Author: bharati

  • रेड कार्पेट पर Jacqueline ने बिखेरा जलवा, Cannes लुक की चर्चा तेज

    रेड कार्पेट पर Jacqueline ने बिखेरा जलवा, Cannes लुक की चर्चा तेज


    नई दिल्ली । कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 में बॉलीवुड अभिनेत्री Jacqueline Fernandez ने अपने शानदार फैशन स्टेटमेंट से सभी का ध्यान खींच लिया। प्रतिष्ठित रेड कार्पेट इवेंट में उनकी मौजूदगी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह ग्लोबल फैशन आइकॉन के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए हैं।

    ब्लैक मिनी ड्रेस में दिखा बोल्ड और एलिगेंट लुक
    इस खास मौके पर जैकलीन ने कैरोलिन कूट्योर की ब्लैक मिनी ड्रेस पहनी, जिसमें मॉडर्न एलिगेंस और हाई-फैशन का बेहतरीन मेल देखने को मिला। स्ट्रैपलेस डिजाइन और टेक्सचर्ड डिटेलिंग ने उनके पूरे लुक को और भी आकर्षक बना दिया। ड्रेस की फिटिंग और शॉर्ट हेमलाइन ने उनके लुक में बोल्ड और यूथफुल टच जोड़ा, जिससे उनका रेड कार्पेट अपीयरेंस और भी दमदार नजर आया।

    डायमं ड ज्वेलरी ने बढ़ाया ग्लैमर
    अपने आउटफिट को और खास बनाने के लिए जैकलीन ने चोपार्ड की लग्जरी डायमंड ज्वेलरी पहनी। चमकते डायमंड्स ने उनके ऑल-ब्लैक लुक को और भी ग्लैमरस और क्लासी बना दिया। उनका पूरा लुक फैशन और एलीगेंस का परफेक्ट कॉम्बिनेशन नजर आया, जिसने फोटोग्राफर्स और फैंस दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें
    जैसे ही उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर आईं, फैंस ने उन्हें खूब पसंद किया और शेयर करना शुरू कर दिया। रेड कार्पेट पर उनका कॉन्फिडेंट और ग्लैमरस अंदाज चर्चा का विषय बन गया है।

    ग्लोबल फैशन आइकॉन के रूप में पहचान
    कान्स में उनकी यह उपस्थिति एक बार फिर साबित करती है कि जैकलीन सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय फैशन सर्किट में भी अपनी मजबूत पहचान रखती हैं।

  • KKR vs MI Pitch Report: ईडन गार्डन्स में बल्लेबाजों को मिलेगा बड़ा फायदा

    KKR vs MI Pitch Report: ईडन गार्डन्स में बल्लेबाजों को मिलेगा बड़ा फायदा


    नई दिल्ली । कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स मैदान में आज आईपीएल 2026 का बड़ा मुकाबला खेला जाएगा, जिसमें कोलकाता नाइट राइडर्स और मुंबई इंडियंस आमने-सामने होंगे। पिच रिपोर्ट के अनुसार यह मैदान हमेशा से बल्लेबाजों के लिए अनुकूल माना जाता है। यहां गेंद बैट पर अच्छी तरह आती है, जिससे स्ट्रोक खेलना आसान हो जाता है। शुरुआत में तेज गेंदबाजों को हल्की स्विंग और मूवमेंट मिल सकती है, लेकिन जैसे-जैसे पारी आगे बढ़ती है, बल्लेबाजों का दबदबा बढ़ जाता है।

     स्पिनर्स भी निभा सकते हैं अहम भूमिका
    हालांकि ईडन गार्डन्स सिर्फ बल्लेबाजों का मैदान नहीं है। दूसरी पारी में पिच धीरे-धीरे धीमी हो जाती है, जिससे स्पिन गेंदबाजों को टर्न और ग्रिप मिलने लगता है। मिडिल ओवर्स में स्पिनर्स का रोल बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि वहीं से मैच का रुख बदल सकता है। कप्तानों के लिए यह एक रणनीतिक चुनौती भी होगी कि कब स्पिन अटैक को इस्तेमाल किया जाए।

    ओस और टॉस का बड़ा असर
    इस मैदान पर पहली पारी का औसत स्कोर करीब 190 रन माना जा रहा है। ऐसे में एक बड़ा स्कोर देखने को मिल सकता है। दूसरी पारी में ओस (Dew) का असर पड़ने की संभावना है, जिससे बल्लेबाजी और आसान हो जाएगी। यही कारण है कि टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी करना पसंद कर सकती है।

    फैंस को मिलेगा हाई-स्कोरिंग थ्रिलर
    दोनों टीमों के पास विस्फोटक बल्लेबाज मौजूद हैं, जिससे फैंस को चौकों और छक्कों की बारिश देखने को मिल सकती है। मुकाबला पूरी तरह रन-फेस्ट और रोमांच से भरा होने की उम्मीद है।

  • सुप्रीम कोर्ट में इंसानियत और कानून का संगम, बुजुर्ग की अपील पर CJI सूर्यकांत का भावुक लेकिन स्पष्ट जवाब

    सुप्रीम कोर्ट में इंसानियत और कानून का संगम, बुजुर्ग की अपील पर CJI सूर्यकांत का भावुक लेकिन स्पष्ट जवाब

    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट में गुरुद्वारा कमेटियों के फंड से जुड़े कथित दुरुपयोग के मामले की सुनवाई के दौरान एक बेहद भावुक और मानवीय क्षण सामने आया, जिसने पूरे माहौल को गंभीरता और संवेदनशीलता से भर दिया। सुनवाई के दौरान जब एक बुजुर्ग याचिकाकर्ता ने अपनी बात रखते हुए भावुक होकर कहा कि वह न्याय की उम्मीद में अदालत के आगे नतमस्तक हैं, तो पूरा कोर्टरूम कुछ पल के लिए शांत हो गया।

    याचिकाकर्ता ने अपनी अपील में मामले की गंभीरता को विस्तार से रखते हुए कहा कि यह मुद्दा केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि समाज, शिक्षा और सार्वजनिक हित से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है। उन्होंने न्यायालय से अनुरोध किया कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया जाए और किसी भी तरह के अपरिवर्तनीय निर्णय पर रोक लगाई जाए।

    इस भावुक अपील को सुनकर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बेहद संतुलित और विनम्र तरीके से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अदालत हमेशा नागरिकों के लिए उपलब्ध है और कोई भी व्यक्ति अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन किसी भी नीति या कानून में बदलाव का अधिकार न्यायपालिका के बजाय विधायिका के पास होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में उचित मंच तक पहुंचना ही सही प्रक्रिया होती है।

    CJI ने आगे याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वह संबंधित विषय को संसद की याचिका समिति के समक्ष भी रख सकते हैं, ताकि वहां से उचित प्रक्रिया के तहत विचार किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका हर मामले में सीमित दायरे में ही हस्तक्षेप कर सकती है, खासकर जब मामला नीतिगत या विधायी क्षेत्र से जुड़ा हो।

    इस पूरी सुनवाई के दौरान कोर्ट में भावनाओं और कानून का संतुलन स्पष्ट रूप से देखने को मिला। एक तरफ बुजुर्ग की भावुक अपील थी, तो दूसरी तरफ न्यायिक प्रक्रिया की स्पष्ट सीमाएं, जिन्हें मुख्य न्यायाधीश ने बेहद सम्मानपूर्वक और सहज भाषा में समझाया।

    यह घटना न केवल न्याय व्यवस्था की गरिमा को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अदालतें भावनाओं को समझते हुए भी कानून की सीमाओं के भीतर ही निर्णय लेने के लिए बाध्य होती हैं।

  • बयानबाजी तेज: राजभर ने अखिलेश यादव को घेरा, राजनीतिक टकराव बढ़ा

    बयानबाजी तेज: राजभर ने अखिलेश यादव को घेरा, राजनीतिक टकराव बढ़ा


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप तेज होते जा रहे हैं। इसी कड़ी में सुभासपा प्रमुख Om Prakash Rajbhar ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव को घेरते हुए कहा कि अगर वह इतने “ज्ञानी-महाज्ञानी” हैं, तो उन्हें बताना चाहिए कि महाराजा सुहेलदेव के इतिहास को किस साजिश के तहत दबाया गया। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है।

    महाराजा सुहेलदेव के इतिहास पर छिड़ा नया विवाद
    राजभर ने अपने पोस्ट में महाराजा सुहेलदेव को पिछड़े समाज और वंचित वर्गों के सम्मान का प्रतीक बताया। उन्होंने दावा किया कि बहराइच की धरती पर महाराजा सुहेलदेव ने विदेशी आक्रांताओं को पराजित कर इतिहास रचा था, लेकिन उनके योगदान को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे दलों ने पिछड़े वर्ग के नायकों को इतिहास में उचित स्थान नहीं दिया और उनकी गौरवगाथा को दबाने का प्रयास किया गया।

    सपा पर 13 साल की सत्ता का सवाल
    राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी यूपी में लंबे समय तक सत्ता में रही, लेकिन इस दौरान महाराजा सुहेलदेव के सम्मान और इतिहास को स्थापित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने सपा की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए इसे “मुगलिया और अंग्रेज मानसिकता” से जोड़ दिया। उनका कहना है कि पिछड़े समाज के नायकों के योगदान को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया, जिससे सामाजिक न्याय की अवधारणा कमजोर हुई।

    2027 चुनाव से पहले बढ़ेगा राजनीतिक घमासान
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक आएंगे, यूपी में जातीय और ऐतिहासिक मुद्दों पर राजनीति और तेज होगी। राजभर के इस बयान ने एक बार फिर पिछड़ा वर्ग की राजनीति को केंद्र में ला दिया है। फिलहाल समाजवादी पार्टी की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।

  • EV सेगमेंट में नई एंट्री: सिंगल चार्ज में 440KM चलने वाली Skoda SUV

    EV सेगमेंट में नई एंट्री: सिंगल चार्ज में 440KM चलने वाली Skoda SUV


    नई दिल्ली ।  ऑटोमोबाइल की दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के बीच Skoda ने अपनी नई इलेक्ट्रिक SUV Epiq EV को पेश कर दिया है। यह कंपनी की अब तक की सबसे किफायती और कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक SUV मानी जा रही है, जिसे खास तौर पर शहरी उपयोग और लंबी दूरी दोनों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।

    Skoda का दावा है कि नई Epiq EV सिंगल चार्ज में करीब 440 किलोमीटर तक की रेंज देने में सक्षम है, जिससे यह अपने सेगमेंट में एक मजबूत विकल्प बन सकती है। इसके साथ ही इसका छोटा बैटरी वेरिएंट लगभग 310 किलोमीटर की रेंज भी प्रदान करता है।

    डिजाइन की बात करें तो Skoda ने इसे अपनी नई “Modern Solid” डिजाइन लैंग्वेज पर तैयार किया है। SUV का लुक काफी फ्यूचरिस्टिक और प्रीमियम है। फ्रंट में ब्लैक फिनिश ग्रिल, स्लिम LED DRLs और L-शेप हेडलाइट्स दी गई हैं, जो इसे एक मॉडर्न अपील देती हैं। वहीं साइड प्रोफाइल में कूपे-स्टाइल रूफलाइन, ब्लैक क्लैडिंग और एयरोडायनामिक अलॉय व्हील्स इसे और स्पोर्टी बनाते हैं। पीछे की तरफ T-शेप LED टेललाइट्स और रूफ स्पॉइलर इसका डिजाइन पूरा करते हैं।

    आकार की बात करें तो Skoda Epiq EV लगभग 4.17 मीटर लंबी है, जिससे यह कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट में आती है और शहरों में ड्राइविंग व पार्किंग के लिए आसान साबित हो सकती है। इसके बावजूद कंपनी ने इसमें पर्याप्त केबिन स्पेस दिया है। इसमें लगभग 475 लीटर का बूट स्पेस और 25 लीटर का फ्रंक (फ्रंट ट्रंक) भी मिलता है।

    इंटीरियर को भी पूरी तरह हाईटेक और प्रीमियम बनाया गया है। इसमें 13-इंच का बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है, जो Android आधारित सॉफ्टवेयर पर काम करता है। इसके साथ डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले, टू-स्पोक स्टीयरिंग व्हील और एम्बिएंट लाइटिंग जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।

    फीचर्स की बात करें तो इसमें वायरलेस Apple CarPlay और Android Auto, पैनोरमिक सनरूफ, ड्यूल-जोन क्लाइमेट कंट्रोल, वायरलेस चार्जिंग, 10-स्पीकर Canton ऑडियो सिस्टम और 360-डिग्री कैमरा जैसे प्रीमियम फीचर्स दिए गए हैं। सुरक्षा के लिहाज से इसमें ADAS (Advanced Driver Assistance System) और 7 एयरबैग जैसी आधुनिक सेफ्टी टेक्नोलॉजी शामिल है।

    Skoda Epiq EV को Volkswagen Group के नए MEB+ प्लेटफॉर्म पर विकसित किया गया है, जो इसे और अधिक एफिशिएंट और मॉडर्न बनाता है। कंपनी का फोकस इसे एक ग्लोबल मास-मार्केट EV के रूप में स्थापित करने पर है।

    हालांकि कंपनी ने अभी इसकी आधिकारिक लॉन्च डेट और कीमत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उम्मीद है कि यह जल्द ही यूरोपीय बाजारों में लॉन्च की जाएगी और बाद में अन्य देशों में भी पेश की जा सकती है।

  • कॉरपोरेट हलचल: स्टारबक्स ने कई पदों पर की बड़े स्तर पर नौकरी में कटौती

    कॉरपोरेट हलचल: स्टारबक्स ने कई पदों पर की बड़े स्तर पर नौकरी में कटौती


    नई दिल्ली । दुनिया की सबसे बड़ी कॉफी चेन कंपनियों में शामिल Starbucks ने अमेरिका में एक बड़ा कदम उठाते हुए व्यापक स्तर पर छंटनी की घोषणा की है। इस फैसले के बाद कंपनी में कार्यरत सैकड़ों कर्मचारियों की नौकरी पर सीधा असर पड़ा है। छंटनी की इस प्रक्रिया में केवल सामान्य कर्मचारी ही नहीं, बल्कि वाइस प्रेसिडेंट, मैनेजर और प्रशासनिक स्तर के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।

    कंपनी ने इस कदम को अपनी नई रणनीति “Back to Starbucks” नीति का हिस्सा बताया है, जिसका उद्देश्य संगठन को अधिक चुस्त, प्रभावी और लाभदायक बनाना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी के सीईओ ब्रायन निकोल (Brian Niccol) के नेतृत्व में यह बड़ा निर्णय लिया गया है, जिसमें लगभग 300 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से हटाया गया है।

    स्टारबक्स अब अपने संचालन मॉडल को पुनर्गठित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत क्षेत्रीय सपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है। कंपनी की योजना के अनुसार, कर्मचारियों को शिकागो, डलास, अटलांटा, बरबैंक और कैलिफोर्निया जैसे विभिन्न शहरों में ट्रांसफर भी किया जाएगा, ताकि कार्यप्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित किया जा सके।

    जानकारी के अनुसार, यह छंटनी केवल एक बार की कार्रवाई नहीं है, बल्कि पिछले कुछ महीनों से जारी व्यापक पुनर्गठन का हिस्सा है। फरवरी 2025 से अब तक कंपनी 2,000 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी है, जिसमें स्टोर स्टाफ, रिटेल और रोस्टरी से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हैं।

    कंपनी का कहना है कि यह फैसला लंबे समय की ग्रोथ स्ट्रैटजी और वित्तीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। स्टारबक्स के प्रवक्ता ने बयान में कहा कि कंपनी अपने ऑपरेशन को अधिक प्रभावी बनाने और भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। इसके साथ ही रियल एस्टेट और नई योजनाओं पर लगभग 400 मिलियन डॉलर खर्च करने की भी योजना है।

    हालिया वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, स्टारबक्स की सालाना बिक्री करीब 9.5 बिलियन डॉलर रही है, जबकि कुल मुनाफा लगभग 511 मिलियन डॉलर दर्ज किया गया है। हालांकि, बढ़ती परिचालन लागत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दबाव के चलते कंपनी अब खर्चों में कटौती पर विशेष ध्यान दे रही है।

    इस बड़े फैसले के बाद कॉर्पोरेट जगत में हलचल तेज हो गई है, और माना जा रहा है कि आने वाले समय में अन्य कंपनियां भी इसी तरह की लागत-कटौती रणनीतियों को अपना सकती हैं।

  • रॉन्ग साइड से आया वाहन बना हादसे की वजह, बड़वानी में चार घायल

    रॉन्ग साइड से आया वाहन बना हादसे की वजह, बड़वानी में चार घायल


    मध्य प्रदेश । बड़वानी जिले में सड़क सुरक्षा की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है, जहां बुधवार देर रात दो अलग-अलग सड़क हादसों में कुल चार लोग घायल हो गए। दोनों ही घटनाओं में स्थानीय लोगों की तत्परता से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    पहला हादसा शहर के सांवरिया मंदिर के सामने हुआ, जहां दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालु एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अर्चना पति निलेश, हंसिका और मंथन बाइक पर सवार होकर मंदिर से लौट रहे थे। इसी दौरान रॉन्ग साइड से तेज रफ्तार में आ रहे एक छोटा हाथी वाहन ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि तीनों लोग सड़क पर गिरकर घायल हो गए।

    स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों की मदद की और 108 एम्बुलेंस को सूचना दी। घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि इस मार्ग पर कई वाहन चालक लगातार लापरवाही से रॉन्ग साइड ड्राइविंग करते हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।

    दूसरा हादसा राजघाट रोड स्थित सर्किट हाउस के पास हुआ, जहां ईंट भट्टे से निकलने वाले घने धुएं ने एक युवक की जान पर भारी संकट खड़ा कर दिया। कुकरा बसाहट निवासी संजय वर्मा ने बताया कि ईंट भट्टे का धुआं सड़क पर फैलने के कारण दृश्यता काफी कम हो जाती है।

    इसी दौरान 17 वर्षीय अखिलेश केवट, जो मछली पकड़कर बाइक से घर लौट रहे थे, धुएं के कारण रास्ता ठीक से न देख पाने की वजह से दुर्घटना का शिकार हो गए। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें साईं अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में रेत और मिट्टी से भरे डंपरों की लगातार आवाजाही के कारण भी भारी मात्रा में धूल उड़ती रहती है, जिससे सड़क पर दृश्यता और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ईंट भट्टों और भारी वाहनों पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए, ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।

    जिला अस्पताल के ड्यूटी डॉक्टर के अनुसार, सभी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद भर्ती किया गया है और उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। दोनों हादसों ने एक बार फिर क्षेत्र में सड़क सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • जितेंद्र-रीना रॉय की जोड़ी का सुनहरा दौर: 22 फिल्मों में 12 सुपरहिट, रोमांस ने जीता दर्शकों का दिल

    जितेंद्र-रीना रॉय की जोड़ी का सुनहरा दौर: 22 फिल्मों में 12 सुपरहिट, रोमांस ने जीता दर्शकों का दिल


    नई दिल्ली ।
    हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में 70 और 80 का दशक कई ऐसी जोड़ियों का गवाह बना, जिन्होंने पर्दे पर अपनी अदाओं और अभिनय से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। इन्हीं में से एक प्रमुख जोड़ी रही जितेंद्र और रीना रॉय की, जिनकी ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री ने उस दौर में बॉक्स ऑफिस पर नया इतिहास रच दिया। दोनों ने मिलकर करीब 22 फिल्मों में साथ काम किया, जिनमें से 17 फिल्मों में रोमांस और इमोशन का ऐसा मेल देखने को मिला कि दर्शक उन्हें असली जीवन की जोड़ी समझने लगे। उनकी इन फिल्मों में से लगभग 12 फिल्में सुपरहिट साबित हुईं, जो उस समय की बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाती हैं।

    रीना रॉय ने बहुत कम उम्र में फिल्मी दुनिया में कदम रखा था और शुरुआती संघर्ष के बाद उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा से खुद को एक मजबूत अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया। धीरे-धीरे वह उस दौर की प्रमुख अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं, जब हेमा मालिनी, रेखा, जीनत अमान और परवीन बॉबी जैसी दिग्गज एक्ट्रेस इंडस्ट्री पर राज कर रही थीं। इसके बावजूद रीना रॉय ने अपनी अलग पहचान बनाई और दर्शकों के बीच अपनी मजबूत जगह कायम की।

    जितेंद्र के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खासतौर पर बेहद पसंद किया। फैमिली ड्रामा हो या रोमांटिक कहानी, दोनों की केमिस्ट्री हर तरह की फिल्म में सहज और प्रभावशाली नजर आती थी। उनकी फिल्मों की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि कई बार सिर्फ दोनों की जोड़ी को देखने के लिए दर्शक सिनेमाघरों तक खिंचे चले आते थे। यह दौर बॉलीवुड के लिए बेहद खास माना जाता है, जब स्टार पावर और कहानी दोनों मिलकर फिल्म को हिट बना देते थे।

    रीना रॉय के करियर से जुड़ा एक दिलचस्प पहलू यह भी रहा कि उन्हें एक बड़े प्रोजेक्ट से हटाकर दूसरी अभिनेत्री को लिया गया था। उस समय इंडस्ट्री में यह चर्चा आम रही कि कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स में स्टार पावर और लोकप्रियता को ध्यान में रखते हुए बदलाव किए जाते थे। इसके बावजूद रीना रॉय की लोकप्रियता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा और वह लगातार हिट फिल्में देती रहीं।

    अपने करियर के शिखर पर रीना रॉय का नाम लगातार सफलता की सूची में शामिल रहा। कई वर्षों तक वह इंडस्ट्री की शीर्ष अभिनेत्रियों में गिनी जाती रहीं और उनका नाम उन कलाकारों में शामिल रहा जिन्होंने 80 के दशक को एक अलग पहचान दी। उनकी अभिनय शैली में भावनाओं की गहराई और स्क्रीन प्रेजेंस की मजबूती ने उन्हें दर्शकों का प्रिय बना दिया।

    बाद के वर्षों में रीना रॉय की निजी जिंदगी भी चर्चा में रही और उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली। हालांकि उनके फिल्मी करियर की यादें आज भी दर्शकों के बीच जीवित हैं। जितेंद्र के साथ उनकी जोड़ी को आज भी बॉलीवुड की सबसे यादगार जोड़ियों में गिना जाता है, जिन्होंने अपने समय में रोमांस और मनोरंजन का नया मानक स्थापित किया।

  • सिंचाई सिस्टम पर सवाल: इंदिरा सागर नहरों की बदहाली से खेती प्रभावित

    सिंचाई सिस्टम पर सवाल: इंदिरा सागर नहरों की बदहाली से खेती प्रभावित


    मध्य प्रदेश । बड़वानी जिले में इंदिरा सागर परियोजना के तहत सिंचाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। 16 मई को मुख्य नहर में पानी छोड़े जाने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि यह पानी अगले आठ से दस दिनों में बड़वानी क्षेत्र तक पहुंच जाएगा, लेकिन खेतों तक पानी पहुंचाने वाली माइनर और सब-माइनर नहरों की जर्जर हालत किसानों के लिए बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है।

    स्थानीय किसानों का कहना है कि बीते करीब एक दशक से इन नहरों की नियमित सफाई और मरम्मत नहीं की गई है। इसके चलते कई स्थानों पर नहरों में गाद भर गई है और झाड़ियों ने अपना कब्जा जमा लिया है। नहरों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि कई जगहों पर पानी का रिसाव होने और खेतों तक पहुंचने से पहले ही बर्बाद होने का खतरा बना हुआ है।

    सजवानी, रेहगुन, सुराना और तलवाड़ा बुजुर्ग सहित कई गांवों के किसान लंबे समय से नहरों की टूट-फूट और जर्जर स्थिति को लेकर परेशान हैं। किसानों का आरोप है कि नहरें अब पहले की तुलना में काफी संकरी हो गई हैं और उनकी दीवारों में दरारें आ चुकी हैं, जिससे सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो सकती है।

    भारतीय किसान संघ के जिला सदस्य धर्मेंद्र राठौर ने आरोप लगाया कि विभाग हर साल केवल आश्वासन देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नहीं होता। इसके कारण किसानों को समय पर पानी नहीं मिल पाता और उनकी फसलें प्रभावित होती हैं।

    वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नहरों की मरम्मत और सुधार के लिए शासन को 2 करोड़ 25 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे अब मंजूरी मिल चुकी है। इंदिरा सागर परियोजना के सहायक अभियंता डीके गोरी ने बताया कि मुख्य अभियंता की नियुक्ति न होने के कारण फाइलें अटकी हुई थीं, लेकिन अब बजट स्वीकृत होने के बाद टेंडर प्रक्रिया के जरिए मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा।

    हालांकि, मुख्य नहर में पानी छोड़े जाने के बाद समय का दबाव बढ़ गया है। किसानों में इस बात को लेकर संशय है कि क्या प्रशासन टेंडर प्रक्रिया और मरम्मत कार्य समय रहते पूरा कर पाएगा। यदि सुधार कार्य में देरी होती है तो इस सीजन में भी फसलों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाएगा, जिससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका है।

    किसानों की मांग है कि नहरों की तत्काल सफाई और मरम्मत कर जल वितरण व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, ताकि सिंचाई व्यवस्था प्रभावित न हो और फसलें सुरक्षित रह सकें।

  • फिल्मी दुनिया में भाषा नहीं, प्रतिभा मायने रखती है: नॉर्थ-साउथ बहस पर बोले बोमन ईरानी

    फिल्मी दुनिया में भाषा नहीं, प्रतिभा मायने रखती है: नॉर्थ-साउथ बहस पर बोले बोमन ईरानी


    नई दिल्ली । भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय से चल रही उत्तर और दक्षिण सिनेमा की बहस पर अभिनेता Boman Irani ने अपनी स्पष्ट राय रखते हुए कहा है कि यह चर्चा अब पुरानी और थकाने वाली हो चुकी है। उनके अनुसार, फिल्म इंडस्ट्री में भाषा या क्षेत्रीय पहचान से ज्यादा महत्वपूर्ण कहानी और काम की गुणवत्ता है।

    बोमन ईरानी इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘पेड्डी’ के प्रमोशन में व्यस्त हैं, जिसमें वह अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसी दौरान एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर देखना सही नहीं है, क्योंकि अंततः यह एक ही देश की रचनात्मक दुनिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “हम सब भारतीय हैं” और किसी भी कलाकार की पहचान उसकी प्रतिभा और काम से होनी चाहिए, न कि उसकी भाषा या क्षेत्र से।

    उन्होंने यह भी बताया कि भारत में भाषाई विविधता बहुत गहरी है और हर कुछ किलोमीटर पर बोली बदल जाती है, लेकिन इससे लोगों के बीच दूरी नहीं बननी चाहिए। उनके अनुसार, एक व्यक्ति अलग भाषा बोल सकता है, लेकिन भावनाएं और सिनेमा की आत्मा समान रहती है। यही कारण है कि आज भारतीय फिल्में क्षेत्रीय सीमाओं से बाहर निकलकर पूरे देश और दुनिया में सराही जा रही हैं।

    अपनी आने वाली फिल्म का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अब ऐसे समय में जब हैदराबाद जैसे शहरों में बनी फिल्में पूरे देश में प्रमोट हो रही हैं और मुंबई जैसे बड़े फिल्म हब में उनका स्वागत हो रहा है, तो यह साफ संकेत है कि इंडस्ट्री धीरे-धीरे एक साझा मंच की ओर बढ़ रही है। यह बदलाव भारतीय सिनेमा की एकता और विस्तार को दर्शाता है।

    बोमन ईरानी ने अभिनय की गहराई पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एक अच्छे अभिनेता के लिए भाषा से ज्यादा जरूरी है संवाद के भीतर छिपे भाव और अर्थ को समझना। उनके अनुसार, अभिनय केवल शब्द बोलने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि उसमें भावनाओं और सोच की गहराई को सही तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना सबसे अहम है।

    उन्होंने यह भी कहा कि कलाकार को पहले अपने विचारों को समझकर अपनी भाषा में तैयार करना चाहिए और फिर उसे पर्दे पर व्यक्त करना चाहिए, ताकि दर्शक उससे जुड़ सकें। उनका मानना है कि अगर भावनाएं सही तरीके से प्रस्तुत की जाएं तो भाषा कभी बाधा नहीं बनती।

    बोमन ईरानी ने अपने लंबे करियर में कई यादगार फिल्मों में काम किया है और अपनी अलग पहचान बनाई है। कॉमेडी और गंभीर दोनों तरह के किरदारों में उनकी अभिनय क्षमता को दर्शकों ने हमेशा सराहा है। ‘पेड्डी’ में भी उनकी भूमिका को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है, जिसमें राम चरण, जान्हवी कपूर और दिव्येंदु शर्मा जैसे कलाकार भी नजर आएंगे।