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  • रक्षाबंधन पर गिफ्ट खरीदना रह गया तो घबराएं नहीं, क्विक कॉमर्स ऐप्स से मिनटों में चॉकलेट, फूल और मिठाई मंगाएं

    रक्षाबंधन पर गिफ्ट खरीदना रह गया तो घबराएं नहीं, क्विक कॉमर्स ऐप्स से मिनटों में चॉकलेट, फूल और मिठाई मंगाएं

    नई दिल्ली ।रक्षाबंधन के मौके पर भाई या बहन के लिए उपहार खरीदना अगर आखिरी समय तक टल गया है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्विक कॉमर्स सेवाओं के जरिए घर बैठे कुछ ही समय में कई तरह के गिफ्टिंग विकल्प तलाशे जा सकते हैं। चॉकलेट, मिठाई, फूल और केक से लेकर ब्यूटी, ग्रूमिंग और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले सामान तक कई विकल्प अलग-अलग इलाकों में उपलब्ध हो सकते हैं।

    आखिरी समय में गिफ्ट ऑर्डर करने से पहले सबसे जरूरी बात अपने इलाके में उपलब्धता देखना है। संबंधित ऐप खोलकर लोकेशन दर्ज करने के बाद यह जांचना चाहिए कि चुना हुआ सामान आसपास के स्टोर में मौजूद है या नहीं। इसके साथ ही ऐप पर दिखाई जा रही अनुमानित डिलीवरी अवधि को भी देखना जरूरी है।

    Blinkit जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर रक्षाबंधन के लिए कई तरह के छोटे और तुरंत दिए जा सकने वाले उपहार मिल सकते हैं। चॉकलेट, मिठाई, फूल और केक के अलावा स्नैक्स, ब्यूटी तथा पर्सनल केयर से जुड़े उत्पाद भी विकल्प हो सकते हैं। भाई या बहन की पसंद को ध्यान में रखते हुए उपयोगी सामान चुनना आखिरी समय में भी बेहतर गिफ्ट तैयार करने का आसान तरीका हो सकता है।

    Zepto पर भी अलग-अलग क्षेत्रों में गिफ्टिंग से जुड़े कई उत्पाद उपलब्ध हो सकते हैं। चॉकलेट और दूसरे खाद्य उत्पादों के अलावा परफ्यूम, ब्यूटी तथा ग्रूमिंग से जुड़े सामान और रोजाना काम आने वाले उत्पादों को भी उपहार के तौर पर चुना जा सकता है। हालांकि हर इलाके में हर उत्पाद उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है।

    Swiggy Instamart भी आखिरी समय में गिफ्ट तलाशने वालों के लिए एक विकल्प हो सकता है। यहां उपलब्धता के आधार पर चॉकलेट, मिठाई, फूल, स्नैक्स और अन्य छोटे गिफ्टिंग आइटम देखे जा सकते हैं। भाई या बहन की पसंद की अलग-अलग चीजें एक साथ मंगाकर छोटा सा गिफ्ट कॉम्बिनेशन भी तैयार किया जा सकता है।

    हालांकि क्विक डिलीवरी का मतलब यह नहीं है कि हर ऑर्डर निश्चित रूप से 15 मिनट में पहुंच जाएगा। डिलीवरी का समय ग्राहक की लोकेशन, आसपास उपलब्ध स्टॉक, ऑर्डर की संख्या और उस समय की स्थानीय मांग पर निर्भर करता है। रक्षाबंधन जैसे त्योहारों पर ऑर्डर की संख्या बढ़ने के कारण कुछ क्षेत्रों में सामान्य समय से अधिक देरी भी हो सकती है।

    इसीलिए ऑर्डर करने से पहले अनुमानित डिलीवरी समय जरूर जांचना चाहिए। यदि राखी बांधने या परिवार के साथ मिलने का समय बेहद करीब है, तो ऐसा सामान चुनना बेहतर हो सकता है जिसकी उपलब्धता स्पष्ट हो और जिसकी अनुमानित डिलीवरी निर्धारित समय से पहले दिखाई दे रही हो।

    गिफ्ट चुनने में ज्यादा समय नहीं है तो चॉकलेट, मिठाई, फूल और केक आसान विकल्प हो सकते हैं। इनके अलावा परफ्यूम, स्किन केयर, ग्रूमिंग उत्पाद, कॉफी और स्नैक कॉम्बो या भाई-बहन की पसंद का कोई छोटा उपयोगी सामान भी चुना जा सकता है। बजट के अनुसार एक से अधिक छोटी चीजों को मिलाकर व्यक्तिगत गिफ्ट तैयार किया जा सकता है।

    रक्षाबंधन पर आखिरी समय में खरीदारी करने वालों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात जल्दबाजी में केवल डिलीवरी स्पीड देखकर ऑर्डर करना नहीं, बल्कि उपलब्धता, कीमत और अनुमानित डिलीवरी समय की जांच करना है। सही विकल्प चुनकर कम समय में भी भाई या बहन के लिए उपयोगी और पसंद आने वाला उपहार मंगाया जा सकता है।

  • जेप्टो ने फ्री डिलीवरी के लिए बढ़ाई न्यूनतम ऑर्डर राशि, सामान्य समय में 199 और पीक डिमांड में 299 रुपये खर्च जरूरी

    जेप्टो ने फ्री डिलीवरी के लिए बढ़ाई न्यूनतम ऑर्डर राशि, सामान्य समय में 199 और पीक डिमांड में 299 रुपये खर्च जरूरी


    नई दिल्ली । 
    क्विक कॉमर्स कंपनी जेप्टो ने ग्राहकों के लिए फ्री डिलीवरी से जुड़ी अपनी न्यूनतम ऑर्डर राशि में बदलाव किया है। अब सामान्य परिस्थितियों में मुफ्त डिलीवरी का लाभ लेने के लिए ग्राहकों को कम से कम 199 रुपये का ऑर्डर करना होगा। इससे पहले यह सीमा 149 रुपये थी। वहीं अधिक मांग वाले समय में फ्री डिलीवरी के लिए न्यूनतम ऑर्डर राशि 299 रुपये तक पहुंच सकती है।

    नई व्यवस्था का सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जो क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म से कम कीमत की कुछ जरूरी वस्तुएं ही मंगाते हैं। पहले 149 रुपये के ऑर्डर पर फ्री डिलीवरी उपलब्ध होने के कारण छोटे ऑर्डर करना अपेक्षाकृत आसान था। अब ऐसे ग्राहकों को मुफ्त डिलीवरी पाने के लिए अपनी खरीदारी में अतिरिक्त सामान जोड़ना पड़ सकता है।

    जेप्टो की नई न्यूनतम ऑर्डर सीमा सामान्य समय और पीक डिमांड के हिसाब से अलग रखी गई है। सामान्य परिस्थितियों में ग्राहक को 199 रुपये का ऑर्डर करना होगा, जबकि जब मांग अधिक होगी, तब यह सीमा बढ़कर 299 रुपये तक हो सकती है। इस तरह फ्री डिलीवरी का लाभ लेने के लिए ग्राहक की ओर से किया जाने वाला न्यूनतम खर्च समय के अनुसार बदल सकता है।

    क्विक कॉमर्स कंपनियों के कारोबार में डिलीवरी की लागत एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। कुछ मिनटों में सामान पहुंचाने के लिए कंपनियों को डार्क स्टोर, डिलीवरी नेटवर्क, कर्मचारियों और लॉजिस्टिक्स पर लगातार खर्च करना पड़ता है। ऐसे में न्यूनतम ऑर्डर राशि बढ़ाने का उद्देश्य प्रति ऑर्डर मिलने वाले राजस्व और डिलीवरी लागत के बीच बेहतर संतुलन बनाना हो सकता है।

    इस बदलाव से जेप्टो की फ्री डिलीवरी नीति प्रतिस्पर्धी क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के करीब आती दिखाई दे रही है। बाजार में कंपनियां लगातार अपनी फीस, डिलीवरी शर्तों और न्यूनतम ऑर्डर मूल्य में बदलाव कर रही हैं। इसका उद्देश्य ग्राहकों को प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने के साथ कारोबार की लाभप्रदता को बेहतर करना भी है।

    नई व्यवस्था से ग्राहकों की खरीदारी की आदतों में भी बदलाव आने की संभावना है। जिन उपभोक्ताओं को केवल एक या दो छोटी जरूरत की चीजें तत्काल मंगानी होती हैं, वे अतिरिक्त सामान खरीदने या डिलीवरी शुल्क का विकल्प चुनने के बीच फैसला कर सकते हैं। वहीं नियमित ग्राहक अपनी खरीदारी को एक साथ करने पर विचार कर सकते हैं, ताकि न्यूनतम ऑर्डर सीमा पूरी हो सके।

    क्विक कॉमर्स क्षेत्र में लाभप्रदता का मुद्दा पिछले कुछ समय से महत्वपूर्ण बना हुआ है। कंपनियां तेजी से डिलीवरी के साथ परिचालन लागत को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं। डिलीवरी शुल्क और न्यूनतम ऑर्डर राशि में बदलाव इसी व्यापक कारोबारी रणनीति का हिस्सा माने जा सकते हैं।

    ऑनलाइन डिलीवरी क्षेत्र में केवल क्विक कॉमर्स ही नहीं, बल्कि फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म भी शुल्क संबंधी बदलाव करते रहे हैं। मार्च में जोमैटो ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी की थी। इसके बाद स्विगी ने भी प्रति ऑर्डर प्लेटफॉर्म शुल्क बढ़ाया था। इन बदलावों से संकेत मिलता है कि डिलीवरी आधारित कारोबार में कंपनियां राजस्व बढ़ाने और परिचालन खर्च का दबाव कम करने के लिए अलग-अलग मूल्य निर्धारण रणनीतियों का इस्तेमाल कर रही हैं।

    जेप्टो की नई सीमा ऐसे समय सामने आई है जब भारतीय क्विक कॉमर्स बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज है। ग्राहकों के लिए कीमत, डिलीवरी समय और सुविधा महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं। ऐसे में कंपनियों के सामने चुनौती यह है कि वे लागत और लाभप्रदता को नियंत्रित करते हुए ग्राहकों को आकर्षक सेवा उपलब्ध कराती रहें। जेप्टो की बढ़ी हुई न्यूनतम ऑर्डर राशि इसी संतुलन की दिशा में उठाया गया कदम है।

  • रामदेव अग्रवाल को भारतीय शेयरों से अगले पांच साल में 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न की उम्मीद, पोर्टफोलियो दोगुना होने का अनुमान

    रामदेव अग्रवाल को भारतीय शेयरों से अगले पांच साल में 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न की उम्मीद, पोर्टफोलियो दोगुना होने का अनुमान

    नई दिल्ली ।दिग्गज निवेशक और मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल ने भारतीय शेयर बाजार के भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख जताया है। उनका मानना है कि अगले पांच वर्षों में भारतीय शेयरों से सालाना करीब 15 प्रतिशत रिटर्न मिल सकता है। इस तरह के रिटर्न से लंबी अवधि में निवेशकों का पोर्टफोलियो लगभग दोगुना होने की संभावना बनती है।

    अग्रवाल के अनुमान का आधार भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि और कंपनियों की कमाई में संभावित बढ़ोतरी है। उनके मुताबिक आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर करीब 7.5 से 8.5 प्रतिशत के बीच रह सकती है, जबकि कॉर्पोरेट मुनाफे में लगभग 13 से 14 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिल सकती है। ऐसे माहौल में प्रमुख बाजार सूचकांकों के रिटर्न के लिए भी सकारात्मक संभावना बनती है।

    हालांकि उन्होंने निकट अवधि के बाजार को लेकर बहुत तेज बढ़त की उम्मीद नहीं जताई। उनके मुताबिक लगभग दो साल की सुस्ती के बाद भारतीय शेयर बाजार अगले विकास चरण में प्रवेश करने से पहले कुछ समय तक सीमित दायरे में रह सकता है। एक और साल तक बाजार में इसी तरह की स्थिति बने रहने की संभावना से भी उन्होंने इनकार नहीं किया।

    मौजूदा वैल्यूएशन को लेकर भी अग्रवाल ने कमाई की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। निफ्टी की कमाई के मुकाबले ऊंचे मूल्यांकन के बीच यदि कंपनियों की कमाई में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि होती है तो बाजार की वैल्यूएशन अपेक्षाकृत कम हो सकती है। उनका अनुमान है कि इस स्थिति में बाजार में आगे बढ़ने की गुंजाइश बनी रह सकती है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई के भारत में सीमित रुझान को लेकर अग्रवाल ने वैश्विक बाजारों की स्थिति का उल्लेख किया। उनके मुताबिक अमेरिका के अलावा कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में मजबूत तेजी और कमाई की संभावनाओं के कारण विदेशी निवेशकों का ध्यान वहां अधिक गया है। वैश्विक पूंजी के लिए अमेरिकी बाजार से मुकाबला करना भी भारतीय बाजारों के लिए चुनौती बना हुआ है।

    अग्रवाल ने कहा कि भारत कुछ ऐसे उभरते बाजारों के लिए पूंजी का स्रोत भी बन रहा है, जिन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश रुझान से फायदा मिल रहा है। हालांकि उन्हें एफआईआई की लगातार बिकवाली में सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। उनके अनुसार यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव कम होता है तो भारतीय बाजार के लिए यह महत्वपूर्ण सकारात्मक कारक साबित हो सकता है।

    विदेशी निवेशकों के लिए भारत की कर व्यवस्था पर भी अग्रवाल ने अपनी राय रखी। उन्होंने कैपिटल गेन्स टैक्स व्यवस्था को विदेशी निवेशकों के लिए कुछ हद तक चुनौतीपूर्ण बताया, लेकिन इसे भारत से निवेश कम होने का सबसे बड़ा कारण नहीं माना। उनके अनुसार मुद्रा विनिमय में होने वाला बदलाव विदेशी निवेशकों के लिए अधिक महत्वपूर्ण चिंता हो सकता है।

    विदेशी निवेशक भारत में डॉलर के माध्यम से पूंजी लगाते हैं, जबकि कैपिटल गेन्स की गणना रुपये में होती है। ऐसे में रुपये की कमजोरी के कारण डॉलर में वास्तविक रिटर्न कम होने के बावजूद निवेशक को रुपये में बने लाभ पर कर देना पड़ सकता है। अग्रवाल के अनुसार विदेशी निवेशकों के लिए लंबे समय तक आकर्षक माहौल बनाए रखने के लिए कर व्यवस्था को दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी रखना जरूरी है।

    नई पीढ़ी की कंपनियों और स्टार्टअप को लेकर भी अग्रवाल ने सावधानी बरतने की सलाह दी। उनका कहना है कि किसी कंपनी को सार्वजनिक बाजार में आने से पहले या तो मुनाफे में होना चाहिए या उसके पास मुनाफे तक पहुंचने का स्पष्ट रास्ता होना चाहिए। सार्वजनिक बाजार निवेशक कंपनियों की कमाई और तिमाही प्रदर्शन को काफी महत्व देते हैं।

    जेप्टो में अपने निवेश का उल्लेख करते हुए अग्रवाल ने कहा कि किसी निवेश की सफलता या विफलता का फैसला तुरंत नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक उनके निवेश का अंतिम आकलन 10 साल बाद ही किया जा सकेगा। इससे उनका जोर स्पष्ट होता है कि शेयर बाजार में लंबी अवधि का नजरिया तत्काल उतार-चढ़ाव से अधिक महत्वपूर्ण है।

  • तेज डिलीवरी के पीछे की चुनौतियां उजागर, डार्क स्टोर की स्वच्छता और गिग वर्कर्स की सुरक्षा पर बढ़ी सरकारी सख्ती

    तेज डिलीवरी के पीछे की चुनौतियां उजागर, डार्क स्टोर की स्वच्छता और गिग वर्कर्स की सुरक्षा पर बढ़ी सरकारी सख्ती


    नई दिल्ली । शहरी जीवन में क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने खरीदारी का तरीका तेजी से बदल दिया है। दूध, सब्जियां, ब्रेड, स्नैक्स और रोजमर्रा की जरूरत का सामान अब कुछ ही मिनटों में घर तक पहुंचने लगा है। Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसी सेवाओं ने तेज डिलीवरी को अपनी पहचान बनाया, लेकिन इस मॉडल की चुनौतियां भी अब सामने आ रही हैं।

    सबसे बड़ा सवाल डिलीवरी की रफ्तार को लेकर है। जनवरी 2026 में केंद्र सरकार के श्रम मंत्रालय ने प्रमुख क्विक कॉमर्स कंपनियों के साथ चर्चा कर 10 मिनट की डिलीवरी के प्रचार से पीछे हटने को कहा था। इसके पीछे डिलीवरी पार्टनर्स पर पड़ने वाले समय के दबाव और उनकी सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता प्रमुख थी। इसके बाद कंपनियों ने अपने प्रचार और ब्रांडिंग से 10 मिनट में डिलीवरी के दावे हटाने शुरू किए।

    इस कदम ने यह सवाल खड़ा किया कि ग्राहक को सामान जल्दी उपलब्ध कराने की होड़ का वास्तविक दबाव किस पर पड़ता है। डिलीवरी पार्टनर को ऑर्डर स्वीकार करने, डार्क स्टोर तक पहुंचने, सामान लेने और ट्रैफिक के बीच ग्राहक तक पहुंचने के लिए सीमित समय में कई काम करने होते हैं। ऐसे माहौल में जल्दबाजी सड़क सुरक्षा के लिए जोखिम बढ़ा सकती है।

    क्विक कॉमर्स की दूसरी बड़ी चुनौती खाद्य सुरक्षा और डार्क स्टोर की स्वच्छता से जुड़ी है। डार्क स्टोर ऐसे केंद्र होते हैं जहां ग्राहकों के लिए सामान रखा, संभाला और पैक किया जाता है। ग्राहक इन जगहों पर सीधे खरीदारी नहीं करते, लेकिन उनके घर पहुंचने वाले खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता काफी हद तक इन्हीं केंद्रों की व्यवस्था पर निर्भर करती है।

    हाल में मुंबई के मलाड वेस्ट स्थित Blinkit से जुड़े एक डार्क स्टोर पर महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कार्रवाई की। निरीक्षण के दौरान परिसर में स्वच्छता से जुड़ी गंभीर कमियां और कॉकरोच की मौजूदगी सामने आने के बाद खाद्य लाइसेंस निलंबित किया गया। यह कार्रवाई इस बात को रेखांकित करती है कि तेज डिलीवरी के साथ भंडारण और साफ सफाई के मानकों का पालन भी जरूरी है।

    इसी तरह बेंगलुरु के होस्कोटे क्षेत्र में Zepto से जुड़े एक वेयरहाउस पर भी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने कार्रवाई की। निरीक्षण में खाद्य पदार्थों की स्टोरेज और हैंडलिंग, लेबलिंग तथा स्वच्छता से संबंधित कई कमियां पाई गईं। इसके बाद संबंधित वेयरहाउस को सील किया गया। इन घटनाओं ने क्विक कॉमर्स कंपनियों की सप्लाई चेन और डार्क स्टोर संचालन पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत को सामने रखा है।

    क्विक कॉमर्स मॉडल में सुविधा और गति दोनों महत्वपूर्ण हैं, लेकिन खाद्य पदार्थों के मामले में केवल कम डिलीवरी समय पर्याप्त नहीं है। दूध, फल, सब्जियां, ब्रेड और पैकेज्ड फूड जैसे उत्पादों की सही स्थिति बनाए रखने के लिए उचित तापमान, साफ-सफाई, स्टोरेज और हैंडलिंग जरूरी है। यदि इन मानकों में कमी रहती है तो कुछ मिनट की बचत ग्राहक के लिए वास्तविक लाभ नहीं रह जाती।

    इसके साथ ही गिग वर्कर्स के अधिकार और सामाजिक सुरक्षा भी चर्चा के केंद्र में हैं। सरकार की ओर से क्विक कॉमर्स और अन्य प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर्स को ई-श्रम व्यवस्था से जोड़ने तथा सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि इस क्षेत्र का भविष्य केवल तेज डिलीवरी पर नहीं, बल्कि सुरक्षित कामकाज और बेहतर नियमन पर भी निर्भर करेगा।

    क्विक कॉमर्स उद्योग के लिए अब चुनौती यह है कि वह सुविधा और गति के साथ सुरक्षा, स्वच्छता और श्रमिक हितों के बीच संतुलन बनाए। ग्राहक के लिए कुछ मिनट कम महत्वपूर्ण हैं, यदि उसके बदले डिलीवरी पार्टनर की सुरक्षा या खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता से समझौता करना पड़े। आने वाले समय में इस क्षेत्र की विश्वसनीयता इसी संतुलन से तय होगी।

  • राइडर्स की सुरक्षा पर केंद्र सरकार सख्त, ‘10 मिनट डिलीवरी’ के दावों से पीछे हटीं क्विक कॉमर्स कंपनियां

    राइडर्स की सुरक्षा पर केंद्र सरकार सख्त, ‘10 मिनट डिलीवरी’ के दावों से पीछे हटीं क्विक कॉमर्स कंपनियां


    नई दिल्ली।क्विक कॉमर्स सेक्टर में तेज डिलीवरी को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच अब केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राइडर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार की आपत्ति के बाद स्विगी और जेप्टो जैसी प्रमुख कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म से 10 मिनट में डिलीवरी जैसे दावों को हटा दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब डिलीवरी की होड़ में सड़क सुरक्षा और गिग वर्कर्स पर बढ़ते दबाव को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे।

    सरकारी स्तर पर यह मुद्दा तब गंभीर रूप से सामने आया जब क्विक कॉमर्स कंपनियों के विज्ञापनों और प्रचार अभियानों में बेहद कम समय में सामान पहुंचाने को प्रमुखता दी जाने लगी। मंत्रालय का मानना है कि इस तरह के वादे डिलीवरी पार्टनर्स पर अप्रत्यक्ष लेकिन गहरा दबाव बनाते हैं। नतीजतन कई बार राइडर्स को समय पर डिलीवरी पूरी करने के लिए तेज ड्राइविंग करनी पड़ती है जिससे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है।मंगलवार को केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में क्विक कॉमर्स कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में गिग वर्कर्स की सुरक्षा काम के घंटे भुगतान प्रणाली और डिलीवरी के दौरान पड़ने वाले दबाव जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे अपनी ब्रांडिंग और मार्केटिंग से ऐसी समय-सीमाएं हटाएं जो राइडर्स को जोखिम लेने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।

    इससे पहले क्विक कॉमर्स सेक्टर की बड़ी कंपनी ब्लिंकिट ने अपने ऐप और प्रचार सामग्री से 10 मिनट में डिलीवरी का दावा हटा लिया था। अब स्विगी और जेप्टो ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए अपनी टैगलाइन और विज्ञापन रणनीति में बदलाव किया है। कंपनियां अब डिलीवरी की गति के बजाय उत्पादों की उपलब्धता सेवा की सुविधा और ग्राहकों को मिलने वाले विकल्पों पर जोर दे रही हैं।क्विक कॉमर्स मॉडल को लेकर यह सवाल लंबे समय से उठता रहा है कि क्या बेहद कम समय में डिलीवरी वास्तव में सुरक्षित और टिकाऊ है। सोशल मीडिया श्रमिक संगठनों और गिग वर्कर्स की ओर से बार-बार यह चिंता जताई गई कि कम समय की प्रतिस्पर्धा में राइडर्स को अपनी और दूसरों की सुरक्षा से समझौता करना पड़ता है। हाल के महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों में गिग वर्कर्स की हड़तालों ने भी इस मुद्दे को और मुखर बना दिया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि विज्ञापनों से समय-सीमा हटाने का मतलब यह नहीं है कि कंपनियां अपनी तेज डिलीवरी क्षमता खो देंगी। डार्क स्टोर्स माइक्रो-वेयरहाउस और स्थानीय आपूर्ति नेटवर्क के चलते क्विक कॉमर्स कंपनियां पहले की तरह तेजी से ऑर्डर पूरा करती रहेंगी। फर्क बस इतना होगा कि अब मार्केटिंग में सबसे तेज होने के बजाय सबसे भरोसेमंद सुरक्षित और सुविधाजनक सेवा को प्राथमिकता दी जाएगी।यह कदम भारत की गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों डिलीवरी पार्टनर्स के लिए अहम माना जा रहा है। बड़ी संख्या में युवा इन प्लेटफॉर्म्स से जुड़े हैं और उनकी सुरक्षा काम की शर्तों और अधिकारों को लेकर लंबे समय से स्पष्ट दिशा-निर्देशों की मांग हो रही थी। केंद्र सरकार का यह हस्तक्षेप उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

  • 10 मिनट में डिलीवरी का दावा खत्म, गिग वर्कर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता: Blinkit और अन्य कंपनियों को सरकार का आदेश

    10 मिनट में डिलीवरी का दावा खत्म, गिग वर्कर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता: Blinkit और अन्य कंपनियों को सरकार का आदेश


    नई दिल्ली। देशभर के गिग वर्कर्स की सुरक्षा और उनके काम के दबाव को देखते हुए अब 10 मिनट में डिलीवरी का दावा समाप्त कर दिया गया है। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया के हस्तक्षेप के बाद क्विक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Blinkit ने अपने सभी ब्रांडों से यह दावा हटा लिया है। इसके साथ ही मंत्री ने अन्य बड़ी कंपनियों जैसे Zepto, Swiggy और Zomato के प्रतिनिधियों से भी स्पष्ट कहा कि वे अपने ब्रांड प्रचार में तय समय सीमा वाली डिलीवरी का उल्लेख न करें और कर्मचारियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

    देशभर में गिग वर्कर्स की हड़ताल और लगातार उठ रही सुरक्षा चिंताओं के बाद यह कदम उठाया गया है।

    अब आम ग्राहक 10 मिनट के भीतर डिलीवरी की सुविधा की उम्मीद नहीं कर सकते। हालांकि इससे डिलीवरी की गति में बदलाव हो सकता है, लेकिन सरकार का मानना है कि यह कर्मचारियों के हित में सबसे जरूरी निर्णय है।

    स्रोतों के अनुसार Blinkit जल्द ही अपने सभी विज्ञापन और प्रचार सामग्री से ‘10 मिनट में डिलीवरी’ का दावा हटा देगी। इसके बाद अन्य कंपनियों द्वारा भी इसी तरह का ऐलान आने की संभावना है। यह कदम डिलीवरी कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव कम करने और उनके काम करने के सुरक्षित माहौल को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।
     मंत्री ने कहा कि कम समय में डिलीवरी का दबाव कर्मचारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा करता है।

    गिग वर्कर्स के संगठन लंबे समय से इस क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की स्थितियों, डिलीवरी के दबाव और सोशल सिक्योरिटी की कमी जैसे मुद्दे उठाते आ रहे हैं। उनका कहना है कि तय समय सीमा के कारण कई बार कर्मचारी स्वास्थ्य और सुरक्षा की अनदेखी करने को मजबूर होते हैं। इस निर्णय से यह सुनिश्चित किया गया है कि गिग वर्कर्स की सुरक्षा प्राथमिकता में रहे।

    क्विक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Blinkit ने बयान जारी कर कहा कि यह कदम सरकार की सलाह और कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।

    कंपनी जल्द ही अपने सभी प्रचार और विज्ञापन से ‘10 मिनट में डिलीवरी’ का दावा हटा रही है। इससे पूरे देश में गिग वर्कर्स की सुरक्षा और कार्यस्थल की स्थिति बेहतर होगी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम गिग वर्कर्स के अधिकारों की दिशा में बड़ा सुधार है। अब कंपनियों को ग्राहकों की सुविधा के साथ-साथ कर्मचारियों की सुरक्षा का संतुलन बनाना होगा। यह संदेश भी जाता है कि व्यवसायिक सफलता केवल तेज डिलीवरी तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि कर्मचारियों की भलाई और सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

    कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम गिग वर्कर्स के हित में एक महत्वपूर्ण सुधार है। अब 10 मिनट में डिलीवरी का दावा खत्म हो गया है और कंपनियों को कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश मिल गए हैं। इससे यह स्पष्ट संदेश भी जाता है कि तेजी से सेवा देना महत्वपूर्ण है, लेकिन कर्मचारियों की सुरक्षा और उनका भला प्राथमिकता में होना चाहिए।

  • जोमाटो-स्विगी को बाजार में भी मिलेगी टक्कर होश उड़ाने आ रहा Zepto IPO

    जोमाटो-स्विगी को बाजार में भी मिलेगी टक्कर होश उड़ाने आ रहा Zepto IPO


    नई दिल्ली । जहां एक ओर जोमाटो और स्विगी को डिलीवरी के मोर्चे पर सड़क पर तगड़ी टक्कर मिल रही है. वहीं अब शेयर बाजार में भी बड़ी चुनौती का सामना भी करना पड़ सकता है. दोनों कंपनियों का होश उड़ाने के लिए रोजमर्रा की जरूरत के सामान डिलीवर करने वाली कंपनी जेप्टो अपना आईपीओ लेकर आ रही है. शुक्रवार यानी आज कंपनी गुपचुप तरीके से अपना ड्राफ्ट पेपर सेबी दफ्तर में दाखिल करेगी. जानकारों का कहना है कि जेप्टो आईपीओ का साइज 11 हजार करोड़ या उससे ऊपर जा सकता है.
    लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. अभी तक जितनी भी जानकारी सामने आई है वो सभी सूत्रों के हवाले से की गई है.कंपनी का अगले साल शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का इरादा है. मामले से परिचित सूत्रों ने जानकारी देते हुए कहा कि जेप्टो 26 दिसंबर को सेबी के पास निर्गम संबंधी मसौदा प्रस्ताव डीआरएचपी दाखिल करने जा रही है.

    जोमैटो-स्विगी की राह पर जेप्टो

    आईपीओ संबंधी मसौदा प्रस्ताव को सेबी की मंजूरी मिलने की स्थिति में जेप्टो भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने वाले सबसे नई स्टार्टअप फर्मों में से एक बन जाएगी. आईपीओ लाने के साथ ही जेप्टो वह अपने क्षेत्र के प्रतिद्वंद्वियों जोमैटो एवं स्विगी की कतार में खड़ी हो जाएगी जो पहले से ही शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं. कंपनी का अगले साल शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का इरादा है. मामले से परिचित सूत्रों ने जानकारी देते हुए कहा कि जेप्टो 26 दिसंबर को सेबी के पास निर्गम संबंधी मसौदा प्रस्ताव डीआरएचपी दाखिल करने जा रही है. अभी तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है.
    गुपचुप तरीका अपना आईपीओ
    सूत्रों के मुताबिक जेप्टो गोपनीय मार्ग से आईपीओ के लिए आवेदन करने की तैयारी में है. इस मार्ग के तहत कंपनी सेबी के साथ अपने मसौदा दस्तावेज को सार्वजनिक किए बगैर उस पर शुरुआती चर्चा कर सकती है. हाल के वर्षों में गोपनीय मार्ग से आईपीओ लाने का तरीका उन कंपनियों के बीच लोकप्रिय हुआ है जो आईपीओ से पहले बाजार की स्थिति को देखते हुए अधिक लचीलापन चाहती हैं और नियामक से प्रारंभिक सुझाव लेना चाहती हैं.
    कंपनी कितना जुटा सकी पैसा
    जेप्टो का मौजूदा मूल्यांकन सात अरब अमेरिकी डॉलर आंका गया है. कंपनी अपने गठन से लेकर अब तक कुल 1.8 अरब डॉलर करीब 16000 करोड़ रुपये का कोष जुटा चुकी है. कंपनी ने अगस्त 2023 में एक अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन वाली कंपनी यानी यूनिकॉर्न होने का दर्जा हासिल किया था. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई अधूरी छोड़ने वाले युवाओं आदित पलिचा और कैवल्य वोहरा ने इस कंपनी की स्थापना की थी. जेप्टो ने 10 मिनट में किराना के सामान की आपूर्ति का मॉडल अपनाकर बड़े भारतीय शहरों में तेजी से विस्तार किया.