Author: bharati

  • पश्चिम एशिया संकट से निपटने के तरीके पर सरकार के साथ नजर आ रहे ये नेता… बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किल!

    पश्चिम एशिया संकट से निपटने के तरीके पर सरकार के साथ नजर आ रहे ये नेता… बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किल!


    नई दिल्ली।
    कांग्रेस (Congress) के कुछ नेताओं ने पश्चिम एशिया (West Asia) संकट से निपटने के तरीके पर सरकार के साथ खड़े नजर आकर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहले भी कई मौकों पर कांग्रेस को असहज स्थिति में डाल चुके पार्टी सांसद शशि थरूर (MP Shashi Tharoor) के अलावा मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पूर्व सीएम कमलनाथ (Former CM Kamal Nath) और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा (Anand Sharma) और मनीष तिवारी (Manish Tewari) ने पिछले कुछ दिनों में पार्टी के आधिकारिक रुख से अलग राय जताई है।


    नेताओं की बयानबाजी से कांग्रेस की हुई किरकिरी

    इन प्रमुख नेताओं की बयानबाजी ने कांग्रेस की काफी किरकिरी कराई है। खासकर ऐसे समय जब पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण देश में ऊर्जा संकट उत्पन्न होने को लेकर लगातार नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। राहुल ने हाल ही में कहा था कि आने वाले समय में ईंधन एक बड़ी समस्या बनने वाला है, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो चुकी है। यह स्थिति गलत विदेश नीति के कारण पैदा हुई है।


    आनंद शर्मा, कमलनाथ के बाद सरकार के साथ मनीष तिवारी

    कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पश्चिम एशिया में जारी जंग पर एक टीवी चैनल पर कहा, सरकार संभवतः सही काम कर रही है। अभी दो दिन पहले कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं आनंद शर्मा और कमलनाथ ने भी मौजूदा स्थिति को संभालने के केंद्र के तरीके की सराहना की थी। आनंद शर्मा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था कि भारत का कूटनीतिक तरीका समझदारी भरा रहा है। इससे संभावित मुश्किलों से बचा गया है।

    एलपीजी की कोई कमी नहीं है- कमलनाथ
    मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने छिंदवाड़ा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, एलपीजी की कोई कमी नहीं है। बस ये माहौल बनाया जा रहा है कि कमी है। कुछ लोगों राजनीतिक फायदे के लिए जानबूझकर डर फैला रहे हैं। शशि थरूर ने पिछले महीने एक लेख में पश्चिम एशिया संकट पर भारत सरकार के संयमित रुख का समर्थन करते हुए इसे जिम्मेदारी भरा बताया है। उनके मुताबिक, इस मामले में चुप्पी कायरता नहीं है। हमें समझना होगा कि हमारे राष्ट्रीय हित इस इलाके से जुड़े हैं।

  • 23 साल का स्पीड स्टार: अशोक शर्मा ने तोड़ा सीजन का रिकॉर्ड, बनी नई सनसनी

    23 साल का स्पीड स्टार: अशोक शर्मा ने तोड़ा सीजन का रिकॉर्ड, बनी नई सनसनी


    नई दिल्ली । इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में एक नया नाम तेजी से सुर्खियों में छा गया है और वह नाम है अशोक शर्मा। गुजरात टाइटन्स के इस युवा तेज गेंदबाज ने अपनी रफ्तार और आक्रामक गेंदबाजी से क्रिकेट जगत को चौंका दिया है। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में उन्होंने 154.2 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंककर न सिर्फ दर्शकों को रोमांचित किया बल्कि पूरे सीजन की सबसे तेज गेंद डालने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया।

    राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ इस मुकाबले में अशोक शर्मा शुरुआत से ही अलग लय में नजर आए। उनकी गेंदों में लगातार 145 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार देखने को मिली। बल्लेबाजों के लिए उनकी गेंदों का सामना करना आसान नहीं था। लेकिन असली रोमांच पारी के 16वें ओवर में देखने को मिला जब उन्होंने ओवर की आखिरी गेंद 154.2 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से फेंकी। यह गेंद इतनी तेज और सटीक थी कि बल्लेबाज ध्रुव जुरेल किसी तरह खुद को बचा सके।

    इस प्रदर्शन के साथ ही अशोक शर्मा ने खुद को उन चुनिंदा भारतीय तेज गेंदबाजों की सूची में शामिल कर लिया है जो 154 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक की रफ्तार छू चुके हैं। इससे पहले यह उपलब्धि उमरान मलिक और मयंक यादव जैसे गेंदबाज हासिल कर चुके हैं। खास बात यह है कि उमरान मलिक के नाम अब भी आईपीएल इतिहास की सबसे तेज गेंद का रिकॉर्ड दर्ज है।

    अशोक शर्मा की कहानी भी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। 23 वर्षीय यह तेज गेंदबाज राजस्थान से ताल्लुक रखते हैं और घरेलू क्रिकेट में अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। करियर के शुरुआती दौर में उनकी गेंदबाजी में सटीकता की कमी थी लेकिन उन्होंने पिछले दो वर्षों में खुद पर कड़ी मेहनत की और अपनी कमजोरियों को ताकत में बदल दिया। इसका परिणाम सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025-26 में देखने को मिला जहां उन्होंने 10 मैचों में 22 विकेट लेकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा।

    अगर उनके घरेलू क्रिकेट रिकॉर्ड पर नजर डालें तो उन्होंने अब तक 4 फर्स्ट क्लास मैचों में 14 विकेट, 7 लिस्ट ए मुकाबलों में 13 विकेट और 12 टी20 मैचों में 24 विकेट हासिल किए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि वह सिर्फ तेज ही नहीं बल्कि असरदार गेंदबाज भी हैं।

    आईपीएल में उनका सफर भी दिलचस्प रहा है। वह पहले कोलकाता नाइट राइडर्स और राजस्थान रॉयल्स के स्क्वॉड का हिस्सा रह चुके थे लेकिन उन्हें खेलने का मौका नहीं मिल पाया। आखिरकार गुजरात टाइटन्स ने उन पर भरोसा जताया और 90 लाख रुपये में टीम में शामिल किया। यह फैसला अब पूरी तरह सही साबित होता नजर आ रहा है।

    अशोक शर्मा की यह तेज गेंदबाजी न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत सफलता की कहानी है बल्कि भारतीय क्रिकेट के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। जिस तरह से वह लगातार अपनी रफ्तार और नियंत्रण में सुधार कर रहे हैं उससे साफ है कि आने वाले समय में वह भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण का अहम हिस्सा बन सकते हैं।

  • कूटनीतिक सफलता…. ईरान युद्ध के बीच होर्मुज से अब तक निकले तेल-गैस से भरे भारत के 9 जहाज

    कूटनीतिक सफलता…. ईरान युद्ध के बीच होर्मुज से अब तक निकले तेल-गैस से भरे भारत के 9 जहाज


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष (West Asia Crisis) के बीच ईरान (Iran) ने समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लगभग बंद कर दिया है। इससे खाड़ी देशों से गैस और तेल की आपूर्ति बाधित हो गई है। इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में तेल की कीमतों में आग लगी है। लेकिन, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिन्होंने इस जोखिम भरे रास्ते से तेल और गैस से भरे सबसे अधिक जहाज सुरक्षित निकाले हैं। होर्मुज फारस और ओमान की खाड़ी के बीच एक संकरा समुद्री मार्ग है। ओमान और ईरान के बीच स्थित होर्मुज जलमार्ग एक जगह मात्र 33 किलोमीटर चौड़ा है। यह फारस की खाड़ी को शेष दुनिया से जोड़ता है।

    इस रास्ते से दुनिया का लगभग 20 फीसदी कच्चे तेल का नौवहन होता है। 28 फरवरी को अमेरिका-इस्राइल की ओर से हमला किए जाने के बाद ईरान ने इस मार्ग की नाकेबंदी कर दी है। कुछ तेल टैंकरों को ईरान ने निशाना भी बनाया है। लेकिन ईरान से अपने ऐतिहासिक संबंधों और मजबूत कूटनीति के जरिये भारत होर्मुज के रास्ते अब तक तेल और गैस से भरे 9 जहाज सुरक्षित निकाल लाने में सफल रहा है। इनमें से 8 जहाज भारतीय तट पर पहुंच गए हैं, जबकि एक पहुंचने वाला है।


    सबसे पहले जहाज पार कराया था

    पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच भारत ने सबसे पहले घरेलू लिक्विफाइड पेट्रोलिमय गैस (एलपीजी) से भरे दो जहाजों को होर्मुज पार कराया था। शिवालिक और नंदा देवी नामक इन दोनों टैंकरों को ईरान की नौसेना ने ही अपनी सुरक्षा में होर्मुज को पार कराा था। हालांकि, भारत ने भी अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए क्षेत्र में पोत तैनात कर रखे हैं। शिवालिक और एमटी नंदा देवी 92,712 टन एलपीजी लेकर आए थे। शिवालिक 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह और नंदा देवी उसके अगले दिन 17 मार्च को गुजरात के ही कांडला बंदरगाह पहुंचा था।


    जग लाडकी से जगत वसंत तक, भारत पहुंचे कई जहाज

    जग लाडकी संयुक्त अरब अमीरात से 80,886 टन कच्चा तेल लेकर 18 मार्च को मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा था। इसके बाद पाइन गैस और जग वसंत 92,612 टन एलपीजी लेकर 26 और 28 मार्च को भारत पहुंचे थे। 94,000 टन एलपीजी लेकर बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम भी आए हैं। बीडब्ल्यू टीवाई 31 मार्च को मुंबई और बीडब्ल्यू ईएलएम 1 अप्रैल को मंगलोर बंदरगाह पहुंचा था। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि लगभग 44,000 टन एलपीजी लेकर सी बर्ड 2 अप्रैल को मंगलोर बंदरगाह पहुंचा था। यह ईरान से एलपीजी लेकर आया है। सात साल में पहली बार भारत ने ईरान से गैस खरीदा है।


    ईरान के साथ भुगतान की समस्या नहीं कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित

    केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि ईरान से कच्चे तेल के आयात के लिए भुगतान संबंधी कोई समस्या नहीं है और रिफाइनरियां तेहरान के साथ दुनियाभर के विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं से तेल हासिल कर रही हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन खबरों को खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि ईरानी कच्चा तेल ले जा रहा एक तेल टैंकर अपने पहले से संकेतित गंतव्य भारत के बजाय चीन की ओर मुड़ गया है।

    मंत्रालय ने कहा कि ये दावे उद्योग के उस सामान्य अभ्यास की अनदेखी करते हैं, जहां परिचालन लचीलेपन के आधार पर यात्रा के दौरान कार्गो अपना गंतव्य बदल सकते हैं। यदि यह खेप भारत आती, तो लगभग सात वर्षों में ऐसी पहली खेप होती। मंत्रालय ने इन दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया कि भुगतान बाधाओं के कारण कार्गो को गुजरात के वाडिनार के बजाय चीन की ओर मोड़ा गया था। मंत्रालय ने कहा कि ईरानी कच्चे तेल के आयात के लिए भुगतान की कोई बाधा नहीं है।

    मंत्रालय ने स्पष्ट किया, भारत 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल का आयात करता है, और कंपनियों के पास विभिन्न स्रोतों और भौगोलिक क्षेत्रों से तेल प्राप्त करने का पूर्ण लचीलापन है। मंत्रालय के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों ने ईरान सहित अपनी कच्चे तेल की आवश्यकताओं को सुरक्षित कर लिया है। जहाजों पर नजर रखने वाली फर्म केपलर ने शुक्रवार को कहा था कि 2002 में निर्मित और 2025 में अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित टैंकर पिंग शुन अब गुजरात के वाडिनार के बजाय चीन के डोंगयिंग को अपना गंतव्य बता रहा है।

  • 1967 से आज तक अटूट यात्रा कृषि दर्शन की अनोखी कहानी

    1967 से आज तक अटूट यात्रा कृषि दर्शन की अनोखी कहानी


    नई दिल्ली । भारत में टेलीविजन प्रसारण की शुरुआत दूरदर्शन के साथ साल 1959 में हुई थी और तभी से यह माध्यम देश के हर वर्ग तक जानकारी मनोरंजन और शिक्षा पहुंचाने का सशक्त जरिया बन गया। समय के साथ दूरदर्शन पर कई लोकप्रिय कार्यक्रम प्रसारित हुए जिनमें रामायण हम लोग और आपबीती जैसे शो शामिल हैं लेकिन इन सबके बीच एक ऐसा कार्यक्रम भी रहा जिसने न सिर्फ इतिहास बनाया बल्कि आज तक अपनी उपयोगिता और प्रासंगिकता को बनाए रखा है। इस शो का नाम है कृषि दर्शन जिसे भारत का सबसे लंबा चलने वाला टेलीविजन शो माना जाता है।

    कृषि दर्शन की शुरुआत 26 जनवरी 1967 को हुई थी जो कि गणतंत्र दिवस का खास दिन था। इस शो को खासतौर पर किसानों के लिए डिजाइन किया गया था ताकि उन्हें खेती से जुड़ी नई तकनीकों उन्नत बीजों और आधुनिक तरीकों की जानकारी दी जा सके। शुरुआत में यह कार्यक्रम केवल दिल्ली के आसपास के लगभग 80 गांवों में ही प्रसारित किया जाता था। उस समय इसका उद्देश्य साफ था किसानों को सशक्त बनाना और उन्हें वैज्ञानिक खेती की ओर प्रेरित करना।

    समय के साथ इस शो की लोकप्रियता बढ़ती गई और यह सीमित क्षेत्र से निकलकर पूरे देश तक पहुंच गया। आज कृषि दर्शन न केवल टीवी पर बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध है जिससे किसान कहीं भी कभी भी इसे देख सकते हैं। यह शो पहले डीडी नेशनल पर प्रसारित होता था लेकिन साल 2015 में इसे डीडी किसान चैनल पर स्थानांतरित कर दिया गया जिससे इसका फोकस और अधिक स्पष्ट रूप से कृषि पर केंद्रित हो गया।

    इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि यह केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसने किसानों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने का काम किया। खेती से जुड़ी समस्याओं के समाधान नई तकनीकों का प्रदर्शन और विशेषज्ञों की सलाह इस शो की पहचान बन गई। यही वजह है कि दशकों बाद भी इसकी उपयोगिता कम नहीं हुई बल्कि और अधिक मजबूत हुई है।

    कृषि दर्शन को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी ICAR के सहयोग से शुरू किया गया था। यह पहल भारत सरकार की उस सोच का हिस्सा थी जिसमें कृषि को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। विकिपीडिया के अनुसार इस शो के अब तक 62 सीजन पूरे हो चुके हैं और 16780 से अधिक एपिसोड प्रसारित किए जा चुके हैं जो इसे अपने आप में एक रिकॉर्ड बनाता है।

    आज जब मनोरंजन के अनगिनत विकल्प मौजूद हैं तब भी कृषि दर्शन अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। यह सिर्फ एक टीवी शो नहीं बल्कि किसानों के लिए ज्ञान का एक भरोसेमंद स्रोत है जिसने पीढ़ियों को जोड़ा है और देश के कृषि विकास में अहम भूमिका निभाई है।

  • RR कप्तान का बड़ा बयान! रियान पराग बोले- ध्रुव जुरैल की टैलेंट के साथ नहीं हुआ इंसाफ

    RR कप्तान का बड़ा बयान! रियान पराग बोले- ध्रुव जुरैल की टैलेंट के साथ नहीं हुआ इंसाफ


    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में शनिवार को शाम का मुकाबला नरेंद्र मोदी स्टेडियम में गुजरात टाइटंस (जीटी) और राजस्थान रॉयल्स (आरआर) के बीच खेला गया। आरआर ने जीटी पर 6 रन से जीत दर्ज की। जीत के बाद आरआर के कप्तान रियान पराग ने विकेटकीपर बल्लेबाज ध्रुव जुरैल की जमकर तारीफ की।

    रियान पराग ने मैच के बाद जुरैल की बल्लेबाजी पर कहा, “मुझे लगता है कि हमने उसकी प्रतिभा के साथ अब तक न्याय नहीं किया है। उसने मुश्किल काम किया है। उसने छह और सात नंबर बैटिंग की है। अब जब हमारे पास मौका है तो मैं सबसे पहले कहने वाला था कि उसे नंबर तीन पर बैटिंग करनी चाहिए और उसने हमें दिखा दिया कि वह क्या कर सकता है। यह उसके लिए शुरुआत है। उम्मीद है वह आगे चलकर 700, 800 रन बनाएगा और हमें चैंपियनशिप जिताएगा।”

    पिछले सीजन तक निचले क्रम में बल्लेबाजी करने वाली ध्रुव जुरैल को आईपीएल 2026 में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भेजा जा रहा है। सीएसके के खिलाफ सीजन के पहले मैच में 9 गेंदों पर 18 रन बनाने वाले जुरैल ने जीटी के खिलाफ अपने आईपीएल करियर की श्रेष्ठ पारी खेली। जुरैल ने 42 गेंदों पर 5 चौकों और 5 छक्कों की मदद से 75 रन बनाए।

    जुरैल की पारी की वजह से ही टॉस जीतने के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी आरआर 6 विकेट पर 210 रन बना सकी।

    211 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जीटी 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 204 रन बना सकी और 6 रन से मैच हार गई। आरआर ने आखिरी 2 ओवरों में बेहतरीन गेंदबाजी की और मैच अपनी तरफ मोड़ लिया। जीटी को आखिरी दो ओवरों में जीत के लिए मात्र 15 रन चाहिए थे। 19वां ओवर फेंकने वाले जोफ्रा आर्चर और 20वां ओवर फेंकने वाले तुषार देशपांडे ने मात्र 4-4 रन दिए और जीटी को 204 रन पर रोक दिया। आरआर के लिए 4 ओवर में 41 रन देकर 4 विकेट लिए रवि बिश्नोई प्लेयर ऑफ द मैच रहे।

  • पूर्व टेनिस स्टार लिएंडर पेस BJP में शामिल…. बोले- PM मोदी ने सौंपी 2036 ओलंपिक की जिम्मेदारी

    पूर्व टेनिस स्टार लिएंडर पेस BJP में शामिल…. बोले- PM मोदी ने सौंपी 2036 ओलंपिक की जिम्मेदारी


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में इसी महीने होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) से पहले सियासत में और ज्यादा गर्माहट बढ़ गई है। ऐसे में अब भारत के पूर्व टेनिस स्टार लिएंडर पेस (Former Indian Tennis star Leander Paes) ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने मुझे युवाओं और खेल के लिए काम करने का एक स्पष्ट दृष्टिकोण दिया। उन्होंने मुझे 2036 ओलंपिक गेम्स के लिए भारत की दावेदारी से जुड़ी जिम्मेदारी दी है। मुझे इस देश में ओलंपिक लाने के लिए एक टीम के साथ कड़ी मेहनत करनी है। पेस ने यह बात शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद पहली बार मीडिया से बातचीत के दौरान कही।

    उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने उन्हें युवाओं और खेलों के लिए काम करने का साफ विजन दिया है। अब उनका लक्ष्य है कि एक मजबूत टीम के साथ मिलकर भारत को 2036 ओलंपिक की मेजबानी दिलाई जाए। पेस ने कहा कि अगर भारत ओलंपिक की मेजबानी करता है, तो इससे देश की पहचान दुनिया में और मजबूत होगी और खेलों को बढ़ावा मिलेगा।


    राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी में भी योगदान की चार- पेस

    पेस ने आगे कहा कि वह 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी में भी योगदान देना चाहते हैं, खासकर अहमदाबाद में होने वाले संभावित आयोजन के लिए। इसके साथ ही उन्होंने अपने गृह राज्य पश्चिम बंगाल में खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया।


    खुद को बताया बंगाली बॉय

    इस दौरान खुद को बंगाली बॉय बताते हुए पेस ने कहा कि पश्चिम बंगाल में इंडोर टेनिस स्टेडियम और अच्छी खेल सुविधाओं की कमी है। उनका सपना है कि आने वाले 20 वर्षों में वे देश के 25 करोड़ बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं और उन्हें खेलों से जोड़ें।


    पेस ने इन देशों का दिया उदाहारण

    पेस यह भी कहा कि भारत को खेलों में आगे बढ़ने के लिए मजबूत स्पोर्ट्स कल्चर अपनाना होगा। पेस ने उदाहरण देते हुए बताया कि अमेरिका, चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिसा और ब्रिटेन जैसे देश, जो आर्थिक रूप से मजबूत हैं, वही ओलंपिक में भी सबसे ज्यादा पदक जीतते हैं।

    उन्होंने कहा कि भारत को भी खेलों के बुनियादी ढांचे, ट्रेनिंग और जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को तैयार करने में निवेश करना होगा। पेस के मुताबिक, खेल और खेल शिक्षा भारत को एक नई ताकत बना सकते हैं और युवा खिलाड़ियों का विकास देश के ओलंपिक सपने को पूरा करने में सबसे अहम भूमिका निभाएगा।

  • सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री विवाद पर SC की 9 जजों की पीठ करेगी सुनवाई… अन्य धर्मों पर भी होगा असर….

    सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री विवाद पर SC की 9 जजों की पीठ करेगी सुनवाई… अन्य धर्मों पर भी होगा असर….


    नई दिल्ली।
    सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple) में महिलाओं के प्रवेश (Women’s entry) से शुरू हुआ विवाद अब एक ऐतिहासिक संवैधानिक मोड़ पर खड़ा है। 7 अप्रैल 2026 से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 9 जजों की संविधान पीठ उन व्यापक कानूनी सवालों पर सुनवाई शुरू करने जा रही है। यह न केवल हिंदू धर्म, बल्कि मुस्लिम, पारसी और दाऊदी बोहरा समुदायों की धार्मिक प्रथाओं को भी प्रभावित करेंगे।

    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की यह पीठ केवल सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर विचार नहीं कर रही है। अदालत के सामने असल चुनौती यह तय करना है कि क्या व्यक्तिगत मौलिक अधिकार किसी समुदाय के धार्मिक अधिकारों से ऊपर हैं। इस फैसले का असर मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, पारसी महिलाओं के अधिकारों और दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित प्रथाओं पर भी पड़ेगा।

    2018 में तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा की बेंच ने 4:1 के बहुमत से सबरीमाला में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी। कोर्ट ने कहा था कि भक्ति को लैंगिक भेदभाव का शिकार नहीं बनाया जा सकता। एकमात्र महिला जज, जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने तब असहमति जताते हुए कहा था कि धार्मिक प्रथाओं की तर्कसंगतता की जांच करना अदालतों का काम नहीं है। नवंबर 2019 में पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि यह मुद्दा बहुत व्यापक है और इसे बड़ी बेंच (9 जजों) को भेज दिया गया।


    सुप्रीम कोर्ट के सामने कई सवाल

    संविधान पीठ कुछ मुद्दों पर स्पष्टता लाने की कोशिश कर सकती है। धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का दायरा और सीमा क्या है? अनुच्छेद 25 (व्यक्तिगत अधिकार) और अनुच्छेद 26 (धार्मिक संप्रदाय के अधिकार) के बीच तालमेल कैसे बैठेगा? क्या धार्मिक संप्रदाय के अधिकार संविधान के ‘भाग-III’ (मौलिक अधिकार) के अधीन हैं? अनुच्छेद 25 और 26 में प्रयुक्त ‘नैतिकता’ शब्द का अर्थ क्या है? क्या इसमें संवैधानिक नैतिकता शामिल है? क्या अदालतें यह तय कर सकती हैं कि कोई धार्मिक प्रथा उस धर्म का अनिवार्य हिस्सा है या नहीं? अनुच्छेद 25(2)(b) में हिंदुओं के वर्गों का वास्तविक अर्थ क्या है? क्या कोई व्यक्ति जो उस विशेष धार्मिक संप्रदाय का हिस्सा नहीं है, उसकी प्रथाओं को कोर्ट में चुनौती दे सकता है?


    अन्य धर्मों पर भी होगा असर

    यह सुनवाई इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इसमें कई अन्य विवादों को जोड़ दिया गया है। मुस्लिम महिलाओं के मस्जिदों में प्रवेश का अधिकार। दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित ‘बहिष्कार’ और अन्य प्रथाओं की वैधता। गैर-पारसी से शादी करने वाली पारसी महिलाओं के ‘अग्नि मंदिर’ में प्रवेश का अधिकार। आपको बता दें कि अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और कई जैन संगठनों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है, क्योंकि कोर्ट का फैसला उनके व्यक्तिगत कानूनों को प्रभावित कर सकता है।


    नई बेंच का गठन

    CJI सूर्य कांत के नेतृत्व वाली इस बेंच में विविधता का ध्यान रखा गया है। इसमें जस्टिस बीवी नागरत्ना सहित देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों से आए अनुभवी जज शामिल हैं। 7 अप्रैल से होने वाली यह दैनिक सुनवाई भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक व्याख्याओं में से एक साबित होगी। अदालत के सामने सबसे बड़ी दुविधा यह है कि संविधान का अनुच्छेद 25 धर्म मानने की आजादी देता है, लेकिन साथ ही यह सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है।

    याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि कोई भी प्रथा जो महिलाओं की गरिमा के खिलाफ है, वह धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं हो सकती। धार्मिक संस्थाओं का तर्क है कि धर्म की अपनी आंतरिक स्वायत्तता होती है और अदालतों को सदियों पुरानी परंपराओं में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

  • साउथेम्प्टन का शानदार खेल! आर्सेनल को हराकर FA कप के सेमीफाइनल में बनाई जगह

    साउथेम्प्टन का शानदार खेल! आर्सेनल को हराकर FA कप के सेमीफाइनल में बनाई जगह


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के प्रतिष्ठित एफए कप का रोमांच चरम पर है। टूर्नामेंट में बड़े उलटफेर देखने को मिल रहे हैं। सबसे बड़े उलटफेर का शिकार आर्सेनल हुए है। आर्सेनल जैसी दिग्गज टीम को साउथेम्प्टन ने हराते हुए सेमीफाइनल में जगह बना ली। सेंट मैरी स्टेडियम में खेले गए एफए कप क्वार्टर फाइनल में साउथेम्प्टन ने आर्सेनल को 2-1 से हराया।

    मैच की शुरुआत में साउथेम्प्टन ने आक्रामक खेल दिखाया और हाफ टाइम से पहले रॉस स्टीवर्ट ने पहला गोल दागकर टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद लियो सेनेजा ने भी बेहतरीन मौके बनाए, लेकिन उन्हें गोल में तब्दील करने में देर कर दी। दूसरे हाफ में साउथेम्प्टन का दबदबा जारी रहा, हालांकि आर्सेनल ने वापसी करते हुए सब्स्टीट्यूट विक्टर ग्योकेरेस के गोल से बराबरी हासिल कर ली।

    जब मैच ड्रॉ की ओर बढ़ता दिख रहा था, तभी सब्स्टीट्यूट शिया चार्ल्स ने मैच खत्म होने से पांच मिनट पहले शानदार गोल कर साउथेम्प्टन को ऐतिहासिक जीत दिला दी।

    दूसरी ओर, मैनचेस्टर सिटी ने अपना दबदबा कायम रखते हुए लिवरपूल को 4-0 से हराकर लगातार आठवीं बार सेमीफाइनल में जगह बनाई। इस मैच के हीरो रहे एर्लिंग हालैंड, जिन्होंने शानदार हैट्रिक लगाई। उनके साथ एंटोनी सेमेन्यो ने भी गोल कर टीम की जीत को और मजबूत किया।

    इस जीत के साथ मैनचेस्टर सिटी ने एफए कप में घरेलू मैदान पर लगातार 18वीं जीत दर्ज की और पुराने रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ दिया। कोच पेप गार्डियोला के नेतृत्व में टीम लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है और अब तक कई बड़े खिताब अपने नाम कर चुकी है।

    वहीं, चेल्सी ने भी शानदार खेल दिखाते हुए सेमीफाइनल में जगह पक्की की। स्टैमफोर्ड ब्रिज में खेले गए मुकाबले में उन्होंने पोर्ट वेले को 7-0 से हराया और क्लीन शीट भी बनाए रखी।

    कुल मिलाकर, इस बार का एफए कप का सेमीफाइनल बेहद रोमांचक होने वाला है, जहां बड़े क्लब्स के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी।

  • रणबीर की ‘रामायण’ में अमिताभ बच्चन के दामाद नजर आएंगे, निभा रहे खास रोल

    रणबीर की ‘रामायण’ में अमिताभ बच्चन के दामाद नजर आएंगे, निभा रहे खास रोल


    नई दिल्ली।बॉलीवुड में जब बड़े बजट की फिल्में बनती हैं, तो स्टार कास्ट और कहानी दोनों ही दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा देते हैं। इसी कड़ी में रणबीर कपूर की आने वाली फिल्म ‘रामायण’ चर्चा में है। इसका पहला टीजर सामने आ चुका है और इसमें रणबीर के किरदार भगवान राम के रूप में पहली झलक देखने को मिली।

    डायरेक्टर नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित इस फिल्म को लेकर फैन्स काफी उत्साहित हैं। फिल्म में बॉलीवुड से लेकर साउथ सिनेमा तक के जाने-माने कलाकार शामिल हैं। खास बात यह है कि इसमें बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन के दामाद भी अहम भूमिका में नजर आएंगे।

    फिल्म का बजट और स्टार कास्ट

    ‘रामायण’ का प्रोडक्शन ग्लोबल विजुअल इफेक्ट्स और एनीमेशन स्टूडियो DNEG के फाउंडर नमित मल्होत्रा कर रहे हैं। इस पिक्चर का बजट लगभग 4000 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, जो इसे भारतीय सिनेमा की अब तक की सबसे महंगी फिल्मों में शामिल करता है।

    लीड रोल में रणबीर कपूर के साथ साई पल्लवी, यश, रवि दुबे, सनी देओल शामिल हैं। इसके अलावा सपोर्टिंग कास्ट भी बेहद शानदार है-अरुण गोविल, काजल अग्रवाल, लारा दत्ता, रकुल प्रीत सिंह, इंदिरा कृष्णन और शीबा चड्ढा जैसे कलाकार फिल्म का हिस्सा हैं। इस बीच, अमिताभ बच्चन के दामाद कुणाल कपूर भी एक महत्वपूर्ण रोल निभाते नजर आएंगे।

    कुणाल कपूर निभा रहे हैं भगवान इंद्र का रोल

    फिल्म में कुणाल कपूर भगवान इंद्र का किरदार निभा रहे हैं। भले ही यह छोटा सा रोल है, लेकिन रामायण की कहानी में इसका महत्व अत्यधिक है। भगवान इंद्र के कारण ऋषि गौतम ने अपनी पत्नी अहिल्या को पत्थर में बदल दिया था। बाद में भगवान राम ने उन्हें मोक्ष दिलाया। ऐसे में कुणाल का यह रोल कहानी के अहम हिस्से से जुड़ा हुआ है।

    कुणाल कपूर ने इस फिल्म को लेकर कहा था,

    “ये फिल्म हमारी संस्कृति के इतिहास में बहुत जरूरी है। इसे इतने बड़े स्केल पर बनाना जरूरी था, जितनी पहले कभी नहीं बनी। ये बहुत स्पेशल होने वाली है। ऑडियंस इसे देखकर सरप्राइज हो जाएगी।”

    अमिताभ बच्चन संग व्यक्तिगत रिश्ता

    कुणाल कपूर, अमिताभ बच्चन के छोटे भाई अजिताभ बच्चन की बेटी नैना बच्चन के पति हैं। अजिताभ और उनकी पत्नी रमोला बच्चन की बेटी नैना से कुणाल ने फरवरी 2015 में शादी की थी। इस तरह से वह बॉलीवुड के प्रतिष्ठित परिवार का हिस्सा भी बन चुके हैं।

    कुणाल कपूर का करियर

    कुणाल कपूर को फिल्म इंडस्ट्री में कई चर्चित फिल्मों में देखा जा चुका है। उनकी फिल्में ‘रंग दे बसंती’, ‘आजा नचले’, ‘लव शव ते चिकन खुराना’, ‘डॉन 2’ और ‘ज्वेल थीफ’ दर्शकों को याद हैं। उनकी एक्टिंग और स्क्रीन प्रजेंस ने उन्हें इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए उपयुक्त बनाया है।

    दर्शकों की उत्सुकता

    फिल्म का बड़ा बजट, स्टार कास्ट और ऐतिहासिक महत्व इसे बेहद खास बनाते हैं। रणबीर कपूर के भगवान राम के रूप में स्क्रीन पर आने के साथ-साथ, कुणाल कपूर का छोटा लेकिन अहम रोल फिल्म की कहानी में नई जान डालने वाला है।

  • बॉलीवुड की चौंकाने वाली कहानी: स्टार एक्ट्रेस और बेटे के जन्मदिन पर हुई दर्दनाक घटना

    बॉलीवुड की चौंकाने वाली कहानी: स्टार एक्ट्रेस और बेटे के जन्मदिन पर हुई दर्दनाक घटना


    नई दिल्ली।बॉलीवुड में कई कलाकारों की जिंदगी पर्दे के पीछे संघर्ष और दर्द से भरी होती है। इनमें से कुछ को अपने करियर के साथ-साथ पर्सनल लाइफ में भी बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसी ही एक दर्दनाक कहानी है अभिनेत्री सईदा खान की, जिनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द उनके बेटे के जन्मदिन पर हुआ।

    फिल्म इंडस्ट्री में कदम और शुरुआती सफलता

    सईदा खान का जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा फिल्ममेकर एचएच रवैल की मदद से। उन्हें पहली बार पहचान मिली फिल्म “अपना हाथ जगन्नाथ” से, जिसमें उनके साथ किशोर कुमार थे। इसके अलावा, उन्होंने “कांच की गुड़िया” जैसी फिल्मों में भी काम किया, जिसमें उनके साथ मनोज कुमार नजर आए।

    हालांकि शुरुआती सफलता के बावजूद सईदा का करियर बड़े पैमाने पर नहीं चला और उन्होंने धीरे-धीरे बी और सी ग्रेड फिल्मों में काम करना शुरू किया।

    प्यार और परिवार की स्थापना

    इस दौरान सईदा का प्यार डायरेक्टर बृज सदनाह से हुआ। दोनों ने शादी की और दो बच्चे हुए—एक बेटा कमल और एक बेटी नम्रता। कमल ने बाद में कुछ फिल्मों में काम किया। सईदा अपने परिवार के प्रति बेहद समर्पित थीं और बच्चों की परवरिश में पूरा ध्यान देती थीं।

    बेटा के बर्थडे पर हुई दर्दनाक घटना

    21 अक्टूबर 1990 का दिन सईदा खान के लिए और उनके परिवार के लिए भयानक रात में बदल गया। उनके बेटे कमल का 20वां जन्मदिन था और सईदा इस दिन के जश्न की तैयारी कर रही थीं। इसी दौरान उनके पति, शराब के नशे में, सईदा और बेटी पर गोली चला दी। उन्होंने बेटे कमल को भी गोली मारने की कोशिश की और इसके बाद उन्होंने अपनी जान ले ली।

    इस हमले में सईदा की मौत हो गई, जबकि उनके बेटे कमल ने चमत्कारिक रूप से बचने में सफलता पाई।

    बेटे कमल ने साझा की कहानी

    कमल ने बाद में इस घटना का दर्दनाक सच साझा किया। उन्होंने बताया,

    “मुझे भी गोली लगी थी और बुलेट मेरी गर्दन के पास से निकली। मुझे बचने का कोई लॉजिकल कारण नहीं था। मेरी एकमात्र उम्मीद थी कि मुझे आगे बढ़ने दो और जीवन जीने दो।”

    कमल ने बताया कि उन्होंने अपनी माँ और बहन को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन अस्पताल में पर्याप्त बेड नहीं थे। उन्होंने डॉक्टर से कहा कि अपनी माँ और बहन को जिंदा करने की कोशिश करें। अंततः कमल का जीवन बच गया, लेकिन उन्होंने अपना पूरा परिवार खो दिया।

    40 की उम्र में हुई सईदा की मौत और उनकी यादें

    सईदा खान की मौत उनके 40वें साल में हुई और यह बॉलीवुड की सबसे दुखद घटनाओं में से एक मानी जाती है। उनके बेटे और परिवार ने इस त्रासदी का सामना किया, लेकिन सईदा की कहानी आज भी हर किसी के रोंगटे खड़े कर देती है।

    उनकी जिंदगी और करियर ने यह दिखाया कि स्टारडम की चमक के पीछे कई बार दर्द और संघर्ष छिपा होता है। सईदा की कहानी बॉलीवुड के उन दुखद किस्सों में शामिल है, जो हमेशा याद रखी जाएंगी।