घटना Rewa-Itwari Express की है, जहां एसी कोच में एक महिला का पर्स छीनने की कोशिश के दौरान आरोपी आरपीएफ की नजर में आ गया। जैसे ही ट्रेन सिहोरा रोड स्टेशन के पास धीमी हुई, आरोपी चेन पुलिंग कर ट्रेन से कूद गया और मौके से भागने लगा। आरपीएफ जवानों ने पीछा किया तो वह खितौला क्षेत्र के एक गहरे तालाब में जा कूदा।
तालाब में छिपकर बनाया अनोखा प्लान
पुलिस और गोताखोरों की टीम ने जब तलाश शुरू की, तो आरोपी कहीं नजर नहीं आया। बाद में पता चला कि उसने खुद को पूरी तरह पानी में डुबो रखा था और केवल कमल की नाल के जरिए सांस ले रहा था। घनी काई और अंधेरे की वजह से उसे ढूंढना बेहद मुश्किल हो गया। करीब 5 घंटे की मशक्कत के बाद गोताखोरों ने उसे पकड़ लिया।
‘सनी’ नाम से खुली पहचान की गुत्थी
गिरफ्तारी के बाद आरोपी लगातार पुलिस को गुमराह करता रहा। उसने अपना नाम बबलू और पता चंडीगढ़ बताया। लेकिन आरपीएफ थाना प्रभारी को शक हुआ और उन्होंने पुराने रिकॉर्ड खंगाले। जैसे ही उन्होंने उसे ‘सनी’ नाम से पुकारा, आरोपी घबरा गया और अपनी असली पहचान बता दी।
400 से ज्यादा चोरियों का मास्टरमाइंड
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी का असली नाम Harvinder Singh है, जिसकी उम्र 32 साल है और वह उत्तर प्रदेश के बिजनौर का रहने वाला है। वह देशभर में 400 से ज्यादा चोरी की वारदातों को अंजाम दे चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि वह 2017 में अपने इलाके में निर्दलीय पार्षद भी रह चुका है।
ट्रेन में चोरी का मास्टर प्लान
आरोपी का तरीका भी बेहद शातिर था। वह अक्सर एसी कोच को निशाना बनाता था और बिना टिकट सफर करता था। टीसी से बचने के लिए बाथरूम में छिप जाता और मौका मिलते ही यात्रियों के कीमती सामान पर हाथ साफ कर देता। 2018 में उसके पास से करीब 70 लाख रुपए के हीरे-जवाहरात भी बरामद किए गए थे।
कई राज्यों की पुलिस को थी तलाश
हरविंदर सिंह के खिलाफ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों में मामले दर्ज हैं। वह हर वारदात के बाद सिम बदल लेता था और पहचान छिपाने के लिए कोई आईडी अपने पास नहीं रखता था। फिलहाल पुलिस और आरपीएफ उससे अन्य मामलों में पूछताछ कर रही है।
