शिक्षकों की पात्रता परीक्षा पर सरकार सुप्रीम कोर्ट में रखेगी पक्ष, शिक्षा मंत्री ने दिया भरोसा


भोपाल । भोपाल में मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ और शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह से मुलाकात की और शिक्षकों की पात्रता परीक्षा को लेकर अपनी चिंताओं और सुझावों से अवगत कराया। प्रतिनिधि मंडल ने शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश के शिक्षकों का पक्ष मजबूती से रखे।

इस पर शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने आश्वस्त किया कि सरकार शिक्षकों के हितों के प्रति पूरी तरह सजग है। उन्होंने कहा कि तकनीकी एवं विधि सम्मत कार्यवाही पूरी होने के उपरांत राज्य सरकार शीघ्र ही उच्चतम न्यायालय में शिक्षकों का पक्ष रखेगी और किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में शिक्षकों के विपरीत निर्णय नहीं लिया जाएगा।

प्रदेश कर्मचारी संघ के प्रवक्ता डॉ. अनिल भार्गव वायु ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से लिया गया है और सरकार का रुख शिक्षकों के हित में ही रहेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का अधिकार और उनके भविष्य की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।

प्रतिनिधिमंडल में भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौड़ राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत श्रीवास्तव और प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि यह बैठक शिक्षकों और सरकार के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम साबित हुई।

मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश के समस्त शिक्षक एकजुट हैं और अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह सजग हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार शिक्षकों के हितों की रक्षा करते हुए न्याय दिलाने में कोई कमी नहीं छोड़ेगी।

शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौड़ ने कहा कि शिक्षकों का पक्ष पूरी मजबूती से रखा जाएगा और हमें पूर्ण विश्वास है कि सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह ने भी इस आश्वासन को दोहराया और कहा कि सरकार के सकारात्मक रुख ने प्रदेश के शिक्षकों में विश्वास को मजबूत किया है।

शिक्षकों ने यह स्पष्ट किया कि वे एकजुट हैं और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। प्रतिनिधि मंडल ने शिक्षा मंत्री से यह भी कहा कि पात्रता परीक्षा और उससे जुड़े अन्य मुद्दों में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी न की जाए।

शिक्षकों और सरकार के बीच यह संवाद प्रक्रिया यह संदेश देती है कि राज्य प्रशासन शिक्षकों के हितों के प्रति संवेदनशील है और उनकी समस्याओं का समाधान विधि सम्मत तरीके से सुनिश्चित किया जाएगा। इससे प्रदेश के शिक्षक अपने अधिकारों की रक्षा के प्रति आश्वस्त हैं और सुप्रीम कोर्ट में अपने पक्ष के न्यायपूर्ण निर्णय की पूरी उम्मीद रखते हैं।