छुट्टियां मनाने आए बच्चों पर कहर, गेहूं बचाने की दवा बनी जानलेवा


उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जहां छुट्टियां मनाने नानी के घर आए बच्चों पर जहरीली गैस कहर बनकर टूटी। गेहूं को सुरक्षित रखने के लिए डाली गई कीटनाशक दवा की गैस से दो मासूमों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है।

नानी के घर खुशियां बदली मातम में

हादसा इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी हिल्स क्षेत्र में लालचंद प्रजापत के घर हुआ। जानकारी के मुताबिक, उनकी बेटियां अपने बच्चों के साथ गर्मी की छुट्टियां बिताने मायके आई थीं।

सोमवार रात सभी लोग एक ही कमरे में सोए, जहां करीब चार क्विंटल गेहूं भी रखा था। गेहूं को कीड़ों से बचाने के लिए उसमें कीटनाशक दवा डाली गई थी, जिससे रातभर जहरीली गैस बनती रही।

सुबह बिगड़ी तबीयत, दो मासूमों ने तोड़ा दम

मंगलवार सुबह करीब 9 बजे बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। डेढ़ माह की त्रिशा के मुंह से झाग निकलने लगा, जिसके बाद सभी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया।

इलाज के दौरान त्रिशा ने दम तोड़ दिया, जबकि बुधवार सुबह 4 साल की अनिका उर्फ अन्नू की भी मौत हो गई।

वहीं, जेनिशा की हालत गंभीर होने पर उसे इंदौर रेफर किया गया है, जबकि रेहान और येशु का इलाज उज्जैन में जारी है।

 सल्फास से बनी जहरीली गैस बनी मौत की वजह

डॉक्टरों के अनुसार, गेहूं में डालने वाली सल्फास (कीटनाशक) से जहरीली गैस निकलती है। यदि कमरा बंद हो और वेंटिलेशन न हो, तो यह गैस जानलेवा साबित हो सकती है।

छोटे बच्चों में इसका असर और तेजी से होता है, जिससे दम घुटने और मौत का खतरा बढ़ जाता है।

जांच में जुटी पुलिस और FSL टीम

मामले की सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों की पुष्टि हो सकेगी।

नानी ने खुद को ठहराया जिम्मेदार

इस हादसे के बाद बच्चों की नानी गहरे सदमे में हैं। उन्होंने रोते हुए बताया कि हर साल की तरह इस बार भी गेहूं में दवा डाली थी, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह इतना घातक साबित होगा।

जरूरी सावधानी

विशेषज्ञों का कहना है कि कीटनाशक दवाओं का उपयोग करते समय कमरे को पूरी तरह हवादार रखना चाहिए और जहां दवा रखी हो, वहां सोना बेहद खतरनाक हो सकता है।