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  • दोस्ती निभाने के साथ करें कमाई, दो दोस्तों के लिए ये बिजनेस आइडिया बन सकते हैं शानदार शुरुआत

    दोस्ती निभाने के साथ करें कमाई, दो दोस्तों के लिए ये बिजनेस आइडिया बन सकते हैं शानदार शुरुआत

    नई दिल्ली। इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे 30 जुलाई को मनाया जाएगा। यह दिन सिर्फ दोस्ती का जश्न मनाने का अवसर ही नहीं, बल्कि अपने सबसे भरोसेमंद साथी के साथ नए सपनों को साकार करने की शुरुआत भी हो सकता है। आज के समय में कई ऐसे बिजनेस मॉडल मौजूद हैं जिन्हें दो दोस्त मिलकर कम लागत में शुरू कर सकते हैं। सही योजना, स्पष्ट जिम्मेदारियां और आपसी भरोसे के साथ शुरू किया गया छोटा कारोबार भी समय के साथ अच्छी आय का स्रोत बन सकता है।

    यदि दोनों दोस्तों के पास अलग-अलग कौशल हैं तो फ्रीलांसिंग एजेंसी शुरू करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, एक व्यक्ति कंटेंट राइटिंग, वीडियो एडिटिंग या ग्राफिक डिजाइनिंग का काम संभाल सकता है, जबकि दूसरा क्लाइंट्स से बातचीत, मार्केटिंग और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की जिम्मेदारी निभा सकता है। डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण इस क्षेत्र में अच्छी कमाई की संभावना बनी रहती है।

    अगर किसी दोस्त के पास कैमरा, लैपटॉप, ड्रोन, बाइक या अन्य महंगे उपकरण हैं जिनका नियमित उपयोग नहीं हो रहा, तो उन्हें किराये पर देकर भी अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है। इस तरह बिना अधिक निवेश किए उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होता है और दोनों साझेदार नियमित कमाई कर सकते हैं।

    खाने-पीने का व्यवसाय भी दो दोस्तों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकता है। कम निवेश के साथ क्लाउड किचन शुरू कर ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंच बनाई जा सकती है। स्वादिष्ट भोजन, अच्छी गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी के जरिए इस व्यवसाय को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, इस कारोबार को शुरू करने से पहले आवश्यक खाद्य लाइसेंस और अन्य नियमों का पालन करना जरूरी होता है।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट क्रिएशन भी आज युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। दो दोस्त मिलकर यूट्यूब चैनल, इंस्टाग्राम पेज या पॉडकास्ट शुरू कर सकते हैं। एक व्यक्ति कैमरे के सामने प्रस्तुति दे सकता है, जबकि दूसरा शूटिंग, एडिटिंग और सोशल मीडिया मैनेजमेंट संभाल सकता है। लगातार गुणवत्तापूर्ण कंटेंट तैयार करने पर विज्ञापन, ब्रांड सहयोग और स्पॉन्सरशिप के जरिए अच्छी कमाई की जा सकती है।

    यदि कम पूंजी में ऑफलाइन कारोबार शुरू करना चाहते हैं, तो चाय या स्नैक्स स्टॉल भी अच्छा विकल्प हो सकता है। भीड़भाड़ वाले स्थान, कार्यालय, कॉलेज या बाजार के आसपास शुरू किया गया छोटा फूड बिजनेस पूरे साल ग्राहकों को आकर्षित कर सकता है। अच्छी गुणवत्ता, साफ-सफाई और बेहतर सेवा इस कारोबार की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    किसी भी साझेदारी वाले व्यवसाय में सफलता के लिए केवल अच्छा आइडिया ही पर्याप्त नहीं होता। शुरुआत से ही जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा, निवेश और मुनाफे का पारदर्शी हिसाब तथा आपसी विश्वास बनाए रखना भी जरूरी है। सही योजना और निरंतर मेहनत के साथ दो दोस्तों की साझेदारी न केवल मजबूत दोस्ती को नई पहचान दे सकती है, बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहतर भविष्य की राह खोल सकती है।

  • सिनेमाघरों में नहीं चली किस्मत, हिंदी डब रिलीज के बाद YouTube पर 100 करोड़ व्यूज पार कर रचा अनोखा रिकॉर्ड

    सिनेमाघरों में नहीं चली किस्मत, हिंदी डब रिलीज के बाद YouTube पर 100 करोड़ व्यूज पार कर रचा अनोखा रिकॉर्ड


    नई दिल्ली ।
    फिल्म उद्योग में कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि कोई फिल्म सिनेमाघरों में दर्शकों का अपेक्षित समर्थन नहीं जुटा पाती, लेकिन बाद में किसी दूसरे मंच पर उसे नई पहचान मिल जाती है। तेलुगु फिल्म ‘जया जानकी नायक’ इसका एक प्रमुख उदाहरण बनकर सामने आई है। वर्ष 2017 में रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकी थी, लेकिन कुछ वर्षों बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इसने ऐसी उपलब्धि हासिल की, जिसने इसे भारतीय सिनेमा की चर्चित फिल्मों की सूची में शामिल कर दिया।

    निर्देशक बोयापति श्रीनु के निर्देशन में बनी इस फिल्म में बेलमकोंडा श्रीनिवास और रकुल प्रीत सिंह मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म का निर्माण लगभग 40 करोड़ रुपये के बजट में किया गया था। हालांकि रिलीज के बाद यह दर्शकों को सिनेमाघरों तक आकर्षित करने में सफल नहीं रही और इसकी कमाई करीब 20 करोड़ रुपये तक ही सीमित रही। लागत की तुलना में कम कारोबार होने के कारण इसे बॉक्स ऑफिस पर असफल फिल्मों में गिना गया।

    फिल्म के कमजोर प्रदर्शन के बावजूद निर्माताओं ने इसके प्रति उम्मीद नहीं छोड़ी। उन्होंने बदलते डिजिटल दौर को देखते हुए फिल्म को नए दर्शकों तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई। इसके तहत वर्ष 2019 में फिल्म का हिंदी डब संस्करण तैयार किया गया और इसका नाम बदलकर ‘खूंखार’ रखा गया। इसके बाद इसे YouTube पर रिलीज किया गया, जहां फिल्म को अप्रत्याशित रूप से बड़ी संख्या में दर्शकों का समर्थन मिलने लगा।

    हिंदी भाषा में उपलब्ध होने के कारण फिल्म देशभर के उन दर्शकों तक भी पहुंची, जो पहले इसे नहीं देख पाए थे। एक्शन, पारिवारिक भावनाओं और व्यावसायिक मनोरंजन से भरपूर कहानी ने डिजिटल दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। धीरे-धीरे फिल्म के व्यूज लगातार बढ़ते गए और समय के साथ इसने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली।

    फिल्म का हिंदी संस्करण YouTube पर 100 करोड़ यानी एक बिलियन से अधिक व्यूज का आंकड़ा पार करने में सफल रहा। इस उपलब्धि के साथ यह 100 करोड़ व्यूज हासिल करने वाली पहली भारतीय फीचर फिल्म बन गई। जिस फिल्म को कभी बॉक्स ऑफिस पर असफल माना गया था, वही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली भारतीय फिल्मों में शामिल हो गई।

    यह उदाहरण इस बात को भी दर्शाता है कि किसी फिल्म की सफलता अब केवल थिएटर कलेक्शन तक सीमित नहीं रह गई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने फिल्मों के लिए नए अवसर तैयार किए हैं, जहां भाषा की बाधाएं भी काफी हद तक समाप्त हो चुकी हैं। हिंदी डब संस्करणों की बढ़ती लोकप्रियता ने दक्षिण भारतीय फिल्मों को देशभर में नई पहचान दिलाई है और दर्शकों का दायरा पहले से कहीं अधिक विस्तृत हुआ है।

    ‘जया जानकी नायक’ की यह यात्रा फिल्म उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह साबित करती है कि यदि किसी फिल्म की सामग्री दर्शकों को पसंद आती है तो वह समय के साथ नए मंचों पर भी सफलता हासिल कर सकती है। डिजिटल माध्यमों ने फिल्मों को दूसरा अवसर दिया है और कई ऐसी फिल्मों को नई पहचान मिली है, जिन्हें सिनेमाघरों में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई थी।

  • सिंगापुर ने भारतीयों के खिलाफ नस्लीय नफरत फैलाने वाली 14 सोशल मीडिया पोस्ट पर रोक लगाई

    सिंगापुर ने भारतीयों के खिलाफ नस्लीय नफरत फैलाने वाली 14 सोशल मीडिया पोस्ट पर रोक लगाई

    नई दिल्ली। सिंगापुर सरकार ने भारतीयों के खिलाफ नस्लीय नफरत फैलाने वाली 14 सोशल मीडिया पोस्ट को ब्लॉक कर दिया है। यह कार्रवाई ‘ऑनलाइन क्रिमिनल हार्म्स एक्ट 2023’ (OCHA) के तहत की गई। अधिकारियों ने कहा कि ये पोस्ट जानबूझकर भारतीय समुदाय को निशाना बनाकर भड़काऊ सामग्री फैलाने के लिए बनाई गई थीं।

    सिंगापुर के गृह मंत्रालय (MHA) ने YouTube, Facebook और X को निर्देश दिए कि वे इन पोस्टों तक स्थानीय उपयोगकर्ताओं की पहुंच रोकें। सरकार ने इसे विदेशी कनेक्शन वाले गलत जानकारी फैलाने के अभियान के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई बताया। इस कदम का उद्देश्य सिंगापुर जैसे बहुसांस्कृतिक शहर-राज्य में सामाजिक सद्भाव बनाए रखना और नस्लीय तनाव को रोकना है।

    पोस्टों में क्या था कंटेंट
    अधिकारियों ने बताया कि आपत्तिजनक सामग्री पिछले महीने चीन के ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर शुरू हुई थी। शुरुआत में यह सिंगापुर की सांस्कृतिक पहचान और जातीय राजनीति पर केंद्रित थी। बाद में पोस्ट और अधिक भड़काऊ हो गई, जिसमें दावा किया गया कि भारतीयों की बढ़ती आबादी सिंगापुर के लिए खतरा है और देश के कई संस्कृतियों वाले ढांचे को कमजोर कर रही है।

    कुछ पोस्टों में कहा गया कि सिंगापुर की सामाजिक स्थिरता उसके बहुसांस्कृतिक ढांचे की वजह से नहीं, बल्कि चीनी बहुल आबादी की वजह से बनी हुई है। इसके साथ ही कुछ पोस्टों ने भारतवंशी नेताओं के प्रभाव को लेकर आलोचना की और भारतीय प्रवासियों के बढ़ते प्रभाव को देश के हितों के लिए हानिकारक बताया।

    कंटेंट को विश्वसनीय दिखाने के लिए ‘लिटिल इंडिया’ की व्यस्त सड़कों और पगोडा स्ट्रीट पर भारतीय त्योहारों के वीडियो का इस्तेमाल किया गया। पोस्ट में अपमानजनक भाषा का भी इस्तेमाल हुआ, जैसे भारतीय आबादी की तुलना “करी (curry) के जमावड़े” से करना।

    कानूनी आधार और जांच
    MHA ने कहा कि ये पोस्ट सिंगापुर के दंड संहिता (Penal Code) की धारा 298A के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं। यह धारा उन गतिविधियों को अपराध मानती है जो जानबूझकर नस्लीय या धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी, नफरत या दुर्भावना को बढ़ावा देती हैं।

    जांच में पता चला कि यह सामग्री संभवतः चीन स्थित प्लेटफ़ॉर्म से शुरू हुई और फिर अन्य सोशल मीडिया चैनलों पर फैल गई। अधिकारियों ने यह भी कहा कि सामग्री फैलाने के प्रयास सुनियोजित और जानबूझकर किए गए थे।

    सिंगापुर पुलिस ने प्लेटफ़ॉर्मों को निर्देश दिए कि वे सभी ज़रूरी कदम उठाएं ताकि स्थानीय उपयोगकर्ताओं को इन भड़काऊ पोस्टों तक पहुंच न मिले। अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई बहुसांस्कृतिक समाज में सद्भाव बनाए रखने और नस्लीय नफरत फैलाने वाली सामग्री से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी थी।

    इस कदम से सिंगापुर ने दिखा दिया कि वह नस्लीय और धार्मिक सद्भाव बनाए रखने में कड़ा रुख अपनाने के लिए तत्पर है, और विदेशों से आई किसी भी भड़काऊ सामग्री को रोकने के लिए कानूनी और तकनीकी माध्यमों का प्रयोग कर रहा है।

  • 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन, आंध्र प्रदेश में प्रस्ताव पर चर्चा..

    16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन, आंध्र प्रदेश में प्रस्ताव पर चर्चा..


    नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है। राज्य के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान बताया कि बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर सोशल मीडिया का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा एक निश्चित उम्र से कम के बच्चों को इन प्लेटफॉर्म्स पर नहीं होना चाहिए। वे यह नहीं समझ पाते कि किस तरह का कंटेंट उनके संपर्क में आ रहा है। ऐसे में मजबूत कानूनी ढांचे की जरूरत है।

    सरकार का यह कदम ऑस्ट्रेलिया के अंडर-16 सोशल मीडिया कानून से प्रेरित है। ऑस्ट्रेलिया ने पिछले महीने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए TikTok X (ट्विटर) फेसबुक इंस्टाग्राम यूट्यूब और स्नैपचैट जैसी प्रमुख सोशल मीडिया साइट्स पर प्रतिबंध लगाया था। इस कानून के तहत न तो बच्चे नए अकाउंट बना सकते हैं और न ही पुराने अकाउंट चालू रख सकते हैं। आंध्र प्रदेश सरकार इसी मॉडल का अध्ययन कर रही है। यदि यह लागू होता है तो यह भारत का पहला राज्य होगा जो बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कानूनी पाबंदी लगाएगा।

    तेलुगु देशम पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक रेड्डी ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि पिछली सरकार के दौरान सोशल मीडिया का दुरुपयोग हुआ था और विशेषकर महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक हमले किए गए। उन्होंने कहा कम उम्र के बच्चे भावनात्मक रूप से इतने परिपक्व नहीं होते कि वे ऑनलाइन नकारात्मक और नुकसानदायक कंटेंट को समझ सकें। इसलिए सरकार दुनिया के बेहतरीन उदाहरणों का अध्ययन कर रही है।दीपक रेड्डी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कदम को सेंसरशिप के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि इसका उद्देश्य केवल बच्चों को जहरीले कंटेंट ऑनलाइन नफरत और मानसिक नुकसान से बचाना है।

    आंध्र प्रदेश सरकार फिलहाल इस प्रस्ताव पर विचार और अध्ययन के चरण में है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम ऐतिहासिक साबित हो सकता है। अगर इसे लागू किया गया तो राज्य के छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह नियंत्रित होगा और उन्हें मानसिक एवं भावनात्मक रूप से सुरक्षित रखा जा सकेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरे से बचाने और उनके स्वस्थ मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम बच्चों की सुरक्षा के लिए डिजिटल युग में एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है।

  • ऑस्ट्रेलिया के बाद फ्रांस में भी बच्चों के लिए फेसबुक-इंस्टा-यूट्यूब होगा बैन

    ऑस्ट्रेलिया के बाद फ्रांस में भी बच्चों के लिए फेसबुक-इंस्टा-यूट्यूब होगा बैन


    नई दिल्‍ली। रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस सरकार ने एक मसौदा कानून तैयार किया है। इस मसौदे के तहत, बच्चों को अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बचाने के लिए नया प्रयास किया जाएगा और सितंबर 2026 तक 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पहुंच पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।

    ऑस्ट्रेलिया ने इस महीने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू कर दिया है। यह दुनिया का पहला देश है जिसने ऐसा कदम उठाया। अब खबर है कि फ्रांस भी इसी तरह का कानून लाने की तैयारी कर रहा है। न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस सरकार ने एक मसौदा कानून तैयार किया है। इस मसौदे के तहत, बच्चों को अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बचाने के लिए नया प्रयास किया जाएगा और सितंबर 2026 तक 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पहुंच पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।
    बताया जा रहा है कि इस पहल को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन का समर्थन प्राप्त है, जिन्होंने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि संसद को जनवरी में इस प्रस्ताव पर बहस शुरू कर देनी चाहिए। ऑस्ट्रेलिया ने इस महीने विश्व में पहली बार 16 साल से कम उम्र के लोगों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागू किया है।

    फ्रांसीसी मसौदे में कहा गया है कि कई अध्ययन और रिपोर्टें अब किशोरों द्वारा डिजिटल स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग से होने वाले विभिन्न जोखिमों की पुष्टि करती हैं। सरकार ने कहा कि जिन बच्चों को ऑनलाइन सेवाओं तक बेरोकटोक पहुंच मिली हुई है, वे ‘अनुचित सामग्री’ के संपर्क में आ रहे हैं, साइबर उत्पीड़न का शिकार हो सकते हैं या उनकी नींद के पैटर्न में बदलाव आ सकता है।

    रिपोर्ट के अनुसार, इस मसौदा कानून में दो मुख्य अनुच्छेद हैं। पहला अनुच्छेद 15 वर्ष से कम आयु के नाबालिग को ऑनलाइन सोशल मीडिया सेवा प्रदान करने को गैरकानूनी बनाता है। दूसरा अनुच्छेद माध्यमिक विद्यालयों में मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान करता है।

  • ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के टीनएजर्स के लिए सोशल मीडिया बैन कियाकंपनियों पर जुर्माना लगाने का आदेश

    ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के टीनएजर्स के लिए सोशल मीडिया बैन कियाकंपनियों पर जुर्माना लगाने का आदेश


    नई दिल्ली ।
    ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के टीनएजर्स के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बैन कर दिया है। यह कदम दुनिया में इस तरह का पहला कदम हैजो 10 दिसंबर से लागू हो चुका है। अब से 16 साल से छोटे बच्चे और किशोर फेसबुकइंस्टाग्रामयूट्यूबटिकटॉक जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। सोशल मीडिया कंपनियों को आदेश दिए गए हैं कि वे इन प्लेटफॉर्म्स पर छोटे उम्र के यूजर्स के अकाउंट डिलीट करें और ऐसा नहीं करने पर भारी पैनल्टी का सामना करना पड़ेगा। हालांकिपेरेंट्स और टीनएजर्स पर कोई पैनल्टी नहीं लगेगी।

    ऑस्ट्रेलिया में नया कानून

    ऑस्ट्रेलिया ने यह नया कानून लागू कर दिया हैजो 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया के उपयोग से प्रतिबंधित करता है। इसका उद्देश्य बच्चों और किशोरों को सोशल मीडिया की लत और उसके नकरात्मक प्रभावों से बचाना है। इस कानून के लागू होने से अब 16 साल से कम उम्र के यूजर्स को फेसबुकइंस्टाग्रामटिकटॉक और यूट्यूब जैसी प्रमुख सोशल मीडिया साइट्स का इस्तेमाल करना प्रतिबंधित होगा। इन प्लेटफॉर्म्स को यह आदेश दिया गया है कि वे इन उम्र के यूजर्स के अकाउंट्स को तुरंत डिलीट करें और यदि ऐसा नहीं किया गया तो उन कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

    कंपनियों पर होगा जुर्माना

    ऑस्ट्रेलिया सरकार ने सभी प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों को आदेश जारी किए हैं कि वे रात 12 बजे तक 16 साल से कम उम्र के बच्चों का एक्सेस इन प्लेटफॉर्म्स से पूरी तरह से ब्लॉक कर दें। यदि कोई कंपनी इन आदेशों का पालन नहीं करतीतो उस पर 4.95 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलरकरीब 296 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यह कदम सोशल मीडिया कंपनियों के लिए एक सख्त चेतावनी है कि वे बच्चों की सुरक्षा को गंभीरता से लें और उन्हें सोशल मीडिया के संभावित खतरों से बचाने के लिए कदम उठाएं।

    यूजर्स के मिले-जुले रिएक्शन

    ऑस्ट्रेलिया के इस नए कानून के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रही हैं। जहां एक तरफ बड़ी टेक कंपनियां और आजादी समर्थक संगठन इस कदम की आलोचना कर रहे हैंवहीं दूसरी तरफ कई पैरेंट्स और समाज के कुछ वर्ग इसे सकारात्मक कदम मान रहे हैं। पैरेंट्स का कहना है कि यह कदम उनके बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैक्योंकि सोशल मीडिया के अधिक उपयोग से बच्चों में अवसादचिंताऔर आत्मसम्मान में कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

    दूसरी ओरकुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने वाला कदम मान रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों को सोशल मीडिया से पूरी तरह से अलग करना भी सही नहीं हो सकताक्योंकि यह प्लेटफॉर्म्स कई अवसर और जानकारी प्रदान करते हैंजो बच्चों के विकास के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

    सामाजिक प्रभाव और बहस

    ऑस्ट्रेलिया का यह कदम सोशल मीडिया की भूमिका और इसके बच्चों पर पड़ने वाले प्रभावों पर वैश्विक स्तर पर बहस को और बढ़ा देगा। सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल के बारे में कई विशेषज्ञ पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि यह बच्चों के मानसिक स्वास्थ्यआत्मविश्वास और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। सोशल मीडिया कंपनियों के लिए यह भी चुनौती होगी कि वे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाती हैंजबकि उनकी प्राइवेसी और स्वतंत्रता को बनाए रखें।

    इस नए कानून से अन्य देशों में भी एक उदाहरण पेश हो सकता हैजो सोशल मीडिया के इस्तेमाल के बारे में सख्त दिशा-निर्देशों की ओर कदम बढ़ाते हैं। लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या इस तरह के कानून पूरी दुनिया में लागू किए जा सकते हैंया फिर यह केवल ऑस्ट्रेलिया के लिए एक विशेष मामला होगा। ऑस्ट्रेलिया का यह कदम बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैलेकिन इसके सामाजिक और कानूनी प्रभावों को लेकर अभी और चर्चाएं जारी रहेंगी।