हेमा मालिनी ने भारी मन से धर्मेंद्र के काम के प्रति उनके जुनून और समर्पण को याद किया। उन्होंने बताया कि किस तरह धर्मेंद्र कैमरे के साथ एक अनूठा रिश्ता साझा करते थे, जैसे वह उनका कोई सगा जीवनसाथी हो। उनकी नजर में धर्मेंद्र सिर्फ एक महान अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान थे जिन्होंने अपने व्यवहार और सादगी से करोड़ों दिलों को जीता। हेमा ने साझा किया कि धर्मेंद्र हमेशा मानते थे कि फिल्मों के जरिए वह सीधे जनता के दिलों से जुड़ते हैं। उनके लिए कला केवल पेशा नहीं, बल्कि दर्शकों के प्रति उनके असीम प्यार को व्यक्त करने का एक जरिया थी, और यही कारण था कि उनकी हर भूमिका जीवंत लगती थी।
अपने साझा जीवन को याद करते हुए हेमा मालिनी ने खुद को बेहद भाग्यशाली बताया। उन्होंने रुंधे हुए गले से कहा कि धर्मेंद्र के साथ बिताया गया हर पल एक आशीर्वाद की तरह था। एक दोस्त, एक अभिनेता और एक पिता के रूप में उन्होंने न केवल परिवार बल्कि पूरी इंडस्ट्री को प्रेरित किया। 1970 के दशक में शुरू हुआ उनका यह सफर कई उतार-चढ़ाव और सामाजिक चुनौतियों से होकर गुजरा, लेकिन दोनों के बीच का प्रेम कभी कम नहीं हुआ। ‘शोले’ और ‘सीता और गीता’ जैसी कालजयी फिल्मों में साथ काम करने के दौरान उनकी केमिस्ट्री ने पर्दे पर जो जादू बिखेरा, वह आज भी दर्शकों के जेहन में ताजा है।
जीवन के इस पड़ाव पर हेमा मालिनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके बिना भविष्य को जीने की है। उन्होंने अपनी व्यथा साझा करते हुए कहा कि उनके जाने के बाद हर दिन एक खालीपन का एहसास कराता है और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आगे का सफर वह कैसे तय करेंगी। हालांकि हेमा मालिनी अब राजनीति में सक्रिय हैं और फिल्मों से दूरी बना चुकी हैं, लेकिन उनके दिल के किसी कोने में आज भी वही ‘ड्रीम गर्ल’ बसी है जो अपने ‘हीमैन’ की यादों के सहारे अपनी जिंदगी की शाम गुजार रही है। यह भावुक संबोधन इस बात का प्रमाण था कि सच्चा प्रेम समय और मृत्यु की सीमाओं से परे होता है।
