ग्वालियर स्मार्ट सिटी बस सेवा फेल, 11 करोड़ खर्च के बाद भी सड़कों से गायब बसें


नई दिल्ली । ग्वालियर में स्मार्ट सिटी के नाम पर शुरू की गई बस सेवा अब पूरी तरह सवालों के घेरे में है। शहरवासियों को सस्ती, सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन सुविधा देने के उद्देश्य से शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट आज ठप पड़ चुका है। जिन बसों को शहर की लाइफलाइन बनना था, वे अब सुनसान इलाकों में खड़ी-खड़ी कबाड़ में तब्दील होती नजर आ रही हैं।
2023 में हुई थी शुरुआत, कुछ महीनों में ही ठप
Gwalior Smart City Development Corporation ने साल 2023 में बड़े दावों के साथ इंट्रा सिटी बस सेवा शुरू की थी। इन बसों में आधुनिक सुविधाएं और जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया था, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और समयबद्ध यात्रा का अनुभव मिल सके। शुरुआत में यह योजना लोगों के बीच चर्चा में भी रही, लेकिन कुछ ही महीनों में इसका संचालन लगभग बंद हो गया।
 ग्वालियर में 11 करोड़ की स्मार्ट सिटी बस सेवा कुछ महीनों में ठप, बसें कबाड़ बनीं और योजना पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
इस योजना के लिए करीब 11 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया था। प्रोजेक्ट के तहत 16 इंट्रा सिटी और कुल 32 बसें (इंटरसिटी सहित) चलाने की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को सौंपी गई थी। लेकिन जमीनी स्तर पर बसों का संचालन बेहद सीमित रहा और धीरे-धीरे बसें सड़कों से गायब हो गईं।
आज स्थिति यह है कि ये बसें शहर के अलग-अलग इलाकों-रेस कोर्स रोड, गार्डर पुलिया और रेलवे ओवरब्रिज के नीचे खड़ी नजर आती हैं। लंबे समय से खड़ी रहने के कारण कई बसें जंग खा रही हैं, जिससे करोड़ों की संपत्ति बर्बाद होती दिख रही है।
ऑटो-विक्रम के दबदबे में नहीं चल पाईं बसें
सूत्रों की मानें तो शहर में पहले से चल रहे ऑटो और विक्रम का नेटवर्क इतना मजबूत है कि बस सेवा को प्रतिस्पर्धा में टिकने का मौका ही नहीं मिला। निजी कंपनी ने भी संचालन में खास रुचि नहीं दिखाई, जिससे धीरे-धीरे पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो गई।
यात्रियों के लिए बनाए गए जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम का उद्देश्य बसों की हर गतिविधि पर नजर रखना था, लेकिन जब बसें ही नहीं चलीं तो यह तकनीक भी बेकार साबित हुई।
जनता में नाराजगी, उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों में इस योजना को लेकर भारी नाराजगी है। हजीरा निवासी मूलचंद का कहना है कि शहर में सरकारी बस सेवा पूरी तरह गायब है, जबकि करोड़ों की बसें यूं ही खड़ी-खड़ी खराब हो रही हैं। उन्होंने इसे जनता के पैसे की बर्बादी बताया और कहा कि “स्मार्ट सिटी के नाम पर सिर्फ दिखावा हो रहा है।”
जिम्मेदारी तय क्यों नहीं?
इस पूरे मामले में कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं-

क्या बिना ठोस ग्राउंड सर्वे के प्रोजेक्ट शुरू कर दिया गया?
निजी कंपनी की जवाबदेही क्यों तय नहीं हुई?
करोड़ों खर्च होने के बावजूद सेवा टिकाऊ क्यों नहीं बन पाई?

स्मार्ट सिटी प्लान पर उठे सवाल
बस सेवा के फेल होने से अब पूरे स्मार्ट सिटी प्लान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। जिस योजना का उद्देश्य शहर को आधुनिक बनाना था, वही अब अव्यवस्था और लापरवाही का उदाहरण बनती दिख रही है।
अगर समय रहते इस पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह प्रोजेक्ट सरकारी योजनाओं में एक और असफल उदाहरण बनकर रह जाएगा।