इंदौर जिला कोर्ट का कड़ा रुख: दूसरी शादी छुपाने वाले पति को झटका, तलाक केस खारिज, FIR होगी दर्ज


इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर में एक अहम मामले में जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए बिना तलाक दूसरी शादी करने वाले पति के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इंदौर जिला कोर्ट ने पति द्वारा दायर तलाक याचिका को खारिज कर दिया और उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 494 के तहत एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। यह मामला प्रेम विवाह, धोखाधड़ी और द्विविवाह (बिगैमी) से जुड़ा हुआ है, जिसने कानूनी और सामाजिक स्तर पर चर्चा को जन्म दिया है।

पहले प्रेम विवाह, फिर अलगाव और दूसरी शादी

जानकारी के अनुसार, नंदानगर निवासी नितिन ने वर्ष 2016 में रीना से प्रेम विवाह किया था। शुरुआती वर्षों में दंपती का जीवन सामान्य रहा, लेकिन संतान न होने के कारण रिश्तों में दूरी आने लगी। वर्ष 2018 के बाद दोनों अलग रहने लगे। इसी बीच, वर्ष 2021 में नितिन ने पारिवारिक सहमति से सोनम नामक महिला से दूसरी शादी कर ली, जबकि पहली पत्नी से उसका कानूनी तौर पर तलाक नहीं हुआ था।

पहली पत्नी ने जताई आपत्ति, कोर्ट पहुंचा मामला

जब पहली पत्नी रीना को दूसरी शादी की जानकारी मिली तो उसने इसका विरोध किया। इसी दौरान नितिन ने तलाक के लिए कोर्ट में याचिका दायर की। नोटिस मिलने पर रीना ने अपने वकील पवन राय के माध्यम से जवाब प्रस्तुत किया और कोर्ट को बताया कि बिना तलाक दिए ही नितिन ने दूसरी शादी कर ली है। साथ ही यह भी सामने आया कि दूसरी पत्नी से उसका एक बच्चा भी है, जबकि नितिन ने शुरुआत में दूसरी शादी से इनकार किया।

फोटो और दस्तावेज बने अहम सबूत

रीना की ओर से कोर्ट में मजबूत साक्ष्य पेश किए गए, जिनमें नितिन और सोनम की शादी के फोटो, बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र और अस्पताल व नगर निगम से जुड़े दस्तावेज शामिल थे। इन सबूतों के आधार पर यह साबित हुआ कि आरोपी ने जानबूझकर पहली शादी के रहते दूसरी शादी की और पत्नी के साथ धोखाधड़ी की।

कोर्ट का फैसला: तलाक याचिका खारिज, FIR के निर्देश

दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद इंदौर जिला कोर्ट ने रीना के पक्ष में पेश साक्ष्यों को सही माना और नितिन की तलाक याचिका खारिज कर दी। साथ ही कोर्ट ने उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 494 के तहत एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अब यह मामला आगे की कानूनी प्रक्रिया में विचाराधीन रहेगा।

क्या कहती है IPC की धारा 494

भारतीय दंड संहिता की धारा 494 के तहत, यदि कोई व्यक्ति अपने जीवनसाथी के जीवित रहते और पहला विवाह वैध होने के बावजूद दूसरी शादी करता है, तो यह द्विविवाह (बिगैमी) अपराध माना जाता है। इसमें अधिकतम 7 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।