शहडोल के धनपुरी का देश में डंका: दिल्ली में सम्मानित हुईं CMO पूजा बुनकर, डिकार्बनाइजेशन में नगर परिषद ने पेश की मिसाल


शहडोल । पर्यावरण संरक्षण और ग्लोबल वार्मिंग जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की एक छोटी सी नगर परिषद ने देश के सामने बड़ी नजीर पेश की है। नई दिल्ली में आयोजित ‘डिकार्बनाइजेशन भारतीय शहर संवाद एवं विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला’ में धनपुरी नगर परिषद को शून्य कार्बन उत्सर्जन की दिशा में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। अखिल भारतीय स्थानीय स्वशासन संस्थान द्वारा आयोजित इस गरिमामयी समारोह में धनपुरी की मुख्य नगरपालिका अधिकारी CMO पूजा बुनकर को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जो पूरे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण है।

महानगरों को पीछे छोड़ धनपुरी ने किया कमाल अक्सर माना जाता है कि कार्बन उत्सर्जन कम करने और डिकार्बनाइजेशन जैसे जटिल लक्ष्य केवल बड़े महानगरों तक सीमित हैं। लेकिन धनपुरी नगर परिषद ने इस धारणा को तोड़ दिया है। कार्यशाला में मौजूद देशभर के शहरी विकास विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बीच धनपुरी द्वारा किए गए नवाचारों की जमकर सराहना की गई। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के भारतीय प्रमुख एवं वरिष्ठ सलाहकार हितेश वैद्य ने धनपुरी के प्रयासों को प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि यदि धनपुरी जैसा छोटा शहर संकल्प ले सकता है, तो यह वैश्विक स्तर पर एक मिसाल है। यह साबित करता है कि पर्यावरण बचाने की इच्छाशक्ति भौगोलिक सीमाओं की मोहताज नहीं होती।

शून्य कार्बन उत्सर्जन का बड़ा संकल्प राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त करने के बाद CMO पूजा बुनकर ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि यह उपलब्धि नगर परिषद की पूरी टीम और नागरिकों के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने संकल्प लिया कि धनपुरी नगर परिषद शत-प्रतिशत शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर काम करेगी। पूजा बुनकर ने बताया कि दिल्ली में प्राप्त तकनीकी प्रशिक्षण और नीतिगत ज्ञान का उपयोग कर धनपुरी को मध्यप्रदेश की पहली ‘डिकार्बनाइजेशन सिटी’ के रूप में विकसित किया जाएगा।

विकास और पर्यावरण का संतुलन नगर विकेंद्रीकरण पहल के तहत धनपुरी ने कचरा प्रबंधन, ऊर्जा की बचत और हरियाली बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में जो मॉडल पेश किया है, उसकी गूंज अब राष्ट्रीय राजधानी तक पहुँच गई है। इस उपलब्धि पर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों में खुशी की लहर है। जानकारों का मानना है कि ऐसे प्रयास न केवल प्रदूषण कम करने में सहायक होंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सतत और स्वस्थ शहरी जीवन की नींव रखेंगे।