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  • अमेरिकी-रूसी डीजल समझौते पर जेलेंस्की का विरोध, ट्रंप की अपील ठुकराकर रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले जारी रखने का ऐलान

    अमेरिकी-रूसी डीजल समझौते पर जेलेंस्की का विरोध, ट्रंप की अपील ठुकराकर रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले जारी रखने का ऐलान

    नई दिल्ली ।रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच अमेरिका और यूक्रेन के संबंधों में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग को मानने से इनकार कर दिया है, जिसमें यूक्रेन से रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने के लिए कहा गया था। जेलेंस्की के इस रुख से दोनों देशों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं।

    यह विवाद ऐसे समय बढ़ा है, जब अमेरिका ने पिछले सप्ताह रूस पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में ढील दी। इसके बदले रूस ने वैश्विक बाजार में बड़ी मात्रा में डीजल की आपूर्ति करने पर सहमति जताई। इस समझौते को लेकर यूक्रेन ने नाराजगी जाहिर की है। जेलेंस्की का मानना है कि रूस को ऊर्जा कारोबार से मिलने वाली अतिरिक्त राहत युद्ध जारी रखने की उसकी क्षमता को मजबूत कर सकती है।

    यूक्रेन ने इस समझौते को कमजोर फैसला बताते हुए चिंता जताई है कि रूस को ऊर्जा क्षेत्र से होने वाली कमाई युद्ध जारी रखने में मदद कर सकती है। जेलेंस्की का कहना है कि रूस को आर्थिक राहत मिलने से यूक्रेन के खिलाफ उसकी सैन्य कार्रवाई लंबी खिंच सकती है। इस समझौते की यूरोप में भी आलोचना हुई है। यूक्रेन का रुख है कि रूस की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले उसकी सैन्य क्षमता और युद्ध से जुड़े संसाधनों को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा हैं।

    इस बीच, ट्रंप ने एक साक्षात्कार में जेलेंस्की की आलोचना करते हुए कहा कि उनके साथ बातचीत करना आसान नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि जेलेंस्की समझौता करने की बात तो करते हैं, लेकिन वास्तव में इसके लिए तैयार नहीं हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह यूक्रेनी राष्ट्रपति के बड़े प्रशंसक नहीं हैं और उनके नेतृत्व में यूक्रेन को भारी नुकसान हुआ है।

    ट्रंप ने रूस और यूक्रेन की सैन्य क्षमताओं की तुलना करते हुए कहा कि रूस एक बड़ा देश है और उसके पास बड़ी संख्या में सैनिक उपलब्ध हैं, जबकि यूक्रेन के पास इतनी बड़ी जनशक्ति नहीं है। उन्होंने रूसी तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों की भी आलोचना की। उनका तर्क है कि डीजल उत्पादन से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाने से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकता है और तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने को लेकर अमेरिका और यूक्रेन के बीच मतभेद ऐसे समय सामने आए हैं, जब ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों को लेकर अस्थायी संघर्षविराम की कोशिशें भी प्रभावित हुई हैं। यूक्रेन का कहना है कि रूस की ओर से उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रहने के कारण वह एकतरफा तौर पर अपनी कार्रवाई रोककर नहीं रख सकता। कीव के अनुसार, ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की किसी भी व्यवस्था में दोनों पक्षों की ओर से समान प्रतिबद्धता जरूरी है।

    इस घटनाक्रम से अमेरिका और यूक्रेन के बीच कूटनीतिक मतभेद और गहरे होने की आशंका बढ़ी है। एक ओर ट्रंप प्रशासन ऊर्जा बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और रूसी रिफाइनरियों पर हमले रोकने पर जोर दे रहा है, वहीं यूक्रेन अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव करने को तैयार नहीं दिख रहा। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर सहमति बनती है या नहीं, इसका असर युद्ध की आगे की दिशा और रूस के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े घटनाक्रमों पर पड़ सकता है।

  • रूस से डीजल आपूर्ति पर ट्रंप ने दी प्रतिबंधों में अस्थायी छूट, जेलेंस्की ने जताई नाराजगी, बोले- इससे पुतिन की युद्ध क्षमता बढ़ेगी

    रूस से डीजल आपूर्ति पर ट्रंप ने दी प्रतिबंधों में अस्थायी छूट, जेलेंस्की ने जताई नाराजगी, बोले- इससे पुतिन की युद्ध क्षमता बढ़ेगी


    नई दिल्ली । अमेरिका और रूस के बीच डीजल आपूर्ति को लेकर हुए कथित समझौते ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस शुरू कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत के बाद रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की। इस फैसले के तहत रूसी डीजल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दिए जाने की बात कही गई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस कदम पर नाराजगी जताई और इसे अनुचित बताया। उनका कहना है कि इससे रूस की युद्ध लड़ने की क्षमता मजबूत हो सकती है।

    ट्रंप ने दावा किया कि रूस तत्काल तीन लाख टन से अधिक डीजल अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में उपलब्ध कराएगा। उन्होंने नवंबर में पांच लाख टन अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति और इसके बाद मात्रा बढ़ाने की संभावना का भी उल्लेख किया। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय ने भी वैश्विक बाजारों में तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति के लिए तत्परता जताई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने रूसी डीजल की बिक्री के लिए अस्थायी छूट जारी की है। इससे अप्रैल 2027 तक आपूर्ति का रास्ता खुलने की बात कही गई है। हालांकि, समझौते की शर्तों और आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है।

    अमेरिका में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 4.37 डॉलर प्रति गैलन और डीजल की कीमत 6.28 डॉलर प्रति गैलन बताई गई है। फरवरी के अंत से पेट्रोल की कीमत में 46 प्रतिशत और डीजल की कीमत में 67 प्रतिशत से अधिक वृद्धि होने का दावा किया गया है। ईरान से जुड़े संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई बाधाओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया है। ट्रंप ने कहा कि किसानों, ट्रक चालकों और आम अमेरिकी नागरिकों के लिए ईंधन की कीमतें कम करना उनकी प्राथमिकता है।

    जेलेंस्की ने रूसी डीजल की बिक्री पर प्रतिबंधों में छूट देने के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे रूस को आर्थिक लाभ मिल सकता है। उनके मुताबिक, अतिरिक्त आय से पुतिन युद्ध को लंबा खींचने और यूक्रेन पर अधिक आक्रामक हमले करने में सक्षम हो सकते हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि इस फैसले से अधिक लोगों की जान जा सकती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान बढ़ सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने मॉस्को पर कई प्रतिबंध लगाए थे। ऐसे में रूसी ईंधन की बिक्री को राहत देने का फैसला अमेरिकी नीति में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

    ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इस समझौते से ईंधन की कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सावधानी जताई है। विशेषज्ञ क्लेटन सीगल के अनुसार, इस फैसले से कीमतों में बड़ी गिरावट आने की संभावना सीमित है, जबकि रूस और पुतिन को लाभ मिल सकता है। विशेषज्ञ माइकल लिंच ने भी कीमतों पर इसके असर को लेकर संदेह जताया। उनका कहना है कि यदि अमेरिका रूस से डीजल खरीदता है, तो रूस के मौजूदा ग्राहक अन्य देशों से ईंधन खरीदने लग सकते हैं। ऐसी स्थिति में बाजार में आपूर्ति का वितरण बदल सकता है, लेकिन कीमतों में उल्लेखनीय कमी होना निश्चित नहीं है।

    इस बीच, क्रेमलिन ने कहा कि ट्रंप ईरान से जुड़े संघर्ष का समाधान निकालने की कोशिशों में रूस की भूमिका का स्वागत करते हैं। ट्रंप ने भी कहा है कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने पर तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आ सकती है। उन्होंने शुक्रवार को न्यूयॉर्क के सिरैक्यूज में एक चुनावी रैली के दौरान यह बात कही। रूस से डीजल आपूर्ति पर राहत देने का फैसला ऐसे समय में आया है, जब ऊर्जा की कीमतें और युद्ध से जुड़े घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय चर्चा के प्रमुख विषय बने हुए हैं।

  • जयशंकर की जेलेंस्की से मुलाकात के बीच कीव पर रूसी ड्रोन हमला

    जयशंकर की जेलेंस्की से मुलाकात के बीच कीव पर रूसी ड्रोन हमला

    कीव। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने दावा किया है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर जब कीव में उनसे मुलाकात कर रहे थे, उसी दौरान रूस ने यूक्रेन पर ड्रोन हमला किया। जेलेंस्की के मुताबिक, रूस की ओर से जेट इंजन वाले ‘शाहेद’ ड्रोन लॉन्च किए गए थे। यूक्रेन पहले भी इन ड्रोन के विकास में ईरान की मदद का आरोप लगाता रहा है।

    जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेनी लड़ाकू विमानों ने ज्यादातर ड्रोन को हवा में ही मार गिराया, जिसके चलते जयशंकर के नेतृत्व वाला भारतीय प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा।

    युद्ध खत्म करने के रास्तों पर हुई चर्चा

    विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को यूक्रेन की राजधानी कीव में राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात की। बातचीत में रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के संभावित रास्तों के साथ-साथ भारत और यूक्रेन के द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

    जयशंकर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि उन्होंने जेलेंस्की को यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ हुई बातचीत की जानकारी दी। दोनों पक्षों के बीच चर्चा का प्रमुख मुद्दा युद्ध का समाधान तलाशना रहा।

    इसी मुलाकात के दौरान कीव में रूसी ड्रोन हमले की खबर सामने आई।

    जेलेंस्की ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का किया जिक्र

    जेलेंस्की ने अपने बयान में खास तौर पर जयशंकर के प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी लड़ाकू विमानों ने ज्यादातर ड्रोन को नष्ट कर दिया और इसी कारण भारतीय प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा।

    यूक्रेनी राष्ट्रपति के मुताबिक, जिस समय जयशंकर उनके साथ कीव में मौजूद थे, उसी वक्त रूस ने एक बार फिर जेट इंजन वाले शाहेद ड्रोन लॉन्च किए। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जयशंकर ऐसे समय यूक्रेन पहुंचे थे जब राजधानी में रूसी हवाई हमलों का खतरा बना हुआ था।

    जेलेंस्की ने दुनिया से मांगा स्पष्ट रुख

    जेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और दुनिया की प्रमुख शक्तियों से रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि युद्ध को समाप्त करने की जरूरत है और शांति ऐसी होनी चाहिए जो भरोसेमंद और लंबे समय तक टिकाऊ रहे।

    उन्होंने भारत के रुख का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यूक्रेन युद्ध समाप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता की सराहना करता है।

    बंदरगाहों और खाद्य आपूर्ति को लेकर रूस पर आरोप

    यूक्रेनी राष्ट्रपति ने रूस पर यूक्रेन के बंदरगाहों, खाद्य गलियारे और आपूर्ति व्यवस्था को बाधित करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने खास तौर पर ब्लैक सी में नागरिक जहाजों की सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया।

    जेलेंस्की का तर्क है कि समुद्री मार्गों में किसी भी तरह की रुकावट का असर केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगा। इससे उन क्षेत्रों में भी खाद्य आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जो इन समुद्री रास्तों पर निर्भर हैं।

    जयशंकर की कीव यात्रा के दौरान हुई यह मुलाकात और उसी समय सामने आया ड्रोन हमला रूस-यूक्रेन युद्ध की मौजूदा स्थिति की गंभीरता को भी रेखांकित करता है।

  • मिडिल ईस्ट से यूक्रेन तक बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दांव नेतन्याहू और जेलेंस्की संग बंद कमरे में हुई अहम वार्ता

    मिडिल ईस्ट से यूक्रेन तक बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दांव नेतन्याहू और जेलेंस्की संग बंद कमरे में हुई अहम वार्ता


    नई दिल्ली । दुनिया इस समय एक साथ कई बड़े भू राजनीतिक संकटों का सामना कर रही है। एक ओर मध्य पूर्व में इजरायल और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है तो दूसरी ओर रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने वैश्विक सुरक्षा को नई चुनौती दी है। ऐसे माहौल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से अलग अलग बंद कमरे में मुलाकात कर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इन बैठकों को अमेरिका की भविष्य की रणनीति तय करने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार दोनों बैठकें पूरी तरह बंद कमरे में हुईं और उनकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। हालांकि व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इन्हें सकारात्मक और रचनात्मक बताया। माना जा रहा है कि इन चर्चाओं में अमेरिका की सुरक्षा नीति सहयोगी देशों के साथ रणनीतिक तालमेल और युद्ध प्रभावित क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से विचार किया गया।

    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुई बैठक में ईरान सबसे प्रमुख मुद्दा रहा। हाल के महीनों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर अमेरिका और इजरायल लगातार चिंतित रहे हैं। बैठक से पहले ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक बयान में कहा था कि उन्हें इजरायल की ओर से किसी विशेष ब्रीफिंग की आवश्यकता नहीं है और उन्होंने संकेत दिया था कि नेतन्याहू चाहते हैं कि अमेरिका इस पूरे मामले में सक्रिय भूमिका निभाता रहे। हालांकि बाद में ओवल ऑफिस से जारी तस्वीरों में दोनों नेता बेहद सकारात्मक माहौल में नजर आए। बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ भी मौजूद रहे।

    सूत्रों के अनुसार इस दौरान लेबनान सीमा पर बढ़ते तनाव हिज्बुल्लाह की गतिविधियों और अब्राहम समझौते के भविष्य जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। इन मुद्दों को मध्य पूर्व की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के साथ हुई बैठक का मुख्य फोकस रूस के खिलाफ जारी युद्ध और यूक्रेन की रक्षा जरूरतें रहीं। जेलेंस्की ने ट्रंप के साथ हुई बातचीत को रचनात्मक बताते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। खास तौर पर पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों के लाइसेंस और एयर डिफेंस सहयोग को लेकर विचार विमर्श हुआ। रूस की ओर से लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच यूक्रेन इन रक्षा प्रणालियों को अपनी सुरक्षा के लिए बेहद अहम मानता है।

    बैठक में ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और रूस के साथ संभावित शांति प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। इसके बाद जेलेंस्की अमेरिकी सांसदों से मुलाकात के लिए कैपिटल हिल पहुंचे जहां यूक्रेन को भविष्य में सैन्य सहायता जारी रखने पर भी विचार किया गया।

    इन बैठकों से पहले ट्रंप नेतन्याहू और जेलेंस्की ने दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार में भी हिस्सा लिया। ग्राहम अमेरिका में इजरायल और यूक्रेन दोनों के प्रबल समर्थक माने जाते थे और उनकी विदेश नीति पर गहरी पकड़ थी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में जब दुनिया कई मोर्चों पर अस्थिरता का सामना कर रही है तब ट्रंप की ये कूटनीतिक बैठकें आने वाले दिनों में अमेरिका की विदेश नीति और वैश्विक शक्ति संतुलन को नई दिशा दे सकती हैं। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि इन अहम बैठकों के बाद अमेरिका कौन से रणनीतिक फैसले लेता है।

  • मॉस्को पर यूक्रेन का बड़ा ड्रोन प्रहार, तेल रिफाइनरी को बनाया निशाना; जेलेंस्की बोले- यह जवाबी कार्रवाई है

    मॉस्को पर यूक्रेन का बड़ा ड्रोन प्रहार, तेल रिफाइनरी को बनाया निशाना; जेलेंस्की बोले- यह जवाबी कार्रवाई है

    नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां दोनों पक्ष सीधे एक-दूसरे की रणनीतिक और आर्थिक क्षमताओं को नुकसान पहुंचाने में जुटे दिखाई दे रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में यूक्रेन ने मॉस्को क्षेत्र पर व्यापक ड्रोन हमला कर रूस की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है। इस कार्रवाई के बाद रूस की राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है, जबकि कई हवाई अड्डों पर उड़ानों के संचालन को अस्थायी रूप से प्रभावित करना पड़ा।

    रिपोर्टों के अनुसार यूक्रेन द्वारा किए गए इस हमले का मुख्य लक्ष्य एक महत्वपूर्ण तेल रिफाइनरी और ऊर्जा ढांचे से जुड़े ठिकाने थे। हमले के बाद रिफाइनरी क्षेत्र से उठते धुएं और आग की तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने इस कार्रवाई की गंभीरता को उजागर किया। ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाए जाने को युद्ध की बदलती रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जहां सैन्य ठिकानों के साथ-साथ आर्थिक और औद्योगिक ढांचे भी संघर्ष का केंद्र बनते जा रहे हैं।

    यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हमले के बाद जारी बयान में कहा कि यह कार्रवाई रूस द्वारा यूक्रेनी शहरों और नागरिक क्षेत्रों पर लगातार किए जा रहे हमलों का जवाब है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेन उन संसाधनों और संरचनाओं को निशाना बना रहा है जो युद्ध संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनके अनुसार यह रणनीति रूस की सैन्य क्षमता और आपूर्ति तंत्र को कमजोर करने के उद्देश्य से अपनाई जा रही है।

    दूसरी ओर रूस ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने बड़ी संख्या में ड्रोन को मार गिराया और संभावित नुकसान को सीमित करने में सफलता हासिल की। हालांकि राजधानी क्षेत्र तक ड्रोन पहुंचने की घटनाओं ने रूस की सुरक्षा तैयारियों और हवाई रक्षा तंत्र को लेकर नए सवाल भी खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी के आसपास बार-बार हो रहे ड्रोन हमले इस संघर्ष के नए स्वरूप को दर्शाते हैं।

    युद्ध के मौजूदा चरण में ऊर्जा अवसंरचना विशेष रूप से निशाने पर है। तेल रिफाइनरी, ईंधन भंडारण केंद्र, बिजली संयंत्र और परिवहन नेटवर्क दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक महत्व रखते हैं। इन पर हमले का उद्देश्य केवल तत्काल नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि विरोधी पक्ष की आपूर्ति श्रृंखला, सैन्य लॉजिस्टिक्स और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करना भी होता है। यही कारण है कि हाल के महीनों में इस प्रकार के हमलों में तेजी देखी गई है।

    जेलेंस्की ने यह भी संकेत दिया कि यूक्रेनी बलों ने रूस के अन्य क्षेत्रों और कब्जे वाले इलाकों में स्थित सैन्य प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया है। इससे स्पष्ट है कि यूक्रेन अब युद्ध को केवल अपनी सीमाओं तक सीमित रखने के बजाय रूस के भीतर मौजूद रणनीतिक परिसंपत्तियों तक पहुंचाने की क्षमता प्रदर्शित कर रहा है। यह घटनाक्रम संघर्ष की तीव्रता को और बढ़ा सकता है।

    विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच चल रहा यह संघर्ष फिलहाल समाप्ति की ओर जाता नहीं दिख रहा है। इसके विपरीत, ऊर्जा ढांचे और महत्वपूर्ण आर्थिक परिसंपत्तियों पर बढ़ते हमले संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में युद्ध और अधिक जटिल तथा व्यापक रूप ले सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, क्योंकि इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।

    फिलहाल मॉस्को सहित रूस के कई क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है। वहीं यूक्रेन ने संकेत दिया है कि वह अपने खिलाफ हो रहे हमलों का जवाब देने की रणनीति जारी रखेगा। ऐसे में युद्ध का अगला चरण दोनों देशों के लिए और अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

  • G7 समिट के दौरान जेलेस्की से मिले PM मोदी, बोले- भारत 'हमेशा शांति के पक्ष में रहेगा

    G7 समिट के दौरान जेलेस्की से मिले PM मोदी, बोले- भारत 'हमेशा शांति के पक्ष में रहेगा


    एवियन।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने बुधवार को फ्रांस (France) के एवियन (Evian) में G7 समिट (G7 Summit) के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की (Ukrainian President Volodymyr Zelenskyy) से मुलाकात की. इस दौरान पीएम मोदी ने एक बार फिर से दोहराया कि भारत हमेशा शांति के पक्ष में रहेगा.

    PM मोदी ने X पर एक पोस्ट में कहा, ‘एवियन में राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात हुई. हाल के समय में भारत और यूक्रेन के बीच काफी बातचीत और सहयोग बढ़ा है. यह हमारे सहयोग के अलग-अलग क्षेत्रों में भी दिखा. आज हमारी बातचीत हमारे सहयोग के अलग-अलग पहलुओं की समीक्षा करने के बारे में थी.।

    उन्होंने आगे कहा, ‘हम दोनों इस बात पर सहमत हैं कि व्यापारिक संबंधों को युद्ध से पहले वाली स्थिति में वापस लाने की जरूरत है. साथ ही, यह भी दोहराया कि भारत हमेशा शांति के पक्ष में रहेगा और इंसानियत को सबसे ऊपर रखेगा। बैठक के बाद, वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि भारत और यूक्रेन के बीच ‘सहयोग की बड़ी संभावना’ है और वे पहले से ही संयुक्त प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं।

    जेलेंस्की के साथ PM मोदी की यह मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ हुई बैठक के ठीक बाद हुई।

    G7 में PM मोदी ने ट्रंप के सामने रखा नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा
    जेलेंस्की ने कहा, ‘आज हमने इस बारे में बात की कि कैसे इन प्रोजेक्ट्स को और मजबूत बनाया जाए और अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग का दायरा बढ़ाया जाए. अहम बात यह है कि प्रधानमंत्री यूक्रेन के साथ आपसी हित वाले संबंध विकसित करने में दिलचस्पी रखते हैं और मानते हैं कि यह साझेदारी हमारे लोगों को और मजबूत बना सकती है।

    उन्होंने X पर लिखा, ‘ऐसे कई अच्छे इंडस्ट्रियल और अन्य प्रोजेक्ट्स हैं जिन पर हम मिलकर काम कर सकते हैं. हमने तय किया कि हमारी टीमें सभी जरूरी बातों पर मिलकर काम करेंगी.’ प्रधानमंत्री मोदी और जेलेंस्की के बीच आखिरी बार सीधी बातचीत तब हुई थी, जब पिछले साल 30 अगस्त को उन्हें फोन किया था।

  • रूस-यूक्रेन युद्ध: ओरेश्निक हाइपरसोनिक मिसाइल समेत बड़े हमले में 4 की मौत, कीव में भारी तबाही; जेलेंस्की बोले- रूस पागल हो चुका है



    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रविवार को एक बार फिर बड़ा सैन्य तनाव देखने को मिला जब रूस ने यूक्रेन पर मिसाइलों और ड्रोनों से भीषण हमला किया। इस हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई दर्जन लोग घायल हुए हैं। हमलों का मुख्य निशाना राजधानी कीव और उसके आसपास के इलाके रहे।

    रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह हमला यूक्रेन की ओर से किए गए हमलों के जवाब में किया गया है। इस दौरान रूस ने ओरेश्निक हाइपरसोनिक मिसाइल का भी इस्तेमाल किया, जिसे परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बताया जाता है। यह मिसाइल अपनी तेज गति और आधुनिक तकनीक के कारण मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है।

    यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हमलों में जानबूझकर नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया है। उन्होंने बताया कि पानी आपूर्ति की एक सुविधा, एक बाजार, कई घर और स्कूल इस हमले में क्षतिग्रस्त हुए हैं। जेलेंस्की ने टेलीग्राम पर कहा कि रूसी मिसाइल बिला त्सेरक्वा शहर के पास गिरी और रूस “पागल हो चुका है।”

    यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने दावा किया कि ओरेश्निक मिसाइल में डमी वारहेड लगाया गया था। उन्होंने कहा कि रूस द्वारा यह मिसाइल सिर्फ डर पैदा करने और शक्ति प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल की जा रही है।

    यूक्रेनी वायुसेना के मुताबिक रूस ने रातभर में लगभग 600 ड्रोन और 90 मिसाइलें दागीं, जिनमें से 604 को एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया। अधिकारियों ने इसे राजधानी पर हुए सबसे बड़े हमलों में से एक बताया है।

    इस बीच रूस ने आरोप लगाया कि यूक्रेन की ओर से उसके नियंत्रण वाले क्षेत्रों पर हमले किए गए थे, जिनके जवाब में यह कार्रवाई की गई। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन के “आतंकी हमलों” के जवाब में ओरेश्निक और अन्य बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी सामने आई है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलस ने ओरेश्निक मिसाइल के इस्तेमाल को बेहद खतरनाक परमाणु शक्ति प्रदर्शन बताया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मर्ज ने भी इस हमले की निंदा करते हुए इसे युद्ध में गंभीर बढ़ोतरी बताया है।

    यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध पहले से ही चरम पर है और दोनों देश लगातार एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयां संघर्ष को और अधिक खतरनाक दिशा में ले जा सकती हैं।

  • रूस-यूक्रेन युद्ध: शांति वार्ता की नई पहल, पुतिन बोले-तीसरे देश में जेलेंस्की से मिलने को तैयार

    रूस-यूक्रेन युद्ध: शांति वार्ता की नई पहल, पुतिन बोले-तीसरे देश में जेलेंस्की से मिलने को तैयार



    नई दिल्ली। Russia-Ukraine War को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक संकेत देते हुए रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने कहा है कि वह यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy से किसी तीसरे देश में मुलाकात करने के लिए तैयार हैं, लेकिन यह बैठक केवल अंतिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर के लिए होगी।

    पुतिन ने स्पष्ट किया कि इस तरह की मुलाकात तभी संभव है जब दोनों देशों के बीच विशेषज्ञ स्तर पर पूरा और ठोस शांति समझौता पहले से तैयार हो जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बातचीत की बजाय यह बैठक सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया का अंतिम चरण होनी चाहिए।

    रूसी राष्ट्रपति ने पुराने Minsk agreements का हवाला देते हुए कहा कि पिछली शांति प्रक्रियाओं की तरह लंबी और असफल चर्चाओं से बचना जरूरी है। उनका कहना है कि इस बार पहले तकनीकी और विशेषज्ञ स्तर पर सभी मुद्दों को पूरी तरह सुलझाया जाना चाहिए, ताकि बाद में नेताओं की मुलाकात सिर्फ हस्ताक्षर तक सीमित रहे।

    यह युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था और अब अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। पुतिन के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति की दिशा में एक संभावित नई पहल के रूप में देखा जा रहा है।

  • ट्रम्प का दावा- 9 संघर्ष रुकवाए, अब रूस-यूक्रेन युद्ध पर फोकस 3 दिन के सीजफायर की अपील

    ट्रम्प का दावा- 9 संघर्ष रुकवाए, अब रूस-यूक्रेन युद्ध पर फोकस 3 दिन के सीजफायर की अपील



    नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि वे अब तक 9 अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रुकवाने में भूमिका निभा चुके हैं और अब उनका अगला लक्ष्य रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करना है। ट्रम्प ने इसे अपनी “10वीं शांति पहल” बताया है।

    व्हाइट हाउस से वर्जीनिया रवाना होने से पहले ट्रम्प ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे विनाशकारी संघर्ष बन चुका है, जिसमें हर महीने बड़ी संख्या में सैनिकों की मौत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध को रोकना अब उनकी प्राथमिकता है।

    इसी बीच ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर रूस और यूक्रेन के बीच 9 से 11 मई तक 3 दिन के अस्थायी सीजफायर का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने और लगभग 1000-1000 कैदियों की अदला-बदली पर सहमति बनी है।

    हालांकि रूस और यूक्रेन की सरकारों की ओर से इस सीजफायर पर कोई आधिकारिक संयुक्त घोषणा नहीं की गई है, लेकिन ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यदि हालात सकारात्मक रहे तो इस अस्थायी युद्धविराम को आगे बढ़ाया जा सकता है।

    ट्रम्प ने दावा किया है कि वे अब तक 9 अंतरराष्ट्रीय संघर्ष रुकवा चुके हैं और अब रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।
    उन्होंने 3 दिन के सीजफायर और कैदियों की अदला-बदली का प्रस्ताव रखकर इसे अपनी बड़ी शांति पहल बताया है।

  • रूस- यूक्रेन युद्धः ट्रंप और जेलेंस्की यूक्रेन शांति योजना पर लगभग सहमत

    रूस- यूक्रेन युद्धः ट्रंप और जेलेंस्की यूक्रेन शांति योजना पर लगभग सहमत


    फ्लोरिडा।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने रविवार को संयुक्त बयान में कहा कि हम दोनों यूक्रेन शांति योजना पर लगभग सहमत हैं। दोनों नेताओं ने यहां के मार-ए-लागो में यूक्रेन-रूस के बीच शांति समझौते को लेकर अहम बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में यह बयान जारी किया। उन्होंने यूक्रेन-रूस युद्ध और संभावित शांति समझौते पर चर्चा की।

    सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा, “यह बैठक शानदार रही। मैंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी फोन पर लगभग दो घंटे से अधिक समय तक बातचीत की। अब लग रहा है कि हम शांति योजना पर बहुत करीब आ गए हैं। पुतिन और मैंने अभी यूरोपीय नेताओं से भी बात की। हमने यूक्रेन-रूस युद्ध को खत्म करने पर बहुत प्रगति की है। यह लड़ाई दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे घातक है।” जेलेंस्की ने कुछ दिन पहले इस मसले पर अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से बातचीत कर चुके हैं।

    यहां यह महत्वपूर्ण है कि ट्रंप की 20 सूत्री योजना के मसौदे की अभी क्रेमलिन समीक्षा नहीं कर सका है। मॉस्को ने अब तक अपनी क्षेत्रीय मांगों पर कोई नरमी दिखाने के संकेत भी नहीं दिए हैं। जेलेंस्की ने जरूर रविवार को कहा कि वह और ट्रंप योजना पर 90 फीसद सहमत हैं। ट्रंप और जेलेंस्की ने डोनबास जैसे क्षेत्रीय मुद्दों को “बहुत कठिन सवाल” बताया। जेलेंस्की ने यूक्रेन के शुभचिंतक देशों से रूस के शनिवार को कीव पर हमला करने के बावजूद शांति योजना पर समर्थन जारी रखने का आग्रह किया।

    सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, जेलेंस्की ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राष्ट्रपति ट्रपं के जनवरी में वाशिंगटन में यूरोपीय नेताओं की मेजबानी करेंगे। इस बैठक में वह भी मौजूद रहेंगे। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने और जेलेंस्की ने फ्रांस, फिनलैंड, पोलैंड, नॉर्वे, इटली, यूके और जर्मनी के नेताओं के साथ नाटो और यूरोपीय आयोग के नेताओं से भी बात की। जेलेंस्की ने इस दौरान यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी के महत्व पर जोर दिया। युद्ध खत्म होने संभावित समय-सीमा के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि ” इसमें कुछ हफ्ते लग सकते हैं।

    ट्रंप और जेलेंस्की के बीच चली लगभग ढाई घंटे की बातचीत के दौरान मार-ए-लागो के डाइनिंग रूम में विटकॉफ और कुशनर, व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और युद्ध सचिव पीट हेगसेथ मौजूद रहे।