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  • TMC छोड़ने के बाद BJP से भी दूरी, बंगाल के 3 सांसदों ने बदला रास्ता, जानिए क्या है वजह ?

    TMC छोड़ने के बाद BJP से भी दूरी, बंगाल के 3 सांसदों ने बदला रास्ता, जानिए क्या है वजह ?


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद भी नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। मुर्शिदाबाद की तीन लोकसभा सीटों से जुड़े सांसद अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान इन दिनों अपने राजनीतिक रुख को लेकर चर्चा में हैं।

    तीनों सांसद पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी TMC से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए। अब उन्होंने BJP के नेतृत्व वाले केंद्रीय गठबंधन के साथ औपचारिक तौर पर जुड़ने से भी दूरी बना ली है। हालांकि, केंद्र और राज्य सरकार के साथ प्रशासनिक तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर उनका संवाद जारी है।

    NDA बैठकों से बनाई दूरी
    तीनों सांसद नई दिल्ली में होने वाली NDA की प्रमुख संसदीय बैठकों से दूरी बनाए हुए हैं। वहीं, राज्य और केंद्र के नेताओं से उनकी बातचीत मुख्य रूप से विकास और प्रशासन से जुड़े विषयों तक सीमित है।

    जंगीपुर से सांसद खलीलुर रहमान ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल पूछे जाने पर कहा, “हमें गृह मंत्री के साथ दो विषयों पर चर्चा करनी थी, हम किसी अन्य मुद्दे पर कुछ नहीं कह सकते।”

    तीनों सांसदों ने पश्चिम बंगाल की मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इससे संकेत मिलता है कि वे फिलहाल किसी गठबंधन में शामिल होने के बजाय मुद्दा आधारित राजनीति पर जोर दे रहे हैं।

    मुर्शिदाबाद का समीकरण क्यों अहम?
    तीनों सांसद मुर्शिदाबाद जिले की महत्वपूर्ण सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। खलीलुर रहमान जंगीपुर, यूसुफ पठान बहरामपुर और अबू ताहिर खान मुर्शिदाबाद से सांसद हैं।

    मुर्शिदाबाद को पश्चिम बंगाल के संवेदनशील और अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में गिना जाता है। ऐसे में BJP के साथ खुलकर खड़ा होना इन सांसदों के लिए अपने पारंपरिक मतदाताओं के बीच राजनीतिक जोखिम पैदा कर सकता है। यही वजह मानी जा रही है कि वे केंद्र के साथ संवाद तो बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन किसी बड़े राजनीतिक गठबंधन का हिस्सा बनने से फिलहाल बच रहे हैं।

    NCPI के लिए भी बढ़ी चुनौती
    तीनों सांसदों का अलग रुख उनकी नई पार्टी NCPI के लिए भी चुनौती पैदा कर सकता है। करीब 20 सदस्यों वाले इस समूह में यदि अलग-अलग सांसद अपनी स्वतंत्र राजनीतिक रणनीति अपनाते हैं तो संगठन के भीतर मतभेद की स्थिति बन सकती है।

    दूसरी ओर, BJP के लिए भी इन सांसदों को अपने पाले में लाना आसान नहीं होगा। राष्ट्रीय दलों की कोशिश आमतौर पर अलग हुए नेताओं या गुटों को एक साझा राजनीतिक आधार में बदलने की होती है, लेकिन ये सांसद फिलहाल पार्टी लाइन के बजाय अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में पकड़ मजबूत रखने पर ज्यादा ध्यान देते दिखाई दे रहे हैं।

    स्थानीय समीकरण बनाम बड़े गठबंधन
    पश्चिम बंगाल में अगले चुनावों की तैयारियों के बीच मुर्शिदाबाद की तीनों सीटों का घटनाक्रम अहम माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि जिन इलाकों में स्थानीय मुद्दे, मतदाताओं का सामाजिक समीकरण और क्षेत्रीय पकड़ ज्यादा प्रभावी होते हैं, वहां केवल बड़े राजनीतिक गठबंधन के सहारे चुनावी सफलता हासिल करना आसान नहीं होता।

  • ममता का साथ छोड़ NDA को सपोर्ट कर रहे TMC के बागी सांसद…. यूसुफ पठान भी गुट में शामिल

    ममता का साथ छोड़ NDA को सपोर्ट कर रहे TMC के बागी सांसद…. यूसुफ पठान भी गुट में शामिल


    कोलकाता।
    तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के संसदीय दल पर संकट गहराता नजर आ रहा है। अधिकांश सांसदों के समर्थन का दावा करने वाले पार्टी के एक गुट ने ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का साथ छोड़कर NDA का समर्थन करने का फैसला किया है। कहा जा रहा है कि इन बागी सांसदों के गुट में पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान (Yusuf Pathan) भी शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है। ये सारा घटनाक्रम तब हुआ, जब बनर्जी दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल होने पहुंचीं थीं।

    टीएमसी की वरिष्ठ नेता और सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पठान का नाम भी होने के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि 20 सांसदों ने बगावत की है और जरूरत पड़ी, तो वह सभी का नाम बता सकती हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं एक-एक कर सभी का नाम बता सकती हूं। हम 20 सांसद हैं, लेकिन मैं ऐसा नहीं करना चाहती।’


    महुआ मित्रा ने साधा निशाना

    सोमवार को टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पठान पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, ‘और यूसुफ पठान आप दिल्ली जा रहे हैं, क्योंकि आपको अमित शाह का कॉल आया है? थोड़ी हिम्मत तो रखो। आप भारत के लिए खेले हैं। हमारे जिले ने आपको बड़े अंतर से जिताया है। थोड़ी शर्म और रीढ़ की हड्डी को मजबूत रखो।’


    लोकसभा सीट पर हो गया था बवाल

    हाल ही में खबरें आई थीं कि टीएमसी ने बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान को सीट से इस्तीफा देने के लिए मनाने की कोशिश की थी। साथ ही इसके लिए भी पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली की मदद ली गई थी। ऐसा इसलिए ताकि ममता बनर्जी सीट से उपचुनाव लड़ सकें। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पूर्व क्रिकेटर ने इस्तीफा देने से मना कर दिया था। हालांकि, बाद में गांगुली ने इन दावों को खारिज कर दिया था।


    ओम बिरला को लिख दिया पत्र

    बागी गुट की प्रमुख बताई जा रहीं दस्तीदार ने NDA को अपने समर्थन की जानकारी देने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखने का फैसला किया है। दस्तीदार ने बताया, ‘मेरे समेत टीएमसी के लगभग बीस सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर NDA को औपचारिक रूप से समर्थन देने का फैसला किया है।’


    भाजपा में शामिल होंगे बागी?

    सूत्रों के अनुसार, बागी सांसदों ने टीएमसी से तुरंत इस्तीफा देने या भाजपा में शामिल होने का विकल्प नहीं चुना है। इसके बजाय, वे राजग का समर्थन करने वाले एक अलग गुट के रूप में काम करने का इरादा रखते हैं, जो दलबदल रोधी कानून से बचने के लिए बनाई गई एक रणनीति है। टीएमसी के पास फिलहाल लोकसभा में 28 सांसद हैं, जिनमें से एक सीट बसीरहाट सांसद हाजी नुरुल इस्लाम के निधन के बाद रिक्त है। 20 सांसदों का समर्थन मिलने पर दलबदल रोधी कानून लागू होने से रोकने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत आसानी से प्राप्त हो जाएगा।

    एक सूत्र ने बताया कि बागी सांसदों के एक समूह ने दिल्ली में भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की। बैठक की एक कथित तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही है। इस तस्वीर में, राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय, सांसद अबू ताहिर, असित मल, अरूप चक्रवर्ती, कालीपद खेरवाल, जगदीश बसुनिया, प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार और शताब्दी रॉय के साथ दिखाई दे रहे हैं।