इन जिलों में ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, भोपाल, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा, उज्जैन, रतलाम, नीमच, मंदसौर, निवाड़ी, टीकमगढ़, सागर, दमोह, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर शामिल हैं। मौसम विभाग के अनुसार 8 और 9 अप्रैल को भी ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग के जिलों में इस सिस्टम का असर बना रहेगा।
प्रदेश में तेज हवाएं भी चलेंगी। कुछ जिलों में हवा की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि अन्य क्षेत्रों में यह 30 से 40 किमी प्रतिघंटा रहने का अनुमान है। आमतौर पर दोपहर के बाद मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। वहीं, 11 अप्रैल को उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिसका प्रभाव मध्य प्रदेश के मौसम पर भी पड़ सकता है।
इससे पहले 4 से 6 अप्रैल के बीच प्रदेश में मौसम की तेज गतिविधियां देखी गई थीं। 4 अप्रैल को 14 जिलों में ओलावृष्टि हुई थी, जबकि 39 जिलों में तेज आंधी और बारिश दर्ज की गई। इसके बाद रविवार और सोमवार को भी कई स्थानों पर बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रहा। मौसम विभाग ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि कुछ इलाकों में आंधी की रफ्तार 50 से 60 किमी प्रतिघंटा तक जा सकती है, जबकि बाकी जगहों पर यह 30 से 40 किमी प्रतिघंटा रहेगी।
आमतौर पर अप्रैल और मई को प्रदेश में भीषण गर्मी के महीने माना जाता है, लेकिन इस बार मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मार्च के दूसरे पखवाड़े में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था, लेकिन महीने के आखिरी दिनों में पश्चिमी विक्षोभ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल के पहले पखवाड़े में भी मौसम का यही मिला-जुला असर जारी रहने की संभावना है।
