धर्मेंद्र के भाई वीरेंद्र सिंह की मौत का वो अनसुलझा रहस्य..


नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के ‘ही-मैन’ कहे जाने वाले धर्मेंद्र के परिवार का फिल्म जगत में गहरा प्रभाव रहा है, लेकिन उनके एक भाई की कहानी जितनी गौरवशाली थी, उसका अंत उतना ही दर्दनाक रहा। धर्मेंद्र के चचेरे भाई वीरेंद्र सिंह देओल, जिन्हें इंडस्ट्री में सुभाष ढडवाल के नाम से भी जाना जाता था, 80 के दशक में पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े सुपरस्टार थे। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि उस दौर में पंजाबी सिनेमा का मतलब ही वीरेंद्र सिंह हुआ करता था। वीरेंद्र और धर्मेंद्र साथ ही पले-बढ़े थे और जहां एक ओर धर्मेंद्र मुंबई में अपनी धाक जमा रहे थे, वहीं वीरेंद्र ने पंजाब में अपनी एक ऐसी पहचान बना ली थी जिसे आज भी लोग याद करते हैं।

वीरेंद्र सिंह ने साल 1975 में अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की थी। उन्होंने ‘तेरी मेरी एक जिन्दड़ी’ जैसी फिल्मों से अपनी पहचान बनाई और देखते ही देखते ‘बंटवारा’, ‘लम्भरदारनी’ और ‘बलबीरो भाभी’ जैसी एक के बाद एक ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। वे केवल एक शानदार अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक कुशल निर्देशक और निर्माता भी थे। अपने 12 साल के छोटे से करियर में उन्होंने लगभग 25 फिल्में बनाईं और खास बात यह थी कि उनकी लगभग हर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई। पंजाबी सिनेमा के साथ-साथ उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी हाथ आजमाया और वहां भी उन्हें सफलता मिली।

उनकी सफलता और बढ़ते कदम तब थम गए जब दिसंबर 1988 में लुधियाना के पास एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उनकी सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। उस समय वे अपनी नई फिल्म ‘जट्ट ते जमीन’ के एक सीन की शूटिंग कर रहे थे। महज 40 साल की उम्र में वीरेंद्र सिंह की इस आकस्मिक मौत ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उनकी हत्या का कातिल आज तक नहीं पकड़ा गया। सालों बीत जाने के बाद भी यह मामला एक अनसुलझी गुत्थी बना हुआ है।

उनकी मौत के पीछे की वजहों को लेकर आज भी कई तरह की चर्चाएं होती हैं। कुछ जानकारों का मानना है कि उनकी बढ़ती लोकप्रियता ही उनकी दुश्मन बन गई और ईर्ष्या के चलते उन्हें रास्ते से हटा दिया गया। वहीं, कुछ लोग इसे उस दौर के उग्रवाद से जोड़कर देखते हैं। वजह जो भी रही हो, लेकिन उस एक दिन ने भारतीय सिनेमा से एक ऐसा सितारा छीन लिया, जो अगर आज जीवित होता तो शायद हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े दिग्गजों को टक्कर दे रहा होता। वीरेंद्र सिंह की कमी को आज भी उनके प्रशंसकों और परिवार द्वारा महसूस किया जाता है, और उनकी फिल्में उनके महान कलाकार होने की गवाही देती हैं।