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  • 8 जुलाई को काशी से शिक्षकों को बड़ी सौगात देंगे मुख्यमंत्री योगी, 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा' योजना का होगा शुभारंभ, लाखों परिवारों को मिलेगा स्वास्थ्य सुरक्षा कवच

    8 जुलाई को काशी से शिक्षकों को बड़ी सौगात देंगे मुख्यमंत्री योगी, 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा' योजना का होगा शुभारंभ, लाखों परिवारों को मिलेगा स्वास्थ्य सुरक्षा कवच

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षकों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 8 जुलाई को वाराणसी दौरे के दौरान ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा’ योजना का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इस योजना के माध्यम से बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के पात्र शिक्षकों तथा उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य सरकार का उद्देश्य शिक्षकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और गंभीर बीमारियों के उपचार में आने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।

    यह योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की तर्ज पर संचालित की जाएगी। इसके तहत पात्र लाभार्थी देशभर में सूचीबद्ध अस्पतालों में बिना नकद भुगतान के उपचार प्राप्त कर सकेंगे। योजना के अंतर्गत मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं और उपचार संबंधी लाभ आयुष्मान भारत योजना के अनुरूप होंगे, जिससे शिक्षकों और उनके परिवारों को व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध हो सकेगी।

    योजना के प्रभावी और पारदर्शी संचालन के लिए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है। पात्र लाभार्थियों का पंजीकरण, सत्यापन और अनुमोदन ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए विशेष डेटा संग्रह पोर्टल विकसित किया गया है, जहां शिक्षक अपना विवरण दर्ज कर रहे हैं। डिजिटल प्रणाली अपनाने का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है, ताकि पात्र लाभार्थियों को बिना अनावश्यक विलंब के योजना का लाभ मिल सके।

    बेसिक शिक्षा विभाग के लिए तैयार किए गए पोर्टल पर अब तक लाखों लाभार्थी अपना विवरण दर्ज करा चुके हैं। आवेदन के बाद संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा जानकारी का सत्यापन किया जाएगा, जबकि अंतिम स्वीकृति जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के स्तर पर दी जाएगी। अनुमोदन के पश्चात लाभार्थियों का विवरण राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली से एकीकृत किया जाएगा, जिसके बाद आधार आधारित ई-केवाईसी पूरी कर डिजिटल कार्ड डाउनलोड किया जा सकेगा।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए भी ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस श्रेणी के शिक्षकों के आवेदन का सत्यापन संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य करेंगे और अंतिम अनुमोदन जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा प्रदान किया जाएगा। इसके बाद लाभार्थियों का डेटा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की प्रणाली से जोड़ा जाएगा। सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शिक्षक डिजिटल कार्ड प्राप्त कर योजना के तहत कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।

    राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से शिक्षकों और उनके परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान आर्थिक राहत मिलेगी। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच अधिक आसान और प्रभावी बनेगी। डिजिटल व्यवस्था के कारण आवेदन से लेकर लाभ प्राप्त करने तक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुविधाजनक होगी।

    सरकार इस योजना का दायरा आगे और बढ़ाने की तैयारी भी कर रही है। आगामी चरण में उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों और कर्मचारियों को भी योजना से जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए अलग ऑनलाइन डेटा संग्रह पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिससे विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं कर्मचारी भी इस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का लाभ प्राप्त कर सकें। इस विस्तार के बाद राज्य में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े बड़ी संख्या में कार्मिकों को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य पूरा किया जाएगा।

  • राम भक्तों पर गोली चलाने वाले आज आस्था की बात कर रहे, जनता ने बदली राजनीति की दिशा: रामपुर में बोले योगी आदित्यनाथ

    राम भक्तों पर गोली चलाने वाले आज आस्था की बात कर रहे, जनता ने बदली राजनीति की दिशा: रामपुर में बोले योगी आदित्यनाथ

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामपुर में 690 करोड़ रुपये की लागत वाली 102 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे और राम भक्तों के खिलाफ कार्रवाई करते थे, वही आज आस्था की बात करते दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसे जनता की लोकतांत्रिक शक्ति का परिणाम बताते हुए कहा कि जनसमर्थन ने राजनीतिक दलों को अपना रुख बदलने के लिए मजबूर किया है।

    अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या आज अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के नए स्वरूप में दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले ऐसे हालात थे जब “जय श्रीराम” के उद्घोष पर कार्रवाई होती थी और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था। उनका कहना था कि समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां बदली हैं और अब वही दल भगवान राम और आस्था की बात करते नजर आते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता के मतदान और विश्वास ने प्रदेश की राजनीति की दिशा बदली है। उन्होंने दावा किया कि पहले जिन राजनीतिक दलों ने भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया, आज वे भी सार्वजनिक रूप से धार्मिक आस्था की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय ही सबसे बड़ी शक्ति होता है और उसी के कारण राजनीतिक दलों को अपनी सोच बदलनी पड़ी है।

    योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि रामपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश में विकास की नई पहचान बनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले गरीबों और कमजोर वर्गों की जमीनों पर अवैध कब्जे होते थे तथा प्रशासनिक व्यवस्था निष्पक्ष नहीं थी। उनका कहना था कि वर्तमान सरकार ने कानून का शासन स्थापित करने और विकास को प्राथमिकता देने का प्रयास किया है।

    उन्होंने राज्य सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार के सहयोग से कई ऐसी परियोजनाएं पूरी हुई हैं जिन्हें पहले असंभव माना जाता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने विकास की नई गति हासिल की है और राज्य आर्थिक प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश अब तेज़ी से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।

    सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का अभाव था और न्यायालयों को हस्तक्षेप करना पड़ता था। उनके अनुसार वर्तमान सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में काम किया है, जिससे युवाओं का भरोसा बढ़ा है।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब कांवड़ यात्रा, दुर्गा पूजा, दीपावली और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जैसे आयोजन बिना किसी बाधा के पूरे उत्साह और भव्यता के साथ आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और धार्मिक आयोजनों को सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास किया है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने रामपुर के लिए स्वीकृत विभिन्न विकास परियोजनाओं को क्षेत्र की प्रगति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे, जनसुविधाओं और विकास कार्यों के विस्तार से क्षेत्र के लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा तथा प्रदेश के समग्र विकास को नई गति प्राप्त होगी।

  • अदिति यादव पर अभद्र टिप्पणी मामले में सख्त हुए सीएम योगी, बोले- बेटी का अपमान किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं

    अदिति यादव पर अभद्र टिप्पणी मामले में सख्त हुए सीएम योगी, बोले- बेटी का अपमान किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं

    नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पुत्री अदिति यादव के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा कि किसी भी बेटी के सम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता और ऐसी टिप्पणियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें जैसे ही इस मामले की जानकारी मिली, उन्होंने पुलिस अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करने और प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बेटियों के प्रति सम्मान भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा किसी भी परिस्थिति में अपमानजनक भाषा को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि समाज में बेटियों और महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अपनी भाषा और व्यवहार में विशेष संयम बरतना चाहिए, क्योंकि उनके शब्दों का व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है।

    इस दौरान उन्होंने राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों को भी मर्यादित भाषा के उपयोग की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी व्यक्ति, परिवार, महिला, बुजुर्ग या सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक शिष्टाचार के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत हमलों में बदलने की प्रवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन व्यक्तिगत जीवन और परिवार के सदस्यों को विवादों में घसीटना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने सभी दलों से अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को जिम्मेदार आचरण के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।

    मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर व्यापक चर्चा देखने को मिली। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और समर्थकों ने महिलाओं के सम्मान और सोशल मीडिया पर बढ़ती अभद्र भाषा के उपयोग को लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं। कई लोगों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जवाबदेही और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों के विस्तार के साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियों और व्यक्तिगत हमलों के मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई ऐसे मामलों पर नियंत्रण स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को महिलाओं के सम्मान, सार्वजनिक संवाद की मर्यादा और सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग से जुड़े व्यापक मुद्दों के संदर्भ में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी रहेगी।

  • हार्ड हिंदुत्व से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में योगी, सॉफ्ट हिंदुत्व के सहारे जवाबी मोर्चा संभाल रहे अखिलेश

    हार्ड हिंदुत्व से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में योगी, सॉफ्ट हिंदुत्व के सहारे जवाबी मोर्चा संभाल रहे अखिलेश

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय शेष है, लेकिन राज्य की राजनीति में चुनावी माहौल धीरे-धीरे आकार लेने लगा है। प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने वोट बैंक को मजबूत करने और नई रणनीतियों के जरिए जनसमर्थन जुटाने में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की राजनीतिक शैली और चुनावी संदेशों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

    हाल के दिनों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाषणों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिंदुत्व, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों को प्रमुखता मिलती दिखाई दी है। गौ संरक्षण, राम मंदिर, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दे उनके राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा आगामी चुनाव में विकास और सुशासन के साथ-साथ अपने पारंपरिक वैचारिक आधार को भी मजबूती से सामने रख सकती है।

    योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न जनसभाओं में राम मंदिर निर्माण, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक गौरव से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए भाजपा सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने रखा है। उनके हालिया बयानों को पार्टी के कोर समर्थक वर्ग को एकजुट रखने और चुनावी संदेश को स्पष्ट करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा नेतृत्व यह भी मानता है कि वैचारिक मुद्दों और विकास कार्यों का संयुक्त प्रस्तुतीकरण चुनावी दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकता है।

    दूसरी ओर समाजवादी पार्टी भी बदले हुए राजनीतिक माहौल के अनुरूप अपनी रणनीति में बदलाव करती नजर आ रही है। अखिलेश यादव ने पिछले कुछ समय में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भागीदारी बढ़ाई है। मंदिरों के दर्शन, धार्मिक स्थलों के विकास संबंधी घोषणाएं और सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर सकारात्मक रुख को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसे भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे के मुकाबले सॉफ्ट हिंदुत्व की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    साथ ही समाजवादी पार्टी अपने पारंपरिक सामाजिक गठबंधन को मजबूत बनाए रखने के प्रयास में भी जुटी हुई है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि धार्मिक मुद्दों पर संतुलित रुख अपनाते हुए व्यापक सामाजिक समूहों को साथ रखा जाए। यही कारण है कि हाल के महीनों में पार्टी के कई नेताओं को विवादित धार्मिक या जातीय टिप्पणियों से बचने की सलाह दी गई है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश का चुनाव केवल वैचारिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा। रोजगार, कानून व्यवस्था, बुनियादी ढांचा, किसानों की समस्याएं और युवाओं की आकांक्षाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। हालांकि हिंदुत्व और सांस्कृतिक पहचान जैसे विषय चुनावी विमर्श का प्रमुख हिस्सा बने रह सकते हैं।

    भाजपा जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अपने मजबूत संगठन और सरकार की उपलब्धियों के सहारे चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी सामाजिक समीकरणों, क्षेत्रीय मुद्दों और संतुलित राजनीतिक संदेश के जरिए मुकाबला करने की रणनीति पर काम कर रही है।

    आने वाले महीनों में दोनों दलों की राजनीतिक गतिविधियां और अधिक तेज होने की संभावना है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश की चुनावी लड़ाई केवल विकास बनाम विकास की नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश, वैचारिक पहचान और सामाजिक संतुलन की भी होगी। ऐसे में 2027 का चुनाव राज्य की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा साबित हो सकता है।

  • योगी सरकार के 9 साल यूपी बना हेल्थकेयर में नंबर वन डिजिटल से इमरजेंसी सेवाओं तक बड़ा बदलाव

    योगी सरकार के 9 साल यूपी बना हेल्थकेयर में नंबर वन डिजिटल से इमरजेंसी सेवाओं तक बड़ा बदलाव

    नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने हेल्थकेयर सिस्टम को मजबूत करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं, जिससे प्रदेश आज कई स्वास्थ्य मानकों पर देश में अग्रणी बनकर उभरा है।

    सरकार ने इस दौरान केवल अस्पतालों के निर्माण तक ही ध्यान सीमित नहीं रखा, बल्कि डिजिटल हेल्थ, आपातकालीन सेवाएं, मातृ और शिशु देखभाल जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय सुधार किए हैं। डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में प्रदेश ने 5.76 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड तैयार कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इसके साथ ही यूनिफाइड डिजीज सर्विलांस पोर्टल के जरिए रोगों की निगरानी और नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाया गया है

    मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। गर्भवती महिलाओं के लिए निशुल्क अल्ट्रासाउंड ई-वाउचर की सुविधा दी गई है, जबकि जननी सुरक्षा योजना और बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत लाखों लोगों को लाभ मिला है। दस्तक अभियान के माध्यम से एईएस और जेई जैसी गंभीर बीमारियों के खिलाफ भी सघन अभियान चलाया गया है

    प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हजारों की संख्या में आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित हो रहे हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच मिला है और लाखों परिवारों को मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इससे गरीब और जरूरतमंद वर्ग को बड़ी राहत मिली है

    स्वास्थ्य अवसंरचना के क्षेत्र में भी राज्य ने तेजी से प्रगति की है। जन औषधि केंद्रों की संख्या में वृद्धि के साथ सस्ती दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। वहीं, हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन और अस्पतालों के नेटवर्क के मामले में भी प्रदेश देश में अग्रणी बना हुआ है

    आपातकालीन सेवाओं में सुधार करते हुए 108 एम्बुलेंस सेवा के जरिए करोड़ों लोगों को मदद पहुंचाई गई है। एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाई गई है और उनकी पहुंच को दोगुना किया गया है। इसके अलावा मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के जरिए दूरदराज के इलाकों में भी इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है

    योगी सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में निशुल्क डायलिसिस और सीटी स्कैन जैसी सुविधाएं शुरू की हैं। टेलीमेडिसिन और टेली कंसल्टेशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुलभ हुई हैं

    दवाओं की गुणवत्ता और सप्लाई को बेहतर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन की स्थापना की गई है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में सुधार हुआ है। इसके साथ ही कई स्वास्थ्य इकाइयों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेट भी प्राप्त हुआ है

    खाद्य सुरक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में भी राज्य ने कदम बढ़ाए हैं। मोबाइल लैब और माइक्रोबायोलॉजी लैब के जरिए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है। साथ ही फार्मास्युटिकल रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए नई संस्थाओं की स्थापना की गई है

     उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य सेवाओं में बुनियादी ढांचे से आगे बढ़कर एक समग्र और आधुनिक सिस्टम विकसित किया है, जो न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करता है बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार है

  • चित्तौड़गढ़ में योगी का अभिभूत संबोधन, मातृभूमि और नारी शक्ति का संदेश..

    चित्तौड़गढ़ में योगी का अभिभूत संबोधन, मातृभूमि और नारी शक्ति का संदेश..


    नई दिल्ली /चित्तौड़गढ़ के ऐतिहासिक किले पर आयोजित जौहर श्रद्धांजलि समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मातृभूमि की वीरता और नारी शक्ति को नमन किया। अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने मेवाड़ की पावन मिट्टी को शीश नवाते हुए कहा कि वे केवल इतिहास का स्मरण करने नहीं आए हैं, बल्कि उस महान भूमि से साक्षात्कार करने आए हैं जिसने अपने खून से देश के लिए बलिदान किया। सीएम ने कहा कि चित्तौड़गढ़ की जौहर भूमि देश की आत्मा है और यह युगों-युगों तक राष्ट्रभक्ति और समर्पण की प्रेरणा देती रहेगी।

    योगी आदित्यनाथ ने विशेष रूप से नारी शक्ति और मातृ शक्ति के अदम्य साहस पर बल दिया। उन्होंने जौहर की ज्वाला को याद करते हुए झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान का उल्लेख किया और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। सीएम ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश महिलाओं के दृष्टिकोण से पूरी तरह सुरक्षित राज्य बन चुका है और यह आयोजन यह दर्शाता है कि देश की हर नारी और बेटी को सुरक्षा और सम्मान की गारंटी मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि मातृ शक्ति का साहस अतीत में अजय था और भविष्य में भी अजय बना रहेगा। चुनौतियों का डटकर सामना करना ही सनातन की मर्यादा है।

    देश की वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए योगी आदित्यनाथ ने जातिवाद की राजनीति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जातिवाद की राजनीति देश की नींव को कमजोर कर रही है और राष्ट्र की प्रगति के लिए काम न करने वाले लोग समाज को बांटने का प्रयास कर रहे हैं। सीएम ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे इस प्रकार के मतभेदों से ऊपर उठें और देश की एकता और सुरक्षा के लिए एकजुट हों।

    संबोधन के दौरान योगी आदित्यनाथ ने सनातन संस्कृति और उसकी मर्यादा को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सनातन की परंपराएं अमर हैं और दुनिया की कोई भी शक्ति इन्हें मिटा नहीं सकती। मेवाड़ के वीर और वीरांगनाओं के बलिदान को याद करते हुए उन्होंने बताया कि यह इतिहास हमें सिखाता है कि आत्मसम्मान के लिए कैसी भी कुर्बानी दी जा सकती है। सीएम ने कालिका माता मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद कहा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है और इस पावन भूमि से उन्हें नई ऊर्जा मिली।

    अपने उद्बोधन के अंत में योगी आदित्यनाथ ने चित्तौड़गढ़ के हर वीर और वीरांगना को नमन किया जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि जौहर मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का माध्यम है। कार्यक्रम के दौरान हजारों लोग ‘जय जौहर’ और ‘जय श्री राम’ के नारों के साथ सीएम का स्वागत करते दिखे। यह समारोह एक बार फिर मेवाड़ की धरती पर राष्ट्रीय गौरव और वीरता की भावना को प्रज्वलित करने वाला रहा।

  • योगी का सपा पर तंज: मंत्री को नहीं पता था बिस्मिल और बिस्मिल्लाह खां का अंतर, अधिकारी भी नहीं पहचानते थे अपना चेहरा!

    योगी का सपा पर तंज: मंत्री को नहीं पता था बिस्मिल और बिस्मिल्लाह खां का अंतर, अधिकारी भी नहीं पहचानते थे अपना चेहरा!


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने पुराने ‘तेवर’ में नजर आए। विपक्ष पर प्रहार करते हुए सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दौरान शिक्षा विभाग की प्रशासनिक अव्यवस्था और मंत्रियों की गंभीरता पर बड़े सवाल खड़े किए। मुख्यमंत्री ने एक बेहद चौंकाने वाला किस्सा साझा किया जिसमें सपा सरकार के एक पूर्व माध्यमिक शिक्षा मंत्री की ऐतिहासिक और सामान्य ज्ञान की कमी उजागर हुई।

    बिस्मिल और बिस्मिल्लाह खां में भ्रम

    मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि स्वतंत्रता सेनानी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के शहादत दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में सपा सरकार के शिक्षा मंत्री को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया था। जब उन्हें बताया गया कि आज पंडित राम प्रसाद बिस्मिल का शहीदी दिवस है तो मंत्री जी बुरी तरह भ्रमित हो गए। उन्होंने क्रांतिकारी बिस्मिल को भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां समझ लिया।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा मंत्री जी कहने लगे कि बिस्मिल्लाह खां को तो हाल ही में अवॉर्ड मिला है उन्हें फांसी कैसे दी जा सकती है? जब वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने उन्हें टोकते हुए बताया कि बात पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की हो रही है तो मंत्री जी ने अपनी गलती सुधारने के बजाय उस व्यक्ति को ही ‘भारतीय जनता पार्टी का समर्थक’ करार दे दिया। सीएम ने तंज कसते हुए कहा कि जिस सरकार के शिक्षा मंत्री को इन दो महान विभूतियों का अंतर न पता हो वहां अंधेर नगरी चौपट राजा वाली स्थिति थी। ऐसे में अगर बच्चे नकल नहीं करते तो क्या करते?

    मंत्री को नहीं पहचानते थे अधिकारी

    मुख्यमंत्री ने एक और संस्मरण सुनाया जब वह गोरखपुर के सांसद थे। उन्होंने बताया कि एक बार रेलवे स्टेशन पर कुछ अधिकारियों के बीच सपा सरकार के शिक्षा मंत्री भी मौजूद थे लेकिन कोई अधिकारी उनके सम्मान में खड़ा तक नहीं हुआ। जब योगी ने एक अधिकारी से पूछा कि क्या वे मंत्री के साथ आए हैं तो अधिकारी ने उल्टा सवाल किया- कौन से मंत्री? बाद में खुद मंत्री ने स्वीकार किया कि वे पिछले छह महीने से दफ्तर ही नहीं गए इसलिए अधिकारी उन्हें पहचानते ही नहीं।

    कानून से ऊपर कोई नहीं

    कानून-व्यवस्था और धार्मिक मर्यादा पर बात करते हुए सीएम योगी ने प्रयागराज कुंभ का जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता। आदि जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठों और वेदों की एक गरिमा है जिसका पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और नियमों का उल्लंघन किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
  • प्रयागराज माघ मेला 2026 त्रिवेणी संगम पर श्रद्धालुओं का तांता साधु-संतों ने भी किया पवित्र स्नान

    प्रयागराज माघ मेला 2026 त्रिवेणी संगम पर श्रद्धालुओं का तांता साधु-संतों ने भी किया पवित्र स्नान


    नई दिल्ली । प्रयागराज में माघ मेले के पहले दिन त्रिवेणी संगम पर श्रद्धालुओं का तांता लग गया। पौष पूर्णिमा के अवसर पर लाखों भक्त अपनी आस्था के साथ पवित्र नदियों में स्नान करने पहुंचे। माघ मेला एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है जो देशभर से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

    श्रद्धालुओं की भारी भीड़
    साधु-संतों और आम श्रद्धालुओं के अलावा माघ मेला के पहले दिन त्रिवेणी संगम में किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर स्वामी कल्याणी नंदगिरी भी पहुंची। उन्होंने इस मौके पर कहा यह लघु कुंभ का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में श्रद्धालुओं के लिए बेहतरीन व्यवस्थाएं की गई हैं। स्वामी कल्याणी ने मां गंगा से सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रार्थना की और कहा कि गंगा उन्हें कष्टों से मुक्त करें।

    मेला अधिकारी और सुरक्षा व्यवस्था

    माघ मेला के आयोजन को लेकर मेला अधिकारी ऋषि राज ने बताया कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के मद्देनज़र सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। पौष पूर्णिमा के अवसर पर माघ मेला शुरू हो चुका है। सुबह 8 बजे तक लगभग 65 लाख श्रद्धालु स्नान कर चुके थे उन्होंने कहा।प्रयागराज के डीएम मनीष कुमार वर्मा ने माघ मेला के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी दी और बताया कि पुलिसकर्मी जल पुलिस एनडीआरएफ और जीआरएफ की टीमें पूरी तत्परता से तैनात हैं। उन्होंने कहा स्नान के बाद श्रद्धालु सुरक्षित रूप से अपने-अपने गंतव्यों की ओर प्रस्थान कर रहे हैं।

    श्रद्धालुओं के अनुभव

    एक श्रद्धालु ने स्नान के बाद कहा यह मेरी तीसरी यात्रा है। मैं पहले भी आया हूं और 144 वर्षों बाद हुए कुंभ में भी था। यहां की व्यवस्था बहुत अच्छी है सब कुछ सुव्यवस्थित है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी प्रशासन ने सारी तैयारियां कर रखी हैं। अगर किसी को तबियत खराब होती है तो डॉक्टर भी उपलब्ध हैं। इस साल के माघ मेले में आने वाले दिनों में और भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। प्रशासन और सुरक्षा बल पूरी तत्परता से उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं।

  • अखिलेश यादव का 40,000 रुपये देने का वादा: अयोध्या की महिलाओं ने की ये बड़ी बात

    अखिलेश यादव का 40,000 रुपये देने का वादा: अयोध्या की महिलाओं ने की ये बड़ी बात


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनावों से पहले नेताओं के घोषणाएं और वादे चर्चा का विषय बन जाते हैं। हाल ही में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिलाओं को सालाना 40,000 रुपये देने का वादा किया है। उन्होंने इसे बीजेपी के बिहार चुनाव में दिए गए 10,000 रुपये के वादे का जवाब बताया। इस घोषणा पर अयोध्या की महिलाओं की क्या राय है, यह जानने के लिए यूपी Tak की टीम ने गांव में जाकर उनकी प्रतिक्रिया ली।

    महिलाओं ने की उम्मीदें जाहिर

    अयोध्या के ग्रामीण इलाकों की महिलाओं ने इस योजना पर अपनी राय दी और अपनी उम्मीदों का इज़हार किया। एक स्थानीय महिला सुंदर कली ने कहा, अखिलेश यादव का यह प्रस्ताव अच्छा है, हम लोग मजदूरी करते हैं, इससे अच्छा होगा कि हमें पैसा मिले। अभी सरकार की तरफ से हमें कुछ नहीं मिलता, केवल मजदूरी करते हैं। अगर अखिलेश यादव देंगे तो ठीक है, नहीं तो हम अपना काम करते रहेंगे।

    विकास की उम्मीदें भी बनीं मुद्दा

    वहीं कश्मीरा देवी ने कहा, हम लोग मजदूरी करके अपना पेट पालते हैं। अगर सरकार कुछ मदद करेगी तो अच्छा रहेगा, लेकिन अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। सरकार बढ़िया नहीं काम कर रही है, जो विकास करेगा हम उसके साथ रहेंगे। विमला देवी ने भी कहा, समाजवादी सरकार के समय पेंशन मिलती थी और सड़कें बनती थीं। अब कुछ नहीं मिल रहा है। हमें विकास और रोजगार दोनों चाहिए।

    महिलाओं की मांग-पैसा नहीं, विकास और रोजगार भी चाहिए

    ममता नाम की महिला ने कहा, यह अच्छा है कि पैसा मिलेगा, इससे हमारी रोज़ी-रोटी में मदद होगी। गरीब बच्चों को भी फायदा होगा, लेकिन सिर्फ पैसा नहीं, हमें काम भी चाहिए। अगर पैसा मिलेगा तो वोट देंगे, नहीं मिला तो कोई बात नहीं। वहीं अन्य महिलाओं ने भी इस योजना का स्वागत किया, लेकिन साफ किया कि अगर वादा पूरा नहीं हुआ तो वे वोट नहीं देंगी।

    योगी सरकार से तुलना

    महिलाओं ने योगी सरकार की योजनाओं के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि उन्हें विधवा पेंशन के रूप में 2,000 रुपये मिलते हैं, लेकिन इसके बावजूद गांव में विकास की कमी महसूस हो रही है। रोज़मर्रा की सुविधाओं और रोजगार के मामले में उन्हें अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

    समाजवादी पार्टी और बीजेपी का मुकाबला

    अखिलेश यादव का यह वादा महिलाओं के बीच उम्मीद और नाखुशी का मिश्रित असर छोड़ रहा है। हालांकि, उनका कहना है कि वे सिर्फ पैसे के लिए नहीं, बल्कि स्थिरता, रोजगार और विकास के लिए भी वोट देंगे। यह साफ है कि महिलाएं अपनी जिंदगी में सुधार और अपने गांव के विकास को भी उतना ही महत्व देती हैं जितना कि चुनावी वादों को।

  • UP में रोजगार का मेगा मिशन: CM योगी ने गोरखपुर में आधुनिक ITI भवन का किया उद्घाटन, बोले-“50 हजार युवाओं को मिली है सीधे नौकरी”

    UP में रोजगार का मेगा मिशन: CM योगी ने गोरखपुर में आधुनिक ITI भवन का किया उद्घाटन, बोले-“50 हजार युवाओं को मिली है सीधे नौकरी”


    गोरखपुर। उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं को कौशल और रोजगार से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिपरौली ब्लॉक में नवनिर्मित राजकीय ITI भवन का उद्घाटन किया। यह अत्याधुनिक ITI पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा CSR फंडिंग के तहत बनाया गया है।

    सरकार का यह प्रयास न सिर्फ तकनीकी शिक्षा को आधुनिक बनाएगा, बल्कि गोरखपुर को कौशल विकास का नया केंद्र बनाने की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा।

    GIDA के अनुरूप तैयार होगा आधुनिक वर्कफोर्स

    सीएम योगी ने कहा कि यह नया ITI, गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GIDA) में तेजी से बढ़ते औद्योगिक माहौल के हिसाब से युवाओं को भविष्य की तकनीकों में दक्ष बनाएगा।
    उन्होंने कहा-
    अब युवाओं को सिर्फ पारंपरिक हुनर नहीं, बल्कि ड्रोन, AI, रोबोटिक्स, 3D प्रिंटिंग और IoT जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए ITI में अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों प्रकार के कोर्स शुरू किए गए हैं।

    सरकार का लक्ष्य है कि हर युवा नई टेक्नोलॉजी पर पकड़ बनाए और रोजगार की नई संभावनाओं का लाभ उठा सके।

    GIDA में 15,000 करोड़ का निवेश-50,000 को मिली नौकरी

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि बीते आठ वर्षों में गोरखपुर के GIDA क्षेत्र में अब तक 12–15 हजार करोड़ का निवेश हो चुका है।
    इससे सीधे 50,000 युवाओं को नौकरी मिली है।

    उन्होंने कहा-
    “UP अब निवेश का नया गढ़ बन चुका है। उद्योगों के स्थापित होने से युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिल रहा है।”

    यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि योगी सरकार प्रदेश में उद्योग, तकनीकी प्रशिक्षण और स्किल डेवलपमेंट को मजबूत करने पर बेहद जोर दे रही है।

    UP में हर गांव से निकलेगा नया टैलेंट

    हाल ही में सीएम योगी ने 75 जिलों में एक साथ बड़े पैमाने पर कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। सरकार का लक्ष्य है कि हर गांव, हर ब्लॉक और हर जिले से तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवा निकलकर रोजगार और उद्यमिता के नए अवसरों को अपनाएं।

    राज्य में सांस्कृतिक प्रोजेक्ट्स को भी बढ़ावा

    इसी बीच योगी सरकार ने सांस्कृतिक विकास के लिए भी बड़े कदम उठाए हैं-

    दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में शामिल किए जाने पर CM ने प्रसन्नता जताई।

    बरेली के छह प्राचीन मंदिरों के विकास के लिए 11.98 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।

    गोरखपुर ITI का उद्घाटन, GIDA में बढ़ता निवेश और हजारों युवाओं को मिली नौकरी-ये सब दर्शाते हैं कि योगी सरकार तकनीक, कौशल और रोजगार को लेकर तेजी से आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में UP का हर जिला आधुनिक शिक्षा और औद्योगिक विकास का बड़ा केंद्र बन सकता है।