नई दिल्ली।भारतीय सिनेमा के सौ सालों से भी ज्यादा के सफर में कई बार धुनें प्रेरित होने या पुराने गानों के रीमेक बनने के किस्से सामने आए हैं, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि बिल्कुल एक ही गाना, एक ही संगीतकार और एक ही गीतकार के साथ दो अलग-अलग फिल्मों में महज दो हफ्तों के अंतराल पर रिलीज हुआ हो? साल 2003 में बॉलीवुड ने एक ऐसा ही अनूठा और दिलचस्प दौर देखा था। यह दुर्लभ किस्सा उस दौर की दिग्गज संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण और मशहूर गीतकार समीर के जादुई काम से जुड़ा है। इन दो फिल्मों के नाम थे ‘हंगामा’ और ‘फूटपाथ’। संगीत के इतिहास में यह पहली और शायद आखिरी बार था जब एक ही रचना को दो बिल्कुल अलग मिजाज की फिल्मों में बराबर की अहमियत के साथ शामिल किया गया और दोनों ही वर्ज़न को दर्शकों ने खूब सराहा।
इस अनोखे सफर की शुरुआत 1 अगस्त 2003 को हुई, जब एक कॉमेडी ड्रामा फिल्म ‘हंगामा’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई। अक्षय खन्ना, रिमी सेन और आफताब शिवदासानी जैसे सितारों से सजी इस फिल्म ने अपनी गुदगुदाने वाली कॉमेडी से दर्शकों को लोटपोट कर दिया। इस फिल्म के संगीत में एक गाना शामिल था—’चैन आपको मिला, मुझे दीवानगी मिली’। इस फिल्म में यह गाना एक ‘सेलिब्रेशन’ यानी जश्न के गीत की तरह पेश किया गया था। इसमें शान और साधना सरगम की ऊर्जावान आवाज थी और इसे फिल्म के मुख्य किरदारों पर एक पार्टी के माहौल में बेहद खूबसूरती से फिल्माया गया था। गाने की तेज लय और उत्साह भरे बोल तुरंत ही युवाओं की जुबान पर चढ़ गए थे।
हैरानी की बात तब हुई जब इस फिल्म की रिलीज के ठीक 15 दिन बाद, यानी 15 अगस्त 2003 को एक और फिल्म ‘फूटपाथ’ बड़े पर्दे पर आई। इस फिल्म में इमरान हाशमी और आफताब शिवदासानी मुख्य भूमिकाओं में थे। दर्शकों को तब सुखद आश्चर्य हुआ जब उन्होंने इसी फिल्म के एलबम में फिर से वही गाना—’चैन आपको मिला’—सुना। हालांकि, इस बार गाने का पूरा अहसास और उसकी ‘फील’ बदल चुकी थी। जहाँ पहली फिल्म में यह एक पार्टी नंबर था, वहीं इस फिल्म में इसे एक ‘सैड सॉन्ग’ या बेहद धीमी लय वाले भावुक रोमांटिक गाने के रूप में रखा गया था। सबसे खास बात यह थी कि इस दूसरे वर्जन को दिग्गज गायक एसपी बालासुब्रमण्यम और स्वर कोकिला आशा भोसले ने अपनी मखमली आवाजों से सजाया था।
एक ही गाने को दो अलग-अलग भावनाओं में ढालने का यह प्रयोग कलात्मक रूप से बेहद सफल रहा। संगीतकारों ने इसकी धुन को इस तरह तैयार किया था कि वह एक तरफ कॉमेडी फिल्म की रौनक में पूरी तरह फिट बैठी और दूसरी तरफ एक गंभीर ड्रामा फिल्म की गहराई में भी समा गई। दिलचस्प बात यह भी है कि अभिनेता आफताब शिवदासानी दोनों ही फिल्मों का अहम हिस्सा थे और उन्होंने एक ही गाने के दो अलग-अलग रंगों को पर्दे पर जिया। आज भी जब बॉलीवुड के दुर्लभ तथ्यों की बात होती है, तो यह उदाहरण सबसे ऊपर आता है कि कैसे एक ही बोल और धुन ने दो अलग कहानियों को अपने-अपने अंदाज में मुकम्मल बनाया। यह सुरीला प्रयोग आज भी संगीत प्रेमियों के बीच एक सुखद चर्चा का विषय बना रहता है।
