नई दिल्ली। अकादमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज ने 2027 में आयोजित होने वाले 99वें ऑस्कर अवॉर्ड समारोह के लिए जो नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, वे वैश्विक फिल्म उद्योग की नींव हिलाने वाले साबित हो सकते हैं। इन नियमों में सबसे क्रांतिकारी बदलाव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के उपयोग को लेकर किया गया है। अब फिल्म निर्माताओं को यह अनिवार्य रूप से बताना होगा कि क्या उनकी फिल्म के लेखन, विजुअल इफेक्ट्स, वॉयस क्लोनिंग या किरदारों के चेहरे बदलने में एआई तकनीक का प्रयोग हुआ है।
अभिनय की श्रेणी में किया गया बदलाव उन कलाकारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो एक ही साल में कई उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। अब एक ही अभिनेता या अभिनेत्री को एक ही श्रेणी में एक से अधिक फिल्मों के लिए नामांकित किया जा सकता है। पहले के नियमों में यह विकल्प बेहद सीमित था, जिससे कई बार बेहतरीन काम भी जूरी की नजरों से छूट जाता था।
भारतीय फिल्म उद्योग के लिए सबसे महत्वपूर्ण खबर अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी से जुड़ी है। अब तक चली आ रही उस व्यवस्था को बदल दिया गया है जिसमें प्रत्येक देश से केवल एक ही फिल्म आधिकारिक तौर पर भेजी जा सकती थी। नए नियमों के मुताबिक, अब यदि कोई फिल्म प्रमुख अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सवों जैसे कान्स, वेनिस, बर्लिन, टोरंटो, सनडांस या बुसान में बड़ा पुरस्कार जीतती है, तो वह सीधे ऑस्कर की इस श्रेणी में शामिल होने के योग्य होगी।
इसके अलावा डिजिटल रिलीज और थिएट्रिकल प्रदर्शन के नियमों को भी वर्तमान समय की मांग के अनुरूप ढाला गया है। अब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज होने वाली फिल्मों के लिए अकादमी ने नियमों में थोड़ी नरमी बरती है, ताकि बेहतरीन कंटेंट को केवल इसलिए न नकारा जाए क्योंकि वह बड़े पर्दे पर लंबे समय तक नहीं रहा।
