धूप और आंखों की परेशानी पर सफाई: महाकुंभ की साध्वी हर्षा ने बताया क्यों लगाया चश्मा


नई दिल्ली। महाकुंभ से सोशल मीडिया पर सुर्खियों में आईं साध्वी हर्षा रिछारिया अब औपचारिक रूप से संन्यास लेकर हर्षानंद गिरि बन चुकी हैं। उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में सुमनानंद जी महाराज से दीक्षा लेने के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया है। हालांकि, संन्यास के बाद भी उनके मेकअप और स्टाइल को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।
ग्लैमर से अध्यात्म तक का सफर
हर्षानंद गिरि ने बताया कि उनका यह बदलाव अचानक नहीं बल्कि धीरे-धीरे आया। 2019 के बाद जीवन में आई आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों ने उन्हें अध्यात्म की ओर मोड़ दिया। केदारनाथ मंदिर की यात्राओं ने उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन किया। उनका कहना है कि यह सब “ईश्वर की कृपा” से संभव हुआ और अब उन्हें आध्यात्मिक जीवन में सुकून मिलता है।
मेकअप और चश्मे पर विवाद, साध्वी का जवाब
संन्यास लेने के बाद भी उनके सनग्लास, काजल और लिप बाम इस्तेमाल को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं। इस पर हर्षानंद गिरि ने स्पष्ट कहा कि-

आंखों की समस्या के कारण उन्हें चश्मा लगाना जरूरी है

तेज धूप में रहने के कारण सनस्क्रीन का उपयोग करना पड़ता है

वे केवल बेसिक चीजें जैसे काजल और लिप बाम ही इस्तेमाल करती हैं

उन्होंने कहा कि यह स्वास्थ्य और जरूरत का मामला है, न कि दिखावे का।

दीक्षा के बाद नया विवादमुंडन पर बहस
दीक्षा के बाद एक और विवाद सामने आया, जब सिलीगुड़ी की एक अन्य साध्वी भारती ने परंपरा के अनुसार मुंडन कराया, जबकि हर्षानंद गिरि का पूर्ण मुंडन नहीं हुआ। इस पर अखाड़ा परंपरा से जुड़े लोगों ने बताया कि महिलाओं के मामले में यह निर्णय गुरु की इच्छा पर निर्भर करता है।
परिवार से दूरी, भावुक हुईं साध्वी
हर्षानंद गिरि ने बताया कि संन्यास के बाद उनका परिवार और दोस्तों से संपर्क लगभग टूट गया है। उनकी मां की तबीयत खराब है और भाई भी उनसे बात नहीं कर रहा। इस विषय पर बात करते हुए वे भावुक हो गईं, लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा।
आगे का मिशन: जागरूकता और सामाजिक काम
दीक्षा के बाद हर्षानंद गिरि ने स्पष्ट किया कि वे अब धर्मांतरण और ‘लव जिहाद’ जैसे मुद्दों पर जागरूकता अभियान चलाएंगी। उनका कहना है कि समाज में बेटियों को जागरूक करना और उन्हें मजबूत बनाना जरूरी है, जिसके लिए वे सेमिनार और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेंगी।
गुरु का बयान: परिवर्तन स्वाभाविक
महामंडलेश्वर सुमनानंद जी महाराज ने इस परिवर्तन को स्वाभाविक बताते हुए कहा कि जैसे रत्नाकर से वाल्मीकि बने, वैसे ही हर्षा का हर्षानंद गिरि बनना भी ईश्वरीय प्रक्रिया का हिस्सा है।