Author: bharati

  • HDFC बैंक की पहली तिमाही शानदार, डिपॉजिट और लोन में दोहरे अंक की बढ़ोतरी, कारोबार ने पकड़ी मजबूत रफ्तार

    HDFC बैंक की पहली तिमाही शानदार, डिपॉजिट और लोन में दोहरे अंक की बढ़ोतरी, कारोबार ने पकड़ी मजबूत रफ्तार

    नई दिल्ली । देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंकों में शामिल एचडीएफसी बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत कारोबारी प्रदर्शन दर्ज किया है। अप्रैल से जून 2026 की अवधि के दौरान बैंक ने जमा राशि और कर्ज वितरण दोनों में दोहरे अंक की वृद्धि हासिल की। बैंक की ओर से जारी तिमाही कारोबारी अपडेट के अनुसार विभिन्न प्रमुख वित्तीय संकेतकों में लगातार मजबूती देखने को मिली है, जो बैंक के विस्तार और ग्राहक आधार में बढ़ोतरी का संकेत देती है।

    बैंक के आंकड़ों के अनुसार 30 जून 2026 तक कुल जमा राशि बढ़कर 31.70 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 14.7 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान टर्म डिपॉजिट में सबसे अधिक मजबूती देखने को मिली और यह 17 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वृद्धि के साथ 21.45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं करंट अकाउंट और सेविंग अकाउंट (CASA) जमा भी लगभग 9 प्रतिशत बढ़कर 10.25 लाख करोड़ रुपये हो गया।

    कर्ज वितरण के मोर्चे पर भी बैंक का प्रदर्शन मजबूत रहा। पहली तिमाही के अंत तक कुल ग्रॉस एडवांस 30.61 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो एक वर्ष पहले की तुलना में 15.4 प्रतिशत अधिक है। इससे स्पष्ट होता है कि खुदरा और कॉरपोरेट दोनों वर्गों में ऋण की मांग बनी हुई है तथा बैंक ने अपने ऋण पोर्टफोलियो का लगातार विस्तार किया है।

    बैंक के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। जून तिमाही के अंत तक यह आंकड़ा 31.27 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 12.4 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि जमा और ऋण दोनों में संतुलित वृद्धि बैंक की वित्तीय स्थिति को और मजबूत बनाती है तथा भविष्य की विकास संभावनाओं को भी बेहतर करती है।

    हालांकि मजबूत कारोबारी प्रदर्शन के बीच बैंक हाल के महीनों में कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े घटनाक्रमों को लेकर भी चर्चा में रहा है। इस वर्ष बैंक के तत्कालीन पार्ट-टाइम चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद अंतरिम व्यवस्था के तहत नेतृत्व में बदलाव किया गया और बाद में केंद्र सरकार के पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए बैंक का नया पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया गया।

    इसी अवधि में बैंक के शीर्ष प्रबंधन और गवर्नेंस प्रक्रियाओं को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर चर्चा हुई, लेकिन बैंक ने अपने नियमित कारोबारी संचालन को प्रभावित नहीं होने दिया। पहली तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि बैंक की मुख्य बैंकिंग गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और ग्राहकों का भरोसा कायम है।

    शेयर बाजार में भी बैंक के शेयर ने सकारात्मक प्रदर्शन दर्ज किया। सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में एचडीएफसी बैंक का शेयर बढ़त के साथ बंद हुआ। हालांकि पिछले छह महीनों में इसमें सीमित गिरावट देखने को मिली, लेकिन बीते एक वर्ष के दौरान शेयर ने उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत कारोबारी वृद्धि और स्थिर वित्तीय प्रदर्शन आने वाले समय में बैंक की संभावनाओं को और मजबूती प्रदान कर सकते हैं।

  • बिहार में अपराध पर सख्ती की बड़ी तैयारी, 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट से तेज होगी सुनवाई और समयबद्ध मिलेगा न्याय

    बिहार में अपराध पर सख्ती की बड़ी तैयारी, 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट से तेज होगी सुनवाई और समयबद्ध मिलेगा न्याय

    नई दिल्ली ।  बिहार सरकार ने अपराध नियंत्रण और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार जल्द ही 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू करेगी, ताकि गंभीर आपराधिक मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जा सके। सरकार का मानना है कि इस पहल से लंबित मामलों की संख्या घटेगी, न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि राज्य में अपराध से जुड़े मामलों के शीघ्र निष्पादन और प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य न्याय मिलने में होने वाली देरी को कम करना तथा अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है। सरकार का विश्वास है कि समय पर न्याय मिलने से आम लोगों का न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत होगा।

    राज्य सरकार के अनुसार इन विशेष अदालतों के माध्यम से हत्या, लूट, दुष्कर्म, अपहरण और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता दी जाएगी। लंबे समय से लंबित मामलों का तेजी से निपटारा होने पर अदालतों पर बढ़ता बोझ भी कम होगा और पीड़ित पक्ष को अपेक्षाकृत कम समय में न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी। इससे न्यायिक प्रणाली की कार्यक्षमता में भी सुधार आने की उम्मीद है।

    सरकार का मानना है कि अपराधियों के खिलाफ त्वरित फैसले और समयबद्ध सजा कानून के प्रति सम्मान और भय दोनों को मजबूत करेंगे। न्याय मिलने में होने वाली अनावश्यक देरी अक्सर पीड़ितों और गवाहों के लिए चुनौती बनती है। ऐसे में फास्ट ट्रैक कोर्ट व्यवस्था न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    बिहार सरकार का कहना है कि न्यायिक सुधार केवल अदालतों की कार्यप्रणाली तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध राज्य की कानून-व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा से भी है। यदि गंभीर अपराधों का त्वरित निपटारा होगा तो अपराध करने वालों के बीच स्पष्ट संदेश जाएगा कि कानून का उल्लंघन करने पर शीघ्र कार्रवाई और सजा निश्चित है। इससे अपराध की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने में सहायता मिलने की संभावना है।

    विशेषज्ञों का भी मानना है कि फास्ट ट्रैक अदालतें तभी अधिक प्रभावी साबित होंगी, जब इनके साथ पर्याप्त न्यायिक अधिकारी, अभियोजन तंत्र, पुलिस जांच और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए। समयबद्ध सुनवाई के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक होगा, ताकि मामलों के निस्तारण की गति बनी रहे और प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से आगे बढ़ सके।

    सरकार का उद्देश्य न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ, तेज और भरोसेमंद बनाना है। 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि यह योजना निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप लागू होती है तो इससे न केवल लंबित आपराधिक मामलों के निपटारे में तेजी आएगी, बल्कि राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और नागरिकों में सुरक्षा की भावना बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।

  • 1.78 लाख करोड़ के रक्षा उत्पादन और रिकॉर्ड निर्यात का दावा, राजनाथ सिंह बोले- आत्मनिर्भर भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा देश

    1.78 लाख करोड़ के रक्षा उत्पादन और रिकॉर्ड निर्यात का दावा, राजनाथ सिंह बोले- आत्मनिर्भर भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा देश

    नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत का रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। उनके अनुसार यह उपलब्धि देश की बढ़ती विनिर्माण क्षमता, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान पर वैश्विक विश्वास का मजबूत संकेत है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में रक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों का सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में देश का वार्षिक रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा वर्ष 2014-15 की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है। वहीं रक्षा निर्यात भी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और यह बढ़कर 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उनके अनुसार यह वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि भारतीय रक्षा उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को अंतरराष्ट्रीय बाजार में व्यापक स्वीकार्यता मिल रही है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार की नीतियों ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों को रक्षा विनिर्माण में निवेश और नवाचार के लिए प्रोत्साहित किया है। इससे देश में आधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण की क्षमता विकसित हुई है और निर्यात के नए अवसर भी खुले हैं।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में जब ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की शुरुआत हुई थी, तब इसकी सफलता को लेकर कई तरह की आशंकाएं व्यक्त की गई थीं। हालांकि समय के साथ यह पहल विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिणाम देने में सफल रही। रक्षा उत्पादन के साथ-साथ मोबाइल निर्माण, ऑटोमोबाइल निर्यात, डिजिटल अवसंरचना और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी देश ने महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन की नीति के आधार पर विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक स्तर पर विनिर्माण, तकनीक और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में और अधिक मजबूत स्थिति हासिल करेगा। उनके अनुसार आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता को मजबूत करने का भी महत्वपूर्ण आधार है।

    उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हो रही प्रगति का भी उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने स्वदेशी चिप निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। सरकार आधुनिक औद्योगिक अवसंरचना विकसित करने के साथ उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दे रही है, जिससे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विनिर्माण क्षमता तैयार हो सके।

    राजनाथ सिंह ने डिजिटल क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से होने वाले डिजिटल लेनदेन लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं और इसकी पहुंच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रही है। इसके साथ ही देश में स्वदेशी 5जी नेटवर्क के विस्तार और 6जी तकनीक के विकास पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।

    उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रारंभिक चुनौतियों के बावजूद जीएसटी अब केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय का प्रभावी माध्यम बन चुका है। रक्षा मंत्री ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में हुए इन सुधारों ने भारत की आर्थिक और औद्योगिक क्षमता को नई दिशा दी है तथा देश को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने की प्रक्रिया को गति प्रदान की है।

  • स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय कार्य का मिला सम्मान, डॉ. रश्मि विज को राज्य स्तरीय डॉक्टर्स अवॉर्ड, एचपीवी अभियान में अमृतसर बना अग्रणी

    स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय कार्य का मिला सम्मान, डॉ. रश्मि विज को राज्य स्तरीय डॉक्टर्स अवॉर्ड, एचपीवी अभियान में अमृतसर बना अग्रणी


    नई दिल्ली । स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाने और जनहित से जुड़े टीकाकरण अभियानों को सफलतापूर्वक लागू करने में उल्लेखनीय योगदान के लिए जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. रश्मि विज को पंजाब सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से राज्य स्तरीय डॉक्टर्स अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, टीकाकरण कार्यक्रमों की प्रभावी निगरानी तथा जनजागरूकता बढ़ाने में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रदान किया गया।

    डॉ. रश्मि विज ने विशेष रूप से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में अमृतसर जिले ने एचपीवी टीकाकरण कवरेज के मामले में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। इसके साथ ही सिविल अस्पताल को पहला ‘मुस्कान’ प्रमाणन दिलाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के प्रयासों को नई पहचान मिली।

    सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. रश्मि विज ने कहा कि यह पुरस्कार केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि के पीछे आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, मेडिकल अधिकारियों, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों का समान योगदान रहा है, जिन्होंने अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा 14 से 15 वर्ष की किशोरियों के लिए शुरू किए गए एचपीवी टीकाकरण अभियान को अमृतसर में मिशन के रूप में संचालित किया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया तथा वैक्सीन से जुड़ी भ्रांतियों और गलत धारणाओं को दूर करने का प्रयास किया। इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में पात्र किशोरियों का टीकाकरण सुनिश्चित किया जा सका।

    डॉ. विज ने कहा कि एचपीवी वैक्सीन को विश्व के अनेक देशों में लंबे समय से सुरक्षित रूप से उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पहले यह टीका सीमित रूप से निजी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध था, जबकि अब पंजाब सरकार पात्र किशोरियों को इसे निःशुल्क उपलब्ध करा रही है। उनका कहना है कि इस पहल का उद्देश्य भविष्य में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम को मजबूत करना है।

    उन्होंने इस अवसर पर बरसात के मौसम में डेंगू से बचाव को लेकर भी लोगों से सतर्क रहने की अपील की। उनके अनुसार स्वास्थ्य विभाग नियमित रूप से जागरूकता अभियान चला रहा है और प्रत्येक सप्ताह डेंगू नियंत्रण गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। उन्होंने नागरिकों से घरों और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने, पानी जमा न होने देने तथा कूलर, गमले, टायर और अन्य पात्रों की नियमित सफाई करने का आग्रह किया।

    डॉ. रश्मि विज ने कहा कि मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता और सामुदायिक जागरूकता दोनों समान रूप से आवश्यक हैं। उन्होंने लोगों से पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, संतुलित आहार अपनाने, खुले में बिकने वाले अस्वच्छ खाद्य पदार्थों से परहेज करने और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी लक्षण के दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की। उनका मानना है कि जनभागीदारी और स्वास्थ्य विभाग के समन्वित प्रयासों से न केवल टीकाकरण अभियान सफल बनाया जा सकता है, बल्कि डेंगू और अन्य संक्रामक बीमारियों की रोकथाम भी प्रभावी ढंग से की जा सकती है।

  • 2020 दिल्ली दंगा साजिश केस में अदालत का बड़ा फैसला, UAPA मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी नामंजूर

    2020 दिल्ली दंगा साजिश केस में अदालत का बड़ा फैसला, UAPA मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी नामंजूर

    नई दिल्ली। वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा साजिश मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। दोनों आरोपियों ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज मामले में ट्रायल कोर्ट से नियमित जमानत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और मामले की प्रकृति को देखते हुए फिलहाल उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया।

    यह मामला दिल्ली दंगा साजिश केस की एफआईआर संख्या 59/2020 से संबंधित है। इस प्रकरण की जांच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल कर रही है। जांच एजेंसी का आरोप है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों की आड़ में व्यापक स्तर पर हिंसा भड़काने की कथित साजिश रची गई थी। इन्हीं आरोपों के आधार पर UAPA तथा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

    अदालत के समक्ष दायर जमानत याचिकाओं में दोनों आरोपियों की ओर से नियमित जमानत देने का अनुरोध किया गया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता, आरोपों की प्रकृति और जांच से जुड़े विभिन्न पहलुओं का उल्लेख करते हुए जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिकाएं स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

    दिल्ली दंगा साजिश मामला पिछले कई वर्षों से देश के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। इस मामले में कई आरोपियों के खिलाफ विस्तृत जांच की गई है और विभिन्न चरणों में अदालत के समक्ष आरोपपत्र भी प्रस्तुत किए जा चुके हैं। कानूनी प्रक्रिया के दौरान कई बार जमानत और अन्य याचिकाओं पर सुनवाई होती रही है, जिससे यह मामला लगातार न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बना हुआ है।

    फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान 50 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। हिंसा के दौरान अनेक मकान, दुकानें, वाहन और अन्य संपत्तियां भी क्षतिग्रस्त हुई थीं। इसके बाद पुलिस ने घटनाक्रम की विस्तृत जांच शुरू की और कथित बड़ी साजिश के पहलू को भी जांच के दायरे में शामिल किया।

    कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि UAPA के तहत दर्ज मामलों में जमानत संबंधी प्रावधान सामान्य आपराधिक मामलों की तुलना में अधिक कठोर होते हैं। ऐसे मामलों में अदालत उपलब्ध साक्ष्यों, आरोपों की गंभीरता और कानून में निर्धारित शर्तों के आधार पर निर्णय लेती है। इसलिए प्रत्येक जमानत याचिका का मूल्यांकन मामले के तथ्यों और न्यायिक मानकों के अनुरूप किया जाता है।

    अदालत के ताजा फैसले के बाद दोनों आरोपियों के लिए फिलहाल ट्रायल कोर्ट से राहत का रास्ता बंद हो गया है। हालांकि भारतीय न्यायिक व्यवस्था के तहत उनके पास उच्च न्यायालय अथवा अन्य सक्षम न्यायिक मंचों पर कानूनी उपाय अपनाने का विकल्प उपलब्ध रहेगा। मामले की आगे की सुनवाई और ट्रायल निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगा।

  • सिंधु जल विवाद पर पाकिस्तान के आरोपों की पड़ताल, जल संकट की जड़ में भारत नहीं बल्कि दशकों की नीतिगत लापरवाही?

    सिंधु जल विवाद पर पाकिस्तान के आरोपों की पड़ताल, जल संकट की जड़ में भारत नहीं बल्कि दशकों की नीतिगत लापरवाही?

    नई दिल्ली । पाकिस्तान में गहराते जल संकट को लेकर एक बार फिर भारत और सिंधु जल संधि चर्चा के केंद्र में हैं। पाकिस्तान की ओर से भारत पर पानी रोकने और जल संकट पैदा करने के आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि मौजूदा स्थिति के पीछे सबसे बड़ी वजह पाकिस्तान की अपनी जल प्रबंधन प्रणाली, अधूरी परियोजनाएं और दशकों से चली आ रही नीतिगत कमियां हैं। इसी कारण यह बहस तेज हो गई है कि संकट का वास्तविक कारण सीमा पार की गतिविधियां हैं या घरेलू स्तर पर जल संसाधनों का कमजोर प्रबंधन।

    सिंधु जल संधि के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के जल बंटवारे की व्यवस्था पहले से निर्धारित है। भारत को आवंटित पूर्वी नदियों के जल का उपयोग करने का अधिकार प्राप्त है। हाल के वर्षों में भारत ने अपने हिस्से के पानी के बेहतर उपयोग के लिए कई सिंचाई और जल भंडारण परियोजनाओं पर काम तेज किया है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य भारत को आवंटित जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना है, न कि पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकना।

    विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान लंबे समय से पर्याप्त जलाशयों और आधुनिक जल संरक्षण ढांचे के निर्माण में अपेक्षित निवेश नहीं कर पाया। परिणामस्वरूप मानसून के दौरान बड़ी मात्रा में पानी बिना उपयोग के समुद्र में बह जाता है। इसके अलावा कई बड़े बांधों में वर्षों से गाद जमा होने के कारण उनकी जल भंडारण क्षमता भी लगातार कम होती गई है, जिससे सूखे और जल संकट की स्थिति और गंभीर होती है।

    जल संसाधन प्रबंधन से जुड़े जानकारों का यह भी मानना है कि पाकिस्तान के कई क्षेत्रों में पुरानी सिंचाई प्रणाली, रिसाव, अवैध जल दोहन और वितरण व्यवस्था की कमजोर निगरानी के कारण बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद होता है। कृषि क्षेत्र में भी पानी के उपयोग की दक्षता अपेक्षाकृत कम मानी जाती है, जिससे उपलब्ध संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। कई शहरी क्षेत्रों में पाइपलाइन नेटवर्क की खराब स्थिति और अवैध जल आपूर्ति भी संकट को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हैं।

    हाल के वर्षों में भारत ने सीमावर्ती क्षेत्रों में जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से कई परियोजनाओं को गति दी है। इनका उद्देश्य अपने हिस्से के जल का उपयोग बढ़ाना, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना और जल संरक्षण को मजबूत बनाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन परियोजनाओं को सिंधु जल संधि के प्रावधानों के अनुरूप तैयार किया गया है और इनका उद्देश्य जल प्रवाह को राजनीतिक हथियार बनाना नहीं बल्कि उपलब्ध अधिकारों का उपयोग करना है।

    दूसरी ओर पाकिस्तान में जल अवसंरचना से जुड़े निवेश में कमी, नए बांधों के निर्माण में देरी और जल संरक्षण योजनाओं के धीमे क्रियान्वयन को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। विभिन्न विश्लेषणों में यह बात सामने आई है कि यदि समय रहते जलाशयों का विस्तार, वितरण व्यवस्था का आधुनिकीकरण और जल संरक्षण पर प्रभावी निवेश किया जाता, तो वर्तमान संकट की गंभीरता काफी हद तक कम हो सकती थी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जल संकट जैसे जटिल मुद्दे का समाधान केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से संभव नहीं है। दीर्घकालिक समाधान के लिए प्रभावी जल प्रबंधन, आधुनिक अवसंरचना, जल संरक्षण तकनीकों का व्यापक उपयोग और संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता होगी। ऐसे कदम ही भविष्य में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय स्तर पर स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • खिलौना उद्योग को पीयूष गोयल का बड़ा लक्ष्य, चार साल में 10 गुना निर्यात बढ़ाने का आह्वान, QCO जारी रखने का दिया भरोसा

    खिलौना उद्योग को पीयूष गोयल का बड़ा लक्ष्य, चार साल में 10 गुना निर्यात बढ़ाने का आह्वान, QCO जारी रखने का दिया भरोसा

    नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय खिलौना उद्योग से वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाने का आह्वान करते हुए अगले चार वर्षों में खिलौनों के निर्यात को मौजूदा स्तर से दस गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित करने की अपील की। उन्होंने उद्योग को भरोसा दिलाया कि सरकार गुणवत्ता मानकों से कोई समझौता नहीं करेगी और खिलौनों पर लागू क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) को वापस लेने का कोई प्रस्ताव नहीं है। साथ ही घरेलू उद्योग को सस्ते विदेशी आयात से भी संरक्षण मिलता रहेगा।

    नई दिल्ली में आयोजित 17वें टॉय बिज इंटरनेशनल बी2बी एक्सपो 2026 को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक खिलौना बाजार का आकार लगभग 120 अरब डॉलर है, जबकि इसमें भारत की हिस्सेदारी अभी भी बेहद सीमित है। उनका कहना था कि भारतीय उद्योग के सामने निर्यात बढ़ाने और दुनिया के प्रमुख बाजारों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करने का बड़ा अवसर मौजूद है।

    उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में भारतीय खिलौनों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन इसे अंतिम उपलब्धि नहीं माना जाना चाहिए। उद्योग को नई तकनीक, बेहतर गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करनी होगी, ताकि भारत विश्व के प्रमुख खिलौना निर्यातक देशों में अपनी जगह बना सके।

    पीयूष गोयल ने उद्योग जगत से हाल के वर्षों में भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौतों का अधिकतम लाभ उठाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि इन समझौतों के माध्यम से भारतीय कंपनियों के लिए कई विकसित देशों के बाजारों तक पहुंच आसान हुई है। उद्योग को विभिन्न देशों में व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भेजकर स्थानीय कंपनियों, सुपरमार्केट श्रृंखलाओं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ नए व्यावसायिक संबंध विकसित करने चाहिए।

    उन्होंने आधुनिक उत्पादन तकनीकों और अत्याधुनिक मशीनरी को अपनाने पर भी विशेष जोर दिया। उनके अनुसार, उत्पादों की गुणवत्ता ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सबसे बड़ी ताकत होती है। इसी उद्देश्य से उन्होंने सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का सुझाव दिया, जहां उत्पाद परीक्षण, डिजाइन विकास, अनुसंधान और नवाचार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

    केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर को लेकर उद्योग में किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था घरेलू उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप बनाए रखने के लिए लागू की गई है। सरकार इसे जारी रखेगी और गुणवत्ता मानकों में किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी। साथ ही अनुचित डंपिंग के खिलाफ भी आवश्यक कदम उठाए जाते रहेंगे।

    उन्होंने यह भी बताया कि भारत और कई देशों के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौतों पर बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है। इन समझौतों के लागू होने से भारतीय खिलौना उद्योग को नए निर्यात बाजार उपलब्ध होंगे और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का दायरा और विस्तृत होगा। उनका मानना है कि यदि उद्योग गुणवत्ता, नवाचार और वैश्विक विपणन पर समान रूप से ध्यान दे तो भारत आने वाले वर्षों में विश्व के खिलौना बाजार में कहीं अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

  • यमन में फिर बढ़ा युद्ध का खतरा, ईरानी विमान की लैंडिंग के बाद सऊदी गठबंधन की हूतियों को कड़ी चेतावनी, क्षेत्रीय तनाव गहराया

    यमन में फिर बढ़ा युद्ध का खतरा, ईरानी विमान की लैंडिंग के बाद सऊदी गठबंधन की हूतियों को कड़ी चेतावनी, क्षेत्रीय तनाव गहराया

    नई दिल्ली । यमन में एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। राजधानी सना में ईरान के एक नागरिक विमान के उतरने के बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन और हूती विद्रोहियों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। दोनों पक्षों की ओर से जारी चेतावनियों ने पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा स्थिति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब क्षेत्र पहले से ही कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है।

    जानकारी के अनुसार, हूती नियंत्रण वाले सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक ईरानी विमान के उतरने के दौरान तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हुई। हूती पक्ष का दावा है कि विमान को रोकने की कोशिश के जवाब में उन्होंने अपने वायु रक्षा तंत्र को सक्रिय किया। वहीं दूसरी ओर सऊदी समर्थित गठबंधन इस घटनाक्रम को क्षेत्रीय सुरक्षा और यमन की स्थिति के लिए गंभीर मान रहा है।

    सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने स्पष्ट किया है कि यदि उसकी सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता या यमन की संप्रभुता को चुनौती देने की कोई भी कोशिश की गई तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। गठबंधन का कहना है कि हाल के घटनाक्रम केवल सैन्य चुनौती नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर डाल सकते हैं।

    उधर हूती विद्रोहियों ने भी अपने हालिया बयानों में सऊदी अरब के विभिन्न रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि उनके नियंत्रण वाले क्षेत्रों में हस्तक्षेप जारी रहा तो वे जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे। इस बयान के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव और अधिक बढ़ गया है।

    यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने भी पूरे घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त की है। सरकार की ओर से आयोजित आपात बैठक में ईरानी विमान की लैंडिंग पर आपत्ति जताते हुए इसे देश की संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा बताया गया। साथ ही संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्षेत्र में तनाव कम करने तथा हालात को नियंत्रण में रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल यमन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक क्षेत्रीय प्रभाव हो सकते हैं। सऊदी अरब और ईरान लंबे समय से विभिन्न क्षेत्रीय मुद्दों पर अलग-अलग पक्षों का समर्थन करते रहे हैं। ऐसे में यमन में बढ़ता तनाव दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद संवेदनशील समीकरणों को और जटिल बना सकता है।

    यमन वर्ष 2015 से लगातार संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। लंबे समय से जारी गृहयुद्ध के कारण लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और देश गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठन समय-समय पर संघर्ष विराम और राजनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल सका है।

    ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि यदि सभी पक्ष संयम नहीं बरतते, तो यमन में सैन्य टकराव का नया दौर शुरू हो सकता है। फिलहाल पूरे क्षेत्र की नजर सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन, हूती विद्रोहियों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आगामी रणनीति पर बनी हुई है, क्योंकि किसी भी बड़े कदम का असर पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा और स्थिरता पर पड़ सकता है।

  • प्याज किसानों को बड़ी राहत, केंद्र ने सरकारी खरीद मूल्य 13% बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल किया, आज से लागू नई दर

    प्याज किसानों को बड़ी राहत, केंद्र ने सरकारी खरीद मूल्य 13% बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल किया, आज से लागू नई दर

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने प्याज उत्पादक किसानों को राहत देते हुए सरकारी खरीद मूल्य में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी का फैसला किया है। अब सरकार मूल्य स्थिरीकरण बफर के लिए किसानों से प्याज की खरीद 2,125 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करेगी। इससे पहले यह खरीद 1,875 रुपये प्रति क्विंटल पर की जा रही थी। नई दर तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और भविष्य में बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए बफर स्टॉक भी अधिक मजबूत होगा।

    सरकारी खरीद का कार्य राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ के माध्यम से जारी रहेगा। इन दोनों एजेंसियों के जरिए खरीदा गया प्याज मूल्य स्थिरीकरण बफर में रखा जाएगा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित किया जा सके। सरकार का कहना है कि संशोधित खरीद मूल्य किसानों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ उपभोक्ताओं के लिए भी संतुलित बाजार व्यवस्था बनाए रखने में सहायक होगा।

    कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार वर्ष 2025-26 में देश में लगभग 307.37 लाख मीट्रिक टन प्याज उत्पादन का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के उत्पादन के लगभग बराबर है। उत्पादन स्थिर रहने के कारण फिलहाल देश में प्याज की उपलब्धता को लेकर किसी बड़ी कमी की आशंका नहीं जताई गई है। हालांकि, मौसम के सामान्य चक्र के अनुसार आने वाले समय में कीमतों में सीमित बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

    सरकार के अनुसार महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में पर्याप्त मात्रा में प्याज का भंडारण उपलब्ध है। अच्छी गुणवत्ता वाला प्याज अभी भी गोदामों में सुरक्षित रखा गया है, जिसे आवश्यकता के अनुसार बाजार में उतारा जाएगा। इससे आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    देशभर की कृषि मंडियों में प्रतिदिन 50 हजार मीट्रिक टन से अधिक प्याज की आवक दर्ज की जा रही है। अकेले महाराष्ट्र में प्रतिदिन 30 हजार मीट्रिक टन से अधिक प्याज मंडियों तक पहुंच रहा है। प्रमुख मंडियों में औसत थोक कीमत लगभग 18 रुपये प्रति किलोग्राम बनी हुई है, जबकि देश का औसत खुदरा मूल्य करीब 31 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया है। सरकार का मानना है कि मौजूदा आपूर्ति स्थिति फिलहाल संतुलित बनी हुई है।

    निर्यात के मोर्चे पर भी भारतीय प्याज की आपूर्ति जारी है। जून महीने में लगभग 1.50 लाख मीट्रिक टन प्याज का निर्यात किया गया। हालांकि, व्यापार से जुड़े जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से निर्यात की गति कुछ धीमी पड़ सकती है। पाकिस्तान और चीन की नई फसल कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध होने से भारतीय निर्यातकों के सामने चुनौती बढ़ सकती है।

    इस बीच कुछ प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में खरीफ प्याज की बुआई सामान्य से धीमी बताई जा रही है। महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में बुआई में लगभग दो सप्ताह की देरी हुई है, जबकि कर्नाटक के कुछ हिस्सों में अब तक सामान्य क्षेत्रफल की तुलना में कम बुआई दर्ज की गई है। सरकार का कहना है कि मानसून की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए समय-समय पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने और उपभोक्ताओं को स्थिर कीमत पर प्याज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकारी खरीद अभियान आगे भी जारी रहेगा।

  • एंटीगुआ टेस्ट के पहले दिन श्रीलंका का दबदबा लाहिरू उदारा की शानदार बल्लेबाजी से वेस्टइंडीज बैकफुट पर

    एंटीगुआ टेस्ट के पहले दिन श्रीलंका का दबदबा लाहिरू उदारा की शानदार बल्लेबाजी से वेस्टइंडीज बैकफुट पर


    नई दिल्ली । वेस्टइंडीज और श्रीलंका के बीच एंटीगुआ के सर विवियन रिचर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन श्रीलंका ने दमदार बल्लेबाजी करते हुए मुकाबले पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली। शुरुआती झटकों के बावजूद लाहिरू उदारा और कामिंदु मेंडिस ने शानदार साझेदारी कर मेहमान टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। दिन का खेल पूरी तरह श्रीलंका के नाम रहा और वेस्टइंडीज के गेंदबाज लंबे समय तक विकेट के लिए संघर्ष करते नजर आए।

    टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका की शुरुआत अच्छी नहीं रही। सलामी बल्लेबाज निशान मदुष्का केवल 6 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद अनुभवी बल्लेबाज दिनेश चांदीमल भी महज एक रन बनाकर शेमार जोसेफ का शिकार बने। शुरुआती दो विकेट जल्दी गिरने के बाद ऐसा लगा कि वेस्टइंडीज मैच पर पकड़ बना लेगा लेकिन लाहिरू उदारा और कामिंदु मेंडिस ने शानदार संयम और आक्रामकता का परिचय देते हुए पारी को संभाल लिया।

    दोनों बल्लेबाजों ने तीसरे विकेट के लिए 252 गेंदों में 215 रन की बेहतरीन साझेदारी की और वेस्टइंडीज के गेंदबाजों को लंबे समय तक कोई सफलता नहीं मिलने दी। कामिंदु मेंडिस ने 120 गेंदों में 84 रन की शानदार पारी खेली जिसमें 11 चौके शामिल रहे। हालांकि वह अपने शतक से चूक गए लेकिन टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाने में उनकी भूमिका बेहद अहम रही।

    दिन के सबसे बड़े नायक लाहिरू उदारा रहे जिन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 248 गेंदों में 188 रन बनाए। अपनी यादगार पारी में उन्होंने 21 चौके और 5 छक्के लगाए। वह दोहरे शतक के बेहद करीब पहुंच गए थे लेकिन 188 रन पर आउट होकर बड़ी उपलब्धि से चूक गए। इसके बावजूद उनकी यह पारी श्रीलंका के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई और उन्होंने वेस्टइंडीज के गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह बेअसर कर दिया।

    कप्तान धनंजय डी सिल्वा अच्छी शुरुआत मिलने के बावजूद बड़ी पारी नहीं खेल सके और 90 गेंदों में 33 रन बनाकर आउट हो गए। पहले दिन का खेल समाप्त होने तक कुशल मेंडिस बिना खाता खोले और सोनल दिनुशा 5 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद थे। श्रीलंका मजबूत स्थिति में पहुंच चुका है और दूसरे दिन टीम बड़ी बढ़त हासिल करने की कोशिश करेगी।

    वेस्टइंडीज की ओर से शेमार जोसेफ ने सबसे प्रभावी गेंदबाजी करते हुए दो विकेट हासिल किए जबकि जस्टिन ग्रीव्स और जायडेन सील्स को एक-एक सफलता मिली। हालांकि मेजबान टीम के गेंदबाज पूरे दिन श्रीलंकाई बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में सफल नहीं हो सके।

    पहले टेस्ट में हार और कुछ खिलाड़ियों की चोट के बाद श्रीलंका ने दूसरे टेस्ट के लिए अपनी प्लेइंग इलेवन में तीन बदलाव किए। प्रभात जयसूर्या लाहिरू उदारा और इसिथा विजेसुंडेरा को अंतिम एकादश में शामिल किया गया। इसिथा ने इस मुकाबले से टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया जबकि पथुम निसांका और लाहिरू कुमारा चोट के कारण टीम से बाहर रहे। खराब प्रदर्शन के चलते कसुन रजिथा को भी अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली।