प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महिला सशक्तिकरण के संकल्प और मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में उद्योग और स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 24.34 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों में से लगभग 4.11 लाख इकाइयों का संचालन महिलाओं द्वारा किया जा रहा है, जो करीब 17 प्रतिशत हिस्सेदारी को दर्शाता है।
स्टार्टअप क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। कुल 7264 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में से 3476 स्टार्टअप महिलाओं द्वारा संचालित हैं, जो लगभग 48 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह आंकड़ा देश में महिला उद्यमिता की मजबूत स्थिति को दर्शाता है और प्रदेश को स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करता है।
एमएसएमई विकास नीति 2025 के तहत महिला उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जिन महिला उद्यमियों द्वारा संयंत्र और मशीनरी में निवेश किया जाता है, उन्हें ₹10 करोड़ तक के निवेश पर अधिकतम 48 प्रतिशत तक पूंजी अनुदान का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की महिलाओं के लिए यह सहायता बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक की गई है, जबकि सामान्य वर्ग के लिए यह 40 प्रतिशत निर्धारित है। यह प्रावधान महिलाओं को बड़े स्तर पर उद्योग स्थापित करने के लिए प्रेरित कर रहा है।
इसी तरह स्टार्टअप नीति 2025 में भी महिलाओं के लिए विशेष वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। महिला उद्यमियों को 18 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता दी जाती है, जिसमें प्रति ट्रॉंच ₹18 लाख तक और कुल मिलाकर ₹72 लाख तक की सहायता शामिल है। वहीं अन्य स्टार्टअप्स के लिए यह सीमा 15 प्रतिशत या ₹15 लाख तक सीमित है।
इन नीतियों के चलते मध्यप्रदेश में महिला उद्यमिता को नई गति मिली है और राज्य सरकार इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देख रही है। सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से आने वाले समय में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और भी मजबूत होगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।
