कम उम्र में संभाली जिम्मेदारी, यहीं से शुरू हुआ सफर
बहुत कम लोग जानते हैं कि आशा भोसले के पिता दीनानाथ मंगेशकर एक प्रसिद्ध गायक और अभिनेता थे। लेकिन जब आशा सिर्फ 9 साल की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद उन्होंने और उनकी बहन लता मंगेशकर ने परिवार की जिम्मेदारी उठाई और फिल्मों में गाना शुरू किया। यही से उनके संघर्ष और सफलता की कहानी की शुरुआत हुई।
10 साल की उम्र में गाया पहला गाना
आशा भोसले ने बेहद छोटी उम्र में ही गायकी की दुनिया में कदम रख दिया था। उन्होंने महज 10 साल की उम्र में 1943 में मराठी फिल्म माझा बल के लिए अपना पहला गाना गाया। इतनी कम उम्र में शुरू हुआ यह सफर आगे चलकर उन्हें संगीत की ऊंचाइयों तक ले गया।
20 भाषाओं में गाने गाकर बनाया रिकॉर्ड
आशा ताई की सबसे बड़ी खासियत उनकी बहुमुखी प्रतिभा थी। उन्होंने हिंदी, मराठी, बंगाली, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, गुजराती, भोजपुरी समेत करीब 20 भाषाओं में गाने गाए। यही वजह है कि उनकी आवाज सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में सुनी और पसंद की जाती रही।
गायिका ही नहीं, सफल बिजनेसवुमन भी थीं
गायकी के अलावा आशा भोसले को खाना बनाने का भी बेहद शौक था। उन्होंने अपने इस शौक को बिजनेस में बदलते हुए साल 2002 में दुबई में ‘Asha’s’ नाम से रेस्टोरेंट शुरू किया। धीरे-धीरे यह ब्रांड बहरीन, कुवैत, कतर और यूके के शहरों तक फैल गया। इस तरह उन्होंने साबित किया कि वह सिर्फ सुरों की रानी ही नहीं, बल्कि एक सफल उद्यमी भी थीं।
आखिरी गाने में भी दिखा प्रयोग का जादू
अपने करियर के अंतिम पड़ाव में भी आशा भोसले ने संगीत के साथ प्रयोग करना नहीं छोड़ा। उनका आखिरी गाना ‘Shadoe Light’ ब्रिटिश बैंड Gorillaz के साथ था, जिसमें भारतीय शास्त्रीय संगीत और पॉप का अनोखा मेल देखने को मिला। यह गाना उनके घर, मुंबई में रिकॉर्ड किया गया था।
हर दौर में कायम रही उनकी बादशाहत
आशा भोसले का नाम उन कलाकारों में शामिल है, जिन्होंने समय के साथ खुद को ढाला और हर पीढ़ी के दिलों में जगह बनाई। उनकी आवाज में वह जादू था, जो हर मूड और हर दौर के लिए परफेक्ट था।
