बगलामुखी जयंती 2026: मां बगलामुखी की पूजा से मिलती है शत्रुओं पर विजय और संकटों से मुक्ति


नई दिल्ली । हिंदू धर्म में शक्ति उपासना का विशेष महत्व माना जाता है और इन्हीं शक्तियों में दस महाविद्याओं में से एक मां बगलामुखी की जयंती को अत्यंत पवित्र अवसर के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व आज श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से मां बगलामुखी की पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और साधक को विशेष सिद्धि और सफलता प्राप्त होती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां बगलामुखी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। देवी बगलामुखी को स्तंभन शक्ति की देवी कहा जाता है जो शत्रुओं की शक्ति को रोकने और नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने की क्षमता रखती हैं। कहा जाता है कि सच्चे मन से की गई उनकी पूजा से भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार मां बगलामुखी का प्राकट्य एक भयंकर तूफान को शांत करने के लिए हुआ था। देवी ने अपनी दिव्य शक्ति से विनाशकारी शक्तियों को नियंत्रित कर सृष्टि की रक्षा की थी। इसी कारण उन्हें संकट निवारण और सुरक्षा की देवी के रूप में पूजा जाता है।

इस दिन की पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी मानी जाती है जो कोर्ट कचहरी के मामलों में सफलता चाहते हैं या जिनके जीवन में शत्रु बाधाएं या मानसिक तनाव अधिक है। माना जाता है कि मां बगलामुखी की आराधना से वाणी पर नियंत्रण प्राप्त होता है और विरोधी शांत हो जाते हैं।

पूजा के शुभ मुहूर्त की बात करें तो सुबह 7 बजकर 24 मिनट से 9 बजकर 2 मिनट तक चौघड़िया मुहूर्त शुभ माना गया है। इसके बाद 9 बजकर 3 मिनट से 10 बजकर 42 मिनट तक अमृत काल रहेगा। दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक शुभ चौघड़िया मुहूर्त है जबकि शाम 6 बजकर 6 मिनट से 7 बजकर 38 मिनट तक प्रदोष काल पूजा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

पूजा विधि के अनुसार इस दिन प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है क्योंकि मां बगलामुखी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। पूजा में पीले फूल हल्दी चने की दाल और पीले प्रसाद का विशेष महत्व होता है। देवी की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर दीपक जलाकर पूजा प्रारंभ की जाती है। इसके बाद हल्दी से तिलक कर पीले पुष्प अर्पित किए जाते हैं।

भक्त श्रद्धा पूर्वक देवी के मंत्रों का जाप करते हैं और अंत में आरती कर प्रसाद वितरित किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन की गई साधना और पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी प्रकार के संकट दूर हो जाते हैं। कुल मिलाकर मां बगलामुखी जयंती का यह पावन अवसर भक्तों के लिए शक्ति विश्वास और विजय का प्रतीक माना जाता है जो जीवन में नकारात्मकता को समाप्त कर सफलता और शांति प्रदान करता है।