड़ रहे हैं।

    अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने अमित शाह के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने की प्रक्रिया के दौरान पारंपरिक उद्योगों की क्षमता को पहचानने पर जोर दिया गया था। उन्होंने कहा कि ओडीओपी इसी सोच के तहत उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि ट्रेड शो में ऑस्ट्रिया, रूस, बेलारूस, वियतनाम और फ्रांस समेत कई देशों की भागीदारी है। उनके अनुसार इन देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी, तकनीक हस्तांतरण और संयुक्त उपक्रम की संभावनाओं पर काम करने का अवसर मिल रहा है।

    उन्होंने कहा कि भारत के विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उत्तर प्रदेश को भी मिल रहा है। प्रदेश अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करने और वैश्विक निर्यात की संभावनाएं बढ़ाने पर जोर दे रहा है। योगी ने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो उत्तर प्रदेश की परंपरा, उद्योग और वैश्विक बाजार से बढ़ते जुड़ाव का प्रतीक बन रहा है।

  • 2027 चुनाव के बाद क्या होगी योगी आदित्यनाथ की भूमिका, PM पद की अटकलों पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया रुख

    2027 चुनाव के बाद क्या होगी योगी आदित्यनाथ की भूमिका, PM पद की अटकलों पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया रुख


    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भविष्य की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। खास तौर पर यह सवाल उठ रहा है कि 2027 के चुनाव के बाद योगी आदित्यनाथ की भूमिका क्या होगी और क्या वह राष्ट्रीय राजनीति में कोई बड़ी जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। प्रधानमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों के बीच मुख्यमंत्री ने अपनी प्राथमिकता स्पष्ट की है।

    एक इंटरव्यू में योगी आदित्यनाथ से पूछा गया कि 2027 के बाद वह खुद को राष्ट्रीय राजनीति में कहां देखते हैं और क्या प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल होना चाहते हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके लिए जिम्मेदारी और देशहित सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी है, जिसे वह बड़ी जिम्मेदारी मानते हैं।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान उत्तर प्रदेश को आगे बढ़ाने पर है। उन्होंने राज्य के आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक विकास को अपनी प्राथमिकता बताया। उनके जवाब में प्रधानमंत्री पद के लिए किसी तरह की दावेदारी सामने नहीं आई। मुख्यमंत्री ने अपनी मौजूदा जिम्मेदारी को ही केंद्र में रखते हुए उत्तर प्रदेश की सेवा और बेहतर शासन पर जोर दिया।

    2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे पर भी उनसे सवाल किया गया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग का फैसला संगठन से जुड़ा विषय है। मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी जिम्मेदारी सरकार की योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाना है।

    उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का फायदा समाज के हर वर्ग, जिले और परिवार तक पहुंचना जरूरी है। उनके अनुसार प्रदेश के प्रत्येक वर्ग का विकास होना चाहिए और लोग राज्य के विकास में अपना योगदान दे सकें, यह भी महत्वपूर्ण है।

    इंटरव्यू के दौरान अयोध्या के बाद काशी और मथुरा पर ध्यान केंद्रित किए जाने को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या, काशी और मथुरा उत्तर प्रदेश की विरासत का हिस्सा हैं। उनके मुताबिक विरासत का संरक्षण और विकास एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।

    मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ धाम का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2021 में इसके उद्घाटन के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां पहुंचे। उनके अनुसार इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला। नाव चलाने वालों, दुकानदारों, पुजारियों, ऑटो चालकों, होटल संचालकों और होम स्टे से जुड़े लोगों को इससे काम मिलने की बात उन्होंने कही।

    योगी आदित्यनाथ ने धार्मिक स्थलों के विकास को केवल आस्था से जोड़कर नहीं देखा, बल्कि स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से भी जोड़ा। उनका कहना था कि विरासत को संरक्षित करने के साथ विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।

    2027 के चुनाव से पहले योगी की भूमिका को लेकर अलग-अलग राजनीतिक चर्चाएं सामने आ रही हैं, लेकिन प्रधानमंत्री पद को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने भविष्य की किसी भूमिका का दावा नहीं किया। उन्होंने फिलहाल उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी, विकास और शासन व्यवस्था को ही अपनी प्राथमिकता बताया।

    इस तरह 2027 के बाद उनकी भूमिका को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच योगी आदित्यनाथ का मौजूदा रुख उत्तर प्रदेश की सेवा और राज्य को आर्थिक, सामाजिक तथा प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।

  • पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन पर काशी में विशेष पूजा, राजनाथ सिंह और योगी ने शुरू की सेवा संकल्प बाइक यात्रा

    पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन पर काशी में विशेष पूजा, राजनाथ सिंह और योगी ने शुरू की सेवा संकल्प बाइक यात्रा

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर वाराणसी में विशेष धार्मिक और सेवा कार्यक्रम आयोजित किए गए। काशी विश्वनाथ धाम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान समेत कई प्रमुख नेताओं ने पूजा-अर्चना की। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दीर्घायु और मंगलकामना के लिए विशेष अनुष्ठान किए गए।

    काशी विश्वनाथ मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा की गई। 11 हवन कुंडों पर आहुतियां दी गईं और बाबा विश्वनाथ का महारुद्राभिषेक किया गया। नेताओं ने मंदिर में विधि-विधान से पूजन कर प्रधानमंत्री के लिए मंगलकामना की। वाराणसी में प्रधानमंत्री के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रमों में धार्मिक आयोजन के साथ सेवा और जनसंपर्क से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल किए गए हैं।

    जन्मदिन के अवसर पर वाराणसी से वडनगर तक सेवा संकल्प बाइक यात्रा भी शुरू की गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यात्रा को हरी झंडी दिखाई। इस यात्रा का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन से जुड़े कार्यक्रमों के तहत सेवा और जनसंपर्क गतिविधियों को आगे बढ़ाना है। यात्रा में बड़ी संख्या में युवा और बाइक सवार शामिल हुए हैं।

    वाराणसी और वडनगर को इस आयोजन में विशेष रूप से जोड़ा गया है। वडनगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मस्थान है, जबकि वाराणसी उनका संसदीय क्षेत्र है। इसी वजह से दोनों स्थानों पर जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। वडनगर से भी वाराणसी की दिशा में बाइक यात्रा रवाना की गई है। इस आयोजन के जरिए दोनों शहरों को सेवा संकल्प अभियान से जोड़ा गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के मौके पर देश के अलग-अलग हिस्सों में भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। वाराणसी में धार्मिक अनुष्ठान और बाइक यात्रा के अलावा सेवा गतिविधियों पर जोर दिया गया। वहीं गुजरात के वडनगर में भी पूजा-अर्चना और अन्य कार्यक्रम हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से जुड़े आयोजनों को भी अभियान का हिस्सा बनाया गया है।

    वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से जुड़े कई प्रमुख नेता भी मौजूद रहे। राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ, चंद्रबाबू नायडू और चिराग पासवान की मौजूदगी में काशी विश्वनाथ धाम में पूजा हुई। कार्यक्रम में धार्मिक अनुष्ठान के साथ सेवा संकल्प यात्रा को भी जोड़ा गया। प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर आयोजित इन कार्यक्रमों के जरिए वाराणसी और वडनगर को एक साथ जोड़ा गया है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। इस वर्ष उनके 76वें जन्मदिन के साथ उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। जन्मदिन के मौके पर देशभर में सेवा, रक्तदान, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य सामाजिक गतिविधियां आयोजित की गईं। वाराणसी का कार्यक्रम इन्हीं आयोजनों की कड़ी में प्रमुख रहा, जहां पूजा-अर्चना के बाद सेवा संकल्प बाइक यात्रा को आगे बढ़ाया गया।

  • वाराणसी की सड़कों पर सीवर का पानी, विदेशी पर्यटक भी परेशान, अखिलेश यादव ने योगी सरकार की व्यवस्था पर उठाए सवाल

    वाराणसी की सड़कों पर सीवर का पानी, विदेशी पर्यटक भी परेशान, अखिलेश यादव ने योगी सरकार की व्यवस्था पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । वाराणसी के भेलूपुर स्थित शिवाला इलाके में सीवर का पानी सड़कों और आसपास के घरों तक पहुंचने से लोगों की परेशानी बढ़ गई। सड़कों और गलियों में गंदा पानी जमा होने के कारण स्थानीय लोगों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। काशी घूमने पहुंचे विदेशी पर्यटक भी जलभराव वाले रास्तों से गुजरते नजर आए।

    शिवाला क्षेत्र में सीवर का पानी सड़क पर जमा होने के साथ आसपास की गलियों में भी फैल गया। कई स्थानों पर पानी घरों के आसपास तक पहुंच गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, जलभराव के कारण रोजमर्रा के काम प्रभावित हुए और आवागमन में भी परेशानी हुई। अस्सी क्षेत्र के कुछ रास्तों पर भी जलभराव की स्थिति सामने आई।

    वाराणसी में सामने आई इस स्थिति को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए शहर की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। वीडियो में शिवाला इलाके की स्थिति और गंदे पानी से होकर गुजरते लोगों को दिखाया गया था।

    मामला सामने आने के बाद जलकल विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के निर्देश पर अधिकारियों ने प्रभावित इलाके का निरीक्षण किया। टीम ने पुरानी ट्रंक सीवर लाइन और कोनिया सीवेज पंपिंग स्टेशन का भी निरीक्षण किया।

    जांच के दौरान कुछ पंप बंद मिले। इसके बाद संबंधित विभाग के साथ समन्वय कर खराब पड़े पंपों को ठीक कराने का काम शुरू किया गया। अधिकारियों की कार्रवाई के बाद बंद पंपों को दोबारा चालू कराया गया।

    नगर निगम के अनुसार, करीब डेढ़ घंटे में पंप फिर से चलने लगे। इसके बाद सड़कों और गलियों में जमा सीवर के पानी को निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई। इससे प्रभावित इलाकों में जमा पानी को हटाया गया और आवागमन की परेशानी को दूर करने का प्रयास किया गया।

    वाराणसी के अलग-अलग हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से जलभराव और सीवर से जुड़ी शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। शिवाला और अस्सी क्षेत्र की स्थिति के बाद नगर निगम की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। खास तौर पर उन इलाकों में समस्या सामने आई जहां स्थानीय लोगों के साथ काशी घूमने आने वाले पर्यटक भी पहुंचते हैं।

    शिवाला में सीवर का पानी सड़क पर जमा होने के दौरान विदेशी पर्यटकों को भी उसी रास्ते से गुजरना पड़ा। इससे इलाके में मौजूद लोगों के साथ बाहर से आए पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    नगर निगम ने तत्काल समस्या से निपटने के बाद भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए स्थायी ड्रेनेज प्लान तैयार करने की बात कही है। विभाग की ओर से पंपों की स्थिति की जांच और सीवर व्यवस्था को लेकर की गई कार्रवाई के बाद तत्काल जमा पानी निकालने का काम पूरा किया गया।

    इस पूरे घटनाक्रम में एक ओर जलभराव और सीवर के पानी को लेकर स्थानीय लोगों की परेशानी सामने आई, वहीं दूसरी ओर मामले को लेकर अखिलेश यादव ने सरकार पर राजनीतिक तंज कसा। उनके वीडियो साझा करने के बाद संबंधित विभाग ने मौके पर कार्रवाई करते हुए बंद पंपों को चालू कराया और जमा पानी निकालने का काम शुरू किया।

  • दिल्ली छात्र प्रदर्शन में पीएम मोदी की मां पर टिप्पणी का मामला, योगी आदित्यनाथ ने गलती स्वीकारने और माफी का किया जिक्र

    दिल्ली छात्र प्रदर्शन में पीएम मोदी की मां पर टिप्पणी का मामला, योगी आदित्यनाथ ने गलती स्वीकारने और माफी का किया जिक्र

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के लिए अभद्र शब्दों के इस्तेमाल से जुड़े मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जिस बेटी ने प्रधानमंत्री की माता के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था, उसने बाद में अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांग ली।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रा और उसके माता-पिता ने बाद में स्वीकार किया कि उससे गलती हुई थी। उन्होंने बताया कि छात्रा ने इसके बाद माफी भी मांगी। मुख्यमंत्री की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब छात्र प्रदर्शन के दौरान की गई उक्त टिप्पणी को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर चर्चा हो रही है।

    योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में युवाओं के भविष्य और उनके सामने मौजूद चुनौतियों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ लोग देश के युवाओं को भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि आखिर कुछ लोग भारत के भविष्य को प्रभावित करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं।

    उन्होंने इस संदर्भ में अर्बन नक्सलियों का भी उल्लेख किया और कहा कि उनके हाथों देश के भविष्य को बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से जुड़े मुद्दों को व्यापक दृष्टिकोण से देखने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि देश की युवा पीढ़ी को सही दिशा देना महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री की टिप्पणी में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई घटना के साथ राजनीतिक परिस्थितियों का भी संदर्भ दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को किसी भी प्रकार के भटकाव से बचाना आवश्यक है। उनके अनुसार, देश के भविष्य को लेकर युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है और उनके बीच जिम्मेदारी तथा सकारात्मक सोच को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

    योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि एक जिम्मेदार विपक्षी नेता के रूप में उनसे बेहतर आचरण की अपेक्षा थी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से खुद को अलग कर लिया है।

    अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने अमेठी और रायबरेली का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन दोनों क्षेत्रों की जनता ने हमेशा राजनीतिक घटनाक्रमों को समझते हुए अपना फैसला दिया है। इन इलाकों का राजनीतिक महत्व लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में रहा है और चुनावी परिस्थितियों में यहां के मतदाताओं के फैसले पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को लेकर की गई अभद्र टिप्पणी के मामले में मुख्यमंत्री ने छात्रा की ओर से बाद में माफी मांगे जाने को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि छात्रा और उसके माता-पिता ने गलती स्वीकार की और इसके बाद माफी मांगी गई।

    मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया में एक ओर छात्रा की ओर से की गई टिप्पणी का जिक्र रहा, वहीं दूसरी ओर उन्होंने युवाओं को राजनीतिक या वैचारिक प्रभाव से बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने देश के भविष्य के रूप में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए उनके सामने सही दिशा और जिम्मेदार सार्वजनिक व्यवहार की जरूरत बताई।

    इस पूरे घटनाक्रम में छात्र प्रदर्शन, प्रधानमंत्री की मां के खिलाफ की गई कथित अभद्र टिप्पणी, छात्रा की ओर से माफी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया प्रमुख बिंदु रहे। साथ ही मुख्यमंत्री ने विपक्षी राजनीति और राहुल गांधी के संदर्भ में भी अपनी बात रखी।

  • योगी आदित्यनाथ ने कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर सपा पर साधा निशाना, ‘पी’ की परिभाषा को लेकर दिया बड़ा बयान

    योगी आदित्यनाथ ने कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर सपा पर साधा निशाना, ‘पी’ की परिभाषा को लेकर दिया बड़ा बयान

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ के इकाना स्टेडियम में पूर्व मुख्यमंत्री और पद्म विभूषण कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कल्याण सिंह के राजनीतिक और सामाजिक योगदान को याद करते हुए समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सपा के पीडीए की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि समय के साथ राजनीतिक रंग बदलने वाले लोग ‘पी’ की अलग-अलग परिभाषाएं गढ़ते हैं।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले ‘पी’ को पिछड़े से जोड़ा गया, फिर पंडित से जोड़ा गया और एक दिन ऐसे लोग ‘पी’ की परिभाषा पाकिस्तान से भी करने लगेंगे। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी को समाजवादी पार्टी की राजनीतिक रणनीति और उसके पीडीए के दावे पर सीधे हमले के तौर पर देखा गया। उन्होंने कहा कि बदलते राजनीतिक समीकरणों के साथ विचार और परिभाषाएं बदलने वाले लोगों को जनता समझती है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कल्याण सिंह के जीवन और सार्वजनिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति का महत्व केवल उसके पद से निर्धारित नहीं होता। व्यक्ति अपनी सोच, कर्म, सिद्धांत और समाज के प्रति योगदान से बड़ा बनता है। उन्होंने कहा कि अतरौली के सामान्य किसान परिवार में जन्मे कल्याण सिंह ने संघर्ष और मेहनत के बल पर सार्वजनिक जीवन में अलग पहचान बनाई।

    योगी ने बताया कि कल्याण सिंह ने किसान और शिक्षक के रूप में काम करने के बाद विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद और राज्यपाल जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभाए। उन्होंने उनके जीवन को सादगी, संघर्ष, तप और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार, कल्याण सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में दबाव के बावजूद अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया।

    मुख्यमंत्री ने कल्याण सिंह के उस कथन को भी याद किया कि वह टूट सकते हैं, लेकिन झुक नहीं सकते। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने जीवन में इस विचार को व्यवहार में उतारा और गलत कार्यों के लिए किसी भी तरह के दबाव के आगे झुकने से इनकार किया।

    राम जन्मभूमि आंदोलन का उल्लेख करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कल्याण सिंह ने सत्ता से अधिक अपने सिद्धांतों को महत्व दिया। उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन का समर्थन किया और ऐसी परिस्थितियों में भी अपने राजनीतिक निर्णयों पर कायम रहे, जब उन्हें सत्ता गंवाने का जोखिम उठाना पड़ा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद कल्याण सिंह का योगदान और अधिक याद आता है। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन में संतों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद सहित विभिन्न संगठनों की भूमिका रही और कल्याण सिंह भी इस आंदोलन के महत्वपूर्ण राजनीतिक चेहरों में शामिल रहे।

    योगी ने कल्याण सिंह के निधन के समय की परिस्थितियों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली से लखनऊ पहुंचे और कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि दी। अंतिम यात्रा से जुड़े कार्यक्रमों में प्रदेश सरकार के मंत्रियों और अन्य नेताओं की मौजूदगी का भी उन्होंने उल्लेख किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि दी थी, जबकि समाजवादी पार्टी के नेतृत्व की ओर से प्रत्यक्ष रूप से श्रद्धांजलि देने या संवेदना व्यक्त करने की पहल नहीं की गई। योगी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि कल्याण सिंह का जीवन सामाजिक मूल्यों, सिद्धांतों और सनातन परंपराओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है। पुण्यतिथि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उनके राजनीतिक जीवन और सार्वजनिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का विषय रहेगा।