उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में मंदिर विस्थापन और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हालात उस समय बेकाबू हो गए जब पंचमपुरा इलाके में दो पक्ष आमने सामने आ गए और मामूली विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया सड़क चौड़ीकरण के तहत नगर निगम द्वारा की जा रही कार्रवाई के बीच शुरू हुआ विरोध देखते ही देखते पथराव में बदल गया जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा तफरी का माहौल बन गया
जानकारी के अनुसार नगर निगम की टीम पंचमपुरा क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण का कार्य कर रही थी इसी क्रम में एक मंदिर और उसके आसपास बने अतिक्रमण को हटाने की तैयारी की जा रही थी इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर पहले ही सहमति बनाने की कोशिश की गई थी जहां कुछ रहवासियों ने मंदिर विस्थापन के लिए हामी भर दी थी वहीं कॉलोनी के एक परिवार ने इसका विरोध शुरू कर दिया क्योंकि उनका मकान भी इस दायरे में आ रहा था
स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब विरोध कर रहे परिवार ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को मौके पर बुला लिया कार्यकर्ताओं ने पहुंचते ही कार्रवाई को रोकने की कोशिश की इसी बीच वे स्थानीय लोग भी वहां पहुंच गए जो पहले से ही सड़क चौड़ीकरण और मंदिर विस्थापन के पक्ष में थे दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई जो धीरे धीरे तीखी बहस में बदल गई
कुछ ही देर में हालात पूरी तरह बिगड़ गए और दोनों ओर से पथराव शुरू हो गया अचानक हुए इस घटनाक्रम से इलाके में भगदड़ जैसे हालात बन गए लोग इधर उधर भागने लगे और दुकानें तक बंद हो गईं स्थिति को बिगड़ता देख नगर निगम की टीम को अपनी कार्रवाई बीच में ही रोकनी पड़ी
मौके पर मौजूद पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला और दोनों पक्षों को अलग करने की कोशिश की लेकिन पथराव के दौरान सब इंस्पेक्टर अंकित बनोध घायल हो गए जिन्हें तुरंत उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है घटना के बाद अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया और इलाके में तैनात किया गया ताकि स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण रखा जा सके
सीएसपी दीपिका शिंदे ने बताया कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान यह विवाद सामने आया था पुलिस को सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पहुंचकर हालात को नियंत्रित किया गया उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और जो भी व्यक्ति दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने इसके लिए इलाके में पुलिस बल की तैनाती जारी रखी गई है
यह घटना एक बार फिर यह संकेत देती है कि विकास कार्यों के दौरान स्थानीय सहमति और संवेदनशील मुद्दों को संभालने में जरा सी चूक किस तरह बड़े विवाद का रूप ले सकती है प्रशासन के सामने अब चुनौती यह है कि वह विकास और सामाजिक संतुलन दोनों को साथ लेकर आगे बढ़े
