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  • दक्षिण कोरिया में जनरेटिव एआई का रोजगार पर असर, युवाओं की 2.85 लाख नौकरियां घटीं, वरिष्ठ कर्मचारियों को मिला फायदा

    दक्षिण कोरिया में जनरेटिव एआई का रोजगार पर असर, युवाओं की 2.85 लाख नौकरियां घटीं, वरिष्ठ कर्मचारियों को मिला फायदा


    नई दिल्ली ।
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल का असर अब रोजगार बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। दक्षिण कोरिया के केंद्रीय बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरेटिव एआई तकनीकों के तेजी से विस्तार के बाद एआई से अधिक प्रभावित क्षेत्रों में युवाओं के रोजगार में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि तकनीकी बदलाव का असर अलग-अलग आयु वर्ग के कर्मचारियों पर समान नहीं रहा है।

    जून 2022 से जून 2026 के बीच दक्षिण कोरिया में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लोगों द्वारा किए जा रहे कुल रोजगारों की संख्या में 2.85 लाख की कमी दर्ज की गई। इस गिरावट का सबसे बड़ा हिस्सा उन क्षेत्रों से जुड़ा रहा जिन्हें एआई के प्रभाव के प्रति अधिक संवेदनशील माना जाता है। कुल कम हुए रोजगारों में करीब 2.68 लाख यानी लगभग 94 प्रतिशत नौकरियां एआई प्रभावित क्षेत्रों से संबंधित थीं।

    इन क्षेत्रों में आईटी सेवाएं, प्रकाशन, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और प्रोफेशनल सर्विसेज प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों में ऐसे काम बड़ी संख्या में शामिल हैं जिन्हें जनरेटिव एआई, ऑटोमेशन और डिजिटल टूल्स के जरिए तेजी से बदला या आसान किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, आईटी सेवाओं में युवाओं का रोजगार 31.4 प्रतिशत घटा। यह उन क्षेत्रों में सबसे बड़ी गिरावट रही, जहां एआई आधारित तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।

    प्रकाशन क्षेत्र में भी युवा रोजगार में 27.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इस श्रेणी में सॉफ्टवेयर और वेब डिजाइन से जुड़े पेशे भी शामिल हैं। कंप्यूटर प्रोग्रामिंग क्षेत्र में युवाओं के रोजगार में 16.6 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि प्रोफेशनल सर्विसेज में यह कमी 11.6 प्रतिशत रही। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि एआई का शुरुआती प्रभाव उन नौकरियों पर अधिक पड़ सकता है जिनमें डिजिटल, दोहराए जाने वाले या सामग्री आधारित कार्य बड़ी भूमिका निभाते हैं।

    इसके विपरीत 50 वर्ष या उससे अधिक आयु के कर्मचारियों के रोजगार में इसी अवधि के दौरान 2.30 लाख की बढ़ोतरी हुई। खास बात यह रही कि इनमें से 1.73 लाख रोजगार एआई प्रभावित क्षेत्रों में ही बढ़े। इससे यह संकेत मिलता है कि अनुभव, विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र की गहरी समझ वाले कर्मचारियों की मांग कई जगहों पर अभी भी मजबूत बनी हुई है।

    रिपोर्ट में 2022 को आधार वर्ष माना गया है। इसी वर्ष के अंत में चैटजीपीटी के लॉन्च के बाद जनरेटिव एआई तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ा। इसके बाद कंपनियों में कंटेंट तैयार करने, कोडिंग, डेटा विश्लेषण और अन्य डिजिटल कार्यों के लिए एआई आधारित उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा है। इससे कंपनियों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ कुछ पारंपरिक भूमिकाओं की जरूरत पर भी असर पड़ा है।

    शिक्षा के आधार पर रोजगार की स्थिति में भी बदलाव सामने आया है। 2019 से 2022 के बीच स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रीधारकों की औसत बेरोजगारी दर 8.2 प्रतिशत रही, जबकि माध्यमिक या जूनियर कॉलेज स्तर तक पढ़े युवाओं में यह 8 प्रतिशत थी। 2022 के बाद उच्च शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी दर 7 प्रतिशत रही, जबकि कम शैक्षणिक योग्यता वाले युवाओं में यह 5.4 प्रतिशत दर्ज की गई।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दक्षिण कोरिया की लगातार घटती आबादी युवाओं के रोजगार में बदलाव का एक कारण हो सकती है। हालांकि एआई ने इस बदलाव को और तेज किया है। शोधकर्ताओं के अनुसार एआई युवा कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ा सकता है, लेकिन यही तकनीक कुछ भूमिकाओं में उनके काम को प्रतिस्थापित भी कर सकती है। इसलिए चुनौती केवल नौकरियां घटने की नहीं, बल्कि युवाओं के लिए पारंपरिक करियर की शुरुआती सीढ़ियों के कमजोर होने की भी है।

  • लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण देने का लक्ष्य

    लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण देने का लक्ष्य

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए युवाओं, तकनीक और आत्मनिर्भरता को भारत की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले एक साल में देश के एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य भारतीय युवाओं में AI के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता विकसित करना है।

    प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि इस लक्ष्य को देश के 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयास से हासिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए ऊंचे संकल्प और उसी स्तर के सामर्थ्य व प्रयास जरूरी हैं। उनके संबोधन में युवाओं को विकसित भारत की यात्रा की प्रमुख शक्ति के रूप में रेखांकित किया गया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा दौर में डेटा सेंटर, AI और क्वांटम तकनीक का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। उभरती तकनीकें भारत के सामने नई चुनौतियां और अवसर दोनों लेकर आ रही हैं। ऐसे में देश को इनोवेशन का केंद्र बनाने के साथ डिजिटल पब्लिक टेक्नोलॉजी को दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास बढ़ाने की जरूरत है।

    तकनीकी विकास के साथ सेमीकंडक्टर निर्माण को भी प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि आज इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल तकनीक में चिप की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं और तीन प्लांट शुरू होने की जानकारी दी गई। आने वाले सात से आठ वर्षों में और संयंत्र शुरू करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा को भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि AI, चिप निर्माण और डेटा सेंटर के विस्तार के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होगी। ऐसे में पर्याप्त और भरोसेमंद ऊर्जा उपलब्धता भारत की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। उन्होंने परमाणु ऊर्जा को ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के प्रमुख माध्यमों में शामिल किया।

    प्रधानमंत्री ने देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य बताया। उन्होंने कहा कि इस दशक में पांच परमाणु रिएक्टरों के काम शुरू करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में तकनीक और ऊर्जा दोनों की जरूरत बढ़ेगी, इसलिए दोनों क्षेत्रों में क्षमता निर्माण जरूरी है।

    संबोधन में ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, ग्रीन मोबिलिटी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भारत के पास लंबी समुद्री तटरेखा, मत्स्य संसाधन, तटीय पर्यटन और तटीय तकनीक के जरिए ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने की भी व्यापक संभावनाएं हैं।

    प्रधानमंत्री के भाषण में AI प्रशिक्षण से लेकर सेमीकंडक्टर निर्माण, परमाणु ऊर्जा और हरित अर्थव्यवस्था तक कई क्षेत्रों को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा गया। एक करोड़ युवाओं को AI स्किल देने की घोषणा से तकनीकी रूप से सक्षम कार्यबल तैयार करने पर विशेष ध्यान का संकेत मिला है। इसके साथ ही ऊर्जा और विनिर्माण क्षमता बढ़ाने को भी भविष्य की आर्थिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

  • 12 राज्यों के युवाओं ने संसद यूथ पार्लियामेंट 2026 में लिया हिस्सा, सीएम यादव बोले लोकतंत्र मजबूत करें युवा

    12 राज्यों के युवाओं ने संसद यूथ पार्लियामेंट 2026 में लिया हिस्सा, सीएम यादव बोले लोकतंत्र मजबूत करें युवा

    मध्य प्रदेश। विधानसभा में गुरुवार को संसद यूथ पार्लियामेंट 2026 का आयोजन किया गया, जिसमें 12 राज्यों के 52 से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं से लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश देश का दिल है और भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। उन्होंने कहा कि देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है और ऐसे समय में विधानसभा भवन में आयोजित युवा संसद ने इसे मिनी इंडिया का स्वरूप दे दिया है। उनके अनुसार सदन कल्याणकारी नीतियों के निर्माण का महत्वपूर्ण स्थान है और युवाओं को इसकी कार्यप्रणाली को समझना चाहिए।

    डॉ. यादव ने युवा संसद में बेटियों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की बढ़ती भूमिका दिखाई देती है। उन्होंने महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का भी उल्लेख किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति में माताओं और बहनों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि समाज की प्रगति में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री ने वसुधैव कुटुम्बकम की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की सीख देती है। उन्होंने कहा कि देश को अनेकता में एकता, सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की भावना के साथ आगे बढ़ाने के लिए केवल विचार पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू करने के लिए संकल्प और सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समान कानून के मुद्दे पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सरकार की नजर में सभी नागरिकों के लिए कानून समान होना चाहिए। उन्होंने मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता से जुड़े विधायी प्रयासों और सुझाव प्रक्रिया का उल्लेख किया। उनके अनुसार विभिन्न जिलों और धर्मों के लोगों से इस विषय पर सुझाव लिए गए हैं।

    डॉ. यादव ने युवाओं से राजनीति को केवल चुनावी गतिविधि के रूप में नहीं देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य पेशेवर बनने के साथ राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। उनके अनुसार लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए शिक्षित और जागरूक युवाओं की भागीदारी आवश्यक है।

    मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने नेताजी सुभाषचंद्र बोस का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने आईसीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद नौकरी छोड़कर देश की स्वतंत्रता के आंदोलन में भाग लिया। उन्होंने युवाओं से देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का आह्वान किया।

    कार्यक्रम में उद्योग जगत से जुड़े वक्ताओं ने भी युवाओं की भूमिका और मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़े उद्योगों के साथ छोटी औद्योगिक इकाइयों में भी निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं। राजनीति और समाज सेवा को समर्पण और जिम्मेदारी वाला क्षेत्र बताते हुए युवाओं को समाज के लिए काम करने की प्रेरणा दी गई।

    युवा संसद में युवा सांसद की भूमिका निभाने वाले प्रतिभागियों ने भी प्रदेश में युवाओं से जुड़ी योजनाओं और शिक्षा के महत्व पर विचार रखे। कार्यक्रम में बताया गया कि वित्त वर्ष 2026-27 में खेल और युवा कल्याण के लिए 800 करोड़ रुपये से अधिक का बजट रखा गया है। प्रदेश में 274 सांदीपनि विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं और 200 नए विद्यालय स्थापित करने की योजना है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत और विकसित मध्य प्रदेश के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर युवाओं की आवश्यकता है। युवा संसद जैसे कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली समझने और सार्वजनिक जीवन में अपनी भूमिका तय करने का अवसर मिलता है।

  • NDA सांसदों की बैठक में सोशल मीडिया पर खास जोर, PM मोदी ने युवाओं से कनेक्शन बढ़ाने और डिजिटल सक्रियता की दी सलाह

    NDA सांसदों की बैठक में सोशल मीडिया पर खास जोर, PM मोदी ने युवाओं से कनेक्शन बढ़ाने और डिजिटल सक्रियता की दी सलाह

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ NDA के नए लोकसभा सांसदों की बैठक में इस बार सोशल मीडिया की सक्रियता को खास महत्व दिया गया। बैठक के दौरान सांसदों को उनके पिछले 90 दिनों की सोशल मीडिया गतिविधियों का एक पेज का रिपोर्ट कार्ड सौंपा गया। इसमें अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर सांसदों की सक्रियता, पोस्ट की संख्या, लोगों तक पहुंच और प्रतिक्रियाओं से जुड़े आंकड़े शामिल थे। सांसदों से सोशल मीडिया के जरिए युवाओं के साथ अपना संपर्क और मजबूत करने को कहा गया।

    बैठक में प्रधानमंत्री ने NDA के भीतर पुराने और नए सांसदों के बीच समानता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि गठबंधन में कोई सांसद 20 साल पुराना हो या 20 दिन पुराना, सभी के लिए बराबर सम्मान है। बैठक में हाल के राजनीतिक बदलावों के बाद NDA के साथ आए कुछ सांसद भी शामिल हुए। इनमें टीएमसी से अलग होकर NCPI में शामिल हुए सांसद और शिवसेना यूबीटी से अलग होकर शिवसेना में आए सांसद भी मौजूद रहे।

    सोशल मीडिया रिपोर्ट कार्ड को बैठक की प्रमुख बातों में माना जा रहा है। इसमें सांसदों के पिछले तीन महीनों के डिजिटल प्रदर्शन का आकलन किया गया। रिपोर्ट में एक्स पर सांसद द्वारा की गई पोस्ट की संख्या, उन पोस्ट पर आए इंप्रेशन और कमेंट जैसे आंकड़े दर्ज किए गए। इसी तरह फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सांसदों की गतिविधियों और उनकी पहुंच से जुड़े आंकड़े भी रिपोर्ट में शामिल किए गए।

    सांसदों को समझाया गया कि आज के दौर में जनता, खासकर युवाओं तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। इसलिए केवल संसद और क्षेत्र में सक्रिय रहना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी नियमित और प्रभावी संवाद जरूरी है। सांसदों को अपनी सोशल मीडिया मौजूदगी को अधिक सक्रिय और जनता से जुड़ा बनाने का सुझाव दिया गया।

    90 दिनों के डेटा को आधार बनाकर तैयार किया गया यह रिपोर्ट कार्ड सांसदों की डिजिटल सक्रियता का तुलनात्मक आकलन करने में भी मदद कर सकता है। पोस्ट की संख्या और इंप्रेशन जैसे आंकड़े यह समझने में मदद करते हैं कि सांसद सोशल मीडिया पर कितने सक्रिय हैं और उनकी सामग्री कितने लोगों तक पहुंच रही है। इसके अलावा कमेंट और अन्य प्रतिक्रियाएं जनता की ऑनलाइन भागीदारी का संकेत देती हैं।

    बैठक में सांसदों के स्वास्थ्य को लेकर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने सांसदों से अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने और नियमित जांच कराने की सलाह दी। खासतौर पर 40 वर्ष से अधिक उम्र के सांसदों को नियमित मेडिकल चेकअप कराने की बात कही गई। योग को लेकर भी उन्होंने सांसदों से सवाल किया और पूछा कि नियमित योग करने वाले कितने सांसद हैं।

    प्रधानमंत्री ने स्थिर सरकार के महत्व का भी उल्लेख किया। बातचीत के दौरान उन्होंने विदेशों में सरकारों के बार-बार बदलने का उदाहरण देते हुए राजनीतिक स्थिरता की जरूरत पर बात की। साथ ही सांसदों को भरोसा दिलाया कि यदि उन्हें अपने क्षेत्र से जुड़ी कोई समस्या या व्यक्तिगत स्तर पर कोई कठिनाई हो तो वे सीधे उनसे संपर्क कर सकते हैं।

    बैठक में पूर्वी भारत के विकास को लेकर भी प्रधानमंत्री ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में कोलकाता, ओडिशा और भुवनेश्वर का ऐसा कायाकल्प होगा जिसकी अभी कल्पना करना भी मुश्किल है। इस तरह बैठक में डिजिटल सक्रियता, स्वास्थ्य, राजनीतिक स्थिरता और क्षेत्रीय विकास जैसे कई मुद्दों पर सांसदों को दिशा देने की कोशिश की गई।

  • मोहन भागवत बोले- पूरी जानकारी के बिना फैसला ठीक नहीं, प्रियंका गांधी ने जवाब देकर तेज किया सियासी विवाद

    मोहन भागवत बोले- पूरी जानकारी के बिना फैसला ठीक नहीं, प्रियंका गांधी ने जवाब देकर तेज किया सियासी विवाद

    नई दिल्ली । आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के Gen-Z और Gen-Alpha युवाओं को लेकर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। युवाओं से संवाद के दौरान भागवत ने उनके विचारों को सुनने के साथ कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने किसी भी मामले में पूरी जानकारी सामने आने से पहले जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने से बचने की बात कही। इसी दौरान उन्होंने युवाओं पर भरोसा जताया, जिसके बाद कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भागवत के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं को किसी तरह के प्रमाण या मंजूरी की जरूरत नहीं है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर बहस और तेज हो गई है।

    मोहन भागवत ने युवाओं से बातचीत के दौरान कहा कि किसी भी घटना या विवाद के बारे में फैसला करने से पहले उसके सभी तथ्यों को समझना जरूरी है। उनका कहना था कि जब तक किसी मामले से जुड़े सभी तथ्य सामने नहीं आ जाते, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। उन्होंने युवाओं पर भरोसा जताते हुए कहा कि सच्चाई सामने आने तक इंतजार किया जाना चाहिए। भागवत ने यह भी संकेत दिया कि कुछ रिपोर्टों में अन्य लोगों के शामिल होने की बातें सामने आई हैं, लेकिन बिना ठोस प्रमाण किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं होगा। उनके इसी रुख को लेकर कांग्रेस नेताओं ने सवाल खड़े किए हैं।

    प्रियंका गांधी ने भागवत की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि युवाओं को किसी प्रमाण या मंजूरी की आवश्यकता नहीं है। उनके बयान को कांग्रेस ने युवाओं के मुद्दों और उनकी चिंताओं से जोड़कर देखा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि वास्तव में छात्रों और युवाओं की चिंता है तो संबंधित घटनाओं और उनसे जुड़े सवालों पर स्पष्ट रूप से जवाब सामने आना चाहिए। पार्टी का आरोप है कि युवाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।

    कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं और छात्रों की चिंता वास्तविक है तो केंद्र सरकार को संबंधित मामलों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने छात्रों के साथ हुई घटनाओं की जांच की मांग करते हुए कहा कि जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और जिन लोगों की भूमिका सामने आती है, उनसे जवाब मांगा जाना चाहिए।

    दरअसल, मोहन भागवत और प्रियंका गांधी के बयानों के बीच मुख्य अंतर किसी भी मामले में निष्कर्ष पर पहुंचने के तरीके को लेकर दिखाई दे रहा है। भागवत ने जहां पूरी जानकारी और प्रमाण सामने आने तक इंतजार करने पर जोर दिया, वहीं प्रियंका गांधी ने युवाओं के अधिकारों और उनकी आवाज को किसी बाहरी मंजूरी से अलग बताया। दोनों पक्षों की टिप्पणियों के बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। Gen-Z और Gen-Alpha युवाओं के साथ संवाद तथा उनके मुद्दों को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों की ओर से और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

  • कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके बोले, फिलहाल आंदोलन पर फोकस, जनता चाहेगी तो राजनीति पर करेंगे विचार

    कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके बोले, फिलहाल आंदोलन पर फोकस, जनता चाहेगी तो राजनीति पर करेंगे विचार

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपने आंदोलन के अगले चरण की तैयारियां शुरू कर दी हैं। उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ दो दिवसीय बैठक बुलाने का फैसला किया है, जिसमें आंदोलन की आगामी रणनीति, युवाओं तक पहुंच बढ़ाने और संगठन के भविष्य को लेकर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इस बीच राजनीति में उनके संभावित प्रवेश को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं, लेकिन दिपके ने फिलहाल चुनावी राजनीति से दूरी बनाए रखने की बात कही है।

    अभिजीत दिपके ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल के रूप में चुनावी मैदान में उतरना नहीं है। उनका कहना है कि उनकी प्राथमिकता एक ऐसे सामाजिक अभियान को मजबूत करना है, जो आम लोगों, विशेषकर युवाओं की आवाज को प्रभावी ढंग से सामने ला सके। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े निर्णय से पहले समाज की अपेक्षाओं और युवाओं की राय को समझना आवश्यक है।

    उन्होंने बताया कि आगामी बैठक में इस बात पर विशेष चर्चा होगी कि आज के युवा किन मुद्दों को सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं और उन विषयों पर किस प्रकार प्रभावी जनजागरूकता अभियान चलाया जा सकता है। उनके अनुसार, आंदोलन का उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना नहीं, बल्कि लोगों की समस्याओं को सामने लाकर समाधान की दिशा में सकारात्मक माहौल तैयार करना भी है।

    राजनीति में आने की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल के जवाब में दिपके ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में बड़ी संख्या में लोग उनसे चुनाव लड़ने की अपेक्षा जताते हैं और उन्हें व्यापक जनसमर्थन मिलता है, तो उस समय इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्णय का आधार व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि जनता की इच्छा और सामाजिक आवश्यकता होगी।

    दिपके का मानना है कि वर्तमान समय में बड़ी संख्या में युवाओं का भरोसा विभिन्न संस्थाओं और पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था पर पहले जैसा नहीं रहा है। उनका कहना है कि इस स्थिति में सबसे बड़ी जरूरत लोगों का विश्वास दोबारा मजबूत करने की है। उन्होंने जिम्मेदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही पर आधारित जनभागीदारी को लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक बताया।

    उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में संगठन की गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। बैठक में शामिल सदस्य आंदोलन के विस्तार, युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर अभियान चलाने की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेंगे। इसके साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों तक पहुंचने और संवाद स्थापित करने के लिए किन माध्यमों का उपयोग किया जाए।

    अभिजीत दिपके ने भरोसा जताया कि यदि उनका अभियान लगातार जनहित के मुद्दों को उठाता रहा और लोगों का समर्थन मिलता रहा, तो भविष्य में संगठन बड़े स्तर पर निर्णय लेने की स्थिति में पहुंच सकता है। उन्होंने दोहराया कि फिलहाल पूरा ध्यान सामाजिक जागरूकता, युवाओं की भागीदारी और जनसरोकारों से जुड़े विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने पर केंद्रित रहेगा।

  • विकसित भारत के संकल्प से जोड़ा नशा मुक्ति अभियान, युवाओं से नेतृत्व संभालने का पीएम मोदी का आह्वान

    विकसित भारत के संकल्प से जोड़ा नशा मुक्ति अभियान, युवाओं से नेतृत्व संभालने का पीएम मोदी का आह्वान

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ की शुरुआत करते हुए देशभर के युवाओं से नशे के खिलाफ व्यापक जनभागीदारी का आह्वान किया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत में ड्रग्स की आपूर्ति केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह देश के खिलाफ रची जा रही एक बड़ी साजिश का हिस्सा भी है। उन्होंने कहा कि दुश्मन देश भारतीय युवाओं को नशे के जाल में फंसाकर देश की ऊर्जा और क्षमता को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे समाज और सरकार को मिलकर विफल करना होगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश का युवा शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से सशक्त होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति केवल एक व्यक्ति के जीवन को प्रभावित नहीं करती, बल्कि पूरे परिवार और समाज पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें।

    अभियान के तहत अगले 100 सप्ताह तक प्रत्येक रविवार देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें खेल, कला, संस्कृति, जनजागरूकता गतिविधियों और सामुदायिक अभियानों के माध्यम से नशा मुक्ति का संदेश लोगों तक पहुंचाया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से चलने वाला राष्ट्रीय अभियान है, जिसका उद्देश्य नशे के खिलाफ जनचेतना को मजबूत करना है।

    कार्यक्रम की शुरुआत में देशभर के युवाओं ने एक साथ नशा मुक्त भारत की शपथ ली। यह आयोजन 28 हजार से अधिक स्थानों पर एक साथ आयोजित किया गया, जिसमें एक करोड़ से अधिक युवाओं ने भागीदारी की। कार्यक्रम में कई आध्यात्मिक गुरुओं ने भी वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की और युवाओं को सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और अन्य जनप्रतिनिधि भी इस अभियान से जुड़े।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत के युवा स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विज्ञान, अंतरिक्ष और नवाचार जैसे क्षेत्रों में वैश्विक पहचान बना रहे हैं। ऐसे समय में यदि कोई युवा नशे की गिरफ्त में आता है तो उसका व्यक्तिगत भविष्य ही नहीं, बल्कि परिवार की उम्मीदें और राष्ट्र की प्रगति भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति के आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और जीवन के लक्ष्यों को कमजोर कर देता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि सरकार नशे के अवैध कारोबार और तस्करी के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है। बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों की जब्ती, तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने इसे सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि ड्रग्स माफिया और तस्करों के खिलाफ अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि नशे की लत से बाहर निकलने वाले लोगों का समाज को सम्मान करना चाहिए, क्योंकि उनका संघर्ष दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकता है। उन्होंने इस अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देने पर बल देते हुए कहा कि स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, सामाजिक संस्थाएं, उद्योग जगत और आध्यात्मिक संगठन मिलकर युवाओं को जागरूक करें। उनके अनुसार, सामूहिक प्रयासों और जनसहभागिता के माध्यम से ही नशा मुक्त भारत और विकसित भारत के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकता है।

  • पाकिस्तान में 'कॉकरोच पार्टी' की एंट्री से बढ़ी सियासी हलचल, गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बयान ने छेड़ी नई बहस

    पाकिस्तान में 'कॉकरोच पार्टी' की एंट्री से बढ़ी सियासी हलचल, गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बयान ने छेड़ी नई बहस

    नई दिल्ली । पाकिस्तान में आर्थिक चुनौतियों, महंगाई और राजनीतिक असंतोष के बीच सोशल मीडिया पर उभर रहे एक नए ऑनलाइन अभियान ‘कॉकरोच पार्टी पाकिस्तान’ को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हाल के दिनों में इस अभियान को सोशल मीडिया पर व्यापक ध्यान मिला है। इसी बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी का एक बयान भी चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें उन्होंने युवाओं की बढ़ती नाराजगी और सामाजिक असंतोष को लेकर चिंता व्यक्त की।

    रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान इस समय आर्थिक दबाव, महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक अस्थिरता जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन परिस्थितियों के बीच सोशल मीडिया पर सक्रिय एक समूह ‘कॉकरोच पार्टी पाकिस्तान’ के नाम से विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए सरकार की नीतियों की आलोचना कर रहा है। यह अभियान विशेष रूप से युवाओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसके समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ने का दावा किया जा रहा है।

    गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि यदि युवाओं की अपेक्षाओं को पूरा नहीं किया गया और उनकी नाराजगी लगातार बढ़ती रही, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उनके बयान को कई राजनीतिक विश्लेषक देश में बढ़ते जनअसंतोष की स्वीकारोक्ति के रूप में देख रहे हैं। हालांकि सरकार की ओर से इस बयान का विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

    बताया जा रहा है कि ‘कॉकरोच पार्टी पाकिस्तान’ स्वयं को भ्रष्टाचार, परिवारवाद और शासन व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी के खिलाफ अभियान चलाने वाला समूह बताती है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेशों में रोजगार, शिक्षा, आर्थिक सुधार, ऊर्जा संकट, जवाबदेही और प्रशासनिक सुधार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है। समूह ने कथित तौर पर एक घोषणापत्र भी जारी किया है और संगठनात्मक ढांचा तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाने का दावा किया है।

    कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि इस अभियान ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से जुड़े मानवाधिकार और प्रशासनिक मुद्दों को भी उठाया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वहीं पाकिस्तान सरकार की ओर से भी इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में आर्थिक संकट और लगातार बढ़ती महंगाई के कारण युवाओं में असंतोष बढ़ा है, जिसका असर सोशल मीडिया अभियानों में भी दिखाई दे रहा है। हालांकि किसी भी नए राजनीतिक या सामाजिक अभियान की वास्तविक लोकप्रियता और उसके प्रभाव का आकलन केवल सोशल मीडिया गतिविधियों के आधार पर करना उचित नहीं माना जाता। ऐसे अभियानों का वास्तविक प्रभाव समय के साथ ही स्पष्ट हो पाता है।

    फिलहाल पाकिस्तान की राजनीति में इस नए ऑनलाइन अभियान और गृह मंत्री के बयान को लेकर बहस जारी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह अभियान केवल सोशल मीडिया तक सीमित रहता है या फिर इसका असर देश की राजनीतिक गतिविधियों और जनचर्चा पर भी व्यापक रूप से दिखाई देता है।

  • शेयर बाजार में तेजी से बढ़ रही युवाओं की भागीदारी….. हर 10वां भारतीय बना निवेशक

    शेयर बाजार में तेजी से बढ़ रही युवाओं की भागीदारी….. हर 10वां भारतीय बना निवेशक


    नई दिल्ली।
    भारतीय शेयर बाजार (Indian stock market) में युवाओं (Youth) की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) (National Stock Exchange – NSE) की मार्केट पल्स-जुलाई 2026 रिपोर्ट के अनुसार, इस साल अप्रैल से जून के बीच यानी तीन माह में शेयर बाजार में आए नए निवेशकों में जेन जी (Gen Z) की हिस्सेदारी 59% रही। मार्च, 2020 से जून, 2026 तक भी हर साल नए निवेशकों में इनका हिस्सा 53-59 फीसदी रहा।


    नए निवेशकों में जेन जी की हिस्सेदारी कितनी रही?

    रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च, 2020 में देश में 3 करोड़ पंजीकृत निवेशक थे, जो जून, 2026 तक बढ़कर 13.24 करोड़ हो गए। यानी अब देश का लगभग हर 10वां व्यक्ति पंजीकृत निवेशक है। इनमें 4.40 करोड़ सक्रिय निवेशक हैं, जिन्होंने एक साल में कम से कम एक बार ट्रेडिंग की। 3.55 करोड़ कैश मार्केट में सक्रिय रहे, जबकि 85 लाख निवेशकों ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) में कारोबार किया।

    रिपोर्ट के अनुसार, शेयर बाजार में निवेश करने में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। उनकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है। देश के कुल पंजीकृत निवेशकों में महिलाओं की हिस्सेदारी 24.9 फीसदी है। यानी लगभग हर चार में एक निवेशक महिला है।


    महिलाओं की भागीदारी कितनी बढ़ी है?
    राज्य – हिस्सेदारी

    गोवा – 33.3%
    मिजोरम- 32.6%
    दिल्ली – 31.1%
    महाराष्ट्र – 29%
    तमिलनाडु- 28.7%
    गुजरात – 28.4%
    उत्तर प्रदेश – 19.2%
    बिहार – 16.5%
    एनएसई में 2020 से जून, 2026 के आंकड़ाें से निष्कर्ष


    लंबी अवधि के निवेश का रुझान क्यों बढ़ रहा है?

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, कैश मार्केट में लगातार बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि खुदरा निवेशक एफएंडओ में सिर्फ सट्टेबाजी और जल्द पैसा बनाने के बजाय लंबी अवधि के निवेश पर भी जोर दे रहे हैं। सेबी कह चुका है कि एफएंडओ में ज्यादातर नुकसान होता है।

  • 2027 के विधानसभा चुनावों में कितना असर दिखाएंगे Gen Z, युवाओं की बढ़ती ताकत पर टिकी राजनीतिक दलों की नजर

    2027 के विधानसभा चुनावों में कितना असर दिखाएंगे Gen Z, युवाओं की बढ़ती ताकत पर टिकी राजनीतिक दलों की नजर

    नई दिल्ली । हाल के वर्षों में देश में युवाओं की राजनीतिक भागीदारी और सामाजिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता ने नई बहस को जन्म दिया है। विशेष रूप से हालिया छात्र आंदोलनों और सोशल मीडिया अभियानों के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या 2027 के विधानसभा चुनावों में Gen Z मतदाता चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। राजनीतिक दल भी इस वर्ग को अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए अलग-अलग स्तर पर युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

    Gen Z में वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवाओं को शामिल किया जाता है। वर्ष 2026 के हिसाब से इस वर्ग की उम्र लगभग 14 से 29 वर्ष के बीच है। देश में इनकी आबादी करीब 37 करोड़ बताई जाती है, जबकि 18 वर्ष से अधिक आयु वाले मतदाताओं में भी इस वर्ग की हिस्सेदारी उल्लेखनीय है। यही कारण है कि आने वाले चुनावों में युवा मतदाता राजनीतिक दलों के लिए एक महत्वपूर्ण समूह बनकर उभरे हैं।

    उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गुजरात और गोवा जैसे राज्यों में वर्ष 2027 के दौरान विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इन राज्यों में बड़ी संख्या में युवा मतदाता चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा होंगे। उत्तर प्रदेश में 18 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लगभग चार करोड़ मतदाता हैं, जो कुल मतदाताओं का करीब 30 प्रतिशत माने जा रहे हैं। इसके अलावा पहली बार मतदान करने वाले युवाओं की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

    पंजाब में भी बड़ी संख्या में युवा मतदाताओं की मौजूदगी को देखते हुए राजनीतिक दल उन्हें साधने की तैयारी में हैं। कई दल युवा उम्मीदवारों को अधिक अवसर देने और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। वहीं उत्तराखंड में भी युवा मतदाता कुल मतदाताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिससे चुनावी मुकाबले में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है।

    गुजरात में भी युवा मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। राज्य में 20 से 29 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं की बड़ी संख्या को देखते हुए विभिन्न राजनीतिक दल संगठन और नेतृत्व स्तर पर युवाओं को अधिक जिम्मेदारियां देने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। वहीं गोवा में भी नए मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे युवा वर्ग का चुनावी महत्व और बढ़ गया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Gen Z की कार्यशैली पारंपरिक राजनीति से अलग है। यह वर्ग सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन संवाद के माध्यम से अपनी राय व्यक्त करने में अधिक सक्रिय रहता है। कई सामाजिक और शैक्षणिक मुद्दों पर डिजिटल अभियानों में युवाओं की भागीदारी ने यह संकेत दिया है कि वे केवल ऑनलाइन चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि सार्वजनिक विमर्श में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।

    विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि युवा मतदाता किसी एक राजनीतिक दल का स्थायी समर्थन आधार नहीं माने जा सकते। यह वर्ग रोजगार, शिक्षा, पारदर्शिता, अवसर और शासन से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देता है तथा परिस्थितियों के अनुसार अपना चुनावी निर्णय बदल सकता है। इसी कारण अधिकांश राजनीतिक दल युवाओं से जुड़े विषयों को अपने चुनावी एजेंडे में प्रमुख स्थान देने की तैयारी कर रहे हैं।

    हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि Gen Z अकेले चुनावी परिणाम तय कर देगा, लेकिन इतना स्पष्ट है कि कई राज्यों में युवा मतदाता मुकाबले को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। ऐसे में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव इस बात की महत्वपूर्ण परीक्षा होंगे कि युवाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी किस हद तक चुनावी नतीजों और राजनीतिक रणनीतियों को प्रभावित करती है।