भोपाल में नाली का पानी भी ‘शुद्ध’! जल सुनवाई में निगम की बड़ी लापरवाही, 6 वार्ड में चौंकाने वाला रियलिटी चेक


भोपाल। भोपाल में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर एक हैरान करने वाली सच्चाई सामने आई है। नगर निगम की जल सुनवाई के दौरान नाली के गंदे पानी को भी महज 15 सेकंड की जांच में ‘पीने लायक’ बता दिया गया। यह दावा किसी आम व्यक्ति का नहीं, बल्कि खुद निगम के अमले का है। एक चर्चित मीडिया संस्थान की टीम ने भोपाल के 6 वार्ड कार्यालयों में जाकर जल सुनवाई का रियलिटी चेक किया, जहां हालात बेहद चिंताजनक नजर आए।

टीम जब अलग-अलग वार्ड दफ्तरों में पहुंची तो सामने आया कि पानी की जांच प्रशिक्षित विशेषज्ञों की बजाय टाइम कीपर, प्यून और डेली वेज कर्मचारी कर रहे हैं। अधिकांश जगहों पर सिर्फ क्लोरीन टेस्ट कर पानी को ‘शुद्ध’ घोषित कर दिया गया, जबकि पानी से बदबू आ रही थी और वह साफ तौर पर नाली से लिया गया था।

वार्ड 70: नाली के पानी को 15 सेकंड में क्लीन चिट
पंजाबी बाग स्थित वार्ड 70 कार्यालय में निगम कर्मचारी ने नाली से लाए गए पानी की सिर्फ क्लोरीन जांच की और उसे पीने योग्य बता दिया। हैरानी की बात यह रही कि पानी में बदबू थी, फिर भी उसे सुरक्षित करार दिया गया।

वार्ड 44: टाइम कीपर कर रहा जांच, क्लोरीन को बताया कैल्शियम
सुभाष नगर वार्ड में टाइम कीपर और श्रमिक पानी की जांच करते मिले। एक स्थानीय निवासी ने बदबूदार और मटमैले पानी की शिकायत की, लेकिन कर्मचारियों ने सिर्फ क्लोरीन टेस्ट कर पानी को सही बता दिया। जब सवाल उठाया गया तो जवाब मिलायहीं तक जांच होती है।

वार्ड 60: नाली का पानी ‘पीने लायक’, सच सामने आया तो बचते दिखे कर्मचारी
अवधपुरी वार्ड में भी नाली के पानी को क्लीन चिट दी गई। जब कर्मचारियों को बताया गया कि यह नाली का पानी है, तो वे खुद उसे पीने से कतराने लगे। एक कर्मचारी ने यहां तक कहा कि अगर नाली का न पता होता तो पी लेता।

जल सुनवाई की जरूरत क्यों पड़ी?
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 28 लोगों की मौत के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशभर में हर मंगलवार जल सुनवाई के आदेश दिए थे। निर्देशों में पानी की गुणवत्ता जांच के लिए 11 पैरामीटर (रंग, स्वाद, पीएच, हार्डनेस, टीडीएस आदि) और ई-कोलाई जैसे बैक्टीरिया टेस्ट शामिल हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन आदेशों का पालन नहीं हो रहा।

शिकायतें बहुत, सुनवाई नाम मात्र
प्रेम नगर, भेल, करोंद और अयोध्या एक्सटेंशन जैसे इलाकों में गंदे पानी की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। कहीं पाइपलाइन सीवेज से गुजर रही है तो कहीं टंकियां महीनों से साफ नहीं हुईं, लेकिन जल सुनवाई में सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है।

एक्सपर्ट्स की चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि पेयजल की जांच केवल प्रशिक्षित केमिस्ट या लैब असिस्टेंट ही कर सकते हैं। इस काम में टाइम कीपर, प्यून या सुपरवाइजर को लगाना जनता की सेहत के साथ गंभीर खिलवाड़ है और भविष्य में बड़ा स्वास्थ्य संकट खड़ा कर सकता है। कुल मिलाकर, भोपाल की जल सुनवाई फिलहाल कागजी साबित हो रही है, जहां नाली का पानी भी पीने लायक घोषित किया जा रहा है। अगर समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी, तो हालात गंभीर हो सकते हैं।