Author: bharati

  • CG: HC का बड़ा फैसला…. जग्गी हत्याकांड में पूर्व CM अजीत जोगी के बेटे को आजीवन कारावास

    CG: HC का बड़ा फैसला…. जग्गी हत्याकांड में पूर्व CM अजीत जोगी के बेटे को आजीवन कारावास


    बिलासपुर।
    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने साल 2003 के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी (Former Chief Minister Ajit Jogi) के बेटे अमित जोगी (Amit Jogi) दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा (Life Sentence) सुनाई है। हाईकोर्ट ने बीते गुरुवार को अमित जोगी को इस मामले में दोषी करार दिया था। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा अमित जोगी को सजा सुनाया जाना 23 सालों से चल रही कानूनी लड़ाई में एक बड़ा मोड़ है।


    सजा के साथ जुर्माना भी लगाया

    चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया। बेंच ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।


    निचली अदालत ने जोगी को कर दिया था बरी

    हाईकोर्ट का आज का फैसला 31 मई 2007 को रायपुर की स्पेशल सीबीआई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय को पूरी तरह पलटता है, जिसमें अमित जोगी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था, जबकि चिमन सिंह, याह्या ढेबर, अभय गोयल और फिरोज सिद्दीकी समेत अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था।


    मुख्य साजिशकर्ता को छोड़ना न्यायसंगत नहीं : हाईकोर्ट

    हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि एक ही गवाही के आधार पर कुछ आरोपियों को सजा देना और कथित मुख्य साजिशकर्ता को छोड़ देना न्यायसंगत नहीं है। हाईकोर्ट ने इसे विधिक दृष्टि से त्रुटिपूर्ण बताया।


    SC के आदेश पर दोबारा खुला था मामला

    गौरतलब है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दोबारा खोला गया था, जिसके बाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के दौरान सतीश जग्गी की ओर से वकील बीपी शर्मा ने गंभीर तर्क प्रस्तुत किए। उन्होंने अदालत को बताया कि यह हत्याकांड उस समय की राज्य सरकार के संरक्षण में रचा गया षड्यंत्र था। दलील दी गई कि जब सीबीआई ने जांच शुरू की, तब प्रभावशाली हस्तक्षेप के चलते महत्वपूर्ण सबूतों को मिटा दिया गया। ऐसे मामलों में केवल भौतिक साक्ष्यों की कमी के आधार पर आरोपियों को राहत नहीं दी जा सकती, बल्कि पूरे षड्यंत्र की कड़ियों को समझना आवश्यक है।


    क्या था मामला

    उल्लेखनीय है कि 4 जून 2003 को राष्ट्रवादी कांग्रेस (राकांपा) नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस प्रकरण में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह बाद में सरकारी गवाह बन गए थे। शेष 28 आरोपियों को सजा मिली थी, जबकि अमित जोगी को ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था। बाद में रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। शुरुआती दौर में अमित जोगी को राहत मिली, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पुनर्विचार के लिए हाईकोर्ट भेज दिया था।


    विद्याचरण शुक्ल के करीबी थे जग्गी

    कारोबारी और राजनेता रामावतार जग्गी, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। कांग्रेस से अलग होकर जब शुक्ल ने राकांपा का रुख किया, तब जग्गी भी उनके साथ जुड़े और उन्हें छत्तीसगढ़ में पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया।


    इन लोगों को ठहराया था दोषी

    जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत और विश्वनाथ राजभर को दोषी पाया गया था।

  • Rajasthan: सलूम्बर जिले के दो गांवों में रहस्यमयी बीमारी से 5 बच्चों की मौत…

    Rajasthan: सलूम्बर जिले के दो गांवों में रहस्यमयी बीमारी से 5 बच्चों की मौत…


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) के सलूम्बर जिले (Salumber district) के 2 गांवों में रहस्यमयी बीमारी (Mysterious Disease) से 5 बच्चों की मौत हो गई है। इसको लेकर सूबे के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Chief Minister Bhajanlal Sharma) के निर्देश पर उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज और जयपुर से विशेषज्ञों की टीमें जांच के लिए भेजी गई हैं। मुख्य सचिव और स्वास्थ्य विभाग ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों की कड़ी निगरानी करने के आदेश दिए हैं। बुखार के लक्षणों वाले बच्चों की सघन स्क्रीनिंग करने को कहा गया है।

    आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सलूम्बर जिले के दो गांवों में रहस्यमयी बीमारी से पांच बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई है। इसको लेकर राजस्थान सरकार की ओर से जिला प्रशासन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों को वस्तुस्थिति पर नजर रखने को कहा गया है। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में बुखार के लक्षण वाले बच्चों की सघन मेडिकल जांच कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।


    मांगी रिपोर्ट

    रहस्यमय बीमारी के फैलने की बात सामने आने पर राजस्थान सरकार ने आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर के चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम गठित कर गहन जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों ने बताया कि सलूम्बर में बच्चों की मौत का मामला सामने आने पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने तत्काल अधिकारियों को वस्तुस्थिति पता करने को कहा है।


    भेजी विशेषज्ञों की टीम

    सीएम ने अधिकारियों से मौत की वजहों का पता लगाने के साथ ही बीमारी की रोकथाम के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। यही नहीं राज्य का स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में आया है। उसने तत्काल प्रभाव से आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर के चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम गठित की है। साथ ही टीमों को बीमारी से प्रभावित गांवों में भेजा है।


    बच्चों की मौत का कारण पता करेंगी

    विशेषज्ञों की ये टीमें बच्चों की मौत का कारण पता करेंगी। साथ ही बीमारी से बचाव के संबंध में भी जरूरी कार्यवाही सुनिश्चित करेंगी। स्वास्थ्य निदेशालय, जयपुर से भी एक टीम भेजी गई है। मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने भी सोमवार रात को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मामले की पूरी जानकारी ली।


    रोकथाम के उपाय लागू करने के निर्देश

    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन के साथ अन्य अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने को कहा है। साथ ही मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के लिए एंटीलार्वा, सोर्स रिडक्शन, फोगिंग के साथ अन्य रोकथाम के उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं।


    टीमें तैनात करने के आदेश

    चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने सलूम्बर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे प्रभावित गांवों और आस-पास के क्षेत्रों में स्वास्थ्यकर्मियों की टीमें तैनात करें। यही नहीं बुखार के लक्षण वाले बच्चों की गहन जांच सुनिश्चित करें। किसी भी बच्चे में लक्षण मिलें तो तत्काल उपचार उपलब्ध कराएं। गंभीर बीमार बच्चों को तत्काल जिला चिकित्सालय या मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में रेफर करें।

  • भोजशाला मामले में HC ने की सुनवाई… हिन्दु पक्ष का दावा- 1935 के बाद हुए अवैध कब्जे

    भोजशाला मामले में HC ने की सुनवाई… हिन्दु पक्ष का दावा- 1935 के बाद हुए अवैध कब्जे


    इंदौर।
    धार (Dhar) स्थित ऐतिहासिक भोजशाला (Historic Bhojshala Complex) परिसर को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर बेंच में सोमवार को सुनवाई हुई। हिंदू पक्ष (Hindu side) के वकील विष्णु शंकर जैन (Vishnu Shankar Jain) ने इसे 10वीं शताब्दी की ऐतिहासिक धरोहर बताते हुए दावा किया कि 1935 के बाद यहां अवैध गतिविधियां शुरू हुईं। उन्होंने एएसआई सर्वे और स्तंभों की मूर्तिकला को साक्ष्य के रूप में पेश किया। अदालत ने कहा है कि वह मामले की नियमित सुनवाई करेगी। सभी पक्षों को विस्तार से सुना जाएगा। मंगलवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।


    हिंदू पक्ष ने 10वीं से 11वीं शताब्दी की ऐतिहासिक धरोहर बताया

    हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अपना पक्ष रखते हुए भोजशाला को 10वीं से 11वीं शताब्दी की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर बताया। इसके पक्ष में उनकी ओर से कई तर्क पेश किए गए। विष्णु शंकर जैन ने 1935 में लगाए गए एक अहम बोर्ड का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस समय परिसर के ऐतिहासिक तथ्यों को स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया था।


    1935 के बाद से हुई विवादित गतिविधियों की शुरुआत

    विष्णु शंकर जैन ने दावा किया कि सन 1935 के बाद से इस परिसर पर अवैध कब्जों और विवादित गतिविधियों की शुरुआत हुई। इन विवादित गतिविधियों ने विवाद को जन्म दिया। समूचा विवाद 1935 के बाद के बाद का है। विष्णु शंकर जैन ने एएसआई की सर्वे रिपोर्टों को भी अदालत के सामने रखा। इसके साथ ही उन्होंने स्तंभों पर उकेरी गई मूर्तिकला और ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कई महत्वपूर्ण तथ्य पेश किए।


    अदालत की दो-टूक, सभी पक्षों को देंगे पूरा मौका

    हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है। अत: इसमें सभी पक्षों को सुना जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होगा और हर पक्ष को अपनी दलीलें रखने का पूरा मौका दिया जाएगा। मामले में मंगलवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।


    1935 से पहले भी होती थी पूजा

    महाराजा भोज सेवा संस्थान की ओर से हाईकोर्ट वकील श्रीष दुबे ने बताया कि सोमवार से इंदौर बेंच में फाइनल सुनवाई की शुरुआत हुई है। विष्णु शंकर जैन की ओर से दोपहर ढाई बजे से साढ़े जार बजे तक बहस चली है। यह बहस कल फिर ढाई बजे से शुरू होगी। विष्णु शंकर जैन की बहस अभी बाकी है यह कल भी चलेगी। विष्णु शंकर जैन की ओर से पिटिशन के पक्ष में दलीलें रखी गईं। हिंदू पक्ष की ओर से बताया गया है कि यहां 1935 से पहले भी पूजा होती थी।

  • पति की उम्र 40 साल… MP HC ने 19 साल की पत्नी को प्रेमी के साथ रहने की दी इजाजत

    पति की उम्र 40 साल… MP HC ने 19 साल की पत्नी को प्रेमी के साथ रहने की दी इजाजत


    ग्वालियर।
    जगह मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की ग्वालियर बेंच (Gwalior Bench)। 19 साल की महिला (19-year-Old Woman) कोर्टरूम के अंदर है। बाहर उसके माता-पिता, पति और प्रेमी खड़े हैं। अंदर हो रही सुनवाई का हर कोई बेसब्री से इंतजार कर रहा है। अदालत के सामने महिला ने ‘साथ रहने के अधिकार’ का इस्तेमाल करते हुए कहा- “मैं बालिग हूँ। मैं अपनी मर्ज़ी से जी रही हूँ। मैं अपने पति या अपने माता-पिता के साथ नहीं रहना चाहती।” जानिए क्या है मामला और इसे लेकर क्यों चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    पति, दूसरे आदमी ने अवैध रूप से पत्नी को रखा
    दरअसल मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच में अवधेश नामक शख्स ने हेबियस कॉर्पस पिटीशन दायर की थी। आसान शब्दों में कहें, तो किसी व्यक्ति को कोर्ट के सामने पेश करो।ये याचिका पति ने अपनी पत्नी के खिलाफ दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि उसकी पत्नी को अनुज कुमार नामक युवक ने अवैध रूप से अपने पास रखा हुआ है। कोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने महिला को खोजकर एक वन-स्टॉप सेंटर में रखा और बाद में अदालत के सामने पेश किया। सुनवाई के दौरान माता-पिता, पति और लवर मौजूद थे।


    पति के बीच 21 साल का अंतर, लवर के साथ रहूंगी

    सुनवाई के दौरान जजों ने महिला से उसकी इच्छा पूछी, तो उसने साफ शब्दों में कहा- वह बालिग है और अपनी मर्जी से रह रही है। उसने जोर देते हुए कहा- वह अपने पति या माता-पिता के साथ नहीं रहना चाहती। महिला ने कोर्ट को बताया- उसकी शादीशुदा जिंदगी ठीक नहीं चल रही है। अपने और पति के बीच 21 साल के उम्र के अंतर का जिक्र करते हुए कहा- यह रिश्ता संतुलित नहीं था। महिला ने अपने पति पर प्रताड़ना के आरोप भी लगाए और कहा कि वह अपने प्रेमी अनुज कुमार के साथ रहना चाहती है।


    काउंसलिंग के बाद भी महिला का फैसला रहा अटल

    कोर्ट ने महिला को काउंसलिंग के लिए भेजा, ताकि वह अपने फैसले पर दोबारा विचार कर सके। हालांकि काउंसलिंग के बाद भी महिला अपने फैसले पर अडिग रही। उसके लवर ने भी कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह महिला की देखभाल करेगा और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने कहा कि जब यह क्लियर हो गया कि महिला को किसी प्रकार की अवैध हिरासत में नहीं रखा गया है, तो याचिका का आधार ही खत्म हो जाता है। कोर्ट ने महिला को वन-स्टॉप सेंटर से रिहा कर प्रेमी के साथ जाने की अनुमति दे दी।

    6 महीने तक महिला को मिली सुरक्षा
    हालांकि, कोर्ट ने महिला की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए छह महीने तक निगरानी का निर्देश भी दिया। “शौर्य दीदी” नामित अधिकारी इस दौरान महिला के संपर्क में रहेंगे और उसकी सुरक्षा व भलाई सुनिश्चित करेंगे।

    आपको बताते चलें कि हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी एक मामले में कहा था कि यदि एक शादीशुदा आदमी किसी बालिग महिला के साथ उसकी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो इसे अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि सामाजिक नैतिकता और कानून अलग-अलग हैं और अदालतें नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती हैं।

  • MP: HC का बड़ा फैसला… मैटरनिटी लीव के लिए 80 दिन की कार्य अवधि की अनिवार्यता पर लगाई रोक

    MP: HC का बड़ा फैसला… मैटरनिटी लीव के लिए 80 दिन की कार्य अवधि की अनिवार्यता पर लगाई रोक


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि सरकारी संस्थानों (Government Institutions) में काम करने वाली महिला कर्मचारियों (Women Employees) को मैटरनिटी लीव (Maternity Leave) का लाभ पाने के लिए 80 दिनों की अनिवार्य कार्य अवधि की शर्त पूरी करने की जरूरत नहीं है। जस्टिस विशाल धगत की पीठ ने कहा कि ये नियम केवल निजी कार्यस्थलों पर लागू होती है, न कि राज्य सरकार के प्रतिष्ठानों पर।

    कोर्ट ने कहा, मैटरनिटी लीव का लाभ उठाने के लिए 12 महीनों में 80 दिन काम करने की अनिवार्य शर्त राज्य सरकार के प्रतिष्ठानों पर लागू नहीं होगी। राज्य अपने नागरिकों की भलाई के लिए उपाय करने के लिए बाध्य है। यह आदेश राज्य सरकार पर लागू होगा और मातृत्व अवकाश का लाभ उठाने के लिए पिछले 12 महीनों में 80 दिन काम करने की अनिवार्य शर्त राज्य सरकार को छोड़कर अन्य प्रतिष्ठानों पर अधिनियम के अनुसार लागू होगी।

    बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने कहा, राज्य का कर्तव्य है कि वह सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय प्रदान करें। सामाजिक न्याय में स्वास्थ्य और परिवार के कल्याणकारी उपाय शामिल हैं। भारत के संविधान के अनुच्छेद 38 के अनुसार, राज्य को जनता के कल्याण को बढ़ावा देने की कोशिश करनी चाहिए और भारत के संविधान के अनुच्छेद 39 में कहा गया है कि राज्य को अपनी नीति श्रमिकों, पुरुषों और महिलाओं, विशेष रूप से कम उम्र के बच्चों के स्वास्थ्य और शक्ति की सुरक्षा की दिशा में लगानी चाहिए। भारत के संविधान के अनुच्छेद 39ए के अनुसार, राज्य को समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करना भी आवश्यक है।


    क्या है मामला?

    यह मामला एक गेस्ट टीचर ने दायर किया गया था, जिसे साल 2023 में मैटरनिटी लीव तो दिया गया था, लेकिन अधिनियम की धारा 5(2) का हवाला देते हुए मानदेय देने से मना कर दिया गया था। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता 26 सप्ताह के पेड़ लीव की हकदार है। अदालत ने साफ किया कि इस अवधि के लिए उसे पूरा वेतन दिया जाए, जबकि बाकी अवकाश अवधि को बिना वेतन के माना जा सकता है।

  • हनुमान जी की पूजा: मंगलवार का महाउपाय और सरल उपाय

    हनुमान जी की पूजा: मंगलवार का महाउपाय और सरल उपाय


    नई दिल्ली। हनुमान जी, जिन्हें राम भक्तों में बजरंगी या महाबली संकट मोचन के नाम से जाना जाता है, हिन्दू धर्म में शक्ति, बुद्धि और साहस के प्रतीक हैं। सनातन परंपरा में हनुमान साधना का विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि उनकी कृपा से भय, रोग, बाधाएं और कष्ट दूर होते हैं। मंगलवार को उनकी पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

    1. हनुमान चालीसा का पाठ

    हनुमान जी की महिमा का गुणगान करना उनके प्रसन्न होने का प्रमुख मार्ग है। मंगलवार को हनुमान चालीसा का सात बार पाठ करने से:

    दुर्भाग्य दूर होता है
    मानसिक शांति मिलती है
    सौभाग्य और सफलता प्राप्त होती है
    साधक पर हर समय बजरंगी की कृपा बनी रहती है
    चालीसा पढ़ते समय अपने मनोकामनाओं का ध्यान करें और पूरी श्रद्धा से पढ़ें।

    2. सिंदूर का महाउपाय

    हनुमान जी को सिंदूर बहुत प्रिय है। इसलिए मंगलवार की पूजा में उन्हें सिंदूर का चोला चढ़ाना विशेष फलदायी है।
    सिंदूर अर्पित करते समय मंत्र का उच्चारण करें:

    “सिंदूरं रक्तवर्णं च सिंदूरतिलकप्रिये, भक्तायन दत्तं मया देव सिंदूरं प्रतिगृह्यताम्”

    इस मंत्र का पाठ करते समय अपनी मनोकामनाओं को हृदय में संजोएं। मान्यता है कि सच्चे मन से यह उपाय करने पर हनुमान जी सभी कष्ट दूर करते हैं और इच्छाओं की पूर्ति करते हैं।

    3. भोग और प्रसाद

    हनुमान जी को भोग अर्पित करना भी उनकी प्रसन्नता का मार्ग है। मंगलवार को पूजा करते समय आप निम्न चीजें अर्पित कर सकते हैं:

    बूंदी
    लड्डू
    चूरमा
    गुड़
    चना
    ये सामग्री बजरंगी जी को अत्यंत प्रिय मानी जाती हैं। भोग अर्पित करते समय भक्तों को अपनी श्रद्धा और भावनाओं को पूर्ण रूप से व्यक्त करना चाहिए।

    4. साधारण नियम और मंत्र
    पूजा के समय स्वच्छ कपड़े पहनें और ब्रह्म मुहूर्त या सुबह का समय श्रेष्ठ मानें।
    मंत्र जाप और भोग के साथ मन में किसी भी प्रकार का द्वेष या नकारात्मकता न रखें।
    पूजा के बाद भोग का वितरण कर दें और शांति भाव बनाए रखें।

    मंगलवार को हनुमान जी की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ, सिंदूर का चोला अर्पित करना, प्रिय भोग चढ़ाना, और श्रद्धा भाव से साधना करना अत्यंत फलदायी है। इन उपायों से सभी कष्ट, भय, रोग और बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सफलता, सौभाग्य और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

  • संकट मोचन बालाजी: सालासर की दाढ़ी-मूंछ वाली हनुमान जी की रहस्यमयी कहानी

    संकट मोचन बालाजी: सालासर की दाढ़ी-मूंछ वाली हनुमान जी की रहस्यमयी कहानी

    नई दिल्ली । राजस्थान के चुरू जिले में स्थित सालासर बालाजी धाम भारत का एक अनोखा हनुमान मंदिर है यहां विराजमान हनुमान जी की मूर्ति दाढ़ी-मूंछों वाली है जो पूरे देश में एकमात्र है यही वजह है कि लाखों भक्त सालाना यहां दर्शन करने आते हैं और मानते हैं कि सालासर बालाजी अपनी भक्तों की मनोकामनाएं बहुत जल्दी पूरी करते हैं सालासर बालाजी धाम जयपुर-बीकानेर राजमार्ग पर आसोटा गांव के पास स्थित है यह मंदिर 19वीं शताब्दी में स्थापित हुआ और आज पूरे देश में प्रसिद्ध है यहाँ रोजाना हजारों श्रद्धालु आते हैं खासतौर पर हनुमान जयंती और शरद पूर्णिमा के मेले में मंदिर में भक्तों की भीड़ हमेशा रहती है

    सालासर बालाजी की मूर्ति की खोज की कहानी भी बहुत रोचक है कहा जाता है कि साल 1811 में आसोटा गांव के किसान मोहनदास खेत में हल जोत रहे थे तभी हल किसी नुकीली चीज से टकराया जब उन्होंने खुदाई की तो उन्हें हनुमान जी की मूर्ति मिली मोहनदास उस समय दोपहर का भोजन चूरमा लेकर आए थे उन्होंने उसी चूरमा का भोग अर्पित कर मूर्ति की पूजा की और रात को उन्हें हनुमान जी का सपना आया

    सपने में हनुमान जी मोहनदास को दाढ़ी-मूंछों वाले रूप में दिखाई दिए उन्होंने मोहनदास को निर्देश दिया कि मूर्ति को बैलगाड़ी में रखकर वहीं स्थापित करें जहाँ बैल खुद रुक जाए मोहनदास ने वैसा ही किया और बैलगाड़ी वहीं रुकी जहाँ आज सालासर बालाजी धाम स्थित है चूंकि सपने में हनुमान जी दाढ़ी-मूंछों में दिखाई दिए इसलिए मोहनदास ने मूर्ति का शृंगार उसी रूप में किया यही कारण है कि सालासर बालाजी की मूर्ति पूरे देश में अनोखी मानी जाती है

    भारत के अधिकांश हनुमान मंदिरों में मूर्तियां युवा और बिना दाढ़ी-मूंछ वाली होती हैं लेकिन सालासर बालाजी इस नियम का अपवाद हैं उनकी दाढ़ी-मूंछ उन्हें प्रौढ़, गंभीर और संकट मोचन स्वरूप में प्रस्तुत करती है भक्त मानते हैं कि इस स्वरूप से बालाजी अधिक शक्तिशाली और भक्तों के लिए तुरंत संकट मोचन बन जाते हैं

    सालासर बालाजी धाम में दो प्रमुख मेले लगते हैं पहला मेला हनुमान जयंती पर और दूसरा शरद पूर्णिमा पर इन मेलों में दूर-दूर से भक्त आते हैं यहाँ धार्मिक किताबें हनुमान जी के चित्र चूरमा प्रसाद और पूजा सामग्री उपलब्ध होती है मेले के दौरान मंदिर में भारी भीड़ लगती है

    सालासर बालाजी में नारियल चढ़ाने की अनोखी परंपरा भी है भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर लाल कपड़े में नारियल बांधकर मंदिर परिसर के खेजड़ी पेड़ पर चढ़ाते हैं ये नारियल ना तो फेंके जाते हैं ना जलाए जाते हैं इन्हें मंदिर से करीब 11 किलोमीटर दूर मुरड़ाकिया गांव के खेत में गाड़ दिया जाता है यह परंपरा भक्तों की अटूट श्रद्धा का प्रतीक है

    सालासर बालाजी धाम भक्ति और विश्वास का केंद्र है यहाँ की दाढ़ी-मूंछ वाली मूर्ति भक्तों के हर संकट को दूर करती है और चूरमा प्रसाद हर भक्त के मन को शांति और विश्वास देता है यदि आप जीवन में किसी समस्या से गुजर रहे हैं तो सालासर बालाजी के दर्शन अवश्य करें

  • आज का राशिफल 7 अप्रैल 2026: मेष से लेकर मीन राशि तक, जानें दिन का हाल

    आज का राशिफल 7 अप्रैल 2026: मेष से लेकर मीन राशि तक, जानें दिन का हाल


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, ग्रह-नक्षत्रों की चाल के आधार पर 7 अप्रैल 2026, मंगलवार के लिए राशिफल इस प्रकार है। मंगलवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन की पूजा करने से भय, रोग और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।

    मेष (Aries)

    आज मेष राशि वालों को अच्छी खबर और सफलता मिलने की संभावना है। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और किसी विशेष व्यक्ति से महत्वपूर्ण मुलाकात हो सकती है। शादीशुदा जातकों की लव लाइफ भी अच्छी रहेगी।

    वृषभ (Taurus)

    आज का दिन वृषभ राशि वालों के लिए आर्थिक चुनौती भरा हो सकता है। बड़े खर्चों के कारण बजट प्रभावित हो सकता है। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान दें।

    मिथुन (Gemini)

    मिथुन राशि वालों को ऑफिस में प्रमोशन या नया अवसर मिल सकता है। लेकिन दिन के मध्य में गुप्त शत्रुओं से सतर्क रहें। खर्चों में सावधानी बरतें।

    कर्क (Cancer)

    कर्क राशि का समय मिला-जुला रहेगा। दिन की शुरुआत में मेहनत का पूरा फल मिलेगा और मान-सम्मान बढ़ेगा। दिन के अंत में पैसों के लेन-देन से बचें। शादीशुदा जीवन में खुशियां रहेंगी।

    सिंह (Leo)

    सिंह राशि वालों के लिए दिन उतार-चढ़ाव भरा रहेगा। सुख-सुविधाओं पर खर्च बढ़ सकता है। नौकरीपेशा जातकों को नए अवसर मिल सकते हैं।

    कन्या (Virgo)

    कन्या राशि वालों का दिन शुभ समाचार लेकर आएगा। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा और कमाई के साधनों में वृद्धि होगी। व्यापारियों को लाभ की संभावना है।

    तुला (Libra)

    तुला राशि के लिए दिन की शुरुआत में कुछ बाधाओं और मतभेद देखने को मिल सकते हैं। छात्रों का मन पढ़ाई से भटक सकता है। परिवार में तालमेल बनाए रखें।

    वृश्चिक (Scorpio)

    वृश्चिक राशि वालों का दिन मिला-जुला रहेगा। नौकरीपेशा जातकों को काम का दबाव महसूस होगा। सफलता पाने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है।

    धनु (Sagittarius)

    धनु राशि वालों का आर्थिक बजट बिगड़ सकता है। संतान या परिवार से जुड़ी किसी बात से तनाव हो सकता है। दिन के मध्य में किसी विशेष काम में सफलता मिलने की संभावना है।

    मकर (Capricorn)

    मकर राशि वालों के लिए दिन उतार-चढ़ाव भरा रहेगा। किसी काम में सफलता पाने के लिए मेहनत अधिक करनी पड़ सकती है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले जातकों को अच्छी खबर मिल सकती है।

    कुंभ (Aquarius)

    कुंभ राशि के लिए परिश्रम का फल मिलेगा। दिन के बीच में नौकरीपेशा जातकों को नए अवसर मिलेंगे। खर्चों में सावधानी बरतें और नकारात्मक विचारों से बचें।

    मीन (Pisces)

    मीन राशि वालों को सेहत का ध्यान रखना आवश्यक है। सुख-सुविधाओं पर खर्च बढ़ सकता है और आर्थिक बजट प्रभावित हो सकता है। व्यापारियों को लाभ की संभावना है।

  • सुबह खाली पेट ये 5 मिनट का योग, पाचन से जुड़ी परेशानियों को देगा अलविदा

    सुबह खाली पेट ये 5 मिनट का योग, पाचन से जुड़ी परेशानियों को देगा अलविदा


    नई दिल्ली । आज की तेज़-तर्रार लाइफस्टाइल और अनियमित खानपान ने पेट की समस्याओं को आम बना दिया है। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026 की थीम “Stand with Science” के अनुसार पवनमुक्तासन एक सरल लेकिन अत्यंत प्रभावी योगासन माना जा रहा है।

    संस्कृत में पवन का अर्थ है वायु और मुक्त का अर्थ है छोड़ना। इस आसन का उद्देश्य शरीर में फंसी हानिकारक गैस और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना है। जब आप घुटनों को धीरे-धीरे छाती की ओर दबाते हैं, तो यह पेट के अंगों पर हल्का दबाव डालता है जिससे पाचन अग्नि तेज होती है और भोजन का अवशोषण बेहतर होता है।

    पवनमुक्तासन के लाभ

    गैस, कब्ज और ब्लोटिंग से राहत – यह वात विकारों को कम करता है, पुरानी कब्ज और एसिडिटी को दूर करता है और आंतों की कार्यक्षमता बढ़ाता है।

    वेट लॉस में मदद – पेट, जांघों और कमर के आसपास की जिद्दी चर्बी कम करने में सहायक।

    पेल्विक और प्रजनन अंगों के लिए लाभकारी – महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता कम करने में मदद करता है।

    पीठ और रीढ़ की हड्डी के लिए लाभकारी – लंबे समय तक बैठने वाले लोगों के लिए रीढ़ की लचीलापन बढ़ाता है और निचले हिस्से के दर्द को कम करता है।

    कैसे करें पवनमुक्तासन

    योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं।

    गहरी सांस लेते हुए दाएं घुटने को मोड़कर छाती के पास लाएं।

    हाथों की उंगलियों को जोड़कर घुटने को पकड़ें।

    सांस छोड़ते हुए सिर उठाकर नाक को घुटने से छूने की कोशिश करें।

    इसी प्रक्रिया को बाएं पैर और फिर दोनों पैरों के साथ दोहराएं।

    इसे सुबह खाली पेट करना सबसे अधिक लाभकारी माना जाता है।

    सावधानियाँ

    उच्च रक्तचाप, हर्निया, स्लिप डिस्क या हाल ही में पेट की सर्जरी कराए लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए।

    गर्भवती महिलाएं इसे न करें।

    केवल 5 मिनट का यह योगासन रोजाना करने से न केवल पाचन सुधारता है बल्कि पेट, कमर और जांघों की मांसपेशियों को मजबूत बनाकर महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए स्वास्थ्य लाभ सुनिश्चित करता है।

  • वजन घटाना हो या हार्मोन बैलेंस, सुबह खाली पेट पिएं ये 5 सुपर ड्रिंक्स

    वजन घटाना हो या हार्मोन बैलेंस, सुबह खाली पेट पिएं ये 5 सुपर ड्रिंक्स


    नई दिल्ली । महिलाओं के लिए दिन की शुरुआत सही खानपान से करना बेहद जरूरी होता है क्योंकि सुबह का पहला आहार शरीर के मेटाबॉलिज्म और पूरे दिन की ऊर्जा को प्रभावित करता है खासतौर पर आयरन की कमी, पीसीओएस और पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रही महिलाओं के लिए कुछ खास ड्रिंक्स बहुत लाभकारी साबित हो सकती हैं

    सबसे पहले चिया सीड्स और नींबू पानी की बात करें तो यह ड्रिंक ओमेगा 3 फैटी एसिड और फाइबर से भरपूर होती है एक गिलास पानी में चिया सीड्स भिगोकर उसमें नींबू मिलाकर पीने से वजन घटाने में मदद मिलती है और त्वचा में भी प्राकृतिक निखार आता है

    दूसरा है मेथी दाना पानी जिसे रातभर भिगोकर सुबह खाली पेट पीना चाहिए यह ड्रिंक इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने और पीरियड्स की अनियमितता को सुधारने में काफी प्रभावी मानी जाती है
    एलोवेरा जूस भी महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद होता है इसे पानी में मिलाकर पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर की सूजन कम होती है साथ ही यह जोड़ों के दर्द में भी राहत देता है

    धनिया पानी एक और उपयोगी ड्रिंक है जिसे उबालकर पीया जाता है यह शरीर में पानी रुकने की समस्या को कम करता है और थायराइड के स्तर को संतुलित रखने में मदद करता है इसके अलावा यह यूरिन इंफेक्शन के खतरे को भी कम करता है अंत में दालचीनी और शहद की चाय का सेवन करने से मीठा खाने की इच्छा कम होती है और शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है यह ड्रिंक वजन नियंत्रण के लिए बहुत अच्छा विकल्प माना जाता है

    इन सभी ड्रिंक्स को नियमित रूप से सुबह खाली पेट लेने से शरीर डिटॉक्स होता है हार्मोन संतुलित रहते हैं और समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है हालांकि किसी भी नई चीज को दिनचर्या में शामिल करने से पहले अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह लेना भी जरूरी है इस तरह छोटी सी सुबह की आदत महिलाओं के लिए बड़ी हेल्थ बेनिफिट साबित हो सकती है और उन्हें लंबे समय तक स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रख सकती है