रामायण से आगे निकली महाभारत जब 99.6 प्रतिशत टीआरपी ने दुनिया को चौंका दिया

नई दिल्ली । दूरदर्शन के स्वर्णिम दौर की बात जब भी होती है तो दो धारावाहिक सबसे पहले याद आते हैं रामायण और महाभारत। इन दोनों शोज ने भारतीय टेलीविजन के इतिहास को नई दिशा दी और दर्शकों के दिलों में गहरी जगह बनाई। हालांकि लोकप्रियता के मामले में दोनों ही धारावाहिक बेहद सफल रहे लेकिन टीआरपी के आंकड़ों में महाभारत ने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जिसने उसे इतिहास के पन्नों में अमर कर दिया।

महाभारत का प्रसारण 1988 से 1990 के बीच हुआ और इस दौरान यह शो घर घर में देखा जाने लगा। रविवार की सुबह सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था और लोग अपने टीवी सेट के सामने बैठ जाते थे। इस धारावाहिक की भव्यता इसकी सबसे बड़ी ताकत थी। सेट डिजाइन संवाद अदायगी और किरदारों की गहराई ने इसे सिर्फ एक धार्मिक शो नहीं बल्कि एक भावनात्मक अनुभव बना दिया।

युधिष्ठिर का किरदार निभाने वाले गजेंद्र चौहान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि महाभारत की लोकप्रियता का अंदाजा उसकी टीआरपी से लगाया जा सकता है। उनके अनुसार जहां रामायण के पहले एपिसोड को लगभग 34 प्रतिशत और अंतिम एपिसोड को 78 प्रतिशत दर्शकों ने देखा वहीं महाभारत ने शुरुआत से ही रिकॉर्ड बनाना शुरू कर दिया था। महाभारत के पहले एपिसोड की टीआरपी लगभग 79 प्रतिशत रही और इसके अंतिम एपिसोड ने तो इतिहास ही रच दिया जब यह आंकड़ा 99.6 प्रतिशत तक पहुंच गया।

यही वह उपलब्धि थी जिसने महाभारत को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह दिलाई। उस समय दुनिया भर में इतने बड़े स्तर पर कोई भी टीवी शो इतनी बड़ी दर्शक संख्या हासिल नहीं कर पाया था। इससे पहले कुछ विदेशी शोज की टीआरपी 80 प्रतिशत के आसपास रही थी लेकिन महाभारत ने उन्हें भी पीछे छोड़ दिया।

इस सफलता के पीछे केवल आंकड़े ही नहीं बल्कि पूरी टीम की मेहनत थी। कलाकारों ने अपने किरदारों को इतने जीवंत तरीके से निभाया कि दर्शक उनसे खुद को जोड़ने लगे। चाहे भीष्म की गंभीरता हो कृष्ण की नीति हो या द्रौपदी का साहस हर किरदार ने दर्शकों के दिल पर गहरा असर छोड़ा। यही वजह रही कि यह शो सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक अनुभव बन गया।

महाभारत की लोकप्रियता का असर आज भी देखा जा सकता है। इसकी कहानी इसके संवाद और इसके पात्र आज भी लोगों की यादों में ताजा हैं। आधुनिक दौर में भले ही तकनीक और प्रस्तुति बदल गई हो लेकिन उस दौर की सादगी और प्रभाव आज भी बेमिसाल मानी जाती है। इस तरह महाभारत ने न केवल भारतीय टेलीविजन में अपनी अलग पहचान बनाई बल्कि पूरी दुनिया में यह साबित कर दिया कि मजबूत कहानी और सच्ची मेहनत के दम पर कोई भी शो इतिहास रच सकता है।