सफर से सिनेमा तक! दिल्ली-मुंबई यात्रा में मनोज कुमार ने जन्म दी ‘उपकार’ की कहानी


नई दिल्ली।आज हम याद कर रहे हैं मनोज कुमार को, जिनकी पुण्यतिथि है। उन्हें देशभक्ति और किसान-जवान-कहानी कहने की अद्भुत क्षमता के लिए जाना जाता था। फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें ‘भारत कुमार’ के नाम से भी जाना गया।

बचपन से संघर्ष और अभिनय की राह

मनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई 1937 को ऐबटाबाद में हुआ था। असली नाम हरिकृष्ण गोस्वामी था। 1947 के बंटवारे के समय उनका परिवार दिल्ली आ गया और शरणार्थी कैंप में रहने लगा। बचपन से ही वे दिलीप कुमार के बड़े प्रशंसक थे और उनकी नकल किया करते थे। कॉलेज के दिनों में उन्होंने सिलाई मशीन का काम भी किया।

मुंबई की शुरुआत और पहले सफलता

अभिनय का सपना लेकर मनोज कुमार मुंबई पहुंचे। साल 1957 में फिल्म ‘फैशन’ से उन्होंने शुरुआत की। पांच साल बाद विजय भट्ट की ‘हरियाली और रास्ता’ से उन्हें पहली बड़ी सफलता मिली। 1965 में आई ‘हिमालय की गोद में’ ने उन्हें और मजबूती दी।

उसी साल उन्होंने भगत सिंह पर फिल्म ‘शहीद’ बनाने का फैसला किया। प्रेम चोपड़ा और गीतकार प्रेम धवन के साथ यह फिल्म भगत सिंह के जीवन पर सबसे प्रामाणिक मानी गई।

‘उपकार’ की रचना: दिल्ली से मुंबई की ट्रेन में

मनोज कुमार के करियर में दो पहलू थे रूमानी नायक और देशभक्ति से ओत-प्रोत ‘भारत कुमार’। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उनसे कहा था, “क्या मेरे नारे ‘जय जवान जय किसान’ पर फिल्म नहीं बन सकती?”

दिल्ली से मुंबई लौटते समय मनोज कुमार ने रजिस्टर और नए पेन खरीदे और ट्रेन की यात्रा में कहानी लिख डाली। दिल्ली से मुंबई पहुंचते-पहुंचते फिल्म ‘उपकार’ की पूरी कहानी तैयार हो गई।

गाने की पृष्ठभूमि: ‘मेरे देश की धरती सोना उगले’

‘उपकार’ के गानों में सबसे खास है ‘मेरे देश की धरती सोना उगले’। गीतकार गुलशन बावरा रेलवे में क्लर्क थे और पंजाब से आने वाली गेहूं की बोरियां उतारते समय उनकी डायरी में यह पंक्ति दर्ज हुई। बाद में मनोज कुमार ने इसे फिल्म में शामिल किया। महेंद्र कपूर की आवाज ने इस गीत को अमर बना दिया।

बाद की उपलब्धियां

1970 में मनोज कुमार ने ‘पूरब और पश्चिम’ बनाई, जो भारतीय परंपरा और पश्चिमी संस्कृति के टकराव पर आधारित थी। यह फिल्म भी खूब सराही गई।

मनोज कुमार ने देशभक्ति और आम आदमी की कहानियों को पर्दे पर जीवंत किया। ट्रेन में लिखी ‘उपकार’ की कहानी और ‘मेरे देश की धरती सोना उगले’ जैसे गाने आज भी उनके योगदान की याद दिलाते हैं।