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  • अभिषेक शर्मा के बल्ले से निकला रनों का तूफान, न्यूजीलैंड को रौंदने के बाद युवराज सिंह को लेकर कही दिलचस्प बात

    अभिषेक शर्मा के बल्ले से निकला रनों का तूफान, न्यूजीलैंड को रौंदने के बाद युवराज सिंह को लेकर कही दिलचस्प बात


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के युवा सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में ऐसी विस्फोटक पारी खेली कि विरोधी टीम के गेंदबाजों के पास कोई जवाब नहीं बचा। अभिषेक ने महज 35 गेंदों में शतक पूरा किया और 38 गेंदों पर 113 रन बनाकर भारतीय टीम को शानदार जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। भारत ने इस मुकाबले में न्यूजीलैंड को छह विकेट से हराकर पांच मैचों की टी20 सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। हालांकि इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद अभिषेक की चर्चा उनकी बल्लेबाजी के साथ साथ अपने मेंटर युवराज सिंह को दिए गए मजेदार जवाब को लेकर भी हो रही है।

    मैच के बाद बातचीत के दौरान अभिषेक से युवराज सिंह की उस टिप्पणी के बारे में पूछा गया जिसमें उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि अभिषेक अभी तक 12 गेंदों में अर्धशतक बनाने का कमाल नहीं कर पाए हैं। इस पर अभिषेक ने हंसते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि उस समय युवराज कौन सा क्रिकेट खेल रहे थे लेकिन 12 गेंदों में 50 रन बनाना बिल्कुल आसान काम नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई बल्लेबाज केवल मैदान पर उतरकर इतनी कम गेंदों में अर्धशतक नहीं बना सकता। इसके लिए परिस्थितियों का साथ और असाधारण प्रदर्शन दोनों जरूरी होते हैं। अभिषेक का यह जवाब सुनकर क्रिकेट प्रशंसकों को उनके और युवराज के बीच गुरु शिष्य के रिश्ते की मजेदार झलक देखने को मिली।

    अभिषेक ने अपनी शानदार पारी के दौरान 11 छक्के और नौ चौके लगाए। उन्होंने केवल 15 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया था और इसके बाद भी उनकी आक्रामक बल्लेबाजी जारी रही। दूसरी ओर युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने भी न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर जमकर हमला बोला। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए महज 7.1 ओवर में 133 रन जोड़ दिए। वैभव ने 19 गेंदों पर 45 रन बनाए और उनकी तेज शुरुआत ने भारतीय टीम के लिए लक्ष्य का पीछा बेहद आसान कर दिया।

    अभिषेक ने बताया कि इस मुकाबले से पहले उन्होंने पिच और मैदान की परिस्थितियों को समझने पर खास ध्यान दिया था। फील्डिंग के दौरान उन्होंने पिच पर अतिरिक्त उछाल को महसूस किया और इसके बाद वैभव के साथ मिलकर पावरप्ले में आक्रामक बल्लेबाजी करने की रणनीति बनाई। उन्होंने कहा कि दोनों का उद्देश्य व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाना नहीं बल्कि टीम को जीत दिलाने के लिए तेजी से रन बनाना था। अभिषेक ने अपनी सफलता का श्रेय कोचिंग स्टाफ और अभ्यास सत्रों को भी दिया। उनके मुताबिक मैच से पहले साइडआर्म गेंदों पर अभ्यास करने से उन्हें तेज गेंदों के खिलाफ बेहतर तैयारी करने में मदद मिली।

    मुकाबले में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए डेरिल मिचेल की नाबाद 89 रन की पारी की बदौलत 20 ओवर में तीन विकेट पर 198 रन बनाए थे। फिन एलन ने 40 रन और बेवन जैकब्स ने नाबाद 39 रन का योगदान दिया। भारतीय टीम ने जवाब में आक्रामक शुरुआत की और शुरुआती ओवरों में ही मैच पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। भारत ने 13.2 ओवर में चार विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया और 40 गेंद शेष रहते मुकाबला अपने नाम कर लिया।

    इस जीत के साथ भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड में लगातार तीसरी टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज जीतने का सिलसिला भी बरकरार रखा। अभिषेक का तूफानी शतक और वैभव के साथ उनकी साझेदारी इस मुकाबले की सबसे बड़ी खासियत रही। वहीं युवराज सिंह की टिप्पणी पर उनका मजेदार जवाब भी चर्चा का विषय बन गया। मैदान पर बल्ले से धमाल मचाने वाले अभिषेक ने यह साफ कर दिया कि उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं बल्कि टीम इंडिया की जीत है।

  • IPL में युवराज सिंह की नई पारी, दिल्ली कैपिटल्स के बैटिंग कोच बनकर लौटेंगे मैदान पर, सौरव गांगुली के साथ करेंगे काम

    IPL में युवराज सिंह की नई पारी, दिल्ली कैपिटल्स के बैटिंग कोच बनकर लौटेंगे मैदान पर, सौरव गांगुली के साथ करेंगे काम

    नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह एक बार फिर इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में नई भूमिका में नजर आ सकते हैं। अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और लंबे-लंबे छक्कों के लिए मशहूर युवराज सिंह के दिल्ली कैपिटल्स से जुड़ने की चर्चा है। सामने आ रही रिपोर्ट के मुताबिक, वह आगामी आईपीएल सीजन में टीम के बैटिंग कोच की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। यदि यह नियुक्ति होती है, तो युवराज पहली बार इस फ्रेंचाइजी के साथ कोचिंग की भूमिका में दिखाई देंगे। हालांकि, उनकी नियुक्ति को लेकर आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

    युवराज सिंह भारतीय क्रिकेट के उन खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने अपनी बल्लेबाजी और ऑलराउंड प्रदर्शन से खास पहचान बनाई। सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। बड़े मुकाबलों में तेजी से रन बनाने और दबाव की परिस्थितियों में खेलने की क्षमता ने उन्हें प्रशंसकों के बीच लोकप्रिय बनाया। मैदान पर लंबे छक्के लगाने के लिए मशहूर युवराज को सिक्सर किंग भी कहा जाता है। अब उनके संभावित कोचिंग करियर को लेकर चर्चा ने आईपीएल में उनकी वापसी की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।

    दिल्ली कैपिटल्स के साथ युवराज सिंह के जुड़ने की खबर इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि टीम अपने बल्लेबाजी विभाग को मजबूत करने की दिशा में काम कर सकती है। बैटिंग कोच की भूमिका में युवराज खिलाड़ियों को बल्लेबाजी तकनीक, शॉट चयन, दबाव में प्रदर्शन और मैच की परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बनाने में मदद कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल में खेलने का उनका अनुभव युवा खिलाड़ियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि, टीम के बल्लेबाजी विभाग में उनकी संभावित जिम्मेदारियों का आधिकारिक विवरण सामने आना बाकी है।

    इस संभावित नियुक्ति में सौरव गांगुली की भूमिका भी चर्चा में है। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली दिल्ली कैपिटल्स के साथ जुड़े रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, युवराज सिंह उनके साथ मिलकर काम कर सकते हैं। गांगुली और युवराज दोनों भारतीय क्रिकेट के अनुभवी नाम हैं और उन्होंने अलग-अलग दौर में भारतीय टीम की सफलता में योगदान दिया है। ऐसे में यदि दोनों दिल्ली कैपिटल्स के साथ एक ही टीम प्रबंधन व्यवस्था में काम करते हैं, तो उनके अनुभव का लाभ फ्रेंचाइजी को मिल सकता है।

    दिल्ली कैपिटल्स लंबे समय से आईपीएल खिताब जीतने की कोशिश कर रही है। टीम के सामने हर सीजन बेहतर संयोजन तैयार करने, बल्लेबाजी में निरंतरता बनाए रखने और अहम मौकों पर अच्छा प्रदर्शन करने की चुनौती रहती है। युवराज जैसे अनुभवी पूर्व खिलाड़ी का कोचिंग स्टाफ से जुड़ना इन पहलुओं पर काम करने का अवसर दे सकता है। खास तौर पर युवा बल्लेबाजों को बड़े मुकाबलों के लिए तैयार करने में उनका अनुभव अहम हो सकता है।

    फिलहाल, युवराज सिंह की दिल्ली कैपिटल्स में संभावित नियुक्ति को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनकी भूमिका, अनुबंध और टीम के कोचिंग स्टाफ में जिम्मेदारियों की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही तस्वीर साफ होगी। यदि यह खबर सही साबित होती है, तो आईपीएल में खिलाड़ी के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले युवराज एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकते हैं। प्रशंसकों की नजरें अब फ्रेंचाइजी की आधिकारिक घोषणा पर रहेंगी।
  • सचिन, युवराज और गंभीर को टीम से बाहर करने पर सालों बाद चर्चा, संदीप पाटिल ने चयन प्रक्रिया से जुड़े अनुभव बताए

    सचिन, युवराज और गंभीर को टीम से बाहर करने पर सालों बाद चर्चा, संदीप पाटिल ने चयन प्रक्रिया से जुड़े अनुभव बताए

    नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट में टीम चयन को लेकर हमेशा चर्चा होती रही है। किसी खिलाड़ी को टीम में जगह देना हो या किसी अनुभवी क्रिकेटर को बाहर बैठाने का फैसला लेना हो, चयनकर्ताओं के लिए यह जिम्मेदारी आसान नहीं होती। सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह और गौतम गंभीर जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के करियर में भी ऐसे दौर आए, जब उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा। इन फैसलों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर और चयनकर्ता संदीप पाटिल ने चयन प्रक्रिया से जुड़े अपने अनुभवों के आधार पर इस तरह के फैसलों की परिस्थितियों पर चर्चा की है।

    संदीप पाटिल भारतीय क्रिकेट के उन पूर्व खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने मैदान पर खेलने के साथ-साथ चयनकर्ता की भूमिका भी निभाई। चयन समिति में रहते हुए उन्हें कई बार ऐसे फैसले लेने पड़े, जिनका सीधा असर स्थापित खिलाड़ियों के करियर पर पड़ता था। भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए प्रदर्शन, फिटनेस, टीम की जरूरत और उपलब्ध विकल्पों जैसे पहलुओं पर विचार किया जाता है। किसी खिलाड़ी का बड़ा नाम या पुराना रिकॉर्ड हमेशा उसकी जगह सुनिश्चित नहीं करता। चयनकर्ताओं के सामने यह चुनौती रहती है कि वे व्यक्तिगत लोकप्रियता के बजाय टीम के हित और मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्णय लें।

    सचिन तेंदुलकर का करियर भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित अध्यायों में से एक रहा है। उन्होंने लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में देश का प्रतिनिधित्व किया और कई रिकॉर्ड बनाए। इसके बावजूद उनके करियर में भी ऐसे मौके आए, जब उनके चयन या टीम में भूमिका को लेकर चर्चा हुई। युवराज सिंह ने भारत की कई महत्वपूर्ण जीतों में योगदान दिया और सीमित ओवरों के क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई। वहीं, गौतम गंभीर ने भी भारतीय टीम के लिए अहम पारियां खेलीं। इन खिलाड़ियों के अनुभव बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबे समय तक प्रदर्शन करने के बावजूद टीम में जगह बनाए रखना लगातार चुनौतीपूर्ण रहता है।

    टीम चयन के फैसलों में केवल किसी खिलाड़ी का पिछला प्रदर्शन ही निर्णायक नहीं होता। चयनकर्ता यह भी देखते हैं कि टीम को किस तरह के संयोजन की जरूरत है, खिलाड़ी का हालिया प्रदर्शन कैसा है और आगामी मुकाबलों की परिस्थितियों के लिए कौन उपयुक्त होगा। कई बार किसी खिलाड़ी को बाहर रखने का फैसला अस्थायी होता है, जबकि कुछ परिस्थितियों में टीम में बदलाव लंबे समय के लिए भी हो सकता है। ऐसे फैसलों के कारण प्रशंसकों और पूर्व खिलाड़ियों के बीच बहस होना स्वाभाविक है, क्योंकि लोकप्रिय खिलाड़ियों से दर्शकों की भावनाएं जुड़ी रहती हैं।

    संदीप पाटिल के अनुभवों के संदर्भ में चयनकर्ताओं की जिम्मेदारी का एक और पहलू सामने आता है। खिलाड़ियों के साथ निजी संबंध, दोस्ती या व्यक्तिगत समीकरण चयन प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करने चाहिए। चयनकर्ता का दायित्व टीम के लिए उपयुक्त खिलाड़ियों का चुनाव करना है, भले ही किसी फैसले से लोकप्रिय खिलाड़ी या उनके प्रशंसक निराश हों। हालांकि, सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह और गौतम गंभीर को टीम से बाहर किए जाने के अलग-अलग कारण रहे होंगे। इन तीनों के मामलों को एक जैसा मानना उचित नहीं है, क्योंकि उनके करियर, प्रदर्शन और टीम की जरूरतें अलग-अलग समय पर अलग थीं।

    भारतीय क्रिकेट में चयन को लेकर होने वाली चर्चाएं इस बात को रेखांकित करती हैं कि टीम बनाना केवल नामों का चुनाव नहीं, बल्कि परिस्थितियों और रणनीति के बीच संतुलन बनाने की प्रक्रिया है। संदीप पाटिल जैसे पूर्व खिलाड़ियों के अनुभव इस प्रक्रिया को समझने का अवसर देते हैं। किसी खिलाड़ी को टीम से बाहर रखने का फैसला उसके पूरे करियर का मूल्यांकन नहीं होता, बल्कि अक्सर किसी खास समय की जरूरतों और उपलब्ध विकल्पों से जुड़ा होता है। इसलिए पुराने चयन फैसलों को समझने के लिए उस समय की परिस्थितियों और संबंधित खिलाड़ियों के प्रदर्शन को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

  • रिकॉर्ड और ट्रॉफियां नहीं वापसी की ताकत बनाती है महान युवराज सिंह का बेन स्टोक्स के लिए भावुक संदेश

    रिकॉर्ड और ट्रॉफियां नहीं वापसी की ताकत बनाती है महान युवराज सिंह का बेन स्टोक्स के लिए भावुक संदेश


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के स्टार ऑलराउंडर बेन स्टोक्स के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह ने उन्हें भावुक अंदाज में विदाई दी है। युवराज ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लंबा संदेश साझा करते हुए स्टोक्स के शानदार करियर के साथ उनकी संघर्ष से उबरने की क्षमता की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी खिलाड़ी की महानता केवल रिकॉर्ड या ट्रॉफियों से नहीं बल्कि हर कठिन दौर के बाद फिर मजबूती से खड़े होने की ताकत से तय होती है।

    युवराज सिंह ने अपने संदेश में स्टोक्स के करियर के कई यादगार पलों का जिक्र किया। उन्होंने विश्व कप फाइनल में खेली गई ऐतिहासिक पारी और हेडिंग्ले टेस्ट में नाबाद 135 रन की पारी को क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार पारियों में से एक बताया। युवराज ने कहा कि इन पारियों ने यह साबित कर दिया कि असंभव दिखने वाली परिस्थितियों में भी जीत हासिल की जा सकती है।

    युवराज ने स्टोक्स की मानसिक मजबूती की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषय पर खुलकर बात करने का साहस हर खिलाड़ी में नहीं होता लेकिन स्टोक्स ने इसे पूरी ईमानदारी से दुनिया के सामने रखा। इसके अलावा अपने पिता को खोने जैसे निजी दुख के बावजूद उन्होंने जिस तरह हर बार खुद को संभाला और मैदान पर वापसी की वह प्रेरणादायक है।

    पूर्व भारतीय ऑलराउंडर ने लिखा कि वह खुद भी अपने करियर में सफलता और संघर्ष के कई दौर से गुजर चुके हैं इसलिए वह स्टोक्स के सफर को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के शिखर पर पहुंचने और फिर कठिन परिस्थितियों का सामना करने का अनुभव उन्होंने भी किया है और स्टोक्स में उन्हें वही जज्बा दिखाई दिया।

    युवराज ने कहा कि यही गुण किसी अच्छे खिलाड़ी को महान खिलाड़ी बनाता है। रिकॉर्ड टूटते रहते हैं ट्रॉफियां भी समय के साथ इतिहास का हिस्सा बन जाती हैं लेकिन मुश्किलों के बाद दोबारा उठ खड़े होने की क्षमता हमेशा याद रखी जाती है। उन्होंने स्टोक्स को दो विश्व कप जीतने वाला खिलाड़ी और ऐसा कप्तान बताया जिसने अपनी टीम में यह भरोसा जगाया कि कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

    35 वर्षीय बेन स्टोक्स ने वर्ष 2011 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। अपने 15 साल लंबे करियर में उन्होंने इंग्लैंड के लिए 122 टेस्ट 114 वनडे और 43 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 7273 रन और 252 विकेट दर्ज हैं जबकि वनडे में उन्होंने 3463 रन बनाने के साथ 74 विकेट भी हासिल किए। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उन्होंने 585 रन बनाए और 26 विकेट अपने नाम किए।

    स्टोक्स इंग्लैंड के सबसे प्रभावशाली ऑलराउंडरों में गिने जाते हैं। दो विश्व कप जीतने के अलावा एशेज सीरीज में उनके कई यादगार प्रदर्शन और कप्तान के रूप में इंग्लैंड की टेस्ट टीम में लाए गए बदलाव उन्हें आधुनिक दौर के महान क्रिकेटरों में शामिल करते हैं। युवराज सिंह का संदेश भी इसी बात का प्रमाण है कि स्टोक्स का प्रभाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं बल्कि क्रिकेट जगत के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

  • 9 गेंदों में फिफ्टी, रिकॉर्ड चकनाचूर: नेपाल की ऐतिहासिक जीत के नायक बने दीपेंद्र सिंह ऐरी

    9 गेंदों में फिफ्टी, रिकॉर्ड चकनाचूर: नेपाल की ऐतिहासिक जीत के नायक बने दीपेंद्र सिंह ऐरी


    नई दिल्ली । नेपाल क्रिकेट के इतिहास में एक नई सुबह तब दर्ज हुई जब टीम ने टी20 वर्ल्ड कप में स्कॉटलैंड को 7 विकेट से हराकर पहली जीत हासिल की। 12 सालों से बड़े मंच पर जीत का इंतजार कर रही नेपाल की टीम के लिए यह पल बेहद खास था और इस ऐतिहासिक जीत के केंद्र में रहे युवा ऑलराउंडर दीपेंद्र सिंह ऐरी। 171 रनों के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करते हुए ऐरी ने महज 23 गेंदों में नाबाद 50 रन ठोक दिए। उनकी पारी में 4 चौके और 3 गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। जब दबाव चरम पर था तब उनके बल्ले से निकली यह विस्फोटक पारी नेपाल की जीत की गारंटी बन गई। इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

    24 जनवरी 2000 को जन्मे दीपेंद्र सिंह ऐरी नेपाल क्रिकेट की नई पीढ़ी के प्रतीक माने जाते हैं। अगस्त 2018 में उन्होंने नीदरलैंड के खिलाफ नेपाल के पहले वनडे मुकाबले में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया था। कम उम्र में ही उन्होंने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और उपयोगी ऑफ-स्पिन गेंदबाजी से टीम में अहम जगह बना ली। लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनकी असली पहचान तब बनी जब उन्होंने एशियाई खेलों में विश्व रिकॉर्ड कायम किया।

    चीन के हांग्जो में आयोजित एशियाई खेल 2022 के दौरान मंगोलिया के खिलाफ मुकाबले में ऐरी ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का सबसे तेज अर्धशतक जड़ दिया। उन्होंने सिर्फ 9 गेंदों में फिफ्टी पूरी कर दुनिया को चौंका दिया। इस पारी में उन्होंने 10 गेंदों पर 8 छक्कों की मदद से 52 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 500 से भी अधिक रहा। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय दिग्गज युवराज सिंह का 16 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। युवराज ने आईसीसी टी20 विश्व कप 2007 में इंग्लैंड के खिलाफ 12 गेंदों पर अर्धशतक बनाया था जो लंबे समय तक विश्व रिकॉर्ड रहा। ऐरी ने उस ऐतिहासिक उपलब्धि को पीछे छोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया।

    इतना ही नहीं अप्रैल 2024 में ACC प्रीमियर कप के दौरान कतर के खिलाफ उन्होंने एक ओवर में लगातार छह छक्के जड़ दिए और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ऐसा करने वाले दुनिया के तीसरे खिलाड़ी बने। उस मुकाबले में उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी की बदौलत नेपाल ने 20 ओवर में 300 रन का आंकड़ा पार किया जो अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि थी।

    आज दीपेंद्र सिंह ऐरी को नेपाल के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडरों में गिना जाता है। वह आईसीसी टी20आई ऑलराउंडर रैंकिंग में भी शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल हैं। उनकी खासियत है बड़े मंच पर निडर होकर खेलना और दबाव में टीम को जीत दिलाना। स्कॉटलैंड के खिलाफ उनकी नाबाद 50 रन की पारी ने यह साबित कर दिया कि वह सिर्फ रिकॉर्ड बनाने वाले खिलाड़ी नहीं बल्कि मैच जिताने वाले सितारे हैं। नेपाल क्रिकेट के लिए ऐरी नई उम्मीद नया आत्मविश्वास और नई पहचान बन चुके हैं। अगर उनका यही फॉर्म जारी रहा तो आने वाले समय में वे विश्व क्रिकेट के सबसे चर्चित ऑलराउंडरों में शामिल हो सकते हैं।