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  • 5 एपिसोड की इस हॉरर सीरीज में हर मोड़ पर बढ़ेगा खौफ अपार्टमेंट में बेटी के गायब होने के बाद खुलता है बड़ा रहस्य

    5 एपिसोड की इस हॉरर सीरीज में हर मोड़ पर बढ़ेगा खौफ अपार्टमेंट में बेटी के गायब होने के बाद खुलता है बड़ा रहस्य


    नई दिल्ली। अगर आपको हॉरर के साथ साइकोलॉजिकल थ्रिलर और सस्पेंस से भरपूर कहानियां देखना पसंद है तो ओटीटी पर मौजूद कन्नामूची आपके लिए अलग तरह का अनुभव लेकर आती है। यह महज डराने वाली कहानी नहीं है बल्कि इसमें रहस्य मनोवैज्ञानिक उलझन और एक पुरानी मर्डर मिस्ट्री को इस तरह जोड़ा गया है कि कहानी आगे बढ़ने के साथ दर्शकों की उत्सुकता भी बढ़ती जाती है। पांच एपिसोड की यह सीरीज खासतौर पर उन लोगों को पसंद आ सकती है जिन्हें हॉरर के साथ कहानी में लगातार ट्विस्ट देखना अच्छा लगता है।

    कन्नामूची की कहानी प्रिया नाम की एक सिंगल मदर के इर्द गिर्द घूमती है। पति की मौत के बाद प्रिया अपनी बेटी के साथ चेन्नई के एक नए अपार्टमेंट में रहने आती है। वह अपनी बेटी के साथ जिंदगी को नए सिरे से शुरू करना चाहती है। प्रिया की बेटी बोल और सुन नहीं सकती। मां बेटी का यह नया ठिकाना शुरुआत में सामान्य नजर आता है लेकिन जल्द ही उनके सामने ऐसी घटनाएं आने लगती हैं जिनका कोई आसान जवाब नहीं मिलता।

    अपार्टमेंट में अजीब घटनाओं का सिलसिला धीरे धीरे बढ़ता जाता है। इसके बाद कहानी में एक ऐसा मोड़ आता है जब पता चलता है कि इस अपार्टमेंट से अतीत का एक बेहद डरावना राज जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि कई साल पहले यहां एक व्यक्ति ने आत्महत्या की थी। यह जानकारी कहानी के रहस्य को और गहरा कर देती है।

    सबसे बड़ा मोड़ तब आता है जब प्रिया की बेटी घर में हाइड एंड सीक खेलते हुए अचानक गायब हो जाती है। अपनी बेटी को तलाशने के दौरान प्रिया को ऐसी जानकारी मिलती है जो करीब 20 साल पुरानी मर्डर मिस्ट्री की तरफ इशारा करती है। अब बेटी कहां गई और उसके गायब होने का इस पुराने मामले से क्या संबंध है यही सवाल पूरी कहानी को आगे लेकर जाता है।

    सीरीज में सुपरनैचुरल घटनाओं के साथ साइकोलॉजिकल ट्विस्ट और सस्पेंस को प्रमुखता दी गई है। कहानी में कुछ वास्तविक जीवन से जुड़े मुद्दों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा साउंड इफेक्ट्स का इस्तेमाल डर और तनाव को बढ़ाने के लिए किया गया है। यही वजह है कि छोटे एपिसोड होने के बावजूद कहानी दर्शकों को लगातार बांधे रखने की कोशिश करती है।

    कन्नामूची का निर्देशन अविनाश हरिहरन ने किया है। इसका निर्माण यूनिकॉर्न और ट्रेंड लाउड प्रोडक्शन ने किया है। सीरीज में आराध्या शम्मा कासिम और विवेक प्रसन्ना अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं। यह तमिल भाषा की सीरीज है लेकिन इसे तेलुगु मलयालम और हिंदी में भी देखा जा सकता है।

    यह सीरीज 13 मार्च 2020 को रिलीज हुई थी और इसमें कुल पांच एपिसोड हैं। प्रत्येक एपिसोड करीब 20 से 30 मिनट का है। आईएमडीबी पर इसे 6.3 की रेटिंग मिली हुई है। अगर आपको छोटी अवधि में हॉरर सस्पेंस और साइकोलॉजिकल ट्विस्ट से भरपूर कहानी देखनी है तो कन्नामूची को अपनी ओटीटी वॉचलिस्ट में शामिल किया जा सकता है। यह सीरीज जी5 पर उपलब्ध है।

  • नदी किनारे हो रही रहस्यमयी मौतों ने बढ़ाया खौफ 7 एपिसोड की इस सीरीज में हर मोड़ पर मिलेगा नया ट्विस्ट

    नदी किनारे हो रही रहस्यमयी मौतों ने बढ़ाया खौफ 7 एपिसोड की इस सीरीज में हर मोड़ पर मिलेगा नया ट्विस्ट


    नई दिल्ली।अगर आपको क्राइम थ्रिलर और साइकोलॉजिकल सस्पेंस से भरपूर कहानियां पसंद हैं तो ओटीटी पर मौजूद एक ऐसी सीरीज आपका ध्यान खींच सकती है जिसमें रहस्यमयी मौतों के साथ लोककथाओं और जंगली मगरमच्छों का खौफ भी देखने को मिलता है। इस सीरीज का नाम राक्षसा है। कहानी नॉर्थ कर्नाटक की पृष्ठभूमि में बुनी गई है जहां मालाप्रभा नदी के आसपास कुछ रहस्यमयी मौतें होने लगती हैं। इन घटनाओं के बाद इलाके के लोगों में डर का माहौल बन जाता है और गांव वाले इन मौतों को पुरानी लोककथाओं तथा मगरमच्छों के हमलों से जोड़कर देखने लगते हैं।

    कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा पुलिस जांच और स्थानीय मान्यताओं के बीच पैदा होने वाला टकराव है। सीरीज में विजय राघवेंद्र सब इंस्पेक्टर हनमप्पा की भूमिका निभा रहे हैं। यह उनका ओटीटी डेब्यू बताया गया है। हनमप्पा अंधविश्वास और श्राप जैसी बातों पर आसानी से विश्वास नहीं करता। वह हर घटना को तर्क और सबूतों के आधार पर समझने की कोशिश करता है। उसका जोर घटनाओं की सही टाइमलाइन और उपलब्ध सबूतों पर रहता है।

    जैसे जैसे हनमप्पा इस रहस्यमयी मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश करता है वैसे वैसे कहानी में कई नए सवाल खड़े होने लगते हैं। एक तरफ उसके सामने लगातार सामने आ रही मौतों की गुत्थी है तो दूसरी तरफ उसकी निजी जिंदगी भी कई जिम्मेदारियां लेकर खड़ी है। उसकी पत्नी प्रेग्नेंट है और ऐसे समय में उसे अपने परिवार के साथ साथ अपने पुलिस के काम पर भी पूरा ध्यान देना पड़ता है। यही दोहरी जिम्मेदारी उसके किरदार को और दिलचस्प बनाती है।

    राक्षसा की खासियत इसका छोटा और तेज रफ्तार फॉर्मेट भी है। सीरीज में कुल 7 एपिसोड हैं और हर एपिसोड लगभग 20 से 22 मिनट का है। कम समय में कहानी को आगे बढ़ाने के कारण दर्शकों को लगातार नए घटनाक्रम देखने को मिलते हैं। एक रहस्य सामने आने के बाद दूसरा सवाल खड़ा हो जाता है और यही सिलसिला दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखता है।

    यह सीरीज जी5 पर देखी जा सकती है। इसकी आईएमडीबी रेटिंग 7.2 बताई गई है। सीरीज का निर्देशन सुहान प्रदास ने किया है। इसमें विजय राघवेंद्र के साथ अविनाश और मयूरी क्यातरी अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं। इसे थरुन सुधीर ने प्रोड्यूस किया है जबकि कहानी और लेखन की जिम्मेदारी सुहान प्रसाद ने अपूर्वा कुमार के साथ संभाली है।

    राक्षसा को तमिल वेब सीरीज विलंगू का कन्नड़ अडैप्शन बताया गया है। हालांकि इसे हूबहू कॉपी करने के बजाय कन्नड़ दर्शकों और स्थानीय संस्कृति को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। यही वजह है कि कहानी में स्थानीय माहौल और लोकविश्वासों की झलक भी दिखाई देती है। अगर आपको रहस्यमयी मौतें पुलिस जांच सस्पेंस और लगातार आने वाले ट्विस्ट पसंद हैं तो राक्षसा आपके लिए एक दिलचस्प क्राइम थ्रिलर साबित हो सकती है।

  • 9 एपिसोड की इस क्राइम सीरीज में है बदले की खतरनाक कहानी क्लाइमेक्स तक नहीं हटेगी नजर

    9 एपिसोड की इस क्राइम सीरीज में है बदले की खतरनाक कहानी क्लाइमेक्स तक नहीं हटेगी नजर


    नई दिल्ली। ओटीटी पर क्राइम और थ्रिलर कंटेंट पसंद करने वालों के लिए ऐसी कई सीरीज मौजूद हैं जिनकी कहानी धीरे धीरे आगे बढ़ते हुए दर्शकों को लगातार बांधे रखती है। अगर आपको अपराध रहस्य बदला और सस्पेंस से भरपूर कहानियां पसंद हैं तो जी5 की बिच्छू का खेल आपके लिए एक विकल्प हो सकती है। साल 2020 में रिलीज हुई इस क्राइम थ्रिलर सीरीज में कहानी एक ऐसे युवक के इर्द गिर्द घूमती है जो अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए अपराध की दुनिया में कदम रखता है।

    सीरीज की कहानी अखिल श्रीवास्तव नाम के युवक से शुरू होती है। बनारस का रहने वाला अखिल एक उभरता हुआ लेखक है लेकिन उसकी जिंदगी उस समय पूरी तरह बदल जाती है जब उसके पिता पर गंभीर आरोप लगाए जाते हैं। इसके बाद उनके साथ ऐसी घटना होती है जो अखिल को भीतर तक झकझोर देती है। पिता की मौत के पीछे जिम्मेदार लोगों को तलाशना और उन्हें सजा दिलाना ही उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा मकसद बन जाता है।

    अखिल का किरदार दिव्येंदु शर्मा ने निभाया है। कहानी की शुरुआत ही एक दिलचस्प स्थिति से होती है जहां अखिल पुलिस के सामने अपना अपराध कबूल करता दिखाई देता है। इसके बाद कहानी फ्लैशबैक में जाती है और दर्शकों को धीरे धीरे पता चलता है कि आखिर वह इस स्थिति तक कैसे पहुंचा। यही तरीका सीरीज के रहस्य को बनाए रखता है और दर्शकों को अगले एपिसोड तक पहुंचने के लिए उत्सुक करता है।

    बिच्छू का खेल में बदले की कहानी के साथ अपराध की दुनिया के कई पहलू देखने को मिलते हैं। कहानी में ऐसे मोड़ आते हैं जहां दर्शक यह समझने की कोशिश करते रहते हैं कि कौन सही है और कौन गलत। जैसे जैसे अखिल अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ता है वैसे वैसे उसके सामने नई मुश्किलें भी खड़ी होती जाती हैं। सीरीज की कहानी में सस्पेंस और क्राइम के साथ बनारस का माहौल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    इस सीरीज का पहला पार्ट कुल 9 एपिसोड का है। इसे जी5 पर देखा जा सकता है। सीरीज के रिलीज होने के बाद इसके दूसरे सीजन को लेकर दर्शकों के बीच दिलचस्पी बनी रही है। हालांकि इसकी अगली कहानी को लेकर दर्शकों को लंबे समय से इंतजार है।

    सीरीज का निर्देशन आशीष शुक्ला ने किया है जबकि बलजीत सिंह चड्ढा और सौरभ अरोड़ा ने भी निर्देशन में योगदान दिया है। कलाकारों की बात करें तो दिव्येंदु शर्मा के साथ अंशुल चौहान और सैयद जीशान कादरी अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं। दिव्येंदु को इससे पहले अलग तरह के किरदारों में देखा गया है लेकिन इस सीरीज में उनका अंदाज दर्शकों को अलग अनुभव देता है।

    बिच्छू का खेल को IMDb पर करीब 7 की रेटिंग मिली हुई है। सीरीज की कहानी लोकप्रिय हिंदी क्राइम फिक्शन की परंपरा से प्रभावित नजर आती है और इसमें बदले के साथ लगातार आने वाले ट्विस्ट कहानी को आगे बढ़ाते हैं। खासतौर पर उन दर्शकों को इसका फॉर्मेट पसंद आ सकता है जो तेज घटनाक्रम के बजाय धीरे धीरे खुलने वाले रहस्य और अपराध की कहानियां देखना पसंद करते हैं।

    अगर आप ओटीटी पर ऐसी क्राइम थ्रिलर तलाश रहे हैं जिसमें मुख्य किरदार के सामने निजी बदला सबसे बड़ी चुनौती बन जाए और कहानी फ्लैशबैक के जरिए धीरे धीरे रहस्य खोलती जाए तो बिच्छू का खेल आपकी वॉचलिस्ट में शामिल हो सकती है। इसके 9 एपिसोड एक साथ देखने पर कहानी का पूरा घटनाक्रम ज्यादा आसानी से समझ में आता है और क्लाइमेक्स तक पहुंचते पहुंचते कई सवालों के जवाब सामने आते हैं।