समय पर इलाज से टली बड़ी अनहोनी
घटना के तुरंत बाद परिजन अरविंद को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उमरियापान ले गए, जहां समय रहते इलाज मिलने से उनकी जान बच गई। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर चिकित्सा मिलने के कारण उनकी स्थिति अब खतरे से बाहर है। इस दौरान ग्रामीणों ने बरेली निवासी सोनू गौर को बुलाया, जिन्होंने काफी मशक्कत के बाद सांप को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ दिया।
सर्प मित्रों की कमी से बढ़ी चिंता
इस घटना ने क्षेत्र में सर्प मित्रों की कमी और वन विभाग की निष्क्रियता को उजागर कर दिया है। जनपद सदस्य श्रीकांत पटेल ने कहा कि ढीमरखेड़ा इलाका जंगलों और खेतों से घिरा है, जहां गर्मी के मौसम में सांपों का रिहायशी इलाकों में आना आम हो जाता है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर कोई प्रशिक्षित टीम मौजूद नहीं है।
ग्रामीणों की मांग स्थानीय युवाओं को मिले प्रशिक्षण
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से वन विभाग केवल आश्वासन दे रहा है कि युवाओं को सर्प पकड़ने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। फिलहाल सांप निकलने पर दूसरी जगहों से सपेरों को बुलाना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। ग्रामीणों ने कलेक्टर आशीष तिवारी से मांग की है कि स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर आपात स्थिति में त्वरित मदद की व्यवस्था की जाए।
प्रशासन से जल्द समाधान की उम्मीद
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला वन मंडल अधिकारी (DFO) अजय मिश्रा से चर्चा की बात कही गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर एक प्रभावी व्यवस्था बनाई जाएगी, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।
