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  • युवाओं पर कोरियन कल्चर का रंग, ग्लास स्किन से के-पॉप तक बढ़ा क्रेज

    युवाओं पर कोरियन कल्चर का रंग, ग्लास स्किन से के-पॉप तक बढ़ा क्रेज


    नई दिल्ली । देशभर में कोरियन कल्चर का प्रभाव तेजी से बढ़ता जा रहा है। संगीत, खान-पान, फैशन और जीवनशैली में कोरिया के नए ट्रेंड युवाओं में खासे लोकप्रिय हो गए हैं। राजधानी और बड़े शहरों में युवाओं की पसंद में के-पॉप म्यूजिक, ग्लास स्किन मेकअप, स्टाइलिश पहनावे और कोरियन फूड का क्रेज नजर आ रहा है।

    डिजिटल दुनिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की वजह से युवा पीढ़ी कोरियन कल्चर के करीब आ रही है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर के-पॉप वीडियो, कोरियन वेब सीरीज, ब्यूटी और फैशन टिप्स को बहुत देखा और अपनाया जा रहा है। इस प्रवृत्ति ने न केवल मेकअप और कपड़ों पर असर डाला है, बल्कि खाने-पीने की आदतों और लाइफस्टाइल में भी बदलाव लाए हैं।

    हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस ट्रेंड का असर कुछ मामलों में नकारात्मक भी हो सकता है। हाल ही में गाजियाबाद में तीन बहनों द्वारा आत्महत्या की दुखद घटना ने सवाल उठाए कि कोरियन कल्चर की लगातार आदत और डिजिटल दुनिया के दबाव का युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। यह घटना यह संकेत देती है कि डिजिटल और ग्लोबल ट्रेंड्स के साथ संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

    फैशन और मेकअप के क्षेत्र में खासकर ग्लास स्किन और के-पॉप स्टार्स की स्टाइलिंग का क्रेज सबसे अधिक देखा जा रहा है। युवा अपनी पहचान और स्टाइल को कोरियन ट्रेंड्स के साथ जोड़ रहे हैं। खान-पान में भी कोरियन फूड जैसे किमची, त्तोकबॉकी और कोरियन स्नैक्स की मांग बढ़ रही है। शहरों में कोरियन रेस्टोरेंट्स और कैफे इस ट्रेंड का फायदा उठा रहे हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि कोरियन कल्चर की लोकप्रियता तकनीक, ग्लोबल कनेक्टिविटी और डिजिटल कंटेंट की वजह से बढ़ी है। हालांकि, यह जरूरी है कि युवा अपने स्थानीय और पारंपरिक मूल्यों के साथ इस ट्रेंड का संतुलित अनुभव करें।

    देश के अलग-अलग हिस्सों में कोरियन कल्चर की लोकप्रियता यह दर्शाती है कि ग्लोबल कल्चर और डिजिटल दुनिया युवा पीढ़ी के जीवन पर तेजी से असर डाल रही है। यह प्रवृत्ति फैशन, म्यूजिक और फूड तक ही सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं की सोच और सामाजिक व्यवहार में भी असर डाल रही है।

  • पाकिस्तान में बढ़ता फर्जी शादियों का ट्रेंड, युवाओं के लिए सिर्फ मनोरंजन का जरिया..

    पाकिस्तान में बढ़ता फर्जी शादियों का ट्रेंड, युवाओं के लिए सिर्फ मनोरंजन का जरिया..


    नई दिल्ली /पाकिस्तान में हाल ही में एक नया ट्रेंड उभरकर सामने आया है-फर्जी शादियां। इन शादियों में हिस्सा लेने वाले युवा केवल मनोरंजन और सामाजिक अनुभव के लिए शादी करते हैं। इसमें कोई भी पारिवारिक दबाव या जीवन भर की जिम्मेदारी नहीं होती। यह ट्रेंड खासकर शहरों और विश्वविद्यालयों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

    शादी दक्षिण एशियाई समाज में हमेशा से एक बड़ा उत्सव रही है। भारत और पाकिस्तान में शादी का आयोजन कई दिनों तक चलता है, जिसमें हल्दी, मेहंदी, संगीत और विदाई जैसी रस्में शामिल होती हैं। पारंपरिक शादियों में दूल्हा-दुल्हन के अलावा परिवार और समाज की जिम्मेदारियां भी बड़ी होती हैं। लेकिन फर्जी शादियों में इसका उल्टा माहौल होता है-युवाओं को केवल अनुभव और मनोरंजन का अवसर मिलता है।पाकिस्तान में इस ट्रेंड की शुरुआत लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज से हुई। वहां दो छात्राओं ने एक फर्जी शादी का आयोजन किया, जिसमें शादी की सारी रस्में और सजावट वही थी जो असली शादी में होती हैं। सोशल मीडिया पर इस शादी के वीडियो वायरल होने के बाद पूरे देश में ध्यान खींचा गया। युवाओं में इसे लेकर उत्सुकता और उत्साह बढ़ा।

    हालांकि, इस घटना ने विरोध भी खड़ा किया। कुछ लोगों ने इसे समलैंगिक विवाह समझकर आपत्ति जताई। वीडियो वायरल होने के बाद दुल्हन बनने वाली छात्रा को ऑनलाइन ट्रोलिंग और आलोचना का सामना करना पड़ा। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा और निजता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए। सबसे पहले वीडियो और फोटो को ऑनलाइन पोस्ट करने पर रोक लगा दी गई। साथ ही केवल उन लोगों को ही इस आयोजन में आने की अनुमति दी जाने लगी, जो इसे केवल मनोरंजन के रूप में लेते हों।

    फर्जी शादी में दुल्हन बनने वाली छात्रा के परिवार को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके विपरीत, दूल्हा बनी छात्रा का परिवार इस पूरे मामले में अपेक्षाकृत शांत रहा। इस अनुभव के बावजूद, इस ट्रेंड ने युवाओं में लोकप्रियता हासिल की और कई समूहों ने इसे व्यवस्थित रूप से आयोजित करना शुरू कर दिया।एक ऐसा ही समूहहुनर क्रिएटिव मार्केट है, जिसकी संस्थापक रिदा इमरान ने महिलाओं के लिए विशेष फर्जी शादियों और मेहंदी पार्टियों का आयोजन किया। इसमें कारीगरों, कलाकारों, कंटेंट क्रिएटर्स और इवेंट मैनेजर्स ने हिस्सा लिया। इस तरह की घटनाएं खासतौर पर उन लोगों के लिए वरदान साबित हुईं जो पारंपरिक शादियों की थकावट और सामाजिक दबाव के कारण शादी का असली आनंद नहीं ले पाते।

    फर्जी शादियों का यह ट्रेंड युवा पीढ़ी में खुद को व्यक्त करने और सामाजिक अनुभव का मज़ा लेने का एक नया तरीका बन गया है। इसमें विवाह के वास्तविक दायित्वों की कमी होने के बावजूद लोग शादी की रस्मों, उत्सव और उत्साह का आनंद ले सकते हैं।पाकिस्तान में फर्जी शादियों का यह चलन यह दिखाता है कि समाज में नई पीढ़ी पारंपरिक धारणाओं और सामाजिक दबावों से हटकर, स्वतंत्र और रचनात्मक तरीके से अपनी खुशियों का अनुभव करना चाहती है। यह केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि युवाओं के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक प्रयोग का एक नया रूप बन चुका है।