Author: bharati

  • रीवा में बेकाबू बल्कर ने बस को मारी जोरदार टक्कर, पांच की मौत और 20 से अधिक घायल

    रीवा में बेकाबू बल्कर ने बस को मारी जोरदार टक्कर, पांच की मौत और 20 से अधिक घायल

    रीवा । मध्य प्रदेश के रीवा जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 39 पर बुधवार शाम तेज रफ्तार बल्कर ने यात्रियों से भरी बस को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई है, जबकि 20 से अधिक यात्री घायल हो गए, जिनमें तीन की हालत गंभीर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हादसे पर दुख व्यक्त कर मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता का ऐलान किया है।

    पुलिस के अनुसार, हादसा गुढ़ थाना क्षेत्र में बदवार बस स्टैंड के पास बुधवार शाम करीब 5 बजे हुआ। रीवा से सीधी जा रही पवन ट्रेवल्स की बस क्रमांक एमपी 19-पी 1501 को सीधी से रीवा की ओर आ रहे बल्कर (क्रमांक एनएल 01 एआई 9213) ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बल्कर पलट गया, जबकि बस सड़क किनारे गड्ढे में जा गिरी। हादसे के वक्त बस में करीब 30 यात्री सवार थे। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बस में फंसे यात्रियों और अन्य घायलों को बाहर निकाला गया।

    जानकारी मिलते ही रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी एवं पुलिस अधीक्षक गुरु करण सिंह मौके पर पहुंचे, साथ ही रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा एवं सीधी सांसद राजेश मिश्रा मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन ने खबर लिखे जाने तक हादसे में पांच लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि 20 से अधिक यात्रियों के घायल होने की जानकारी दी है। गंभीर घायलों को उपचार के लिए रीवा के संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि कुछ घायलों का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुढ़ में जारी है। घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है। इनमें एक 6 साल का मासूम बच्चा भी शामिल है।अस्पताल में चिकित्सकों की टीम घायलों के उपचार में जुटी हुई है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के समय बारिश हो रही थी। सड़क पर काफी फिसलन थी। बल्कर तेज रफ्तार में था। फिसलन के कारण ड्राइवर वाहन को कंट्रोल नहीं कर पाया और बस को टक्कर मार दी। घायल यात्री पुनीत शुक्ला (30) निवासी ग्राम बघोर (जिला सीधी) ने बताया कि बस में करीब 25 से 30 यात्री सवार थे। बल्कर अचानक अपनी साइड छोड़कर विपरीत दिशा में आ गया और बस को सामने से टक्कर मार दी। हादसे के बाद मौके पर पहुंचे प्रशासन और पुलिस की टीम ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घटना के बाद रीवा-सीधी मार्ग पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा। प्रशासन की टीमें मौके पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी रहीं।

    रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने बताया कि हादसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। हादसे के बाद एक तीन साल की एक बच्ची लापता है। उसकी मां हादसे में घायल हुई है और फिलहाल वह कुछ बताने की स्थिति में नहीं है। कलेक्टर के अनुसार, आशंका है कि बच्ची गड्ढे में दबी हो सकती है। गड्ढा ज्यादा गहरा नहीं है, लेकिन उसमें दलदल है। रेस्क्यू टीम बच्ची की तलाश में जुटी है। फिलहाल बच्ची के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के लापता होने की जानकारी नहीं है।

    इधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हादसे पर दुख जताया है और दिवंगतों की आत्मा को शांति एवं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स के माध्यम से मृतकों के परिजन को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इसके अलावा घायलों को 1-1 लाख रुपये देने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से घायलों के इलाज और राहत-बचाव कार्य की निगरानी की जा रही है।

    वहीं, पुलिस प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर बल्कर के विपरीत दिशा में आने की बात सामने आई है। हालांकि हादसे की पूरी परिस्थितियों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। बस के परमिट सहित वाहन से जुड़े अन्य दस्तावेज और बिंदुओं की भी प्रशासन द्वारा जांच की जा रही है। 
  • शिवपुरी में राशन की मांग पर बिफरे ज्योतिरादित्य सिंधिया; बोले- 'नेतागिरी नहीं चलेगी', फिर खुद को बताया परिवार का मुखिया

    शिवपुरी में राशन की मांग पर बिफरे ज्योतिरादित्य सिंधिया; बोले- 'नेतागिरी नहीं चलेगी', फिर खुद को बताया परिवार का मुखिया

    ​शिवपुरी। जिले की पिछोर तहसील अंतर्गत ग्राम राजपुर में आयोजित विकास कार्यों के शिलान्यास एवं लोकार्पण समारोह के दौरान उस समय असहज स्थिति बन गई, जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जनसमूह में मौजूद कुछ ग्रामीणों द्वारा राशन वितरण को लेकर की गई नारेबाजी पर उखड़ गए। हालांकि, स्थिति को भांपते हुए उन्होंने तत्काल अपने वक्तव्य को भावनात्मक मोड़ दिया और खुद को नेता के बजाय क्षेत्र का मुखिया बताया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है।
    ​राशन के मुद्दे पर नारेबाजी से बिगड़ा माहौल
    समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री सिंधिया जब मंच से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी और विकासात्मक परियोजनाओं का ब्यौरा दे रहे थे, तभी भीड़ में मौजूद कुछ ग्रामीणों ने राशन वितरण में आ रही दिक्कतों को लेकर आवाज उठाई और नारेबाजी शुरू कर दी। अचानक हुए इस विरोध से सिंधिया भाषण के बीच में ही नाराज हो गए। उन्होंने कड़े शब्दों में टोकते हुए कहा, “शांति बनाए रखिए… यहां नेतागिरी नहीं चलेगी। यदि नेतागिरी करनी है तो किसी नेता के पास जाइए।”
    ​नाराजगी के बाद तुरंत संभाला मंच
    मंच से दिखाई गई इस तल्खी के बाद सभा स्थल पर कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया। इसके तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री ने अपना रुख बदलते हुए संवाद को सहज बनाने की कोशिश की। उन्होंने मंच से कहा कि वे यहां किसी राजनेता की हैसियत से नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के एक अभिभावक और परिवार के मुखिया के नाते उपस्थित हैं, और हर नागरिक की समस्या का समाधान उनकी प्राथमिकता है।

    ​प्रीतम लोधी के बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल
    कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेता प्रीतम सिंह लोधी के एक बयान ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी। सभा को संबोधित करते हुए लोधी ने कहा कि महाराज (सिंधिया) की यह तो महज शुरुआत है, असली फिल्म एक साल बाद सामने आएगी। इस बयान के बाद स्थानीय राजनीतिक गलियारों में आगामी समीकरणों को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है।
    ​जनसभा में घटे इस घटनाक्रम और केंद्रीय मंत्री के तल्ख तेवरों की क्लिप अब इंटरनेट मीडिया पर जमकर साझा की जा रही है, जिस पर विभिन्न राजनीतिक दलों और आमजन की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

  • बारिश का मजा भी और सेहत की सुरक्षा भी, मानसून में खुद की देखभाल के लिए अपनाएं ये आसान और असरदार उपाय

    बारिश का मजा भी और सेहत की सुरक्षा भी, मानसून में खुद की देखभाल के लिए अपनाएं ये आसान और असरदार उपाय


    नई दिल्ली । बरसात का मौसम गर्मी से राहत लेकर आता है और हरियाली के साथ वातावरण को खुशनुमा बना देता है लेकिन इस मौसम में सेहत का खास ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी होता है। बारिश के दौरान हवा में नमी बढ़ जाती है और मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिलता है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी सर्दी खांसी बुखार पेट से जुड़ी परेशानी और त्वचा संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है। इसलिए मानसून का आनंद लेने के साथ साथ खुद की देखभाल पर ध्यान देना जरूरी है। सही खानपान साफ सफाई और रोजमर्रा की कुछ अच्छी आदतें अपनाकर इस मौसम में खुद को स्वस्थ और फिट रखा जा सकता है।

    बरसात के मौसम में सबसे पहले साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए क्योंकि जमा हुआ पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है। बारिश में बाहर से आने के बाद गीले कपड़ों को तुरंत बदल देना चाहिए और शरीर को अच्छी तरह सुखाना चाहिए। लंबे समय तक गीले कपड़े पहनने से त्वचा में खुजली और फंगल संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पैरों को भी साफ और सूखा रखना जरूरी है क्योंकि मानसून में पैरों में संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है। बाहर से आने के बाद हाथ और पैरों को अच्छी तरह धोने की आदत स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है।

    इस मौसम में खानपान का भी विशेष महत्व होता है। बाहर का खुला और लंबे समय से रखा हुआ खाना खाने से बचना चाहिए। बारिश के दिनों में ताजा और घर का बना भोजन ज्यादा सुरक्षित विकल्प माना जाता है। भोजन में फल सब्जियां दाल और अन्य पौष्टिक चीजों को शामिल करना चाहिए ताकि शरीर को जरूरी पोषण मिल सके। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है क्योंकि कई लोग ठंडे मौसम में पानी कम पीने लगते हैं। शरीर को हाइड्रेट रखना सेहत के लिए हर मौसम में जरूरी है। पीने के पानी और खाने की स्वच्छता का ध्यान रखना भी इस मौसम में महत्वपूर्ण होता है।

    मानसून में त्वचा की देखभाल को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बढ़ी हुई नमी के कारण त्वचा चिपचिपी हो सकती है और कुछ लोगों को पिंपल्स या रैशेज की परेशानी हो सकती है। इसलिए चेहरे और शरीर को साफ रखना जरूरी है। त्वचा पर बहुत ज्यादा भारी उत्पादों का इस्तेमाल करने के बजाय अपनी स्किन टाइप के अनुसार हल्के और उपयुक्त उत्पादों का चयन किया जा सकता है। किसी भी नई स्किन प्रोडक्ट से एलर्जी या जलन महसूस होने पर उसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

    बरसात के दिनों में पर्याप्त नींद और आराम भी जरूरी है। मौसम में बदलाव के कारण शरीर थका हुआ महसूस कर सकता है इसलिए रोजाना पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करनी चाहिए। हल्की एक्सरसाइज योग या घर पर स्ट्रेचिंग जैसी गतिविधियां शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकती हैं। अगर बाहर बारिश हो रही हो तो घर के अंदर ही कुछ समय शारीरिक गतिविधि के लिए निकालना बेहतर हो सकता है। मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना भी सेल्फ केयर का महत्वपूर्ण हिस्सा है इसलिए अपनी पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना चाहिए।

    बारिश में भीगने का आनंद लेना गलत नहीं है लेकिन लंबे समय तक गीले रहने से बचना चाहिए। अगर बारिश में भीग जाएं तो घर पहुंचकर जल्द से जल्द सूखे कपड़े पहनें और शरीर को गर्म और आरामदायक रखें। किसी भी तरह के लगातार बुखार तेज कमजोरी सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। मानसून में छोटी छोटी सावधानियां अपनाकर न केवल बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है बल्कि पूरे मौसम का आनंद भी बेहतर तरीके से लिया जा सकता है। साफ सफाई पौष्टिक भोजन पर्याप्त पानी अच्छी नींद और सक्रिय दिनचर्या ही बरसात के मौसम में खुद की बेहतर देखभाल का सबसे आसान तरीका है।

  • मंदाकिनी फिर उफान पर, खतरे के निशान से 4.5 मीटर ऊपर पहुंचा पानी, रामघाट जलमग्न

    मंदाकिनी फिर उफान पर, खतरे के निशान से 4.5 मीटर ऊपर पहुंचा पानी, रामघाट जलमग्न

    चित्रकूट। मध्य प्रदेश और पहाड़ी इलाकों में हुई तेज बारिश के बाद मंदाकिनी नदी एक बार फिर उफान पर आ गई। मंगलवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान 126.50 मीटर को पार कर करीब 4.5 मीटर ऊपर पहुंच गया। इसके चलते रामघाट सहित आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी फिर भर गया। घाट किनारे बनी दुकानें, मकान, आश्रम और होटल जलमग्न हो गए। रामघाट से कामतानाथ, आरोग्यधाम और जानकीकुंड जाने वाली सड़कें भी पानी में डूब गईं, जिससे इन मार्गों पर नाव चलानी पड़ी।

    कुछ घंटों में बिगड़े हालात, फिर डूबीं दुकानें
    मंगलवार सुबह करीब 4 बजे मंदाकिनी का जलस्तर 126.40 मीटर था, जो खतरे के निशान से सिर्फ 10 सेंटीमीटर नीचे था। इसके बाद मध्य प्रदेश और चित्रकूट क्षेत्र में रातभर हुई तेज बारिश के कारण नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और कुछ ही घंटों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई।

    रामघाट में दोबारा पानी भरने से दुकानदारों की परेशानी बढ़ गई। एक दिन पहले ही की गई साफ-सफाई भी बाढ़ के पानी में बह गई। घरों और दुकानों में पानी घुसने के बाद कई लोग ऊपरी मंजिलों पर चले गए। होटल और आश्रमों में ठहरे लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़कें जलमग्न होने से लोगों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया।

    भरत मंदिर में पुजारी समेत 15 लोग फंसे
    रामघाट स्थित भरत मंदिर में पुजारी श्यामजी पांडेय समेत करीब 15 लोग पानी के बीच फंसे हुए हैं। पुजारी के मुताबिक मंदिर के सभी कमरे पानी में डूब गए हैं और वहां रखा राशन भी खराब हो गया है। उनका कहना है कि अब तक मदद के लिए कोई नहीं पहुंचा है।

    डीएम पुलकित गर्ग ने बताया कि तेज बारिश के कारण मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ा है। प्रशासन की ओर से लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई थी। कई लोगों के लिए रैन बसेरों में ठहरने और भोजन-पानी की व्यवस्था की गई है। डीएम ने कहा कि किसी भी मंदिर में पुजारी या अन्य लोग रुके हैं तो उन्हें भी सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा।

    29 अगस्त की बाढ़ में 563 घर क्षतिग्रस्त
    चित्रकूट में 29 अगस्त को आई बाढ़ को अब तक की सबसे बड़ी बाढ़ बताया गया था। इस दौरान करीब 563 घरों के क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट सामने आई है। टीमें लगातार नुकसान का आकलन कर रही हैं। मंगलवार सुबह फिर आई बाढ़ से रामघाट, तरौंहा सहित कई गांव प्रभावित हुए हैं। प्रशासन अब तक 700 से अधिक राशन किट बांट चुका है।

    कानपुर और आसपास के जिलों में 4 मौतें
    लगातार बारिश के बीच पिछले 24 घंटे में कानपुर और आसपास के जिलों में कच्चे मकान और दीवार गिरने की घटनाओं में चार लोगों की मौत हो गई। कई लोग घायल भी हुए हैं।

    कानपुर के महाराजपुर में मंगलवार सुबह कच्चा मकान गिरने से मलबे में दबकर शकुंतला विश्वकर्मा (56) की मौत हो गई। हरदोई के बेनीगंज में सोमवार रात कच्ची दीवार गिरने से हरिपाल (72) की जान चली गई। लोनार में कच्ची कोठरी ढहने से दंपती समेत चार लोग घायल हुए हैं।

    बांदा के मरका क्षेत्र में सोमवार को कच्चे मकान की दीवार गिरने से हिमांशु (7) की मौत हो गई। वहीं कानपुर देहात के शिवली में मंगलवार सुबह कच्चा घर ढहने से सात माह की मासूम शानवी की मौत हो गई। हादसे में बुजुर्ग दंपती समेत चार लोग घायल हुए हैं।

  • कानपुर में BSF परीक्षा में बवाल: सिस्टम बंद, बिना चेकिंग एंट्री और पेपर लीक का आरोप, एग्जाम रद्द

    कानपुर में BSF परीक्षा में बवाल: सिस्टम बंद, बिना चेकिंग एंट्री और पेपर लीक का आरोप, एग्जाम रद्द

    कानपुर। कानपुर के चकेरी थाना क्षेत्र के श्याम नगर स्थित एमडी इन्फोटेक परीक्षा केंद्र पर बुधवार को आयोजित BSF कांस्टेबल (मिनिस्ट्रियल) की परीक्षा हंगामे और बवाल की भेंट चढ़ गई। तकनीकी खामियों, बिना चेकिंग परीक्षार्थियों को प्रवेश देने और पेपर लीक होने के आरोपों के बाद परीक्षार्थियों ने केंद्र पर जमकर हंगामा किया और तोड़फोड़ की। करीब चार घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद प्रशासन और BSF अधिकारियों के हस्तक्षेप से परीक्षा रद्द कर दी गई। अब यह परीक्षा 18 सितंबर को आयोजित की जाएगी।

    40 मिनट तक बंद रहे सिस्टम, कीबोर्ड-माउस ने भी दिया जवाब
    परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थियों का आरोप था कि पहली पाली शुरू होते ही करीब 40 मिनट तक कंप्यूटर सिस्टम बंद रहे। सिस्टम चालू होने के बाद भी कई कंप्यूटरों में कीबोर्ड और माउस काम नहीं कर रहे थे, जबकि केवल CPU चालू था। परीक्षार्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि परीक्षा हॉल में बिजली की समस्या के कारण लाइट और पंखे तक नहीं चल रहे थे। बारिश और उमस के बीच जब छात्रों ने इन समस्याओं को लेकर शिकायत की तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

    मुंबई से आई छात्रा ने लगाया बिना चेकिंग प्रवेश का आरोप
    मुंबई से परीक्षा देने पहुंची छात्रा शालिनी बागुन ने आरोप लगाया कि परीक्षा केंद्र पर परीक्षार्थियों को बिना किसी चेकिंग के सीधे अंदर प्रवेश दिया गया था। तकनीकी समस्याओं और बिजली कटौती के बीच छात्रों का गुस्सा बढ़ता गया। इसके बाद आक्रोशित परीक्षार्थियों ने परीक्षा केंद्र के सिस्टम में तोड़फोड़ शुरू कर दी।

    मौके पर भारी पुलिस फोर्स तैनात
    हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। एडीसीपी पूर्वी शिवा सिंह, एसीपी चकेरी आशुतोष कुमार सिंह के साथ चकेरी, कैंट, जाजमऊ, नौबस्ता और रेलबाजार थानों की पुलिस फोर्स को भी मौके पर तैनात किया गया। प्रदर्शन कर रहे परीक्षार्थियों की मांग थी कि जब तक BSF के आधिकारिक पोर्टल पर अगली परीक्षा की तारीख जारी नहीं होती, तब तक वे प्रदर्शन खत्म नहीं करेंगे।

    ADG BSF से बात के बाद रद्द हुई परीक्षा
    बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने तत्काल ADG BSF मकरंद देवेशकर से संपर्क किया। इसके बाद परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया और अगली परीक्षा की तारीख 18 सितंबर तय की गई।

    ACM बोलीं- ऐसे सेंटरों को ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए
    मौके पर पहुंचीं ACM-2 कैंट शिखा शुक्ला ने स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की लापरवाही करने वाले परीक्षा केंद्रों को पूरी तरह ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में जिलाधिकारी को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने की बात कही।

    उल्लेखनीय है कि राजस्थान और जयपुर के परीक्षा केंद्रों पर भी इसी तरह की गड़बड़ियों की खबरें सामने आई हैं। फिलहाल कानपुर में पेपर लीक के आरोपों समेत परीक्षा केंद्र पर हुई अव्यवस्थाओं की जांच को लेकर भी निगाहें टिकी हैं।

  • UP के 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात, सैलरी में 7 हजार रुपए तक बढ़ोतरी, बीमा कवर भी

    UP के 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात, सैलरी में 7 हजार रुपए तक बढ़ोतरी, बीमा कवर भी

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश के करीब साढ़े तीन लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी है। सरकार ने उनकी सैलरी में 7 हजार रुपए तक की बढ़ोतरी की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकोस) की वेबसाइट और लोगो लॉन्च किया। इस दौरान आउटसोर्स कर्मचारियों को चेक भी वितरित किए गए। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे।

    सरकार के मुताबिक, आउटसोर्स कर्मचारियों को 50 लाख रुपए तक का बीमा कवर दिया जाएगा। इसके अलावा आकस्मिक दवा के लिए 5 लाख रुपए और एयर एंबुलेंस के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता का प्रावधान किया गया है।

    एक ही पोर्टल पर होगा सभी आउटसोर्स कर्मचारियों का रिकॉर्ड
    यूपीकोस के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग सरकारी विभागों में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों का एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। अभी कर्मचारियों से संबंधित जानकारी अलग-अलग विभागों और आउटसोर्स एजेंसियों के स्तर पर रखी जाती है। नई व्यवस्था में इन सभी रिकॉर्ड को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इससे कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध हो सकेगी।

    भर्ती से लेकर भुगतान तक की जानकारी पोर्टल पर दर्ज होगी
    यूपीकोस के पोर्टल पर कर्मचारी की भर्ती, तैनाती, उपस्थिति और भुगतान से संबंधित जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि किस विभाग में कितने आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं और उन्हें कितना भुगतान किया जा रहा है। कर्मचारियों की सेवा से संबंधित रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा। जरूरत पड़ने पर किसी कर्मचारी की तैनाती, भुगतान या सेवा रिकॉर्ड की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म से देखी जा सकेगी।

    एजेंसियों की प्रक्रिया पर भी होगी निगरानी
    नई व्यवस्था लागू होने के बाद आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, तैनाती और भुगतान की प्रक्रिया पर निगरानी आसान होने की उम्मीद है। अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से होने वाली प्रक्रिया में रिकॉर्ड और भुगतान से जुड़ी गड़बड़ियों की गुंजाइश कम करने में भी मदद मिलेगी। प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में कर्मचारी आउटसोर्स के माध्यम से काम कर रहे हैं। नई व्यवस्था का सीधा असर इन कर्मचारियों की भर्ती, सेवा शर्तों और भुगतान व्यवस्था से जुड़े प्रबंधन पर पड़ेगा।

  • बुलंदशहर के शिकारपुर विधायक अनिल शर्मा का निधन, दिल्ली के अस्पताल में ली अंतिम सांस

    बुलंदशहर के शिकारपुर विधायक अनिल शर्मा का निधन, दिल्ली के अस्पताल में ली अंतिम सांस

    बुलंदशहर। शिकारपुर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक और पूर्व राज्यमंत्री अनिल शर्मा का बुधवार को दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और कैंसर का इलाज करा रहे थे। उनके निधन की खबर से बुलंदशहर जिले और शिकारपुर क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। अनिल शर्मा योगी सरकार में वन राज्य मंत्री भी रह चुके थे। इलाज के दौरान दिल्ली के अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।

    कम उम्र में निर्विरोध ग्राम प्रधान चुने गए थे
    अनिल शर्मा बुलंदशहर के शिकारपुर विधानसभा क्षेत्र के सुरजावली गांव के रहने वाले थे। उन्होंने कम उम्र में ही राजनीति में कदम रखा और ग्राम सुरजावली के निर्विरोध प्रधान चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में आगे बढ़ते हुए विधानसभा चुनाव लड़ा।

    2002 में पहली बार बने विधायक
    अनिल शर्मा ने वर्ष 2002 में खुर्जा विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। इसके बाद 2007 में भी उन्होंने खुर्जा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और लगातार दूसरी बार विधायक बने। वर्ष 2012 में उन्होंने शिकारपुर विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया।

    2017 में भाजपा के टिकट पर जीते, योगी सरकार में बने मंत्री
    भाजपा में शामिल होने के बाद अनिल शर्मा ने वर्ष 2017 में शिकारपुर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके बाद उन्हें प्रदेश की योगी सरकार में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी गई। वर्ष 2022 में भी उन्होंने भाजपा के टिकट पर शिकारपुर सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इस तरह वह शिकारपुर से भाजपा विधायक के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा कर रहे थे। अनिल शर्मा के निधन से भाजपा कार्यकर्ताओं, समर्थकों और क्षेत्र के लोगों में शोक की लहर है।

  • अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक, 3 नए सदस्य बनाए गए, CEO के नाम पर मंथन जारी

    अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक, 3 नए सदस्य बनाए गए, CEO के नाम पर मंथन जारी

    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक अयोध्या की मणिरामदास छावनी में चल रही है। बैठक में ट्रस्ट के लिए तीन नए सदस्यों की घोषणा की गई है। इनमें अयोध्या के मदन मोहन पांडेय, दिल्ली के महेश भागचंदका और अयोध्या की निर्मला यादव शामिल हैं। बैठक में अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि, ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास, शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती सहित अन्य ट्रस्टी मौजूद हैं।

    राम मंदिर के पहले CEO के नाम पर अंतिम मंथन
    बैठक का सबसे अहम एजेंडा राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) की नियुक्ति है। CEO के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप चुकी है। बताया जा रहा है कि कमेटी ने तीन नामों का पैनल ट्रस्ट के सामने रखा है। अब ट्रस्ट इन नामों पर चर्चा कर अंतिम नाम तय कर सकता है। बैठक के दूसरे चरण में ट्रस्ट से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श होगा।

    पूर्व IPS राजेश पांडेय की दावेदारी सबसे मजबूत बताई जा रही
    CEO पद की चर्चा में पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। उनकी दावेदारी की खास वजह सिर्फ पुलिस और प्रशासनिक अनुभव नहीं है। वह लखनऊ के अलीगंज स्थित ऐतिहासिक हनुमान मंदिर ट्रस्ट के सचिव भी हैं। इस वजह से उन्हें मंदिर प्रशासन और धार्मिक संस्थान के प्रबंधन का प्रत्यक्ष अनुभव भी हासिल है। राम मंदिर CEO के लिए यह अनुभव उनकी प्रोफाइल को अलग महत्व देता है।

    CEO के सामने होंगी कई बड़ी जिम्मेदारियां
    राम मंदिर CEO की भूमिका केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं होगी। अयोध्या में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या के बीच सुरक्षा व्यवस्था, विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय, VIP और आम श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं तथा मंदिर से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स का प्रबंधन जैसी जिम्मेदारियां भी CEO के सामने रहेंगी।

    इसी वजह से सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की जटिलताओं का अनुभव रखने वाले राजेश पांडेय की दावेदारी को खास माना जा रहा है। हालांकि अंतिम फैसला ट्रस्ट को ही करना है।

    बैठक में ये प्रमुख ट्रस्टी और आमंत्रित सदस्य मौजूद
    1. महंत नृत्य गोपाल दास
    2. कमलनयन दास
    3. स्वामी गोविंद देव गिरी
    4. डॉ. कृष्ण मोहन
    5. दिनेंद्र दास जी महाराज
    6. दिनेश चंद्र जी
    7. बजरंग बांगड़ा
    8. जगदीश आफले
    9. राज गोपाल मिनियार
    10. समीर पांडा

    ट्रस्ट डीड और नियमावली में संशोधन पर भी चर्चा
    CEO की नियुक्ति के अलावा ट्रस्ट की डीड और न्यास नियमावली में संशोधन सहित कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बैठक में चर्चा होने की संभावना है। बैठक दोपहर 3 बजे ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में होनी है। अधिकांश ट्रस्टी अयोध्या पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ सदस्य ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल होंगे।

    बैठक से पहले ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि और अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन ने रामलला के दरबार में पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। दोनों ने मंदिर की मौजूदा व्यवस्थाओं का जायजा लेने के बाद बैठक की तैयारियों में हिस्सा लिया।

    चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र की वापसी पर भी नजर
    बैठक में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र को लेकर भी निर्णय अहम माना जा रहा है। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद दोनों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया था। हालांकि पिछले कुछ समय में दोनों की सामाजिक गतिविधियां बढ़ी हैं।

    ऐसे में ट्रस्ट में उनकी संभावित वापसी को लेकर अटकलें भी तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच की मौजूदा स्थिति में चंपत राय को लेकर राहत की बात सामने आने के बाद उनके दोबारा ट्रस्ट से जुड़ने की संभावना पर चर्चा हो सकती है। डॉ. अनिल मिश्र को लेकर ट्रस्ट क्या फैसला करता है, इस पर भी नजर रहेगी। अंतिम तस्वीर बैठक के बाद ही साफ होगी।

    संघ और VHP पदाधिकारियों के अयोध्या पहुंचने से बढ़ी हलचल
    बैठक से पहले संघ और विश्व हिंदू परिषद के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के भी अयोध्या पहुंचने की सूचना है। VHP महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा, संरक्षक दिनेश चंद्र और संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल सिंह के अयोध्या पहुंचने की जानकारी है। संघ और VHP पदाधिकारियों ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि से मुलाकात भी की। बंद कमरे में हुई इस बैठक के बाद ट्रस्ट की अहम बैठक को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

  • AI की बढ़ती ताकत से डेटा सेंटर सेक्टर में बड़ा धमाका, 2029 तक भारत में 110 अरब डॉलर के निवेश का अनुमान

    AI की बढ़ती ताकत से डेटा सेंटर सेक्टर में बड़ा धमाका, 2029 तक भारत में 110 अरब डॉलर के निवेश का अनुमान


    नई दिल्ली। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड टेक्नोलॉजी की तेजी से बढ़ती मांग अब डेटा सेंटर उद्योग को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी कर रही है। देश की डेटा सेंटर क्षमता जून 2026 में करीब 1.6 गीगावाट है और इसके 2029 तक बढ़कर 6 गीगावाट पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। इस विशाल विस्तार के लिए करीब 110 अरब डॉलर की पूंजी की जरूरत होगी। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में एआई वर्कलोड और हाइपरस्केल क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती तैनाती डेटा सेंटर सेक्टर के इस तेज विस्तार की सबसे बड़ी वजह बनने जा रही है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 की पहली छमाही में देश के डेटा सेंटर बाजार में 101 मेगावाट की मांग दर्ज की गई। यह आंकड़ा पिछले तीन वर्षों की पहली छमाही के औसत की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक है। इससे साफ है कि डिजिटल सेवाओं और एआई आधारित तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ कंपनियों को बड़े स्तर पर डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग क्षमता की जरूरत पड़ रही है। इसी दौरान डेटा सेंटर की आपूर्ति में भी तेजी देखी गई और करीब 85 मेगावाट नई क्षमता जोड़ी गई।

    नई क्षमता का बड़ा हिस्सा मुंबई और चेन्नई जैसे प्रमुख बाजारों में केंद्रित रहा। हालांकि पहले से बुक की जा चुकी क्षमता को तेजी से उपलब्ध कराए जाने के कारण बाजार में खाली डेटा सेंटर क्षमता घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर 2.8 प्रतिशत पर पहुंच गई। इतनी कम रिक्त क्षमता इस बात का संकेत है कि डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग तेजी से बढ़ रही है और कंपनियां भविष्य की जरूरतों को देखते हुए पहले से ही बड़ी क्षमता सुरक्षित करने में जुटी हुई हैं।

    वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियां भी भारत के डेटा सेंटर बाजार की तस्वीर बदल रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार ये कंपनियां नई क्षमता का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा अपनी सेल्फ बिल्ड सुविधाओं के माध्यम से विकसित करने की तैयारी कर रही हैं। अनुमान है कि केवल हाइपरस्केल सेल्फ बिल्ड परियोजनाओं से ही 2029 तक करीब 1.4 गीगावाट क्षमता उपलब्ध हो सकती है। इससे भारत के तकनीकी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    बड़े निवेश के कारण हैदराबाद और विशाखापत्तनम जैसे शहर तेजी से गीगावाट स्तर के डेटा सेंटर हब के रूप में उभर सकते हैं। वहीं मुंबई और चेन्नई जैसे पहले से स्थापित बाजार भी अपनी क्षमता का तेजी से विस्तार कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में देश के कई शहर वैश्विक क्लाउड और एआई सेवाओं के महत्वपूर्ण केंद्र बन सकते हैं।

    डेटा सेंटर उद्योग को सरकारी नीतियों से भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। हालिया केंद्रीय बजट में विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए 20 साल की टैक्स हॉलिडे की घोषणा की गई है जिसे 31 मार्च 2047 तक बढ़ाया गया है। इस नीति से 50 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी निवेश प्रतिबद्धताएं सामने आने की बात कही गई है। इससे भारत को वैश्विक एआई और क्लाउड सेवाओं के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिल सकती है।

    रिपोर्ट के अनुसार 2029 तक डेटा सेंटर विस्तार के लिए रियल एस्टेट निर्माण पर करीब 4 अरब डॉलर मैकेनिकल इलेक्ट्रिकल और प्लंबिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर 18 अरब डॉलर तथा सर्वर और रैक जैसे आईटी उपकरणों पर करीब 88 अरब डॉलर खर्च होने का अनुमान है। भविष्य में बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर भी एक अहम विकल्प बन सकते हैं। 2033 तक इन तकनीकों के विकसित होने से बड़े डेटा सेंटर परिसरों को ऑफ ग्रिड बिजली उपलब्ध कराने की संभावनाएं पैदा हो सकती हैं। कुल मिलाकर एआई की बढ़ती ताकत और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ भारत का डेटा सेंटर सेक्टर आने वाले वर्षों में तकनीकी विकास और बड़े निवेश का नया केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है।

  • जुबीन गर्ग मौत केस में नई कड़ी: घटना वाली यॉट के चश्मदीद सदस्य की कोर्ट में पेशी, बयान से जांच को मिल सकती है दिशा

    जुबीन गर्ग मौत केस में नई कड़ी: घटना वाली यॉट के चश्मदीद सदस्य की कोर्ट में पेशी, बयान से जांच को मिल सकती है दिशा


    नई दिल्ली। जुबीन गर्ग की मौत के मामले में अब एक अहम मोड़ सामने आया है। सितंबर 2025 में सिंगापुर में जिस यॉट पर मशहूर सिंगर और म्यूजिशियन जुुबीन गर्ग मौजूद थे और जहां से जुड़ी परिस्थितियों के बाद उनकी मौत हुई थी उस यॉट पर मौजूद रहे एक महत्वपूर्ण गवाह ने अब कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया है। सिंगापुर में असम एसोसिएशन से जुड़े परीक्षित शर्मा बुधवार को गुवाहाटी की स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में पेश हुए। उनकी गवाही को इस मामले की सुनवाई में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह उन लोगों में शामिल थे जो घटना के समय उसी यॉट पर मौजूद थे।

    52 वर्षीय जुबीन गर्ग की 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में मौत हो गई थी। वह नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के चौथे आयोजन में हिस्सा लेने के लिए सिंगापुर पहुंचे थे। इसी दौरान वह लाजरस आइलैंड के पास एक यॉट पर गए थे। जानकारी के मुताबिक जुबीन गर्ग समुद्र में तैरने के लिए यॉट से नीचे उतरे थे लेकिन इसके बाद उनकी डूबने से मौत हो गई। इस घटना की खबर सामने आने के बाद असम समेत देशभर में उनके प्रशंसकों के बीच गहरा दुख देखने को मिला था। मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल भी उठे जिसके बाद मामले की गहन जांच शुरू की गई।

    जुबीन गर्ग की मौत को लेकर असम में कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए और पुलिस में बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज कराई गईं। इसके बाद असम पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की। राज्य में दर्ज 60 से अधिक एफआईआर को बाद में एक साथ जोड़कर सीआईडी को सौंप दिया गया ताकि पूरे मामले की एकीकृत तरीके से जांच की जा सके।

    जांच के बाद एसआईटी ने दिसंबर 2025 में कोर्ट के सामने चार्जशीट पेश की। इस मामले में कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के आयोजक श्यामकानु महंत जुबीन गर्ग के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा उनके बैंड से जुड़े शेखर ज्योति गोस्वामी और सिंगर अमृतप्रभा महंत शामिल हैं जिन पर हत्या सहित गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा जुबीन गर्ग के कजिन संदीपन गर्ग तथा उनके निजी सुरक्षा कर्मी नंदेश्वर बोरा और प्रबीन बैश्य को भी आरोपी बनाया गया है। हालांकि इन सभी आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत को करना है और मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

    मामले की सुनवाई तेजी से पूरी करने के उद्देश्य से गुवाहाटी हाईकोर्ट ने मार्च 2026 में एक विशेष फास्ट ट्रैक सेशन कोर्ट का गठन किया था। इसके बाद मई में सभी सात आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए और मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ी। गवाहों के बयान दर्ज करने का सिलसिला 8 जून से शुरू हुआ था। 14 अगस्त तक अभियोजन पक्ष सूचीबद्ध 394 गवाहों में से 94 के बयान दर्ज करा चुका था। अब सिंगापुर से जुड़े गवाहों की गवाही को भी जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इसी क्रम में परीक्षित शर्मा का कोर्ट पहुंचना मामले की एक नई और अहम कड़ी माना जा रहा है। क्योंकि वह उस यॉट पर मौजूद थे जहां जुबीन गर्ग अपने अंतिम समय में मौजूद थे। ऐसे में उनके बयान से घटना के दौरान मौजूद परिस्थितियों और वहां के घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है।

    उधर सिंगापुर की कोरोनर कोर्ट इस साल मार्च में जुबीन गर्ग की मौत को डूबने से हुई मौत बता चुकी है। वहां की जांच में किसी साजिश या बाहरी हस्तक्षेप के ठोस सबूत नहीं मिले थे और फाउल प्ले की संभावना को खारिज कर दिया गया था। हालांकि भारत में चल रही न्यायिक प्रक्रिया उन आरोपों और परिस्थितियों की जांच से जुड़ी है जो जुबीन गर्ग की मौत के बाद सामने आई थीं। सुप्रीम कोर्ट भी मामले की सुनवाई को जल्द पूरा करने पर जोर दे चुका है। ऐसे में यॉट पर मौजूद रहे अहम गवाह परीक्षित शर्मा की गवाही को अब इस बहुचर्चित मामले की आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।