‘वोकल फॉर लोकल’ का असर: गुना में 50 से अधिक स्टॉलों के साथ हस्तशिल्प प्रदर्शनी का शुभारंभ


गुना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का असर अब जमीन पर साफ नजर आने लगा है। इसका ताजा उदाहरण मध्य प्रदेश के गुना जिले में देखने को मिला, जहां स्थानीय और देशभर के हस्तशिल्पियों के लिए हस्तशिल्प प्रदर्शनी-2026 का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य कारीगरों की आमदनी बढ़ाना और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय व वैश्विक पहचान दिलाना है।

कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से मध्य प्रदेश राज्य सहकारी संघ मर्यादित और विकास आयुक्त हस्तशिल्प द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी का शुभारंभ 9 फरवरी की रात प्रताप छात्रावास, गुना में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने किया। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक दुबे, अमित सहारे और सहायक निदेशक, हस्तशिल्प विकास आयुक्त सेवा केंद्र, ग्वालियर भी मौजूद रहे।

प्रदर्शनी में हैदराबाद, जयपुर, दिल्ली, आगरा, बेंगलुरु, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गुजरात समेत कई राज्यों से आए हस्तशिल्पियों ने करीब 50 स्टॉल लगाए। यहां जूट बैग, जरी वर्क, एम्ब्रॉयडरी, बांस शिल्प, कलमकारी, बनारसी साड़ी, मीनाकारी, ज्वेलरी, पेंटिंग, क्ले और क्रॉकरी, लेदर आर्ट, तोरण आर्ट, दरी-बेडशीट और लकड़ी के खिलौने सहित पारंपरिक हस्तशिल्प प्रदर्शित किए गए।

कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने स्टॉलों पर संबंधित कारीगरों और उनके राज्यों के नाम स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल कारीगरों को बाजार मिलता है, बल्कि आमजन को भी भारत की समृद्ध कला और संस्कृति के करीब जाने का अवसर मिलता है। उन्होंने गुनावासियों से अपील की कि अधिक से अधिक लोग आएं, हस्तशिल्प को देखें, सराहें और पसंद आने पर खरीदारी करें।

प्रदर्शनी ने कई हस्तशिल्पियों की जिंदगी बदलने की कहानी भी बताई। गुजरात से आए मोनू गुजराती ने कहा कि पहले उनकी स्थिति कठिन थी, लेकिन इस मंच के मिलने से आमदनी में सुधार हुआ। बनारस से आए जलालुद्दीन अंसारी ने बताया कि अब उन्हें ग्राहक तक सीधी पहुंच मिल रही है और बीच का मार्जिन बच रहा है। राजस्थान के जयपुर से आए नीरज कुमार सैनी और नागपुर की शकुन ठाकुर ने भी अपनी आमदनी में बढ़ोतरी की कहानी साझा की।

पश्चिम बंगाल के बप्पा दास और सेवोसी दे ने बताया कि पहले गांव-गांव जाकर सामान बेचना मुश्किल था, लेकिन अब सीधे बाजार तक पहुंच बन गई है। गुना के स्थानीय लोग भी इस पहल से प्रभावित नजर आए। महेंद्र नायक ने कहा कि हाथों की कलाकारी आम जनता तक पहुंचनी चाहिए। गायत्री शर्मा ने बताया कि कारीगरों को रोजगार मिला है और ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद।

उपायुक्त सहकारिता मुकेश जैन ने आमजन से अपील की कि यह प्रदर्शनी 16 फरवरी तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक प्रताप छात्रावास, मेन रोड, गुना में आयोजित रहेगी। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोग आएं, हस्तशिल्प का लाभ उठाएं और देश की पारंपरिक कला को प्रोत्साहित करें।