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  • भारत मंडपम में पीएम मोदी ने किया चिन्मय अमृत महोत्सव सम्मेलन का उद्घाटन, युवा शक्ति को बताया मजबूत भारत की आधारशिला

    भारत मंडपम में पीएम मोदी ने किया चिन्मय अमृत महोत्सव सम्मेलन का उद्घाटन, युवा शक्ति को बताया मजबूत भारत की आधारशिला

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने युवा शक्ति को मजबूत और सक्षम भारत के निर्माण का आधार बताया। प्रधानमंत्री ने स्वामी चिन्मयानंद के साथ अपनी मुलाकात और उनसे मिले आशीर्वाद को याद करते हुए कहा कि युवाओं की क्षमता का विकास देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। इस वैश्विक सम्मेलन में भारत और विदेशों से 9,000 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

    कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने आधुनिक तकनीक के माध्यम से स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम को देखने और उनसे बातचीत का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि यह उनके लिए भावुक क्षण था, जिसने उन्हें वर्ष 1993 में वडोदरा में हुई मुलाकात की याद दिला दी। उस समय स्वामी चिन्मयानंद के साथ हुई बातचीत, उनका स्नेह और आशीर्वाद आज भी उनके स्मरण में हैं। प्रधानमंत्री ने इस अनुभव को संभव बनाने के लिए चिन्मय मिशन के सदस्यों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद के साथ उनकी बातचीत में युवा शक्ति के विकास और उसके माध्यम से मजबूत भारत के निर्माण का विषय प्रमुख रहा था। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालने से लेकर सरकार के मुखिया के तौर पर काम करने तक गुरुदेव का आशीर्वाद उनके साथ रहा है। उनके संबोधन में युवाओं को देश की प्रगति और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने पर विशेष जोर दिखाई दिया।

    मोदी ने कहा कि युवाओं को सक्षम बनाने, उनकी प्रतिभा को निखारने और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने से भारत मजबूत बन सकता है। युवाओं की ऊर्जा और क्षमता का सही उपयोग देश को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में मदद कर सकता है। उन्होंने अपने संबोधन में युवाओं को राष्ट्र निर्माण में भागीदारी के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी नीतियों के केंद्र में देश के युवा हैं।

    प्रधानमंत्री ने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर को भी याद किया। उन्होंने कहा कि यह पड़ाव केवल विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने का अवसर नहीं था, बल्कि भारत की उस ज्ञान परंपरा को दुनिया के सामने रखने का भी मौका था, जो प्राचीन विचारों और अनुभवों के माध्यम से संपूर्ण मानवता के कल्याण की बात करती है।

    उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत आने वाली पीढ़ियों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भारत के प्राचीन विचारों और अनुभवों को वर्तमान समय के संदर्भ में समझना तथा उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी इस विरासत को आगे बढ़ाने का हिस्सा है।

    चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है। यह चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में साल भर आयोजित कार्यक्रमों का समापन है। चिन्मय मिशन की स्थापना स्वामी चिन्मयानंद ने वर्ष 1951 में की थी। मिशन का प्रमुख उद्देश्य वेदांत और भगवद गीता के ज्ञान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।

    समय के साथ चिन्मय मिशन ने आध्यात्मिक शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, युवा सशक्तिकरण और सामुदायिक सेवा जैसे क्षेत्रों में भी काम किया है। सम्मेलन के माध्यम से आध्यात्मिक विचारों, भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीन समाज में उनके महत्व पर चर्चा की जा रही है। प्रधानमंत्री का संबोधन भी युवा शक्ति, सांस्कृतिक मूल्यों और विकसित भारत के लक्ष्य के बीच संबंध को रेखांकित करने पर केंद्रित रहा।

  • इस्राइल में चुनाव से पहले युवाओं की सोच में दिख रहा बदलाव… बढ़ रहा दक्षिणपंथ का आकर्षण?

    इस्राइल में चुनाव से पहले युवाओं की सोच में दिख रहा बदलाव… बढ़ रहा दक्षिणपंथ का आकर्षण?


    तेलअबीव।
    इस्राइल (Israel) में नई पीढ़ी के बीच दक्षिणपंथी राजनीति का आकर्षण बढ़ता दिखाई दे रहा है। कभी अपने कट्टर विचारों के कारण राजनीतिक मुख्यधारा से दूर रहे नेता इतामार बेन-ग्विर (Leader Itamar Ben-Gvir) आज सरकार के शक्तिशाली मंत्रियों में शामिल हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उनके आसपास बड़ी संख्या में युवा समर्थक नजर आ रहे हैं। यह बदलाव केवल किसी एक नेता की लोकप्रियता की कहानी नहीं है, बल्कि उस पीढ़ी की सोच को भी सामने लाता है, जिसने युद्ध, हिंसा और सुरक्षा के सवालों के बीच आंखें खोली हैं। सवाल है कि इस्राइल के युवा मतदाता (Young Voters) दक्षिणपंथ की ओर क्यों आकर्षित हो रहे हैं और इसका देश की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?


    पहले सेना ने ठुकराया, अब युवाओं के बीच लोकप्रिय

    एक संवाददाता लूसी विलियमसन की रिपोर्ट के मुताबिक बेन-ग्विर को युवावस्था में उनके राजनीतिक विचारों के अत्यधिक कट्टर होने के कारण इस्राइली सेना में शामिल होने के लिए अनुपयुक्त माना गया था। करीब तीन दशक बाद वही नेता राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री के पद पर हैं और चुनावी राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं।रामले शहर के एक बाजार में चुनाव प्रचार के दौरान उनके समर्थकों में बड़ी संख्या में युवा शामिल थे। 20 वर्षीय मोर्दखाई का मानना है कि बेन-ग्विर उन्हें सुरक्षा का भरोसा देते हैं। वहीं, 18 वर्षीय नदाव का कहना है कि यह नेता दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि इस्राइल एक मजबूत देश है और उसे अपनी विचारधारा व्यक्त करने में संकोच नहीं करना चाहिए।इन बयानों से युवाओं की प्राथमिकताओं का संकेत मिलता है। उनके लिए केवल आर्थिक मुद्दे या रोजगार ही चुनावी पसंद तय नहीं कर रहे, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, देश की ताकत और भविष्य को लेकर भरोसा भी महत्वपूर्ण बन गया है।


    पहली बार वोट डालने वाले युवा बन सकते हैं निर्णायक

    रिपोर्ट के अनुसार आगामी चुनाव में पांच लाख से अधिक मतदाता पहली बार अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। ये युवा ऐसे समय में मतदान करने जा रहे हैं, जब इस्राइल की सुरक्षा, राष्ट्रीय पहचान और भविष्य की दिशा पर बहस तेज है।रिपोर्ट में उद्धृत एक सर्वेक्षण के मुताबिक, पहली बार मतदान करने वाले 16 प्रतिशत से अधिक युवा बेन-ग्विर की यहूदी शक्ति पार्टी या उनके सहयोगी बेजालेल स्मोट्रिच की धार्मिक जायनिज्म पार्टी का समर्थन करने की योजना बना रहे हैं। एक अन्य सर्वेक्षण में करीब तीन-चौथाई युवा मतदाताओं ने खुद को दक्षिणपंथी या मध्य-दक्षिणपंथी विचारधारा के करीब बताया।हालांकि, इन आंकड़ों का अर्थ यह नहीं है कि सभी युवा दक्षिणपंथी हो गए हैं। ये सर्वेक्षणों में सामने आए रुझान हैं। फिर भी, चुनावी मुकाबले में इन नए मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है, खासकर तब, जब सरकार समर्थक और विपक्षी खेमों के बीच मुकाबला कड़ा हो।


    7 अक्तूबर के हमलों ने बदली सोच

    युवाओं की राजनीतिक पसंद को समझने के लिए 7 अक्तूबर 2023 के हमलों और उसके बाद शुरू हुए गाजा युद्ध को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हमास के नेतृत्व में हुए हमलों ने इस्राइल में सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा की। युद्ध और हिंसा के अनुभवों ने कई युवाओं के लिए राजनीति को व्यक्तिगत सवाल बना दिया है।23 वर्षीय अति-रूढ़िवादी यहूदी युवक मेइर श्राइबर, जो लंदन में पले-बढ़े हैं, कहते हैं कि 7 अक्तूबर की घटनाओं ने उन्हें इस नतीजे पर पहुंचाया कि शांति हासिल करना आसान नहीं है। उनके अनुसार कम उम्र में देखी गई घटनाएं व्यक्ति की सोच और व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित करती हैं।हालांकि, इस सोच से सभी इस्राइली युवा सहमत नहीं हैं। कुछ लोग मौजूदा सरकार की नीतियों और सुरक्षा संबंधी फैसलों पर सवाल भी उठाते हैं। इसलिए युवाओं में दक्षिणपंथ की ओर झुकाव को एक समान विचारधारा का परिणाम मानने के बजाय युद्ध के अनुभवों और भविष्य को लेकर अलग-अलग आशंकाओं के संदर्भ में देखना जरूरी है।


    कठोर नीतियां भी बन रहीं बहस का विषय

    बेन-ग्विर की राजनीति विवादों से घिरी रही है। वे कब्जे वाले पश्चिमी तट के विलय, गाजा में यहूदी बस्तियां बसाने और फलस्तीनियों के तथाकथित स्वैच्छिक पलायन जैसे विचारों का समर्थन करते रहे हैं। उदारवादी इस्राइली इन नीतियों और उनके बयानों की आलोचना करते हैं। कई पश्चिमी देशों ने बेन-ग्विर और स्मोट्रिच के खिलाफ फलस्तीनियों के प्रति भड़काऊ बयानों के मामले में प्रतिबंध या यात्रा संबंधी पाबंदियां भी लगाई हैं।राजनीतिक विश्लेषक डाहलिया शाइनडलिन के अनुसार, इस्राइल के युवा यहूदी मतदाता लगभग दो दशक से औसतन पुरानी पीढ़ी की तुलना में अधिक दक्षिणपंथी रुझान दिखाते रहे हैं। उनके मुताबिक इन युवाओं ने कई युद्धों के बीच जीवन बिताया है और शांति की कोशिशों का उन्हें व्यक्तिगत अनुभव कम मिला है। इससे राजनीतिक बहस में कठोर विचारों को स्वीकार्यता मिलने की पृष्ठभूमि बनी है।


    टिकटॉक और इंस्टाग्राम भी बन रहे चुनावी हथियार

    इस बदलाव में सोशल मीडिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। युवा मतदाता पारंपरिक समाचार चैनलों और अखबारों के बजाय टिकटॉक और इंस्टाग्राम से अधिक जानकारी हासिल कर रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक नेताओं के छोटे वीडियो, सीधे संवाद और आकर्षक प्रचार सामग्री मतदाताओं तक पहुंचने का प्रभावी माध्यम बन गए हैं।

    विपक्षी दल भी अब इस चुनौती को समझ रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट (Former Prime Minister Naftali Bennett) के नेतृत्व वाले विपक्षी दल के युवा उम्मीदवार योनातन शालेव का कहना है कि बेन-ग्विर ने दूसरे नेताओं की तुलना में सोशल मीडिया की ताकत को पहले पहचान लिया। अब विपक्ष भी युवा मतदाताओं तक पहुंचने के लिए डिजिटल प्रचार का सहारा ले रहा है। इस्राइल की राजनीति में नई पीढ़ी का यह रुझान बताता है कि चुनाव केवल पुराने राजनीतिक समीकरणों से तय नहीं होंगे। सुरक्षा की चिंता, युद्ध की स्मृतियां और डिजिटल माध्यमों से बनने वाली राजनीतिक छवि युवा मतदाताओं के फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन इस्राइल के युवा पूरी तरह एक खेमे में बंटे नहीं हैं। असली सवाल यही है कि मतदान के दिन सुरक्षा और कठोर नेतृत्व का संदेश अधिक प्रभावी होगा या बदलाव और जवाबदेही की मांग।

  • लाल परेड मैदान में कल 20 हजार से ज्यादा युवाओं से संवाद करेंगे CM मोहन यादव, जुबिन नौटियाल का कंसर्ट भी

    लाल परेड मैदान में कल 20 हजार से ज्यादा युवाओं से संवाद करेंगे CM मोहन यादव, जुबिन नौटियाल का कंसर्ट भी

    भोपाल ।  सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन छह अक्टूबर को भोपाल के लाल परेड मैदान में किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 हजार से अधिक युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। उच्च शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में युवा शक्ति से जुड़े विषयों पर संवाद और मार्गदर्शन के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। कार्यक्रम में पार्श्व गायक जुबिन नौटियाल और मुंबई के कबीर कैफे की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। आयोजन को लेकर उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने लाल परेड मैदान पहुंचकर कार्यक्रम स्थल, प्रदर्शनी कक्षों और अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।

    निरीक्षण के दौरान अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। कॉन्क्लेव में युवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष फोकस किया जाएगा। इसमें रोजगार, कौशल विकास, स्वरोजगार, उद्यमिता, नवाचार, अनुसंधान और उभरती प्रौद्योगिकियों को प्रमुखता दी जाएगी। कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को शिक्षा और रोजगार की बदलती आवश्यकताओं के साथ उपलब्ध संभावनाओं की जानकारी देने की व्यवस्था की गई है।

    कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योगों और नवोदित उद्यमों की सहभागिता रहेगी। इनके माध्यम से युवाओं को रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में बदलती जरूरतों तथा उपलब्ध अवसरों से परिचित कराया जाएगा। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विषयों पर जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही युवा प्रतिभागियों के लिए सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आयोजन किया गया है, जिसमें जुबिन नौटियाल और कबीर कैफे की प्रस्तुतियां शामिल रहेंगी।

    आयोजन में 17 शासकीय विभागों और विभिन्न संस्थाओं की सहभागिता रहेगी। उच्च शिक्षा, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, तकनीकी शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, श्रम, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, परिवहन, आयुष तथा पुलिस एवं साइबर सुरक्षा से जुड़े विभाग इसमें शामिल होंगे। सभी विभाग अपने-अपने क्षेत्र से संबंधित योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी युवाओं को देंगे। इस तरह कॉन्क्लेव में युवाओं के लिए रोजगार, कौशल, उद्यमिता, नवाचार और तकनीक से जुड़े विषयों के साथ विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।

  • MP: विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने की Gen-Z की बजाय युवाओं को तरुण भारत कहने की वकालत

    MP: विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने की Gen-Z की बजाय युवाओं को तरुण भारत कहने की वकालत


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर (Assembly Speaker Narendra Singh Tomar) ने ‘Gen-Z’ के बजाय ‘तरुण भारत’ (‘Tarun Bharat’) शब्द का इस्तेमाल करने की वकालत की. उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी का खुले मन से स्वागत किया जाना चाहिए क्योंकि बदलाव जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है।

    इंदौर में स्टेट प्रेस क्लब द्वारा आयोजित भारतीय पत्रकारिता से जुड़े एक कार्यक्रम में तोमर ने कहा, “आज हर जगह ‘Gen-Z’ की चर्चा हो रही है, लेकिन मेरा आग्रह है कि ‘Gen-Z’ शब्द के बजाय अगर हम ‘तरुण भारत’ शब्द का इस्तेमाल करें, तो यह कहीं बेहतर होगा.”

    उन्होंने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी देश और विदेश में उल्लेखनीय काम कर रही है, जिससे हर कोई हैरान है. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि मौजूदा समय पीढ़ियों के बदलाव का दौर है. ऐसे में हम सभी को अपनी सोच का दायरा बढ़ाना चाहिए, नए पहलुओं पर गौर करना चाहिए और उस पीढ़ी का स्वागत और सम्मान करना चाहिए जो भविष्य में हमसे कमान संभालेगी.”

    बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि पीढ़ीगत अंतर हो सकता है, लेकिन ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है कि युवा पीढ़ी हमेशा गलत दिशा में ही सोचेगी. उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपराएं बदलाव को प्रकृति का नियम मानती हैं और हर दौर में बदलाव एक स्वाभाविक प्रक्रिया रही है।

    पुराने मुगल शासकों का जिक्र करते हुए तोमर ने कहा कि ऐसी संस्कृतियां भी रही हैं जिनमें बेटा साम्राज्य पाने के लिए अपने ही पिता को कैद कर लेता था. उन्होंने कहा, “कुछ लोग जनता को गुमराह करने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि देश के युवाओं ने पिछले 10-15 सालों में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा प्रयोग किए हैं. युवाओं की इस उपलब्धि पर हम जितना भी गर्व करें, कम है।

    तोमर ने पीएम मोदी के नेतृत्व की तारीफ की और कहा कि भारत को वैश्विक पहचान मिली है, जबकि भारतीय युवा वैश्विक अर्थव्यवस्था में अहम योगदान दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि विदेशों में प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों में शामिल होने वाले भारतीय मूल के बड़ी संख्या में युवा सदस्य, विकसित देशों की तरक्की में भारतीयों के योगदान को दिखाते हैं।


    स्टार्ट-अप क्रांति में युवाओं का योगदान

    पूर्व केंद्रीय मंत्री ने मोदी के नेतृत्व में भारत की स्टार्ट-अप यात्रा का भी जिक्र किया. उन्होंने आगे कहा, “जब हम सरकार में आए थे, तब देश में सिर्फ 300-400 स्टार्ट-अप हुआ करते थे. आज कॉम्पिटिशन की वजह से हजारों स्टार्ट-अप हैं. इन स्टार्ट-अप्स में वही युवा हैं जिन्हें आप ‘जेन-जी’ कहते हैं, जबकि मैं उन्हें ‘तरुण भारत’ कहता हूं।

    बता दें कि ‘Gen-Z’ का मतलब उस पीढ़ी से है जो मुख्य रूप से 1997 और 2012 के बीच पैदा हुई थी. देश में अलग-अलग मुद्दों पर बढ़ते युवा आंदोलनों के बीच राजनीतिक चर्चाओं में इस शब्द का इस्तेमाल बढ़ा है।

  • शी जिनपिंग ने पांच साल में एक लाख अमेरिकी युवाओं को चीन बुलाने का किया बड़ा एलान

    शी जिनपिंग ने पांच साल में एक लाख अमेरिकी युवाओं को चीन बुलाने का किया बड़ा एलान


    नई दिल्ली ।
    चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अगले पांच वर्षों में एक लाख युवा अमेरिकियों को चीन आने का निमंत्रण दिया है। इन युवाओं के लिए पढ़ाई और विभिन्न आदान-प्रदान कार्यक्रमों के अवसर उपलब्ध कराने की बात कही गई है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब चीन और अमेरिका के बीच संबंधों में व्यापार, तकनीक और अन्य रणनीतिक मुद्दों को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। शी जिनपिंग ने युवाओं को दोनों देशों के भविष्य के संबंधों से जोड़ते हुए लोगों के बीच संपर्क और आपसी समझ बढ़ाने पर जोर दिया।

    शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका के रिश्तों की उम्मीद दोनों देशों के लोगों से जुड़ी है और इन संबंधों का भविष्य युवाओं के हाथ में है। इसी सोच के तहत उन्होंने अगले पांच वर्षों में एक लाख युवा अमेरिकियों को चीन आने का न्योता देने की घोषणा की। इन यात्राओं में शिक्षा के साथ सांस्कृतिक और अन्य आदान-प्रदान कार्यक्रमों को भी शामिल किया जाएगा।

    यह पहली बार नहीं है जब चीन की ओर से अमेरिकी युवाओं को इस तरह आमंत्रित किया गया है। नवंबर 2023 में भी पांच वर्षों के भीतर 50 हजार युवा अमेरिकियों को चीन बुलाने की पहल की गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह लक्ष्य तय समय से करीब ढाई साल पहले ही पूरा हो गया। इसके बाद अब प्रस्तावित संख्या को बढ़ाकर एक लाख कर दिया गया है।

    इस पहल के तहत अमेरिकी युवाओं ने चीन के अलग-अलग हिस्सों का दौरा किया है। कई युवाओं ने वहां शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लिया, स्थानीय लोगों से मुलाकात की और चीन के इतिहास तथा आधुनिक विकास को करीब से समझने का अवसर पाया। चीन में आयोजित कार्यक्रमों में विश्वविद्यालयों के छात्रों के बीच संवाद और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां भी शामिल रही हैं।

    अपने संबोधन में शी जिनपिंग ने चीन और अमेरिका के पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दोनों देशों के सहयोग को याद किया और कहा कि उस समय दोनों पक्षों ने फासीवादी ताकतों के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ी थी। उनका कहना था कि इस साझा इतिहास को दोनों देशों के लोगों ने याद रखा है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चीन और अमेरिका के सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने चीन की मदद करने वाले अमेरिकी पायलटों के समूह ‘फ्लाइंग टाइगर्स’ की भूमिका को याद किया। इसके साथ ही उन्होंने दोनों देशों के बीच पुराने संपर्कों से जुड़े ‘गंग हो’ शब्द का भी जिक्र किया और इसे मिलकर काम करने के अर्थ से जोड़ा।

    शी जिनपिंग ने यह भी कहा कि चीन के राष्ट्रीय पुनरुत्थान का लक्ष्य और अमेरिका को फिर से महान बनाने की कोशिश एक-दूसरे के साथ आगे बढ़ सकती हैं। उन्होंने दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती और संपर्क बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

    एक लाख अमेरिकी युवाओं को चीन बुलाने की नई पहल को शिक्षा, सांस्कृतिक संपर्क और लोगों के बीच संवाद बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। पिछले कार्यक्रम में 50 हजार युवाओं का लक्ष्य समय से पहले पूरा होने के बाद अब इसकी संख्या दोगुनी की गई है। आने वाले पांच वर्षों में इस पहल के तहत कितने युवा चीन पहुंचते हैं और इससे दोनों देशों के बीच शैक्षणिक एवं सामाजिक संपर्क किस स्तर तक बढ़ता है, यह आगे स्पष्ट होगा।

  • Delhi Gurugram News: मानसिक रूप से बीमार दोस्त को घुमाने आई युवती ने भीड़ बढ़ने पर युवक को सुरक्षित संभाला

    Delhi Gurugram News: मानसिक रूप से बीमार दोस्त को घुमाने आई युवती ने भीड़ बढ़ने पर युवक को सुरक्षित संभाला

    नई दिल्ली । दिल्ली से गुरुग्राम घूमने आए एक युवक की शनिवार को फ्रेंड्स कॉलोनी में अचानक तबीयत बिगड़ गई। युवक को मानसिक रूप से बीमार बताया गया है। इलाके में मौजूद लोगों की भीड़ देखकर वह घबरा गया और असहज होकर बदहवास जैसी स्थिति में पहुंच गया। उसके साथ मौजूद महिला मित्र ने स्थिति को समझते हुए तुरंत उसे संभाला और सुरक्षित महसूस कराने की कोशिश की।

    जानकारी के अनुसार, दोनों दोस्त युवक का मन बहलाने और उसकी मानसिक स्थिति को बेहतर रखने के उद्देश्य से दिल्ली से गुरुग्राम आए थे। घूमने के दौरान वे सिविल लाइन क्षेत्र स्थित फ्रेंड्स कॉलोनी पहुंचे। इसी दौरान वहां अचानक मौजूद भीड़ पर युवक की नजर पड़ी और वह घबरा गया। भीड़ के बीच वह असहज महसूस करने लगा और उसकी स्थिति बिगड़ती चली गई।

    युवक की हालत देखकर महिला मित्र ने बिना घबराए स्थिति को संभालने की कोशिश की। उसने युवक को भीड़ से अलग किया और उसे शांत माहौल देने का प्रयास किया। महिला मित्र की सूझबूझ और समय पर उठाए गए कदम से युवक धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आने लगा। इस दौरान आसपास मौजूद लोगों का ध्यान भी घटना की ओर गया, लेकिन स्थिति को संभाल लिया गया।

    पुलिस के मुताबिक, युवक की मानसिक स्थिति से जुड़ी परेशानी के कारण अचानक जुटी भीड़ ने उसकी असहजता बढ़ा दी। पुलिस ने बताया कि दोनों गुरुग्राम घूमने और युवक का मन बहलाने के उद्देश्य से आए थे। फ्रेंड्स कॉलोनी में भीड़ देखने के बाद युवक की स्थिति अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उसकी महिला मित्र ने उसे संभाल लिया।

    मौके पर महिला मित्र ने युवक को भीड़ से दूर रखने और उसे सहज माहौल उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया। उसने धैर्य के साथ युवक को संभालने का प्रयास किया। कुछ समय बाद उसकी स्थिति सामान्य होने लगी। इस दौरान किसी तरह का विवाद नहीं हुआ और न ही कोई अप्रिय घटना सामने आई।

    पुलिस के अनुसार, युवक के व्यवहार का संबंध उसकी मानसिक स्थिति से था। अचानक बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने उसकी परेशानी को बढ़ा दिया था। ऐसे समय में महिला मित्र ने स्थिति को समझते हुए तत्काल प्रतिक्रिया दी और युवक को संभालने में अहम भूमिका निभाई।

    घटना के दौरान आसपास मौजूद लोगों की नजर भी युवक की स्थिति पर बनी रही। हालांकि, महिला मित्र के समय रहते हस्तक्षेप करने के बाद स्थिति नियंत्रण में आ गई। युवक को भीड़ से अलग कर शांत रखने की कोशिश की गई, जिससे उसकी परेशानी धीरे-धीरे कम हुई।

    पुलिस के मुताबिक, इस घटना में किसी प्रकार का विवाद या अनहोनी नहीं हुई। दोनों का गुरुग्राम आने का उद्देश्य युवक का मन बहलाना और उसकी मानसिक स्थिति को बेहतर बनाए रखना था। लेकिन फ्रेंड्स कॉलोनी में अचानक भीड़ देखने के बाद युवक घबरा गया और उसकी तबीयत बिगड़ गई।

    घटना में महिला मित्र की तत्परता से स्थिति को समय रहते संभाल लिया गया। उसने युवक को अकेला छोड़ने के बजाय उसके साथ रहकर उसे सुरक्षित महसूस कराने की कोशिश की। इसके बाद युवक धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट आया और मौके पर स्थिति शांत रही।

  • लखनऊ पुस्तक महोत्सव में CM योगी की युवाओं से अपील, पाठ्यक्रम के साथ अच्छी किताबें खरीदें

    लखनऊ पुस्तक महोत्सव में CM योगी की युवाओं से अपील, पाठ्यक्रम के साथ अच्छी किताबें खरीदें

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से पाठ्यक्रम की किताबों के साथ साहित्य, महापुरुषों की आत्मकथाएं, धार्मिक ग्रंथ और वैज्ञानिक शोध से जुड़ी पुस्तकें पढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपना ‘बुक बैंक’ बनाना चाहिए। किताबें व्यक्ति को नई दिशा देने के साथ जीवन की मुश्किल परिस्थितियों में मार्गदर्शन भी कर सकती हैं।

    मुख्यमंत्री शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित 5वें गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 के उद्घाटन समारोह में युवाओं को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में लगी पुस्तक प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ वितरित की और इसे हर बच्चे के लिए पढ़ने योग्य बताया।

    योगी ने कहा कि ‘एग्जाम वॉरियर्स’ केवल स्कूली विद्यार्थियों के लिए उपयोगी नहीं है, बल्कि हर युवा और नागरिक के लिए मार्गदर्शक बन सकती है। जीवन में हर व्यक्ति को किसी न किसी परीक्षा से गुजरना पड़ता है। कभी डिग्री और सर्टिफिकेट के लिए तो कभी जीवन की अलग-अलग परिस्थितियों में। मुश्किल समय में जब हिम्मत जवाब देने लगती है, तब ऐसी किताबें संबल दे सकती हैं।

    ‘युवा किताब नहीं पढ़ता, यह कहना अन्याय’

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि आज का युवा किताबों से दूर हो गया है या सोशल मीडिया पर अपना समय बर्बाद कर रहा है। उनके मुताबिक जरूरत युवाओं तक किताबें पहुंचाने की व्यवस्था करने की है।

    उन्होंने बताया कि लखनऊ में पुस्तक महोत्सव शुरू करने का प्रस्ताव आने पर उन्होंने तत्कालीन अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी से चर्चा कर इसे प्रोत्साहित करने को कहा था। लखनऊ में आयोजन का अच्छा परिणाम मिलने के बाद उन्होंने गोरखपुर में भी पुस्तक महोत्सव कराने का सुझाव दिया। वहां लखनऊ से भी ज्यादा लोगों की भागीदारी हुई और अधिक पुस्तकों की बिक्री हुई। इससे यह धारणा गलत साबित हुई कि आज का युवा किताबें नहीं पढ़ता।

    ज्ञान को संकुचित दायरे में न बांधें

    योगी ने कहा कि समाज और राष्ट्र भी तब कमजोर होते हैं, जब वे अपनी क्षमता खोने लगते हैं और अपनी विरासत से दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को पहले सीमित दायरे में बांधने का प्रयास किया गया, जिसके दुष्परिणाम समाज और देश को भुगतने पड़े।

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण भूमि रहा है। लखनऊ से करीब 70 किलोमीटर दूर नैमिषारण्य में ऋषियों ने चिंतन और ज्ञान की परंपरा को आगे बढ़ाया। काशी ज्ञान और संवाद की भूमि रही है। वहीं मुजफ्फरनगर स्थित शुक्रतीर्थ को करीब 5 हजार वर्ष पहले श्रीमद्भागवत महापुराण की पहली कथा के वाचन की परंपरा से जोड़ा जाता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान के रास्ते खुले रखने चाहिए। केवल स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम पढ़ लेना ही व्यक्ति को पूर्ण रूप से ज्ञानवान नहीं बनाता। समाज, देश और दुनिया को समझने के लिए अलग-अलग विषयों और विचारों से परिचित होना जरूरी है।

    9 दिन तक चलेगा पुस्तक महोत्सव

    योगी ने कहा कि पुस्तक महोत्सव युवाओं, छात्रों, लेखकों और प्रकाशकों को एक मंच देता है। यहां ज्ञानवर्धक, मनोरंजक और रोचक पुस्तकों से परिचित होने का अवसर मिलता है। गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 अगले 9 दिनों तक चलेगा। इस दौरान पुस्तकों के विमोचन के साथ लेखकों से संवाद और उनकी रचनात्मक यात्रा को समझने का अवसर भी मिलेगा।

    उन्होंने कहा कि आत्मकथाओं के जरिए महापुरुषों के संघर्ष को जाना जा सकता है और वैज्ञानिकों के शोध व उनकी यात्राओं को पुस्तकों के माध्यम से समझा जा सकता है। किताबें रचनात्मकता को आगे बढ़ाने और जीवन को नई दिशा देने का माध्यम बन सकती हैं।

    57,600 ग्राम पंचायतों में पुस्तकालय की व्यवस्था

    मुख्यमंत्री ने डिजिटल युग का जिक्र करते हुए कहा कि तकनीक ने गांव और शहर के बीच की दूरी कम की है। ग्राम सचिवालयों में केवल प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी के बैठने की व्यवस्था नहीं की गई, बल्कि ग्रामीणों के लिए कॉन्फ्रेंस रूम और डिजिटल लाइब्रेरी भी बनाई गई हैं।

    उन्होंने बताया कि प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों में पुस्तकालय की व्यवस्था की गई है और इनमें नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। उनके मुताबिक सुविधा मिलने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के युवा अपनी प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

    स्कूलों की तस्वीर बदली, स्मार्ट क्लास की सुविधा

    योगी ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों की पुरानी स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले कई स्कूलों के भवन और व्यवस्थाएं जर्जर थीं। ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए स्कूलों की स्थिति में बदलाव किया गया। भवनों का निर्माण हुआ और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

    चित्रकूट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक साल के अंतराल में स्कूल की स्थिति में ऐसा बदलाव आया कि तीसरी कक्षा की एक छात्रा ने डिजिटल लाइब्रेरी संचालित करके दिखाई और पाठ्यक्रम से जुड़ी सामग्री भी प्रदर्शित की। उनके मुताबिक पहले सुविधाओं के अभाव में बच्चों को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर नहीं मिलता था।

    किताब खरीदें और अपना ‘बुक बैंक’ तैयार करें

    मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि जब भी किताब खरीदने का अवसर मिले तो पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ ऐसी किताबों को भी प्राथमिकता दें, जो रचनात्मकता और सकारात्मक सोच विकसित करें। अच्छी साहित्यिक कृति, धार्मिक ग्रंथ, महापुरुष की आत्मकथा या वैज्ञानिक शोध पर आधारित पुस्तक जीवनभर प्रेरणा दे सकती है।

    उन्होंने युवाओं से खाली समय में किताब पढ़ने की आदत विकसित करने और अपना ‘बुक बैंक’ तैयार करने की अपील की। साथ ही कहा कि युवाओं को अपनी राह खुद तैयार करनी है और पुस्तक मेले इसमें महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकते हैं।

    ‘नेशनल बुक ट्रस्ट की किताबों का सबसे बड़ा खरीदार यूपी’

    योगी ने गोमती पुस्तक महोत्सव के आयोजकों, नेशनल बुक ट्रस्ट और सहयोगी संस्थाओं का आभार जताते हुए कहा कि इसे केवल लखनऊ तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। पुस्तक मेले को प्रदेश के दूसरे हिस्सों तक ले जाने की जरूरत है और उत्तर प्रदेश सरकार इसमें पूरा सहयोग करेगी।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकों की सबसे बड़ी खरीदार है। गांवों, स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पुस्तकालय उपलब्ध कराने का काम किया जा रहा है। यह समय की जरूरत है और ज्ञान की इस परंपरा को और व्यापक बनाने की आवश्यकता है।

  • दक्षिण कोरिया में जनरेटिव एआई का रोजगार पर असर, युवाओं की 2.85 लाख नौकरियां घटीं, वरिष्ठ कर्मचारियों को मिला फायदा

    दक्षिण कोरिया में जनरेटिव एआई का रोजगार पर असर, युवाओं की 2.85 लाख नौकरियां घटीं, वरिष्ठ कर्मचारियों को मिला फायदा


    नई दिल्ली ।
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल का असर अब रोजगार बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। दक्षिण कोरिया के केंद्रीय बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरेटिव एआई तकनीकों के तेजी से विस्तार के बाद एआई से अधिक प्रभावित क्षेत्रों में युवाओं के रोजगार में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि तकनीकी बदलाव का असर अलग-अलग आयु वर्ग के कर्मचारियों पर समान नहीं रहा है।

    जून 2022 से जून 2026 के बीच दक्षिण कोरिया में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लोगों द्वारा किए जा रहे कुल रोजगारों की संख्या में 2.85 लाख की कमी दर्ज की गई। इस गिरावट का सबसे बड़ा हिस्सा उन क्षेत्रों से जुड़ा रहा जिन्हें एआई के प्रभाव के प्रति अधिक संवेदनशील माना जाता है। कुल कम हुए रोजगारों में करीब 2.68 लाख यानी लगभग 94 प्रतिशत नौकरियां एआई प्रभावित क्षेत्रों से संबंधित थीं।

    इन क्षेत्रों में आईटी सेवाएं, प्रकाशन, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और प्रोफेशनल सर्विसेज प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों में ऐसे काम बड़ी संख्या में शामिल हैं जिन्हें जनरेटिव एआई, ऑटोमेशन और डिजिटल टूल्स के जरिए तेजी से बदला या आसान किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, आईटी सेवाओं में युवाओं का रोजगार 31.4 प्रतिशत घटा। यह उन क्षेत्रों में सबसे बड़ी गिरावट रही, जहां एआई आधारित तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।

    प्रकाशन क्षेत्र में भी युवा रोजगार में 27.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इस श्रेणी में सॉफ्टवेयर और वेब डिजाइन से जुड़े पेशे भी शामिल हैं। कंप्यूटर प्रोग्रामिंग क्षेत्र में युवाओं के रोजगार में 16.6 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि प्रोफेशनल सर्विसेज में यह कमी 11.6 प्रतिशत रही। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि एआई का शुरुआती प्रभाव उन नौकरियों पर अधिक पड़ सकता है जिनमें डिजिटल, दोहराए जाने वाले या सामग्री आधारित कार्य बड़ी भूमिका निभाते हैं।

    इसके विपरीत 50 वर्ष या उससे अधिक आयु के कर्मचारियों के रोजगार में इसी अवधि के दौरान 2.30 लाख की बढ़ोतरी हुई। खास बात यह रही कि इनमें से 1.73 लाख रोजगार एआई प्रभावित क्षेत्रों में ही बढ़े। इससे यह संकेत मिलता है कि अनुभव, विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र की गहरी समझ वाले कर्मचारियों की मांग कई जगहों पर अभी भी मजबूत बनी हुई है।

    रिपोर्ट में 2022 को आधार वर्ष माना गया है। इसी वर्ष के अंत में चैटजीपीटी के लॉन्च के बाद जनरेटिव एआई तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ा। इसके बाद कंपनियों में कंटेंट तैयार करने, कोडिंग, डेटा विश्लेषण और अन्य डिजिटल कार्यों के लिए एआई आधारित उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा है। इससे कंपनियों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ कुछ पारंपरिक भूमिकाओं की जरूरत पर भी असर पड़ा है।

    शिक्षा के आधार पर रोजगार की स्थिति में भी बदलाव सामने आया है। 2019 से 2022 के बीच स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रीधारकों की औसत बेरोजगारी दर 8.2 प्रतिशत रही, जबकि माध्यमिक या जूनियर कॉलेज स्तर तक पढ़े युवाओं में यह 8 प्रतिशत थी। 2022 के बाद उच्च शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी दर 7 प्रतिशत रही, जबकि कम शैक्षणिक योग्यता वाले युवाओं में यह 5.4 प्रतिशत दर्ज की गई।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दक्षिण कोरिया की लगातार घटती आबादी युवाओं के रोजगार में बदलाव का एक कारण हो सकती है। हालांकि एआई ने इस बदलाव को और तेज किया है। शोधकर्ताओं के अनुसार एआई युवा कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ा सकता है, लेकिन यही तकनीक कुछ भूमिकाओं में उनके काम को प्रतिस्थापित भी कर सकती है। इसलिए चुनौती केवल नौकरियां घटने की नहीं, बल्कि युवाओं के लिए पारंपरिक करियर की शुरुआती सीढ़ियों के कमजोर होने की भी है।

  • लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण देने का लक्ष्य

    लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण देने का लक्ष्य

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए युवाओं, तकनीक और आत्मनिर्भरता को भारत की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले एक साल में देश के एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य भारतीय युवाओं में AI के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता विकसित करना है।

    प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि इस लक्ष्य को देश के 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयास से हासिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए ऊंचे संकल्प और उसी स्तर के सामर्थ्य व प्रयास जरूरी हैं। उनके संबोधन में युवाओं को विकसित भारत की यात्रा की प्रमुख शक्ति के रूप में रेखांकित किया गया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा दौर में डेटा सेंटर, AI और क्वांटम तकनीक का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। उभरती तकनीकें भारत के सामने नई चुनौतियां और अवसर दोनों लेकर आ रही हैं। ऐसे में देश को इनोवेशन का केंद्र बनाने के साथ डिजिटल पब्लिक टेक्नोलॉजी को दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास बढ़ाने की जरूरत है।

    तकनीकी विकास के साथ सेमीकंडक्टर निर्माण को भी प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि आज इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल तकनीक में चिप की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं और तीन प्लांट शुरू होने की जानकारी दी गई। आने वाले सात से आठ वर्षों में और संयंत्र शुरू करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा को भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि AI, चिप निर्माण और डेटा सेंटर के विस्तार के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होगी। ऐसे में पर्याप्त और भरोसेमंद ऊर्जा उपलब्धता भारत की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। उन्होंने परमाणु ऊर्जा को ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के प्रमुख माध्यमों में शामिल किया।

    प्रधानमंत्री ने देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य बताया। उन्होंने कहा कि इस दशक में पांच परमाणु रिएक्टरों के काम शुरू करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में तकनीक और ऊर्जा दोनों की जरूरत बढ़ेगी, इसलिए दोनों क्षेत्रों में क्षमता निर्माण जरूरी है।

    संबोधन में ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, ग्रीन मोबिलिटी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भारत के पास लंबी समुद्री तटरेखा, मत्स्य संसाधन, तटीय पर्यटन और तटीय तकनीक के जरिए ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने की भी व्यापक संभावनाएं हैं।

    प्रधानमंत्री के भाषण में AI प्रशिक्षण से लेकर सेमीकंडक्टर निर्माण, परमाणु ऊर्जा और हरित अर्थव्यवस्था तक कई क्षेत्रों को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा गया। एक करोड़ युवाओं को AI स्किल देने की घोषणा से तकनीकी रूप से सक्षम कार्यबल तैयार करने पर विशेष ध्यान का संकेत मिला है। इसके साथ ही ऊर्जा और विनिर्माण क्षमता बढ़ाने को भी भविष्य की आर्थिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

  • 12 राज्यों के युवाओं ने संसद यूथ पार्लियामेंट 2026 में लिया हिस्सा, सीएम यादव बोले लोकतंत्र मजबूत करें युवा

    12 राज्यों के युवाओं ने संसद यूथ पार्लियामेंट 2026 में लिया हिस्सा, सीएम यादव बोले लोकतंत्र मजबूत करें युवा

    मध्य प्रदेश। विधानसभा में गुरुवार को संसद यूथ पार्लियामेंट 2026 का आयोजन किया गया, जिसमें 12 राज्यों के 52 से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं से लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश देश का दिल है और भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। उन्होंने कहा कि देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है और ऐसे समय में विधानसभा भवन में आयोजित युवा संसद ने इसे मिनी इंडिया का स्वरूप दे दिया है। उनके अनुसार सदन कल्याणकारी नीतियों के निर्माण का महत्वपूर्ण स्थान है और युवाओं को इसकी कार्यप्रणाली को समझना चाहिए।

    डॉ. यादव ने युवा संसद में बेटियों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की बढ़ती भूमिका दिखाई देती है। उन्होंने महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का भी उल्लेख किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति में माताओं और बहनों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि समाज की प्रगति में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री ने वसुधैव कुटुम्बकम की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की सीख देती है। उन्होंने कहा कि देश को अनेकता में एकता, सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की भावना के साथ आगे बढ़ाने के लिए केवल विचार पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू करने के लिए संकल्प और सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समान कानून के मुद्दे पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सरकार की नजर में सभी नागरिकों के लिए कानून समान होना चाहिए। उन्होंने मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता से जुड़े विधायी प्रयासों और सुझाव प्रक्रिया का उल्लेख किया। उनके अनुसार विभिन्न जिलों और धर्मों के लोगों से इस विषय पर सुझाव लिए गए हैं।

    डॉ. यादव ने युवाओं से राजनीति को केवल चुनावी गतिविधि के रूप में नहीं देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य पेशेवर बनने के साथ राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। उनके अनुसार लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए शिक्षित और जागरूक युवाओं की भागीदारी आवश्यक है।

    मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने नेताजी सुभाषचंद्र बोस का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने आईसीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद नौकरी छोड़कर देश की स्वतंत्रता के आंदोलन में भाग लिया। उन्होंने युवाओं से देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का आह्वान किया।

    कार्यक्रम में उद्योग जगत से जुड़े वक्ताओं ने भी युवाओं की भूमिका और मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़े उद्योगों के साथ छोटी औद्योगिक इकाइयों में भी निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं। राजनीति और समाज सेवा को समर्पण और जिम्मेदारी वाला क्षेत्र बताते हुए युवाओं को समाज के लिए काम करने की प्रेरणा दी गई।

    युवा संसद में युवा सांसद की भूमिका निभाने वाले प्रतिभागियों ने भी प्रदेश में युवाओं से जुड़ी योजनाओं और शिक्षा के महत्व पर विचार रखे। कार्यक्रम में बताया गया कि वित्त वर्ष 2026-27 में खेल और युवा कल्याण के लिए 800 करोड़ रुपये से अधिक का बजट रखा गया है। प्रदेश में 274 सांदीपनि विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं और 200 नए विद्यालय स्थापित करने की योजना है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत और विकसित मध्य प्रदेश के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर युवाओं की आवश्यकता है। युवा संसद जैसे कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली समझने और सार्वजनिक जीवन में अपनी भूमिका तय करने का अवसर मिलता है।