विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आलोक शर्मा का बयान, विदेशी फंडिंग वाली संस्थाओं की जांच पर दिया जोर


भोपाल। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर भोपाल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बीजेपी सांसद आलोक शर्मा ने देश में काम कर रहे गैर सरकारी संगठनों यानी NGO को मिलने वाली विदेशी आर्थिक मदद को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से होने वाले जनहित के कार्यों का स्वागत किया जाना चाहिए लेकिन विदेशी स्रोतों से मिलने वाली आर्थिक सहायता को लेकर पारदर्शिता भी जरूरी है। उनके मुताबिक किसी संगठन को विदेश से मिलने वाले पैसे का स्रोत क्या है और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है इसकी जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए। 14 अगस्त को देश में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है और इस दिन 1947 के विभाजन के दौरान प्रभावित लोगों के संघर्ष और पीड़ा को याद किया जाता है।

आलोक शर्मा ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में सामाजिक और गैर सरकारी संस्थाएं शिक्षा स्वास्थ्य राहत और अन्य सामाजिक क्षेत्रों में काम करती हैं। ऐसे संगठनों की भूमिका कई स्तरों पर महत्वपूर्ण हो सकती है। लेकिन जब किसी संस्था को विदेश से आर्थिक मदद मिलती है तो उसके वित्तीय स्रोत और फंड के इस्तेमाल की निगरानी भी जरूरी हो जाती है। उन्होंने इस मुद्दे को राष्ट्रीय हित से जोड़ते हुए कहा कि नियमों का पालन सुनिश्चित होना चाहिए और यदि कोई संस्था निर्धारित नियमों का उल्लंघन करती है तो संबंधित एजेंसियों को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

सांसद ने विदेशी फंडिंग के इस्तेमाल को लेकर विशेष रूप से पारदर्शिता पर जोर दिया। उनका कहना था कि किसी भी सामाजिक संगठन को मिलने वाली आर्थिक सहायता का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए। यदि पैसा किसी विशेष सामाजिक या जनकल्याणकारी काम के लिए प्राप्त हुआ है तो उसका इस्तेमाल उसी उद्देश्य के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देशहित से जुड़े मामलों में किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। हालांकि उनके बयान में किसी विशेष NGO पर अनियमितता का आरोप नहीं लगाया गया है। इसलिए इसे विदेशी फंडिंग की सामान्य निगरानी और पारदर्शिता की मांग के तौर पर देखा जाना चाहिए।

विदेशी आर्थिक सहायता प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए भारत में पहले से ही कानूनी और नियामकीय व्यवस्था मौजूद है। विदेशी योगदान से जुड़े मामलों में FCRA यानी Foreign Contribution Regulation Act के तहत नियम लागू होते हैं। इसी व्यवस्था के तहत विदेशी योगदान प्राप्त करने वाले संगठनों से उसके स्रोत और इस्तेमाल से संबंधित जानकारी तथा निर्धारित अनुपालन की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में आलोक शर्मा का बयान इसी व्यापक बहस के बीच सामने आया है कि विदेशी सहायता का इस्तेमाल पूरी पारदर्शिता के साथ और कानून के दायरे में होना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान आलोक शर्मा ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के महत्व पर भी बात की। उन्होंने 1947 के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों और विस्थापन का दर्द झेलने वाले परिवारों को याद किया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। विभाजन के दौरान बड़े पैमाने पर लोगों को अपने घर और जमीन छोड़कर विस्थापित होना पड़ा था। केंद्र सरकार ने 2021 में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।

आलोक शर्मा भोपाल लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं और 18वीं लोकसभा के लिए 2024 में निर्वाचित हुए थे। PRS India के अनुसार उनका लोकसभा कार्यकाल जून 2024 से जारी है।

सांसद के बयान के बाद NGO की विदेशी फंडिंग और उसके नियमन को लेकर चर्चा फिर तेज होने की संभावना है। सामाजिक संस्थाओं के योगदान और विदेशी सहायता के बीच संतुलन बनाते हुए पारदर्शिता सुनिश्चित करना इस बहस का अहम हिस्सा है। सरकार और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि नियमों का पालन हो और जहां कोई वास्तविक उल्लंघन सामने आए वहां कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए। वहीं सामाजिक संगठनों के लिए भी जरूरी है कि वे अपने वित्तीय स्रोत और खर्च से जुड़ी जानकारी नियमानुसार स्पष्ट रखें ताकि उनके काम को लेकर जनता का भरोसा कायम रहे।